दशहरा की सुहागरात – अंजली की पहली रात की सुहागरात
दशहरे की रात, जब पूरे गांव में रावण दहन की तैयारी चल रही थी और आसमान में आग की लपटें रावण के पुतले को निगल रही थीं, उसी समय राजस्थान के एक छोटे से गांव में 19 वर्षीय अंजली की शादी शहर के अमीर व्यापारी के बेटे आदित्य से हो रही थी। आदित्य 24 साल का था, लंबा, हट्टा-कट्टा, चौड़ी छाती, गोरा रंग, और आंखों में ऐसी शरारत थी जो किसी भी लड़की को उसकी तरफ आकर्षित कर ले। अंजली एक साधारण किसान परिवार से थी, उसका रंग गेहुआं था जैसे सुबह की पहली किरण, आंखें बड़ी-बड़ी और काली जैसे कोयला, होंठ मोटे और गुलाबी जैसे गुलाब की पंखुड़ियां, और बाल कमर तक लंबे, घने और काले जैसे रात का अंधकार। उसका फिगर 34-26-36 का था – मध्यम आकार के चूचे जो हमेशा उसके कपड़ों में उभार बनाते रहते थे, एक संकरी कमर जिसे देख कोई भी मर्द मोहित हो जाता, और गोल-मटोल नितंब जिनकी हरकत में ही जादू था। अंजली की पहली रात की सुहागरात
विजयादशमी के दिन, जब रावण दहन हुआ और पूरा गांव आतिशबाजी में डूब गया, अंजली ने लाल रंग का भारी लहंगा पहना था जिसपर सोने का काम था। उसका ब्लाउज बहुत कसा हुआ था जिसमें उसके चूचे बाहर निकलने को बेकरार लग रहे थे। दुपट्टे से ढके होने के बावजूद, जब भी वह सांस लेती उसके चूचों का उभार साफ दिखता था। आदित्य की आंखें बार-बार उसके गोल चूचों पर टिक जातीं और वह मन ही मन सोचता कि कब वह इन चूचों को अपने हाथों में भरेगा, कब इन निप्पलों को अपने मुंह में लेकर चूसेगा।
रात के करीब 11 बजे जब सारी रस्में खत्म हुईं, दोनों को गांव के बाहर एक हवेली जैसे मकान में ले जाया गया जहां से दशहरे के मेले की आतिशबाजी की आवाजें आ रही थीं। कमरा बड़ा था, बीच में एक विशाल बिस्तर जिसपर लाल गुलाब की पंखुड़ियां बिछाई गई थीं, मोमबत्तियां जल रही थीं और हवा में इत्र की महक थी।
कमरे में अंजली घूंघट किए बैठी थी, उसका दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था कि उसे लग रहा था कि कोई उसकी छाती में ढोल बजा रहा है। उसके हाथ ठंडे पड़ गए थे और पसीने से तर थे। उसे पता था कि आज रात उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाएगी, आज रात वह एक लड़की से औरत बनेगी। उसने अपनी मां की बातें याद कीं – बेटा, पति भगवान का रूप होता है, उसकी हर बात मानना, उसकी हर इच्छा पूरी करना। लेकिन मां ने यह नहीं बताया था कि उस रात क्या होने वाला है, उसे कितना दर्द सहना पड़ेगा, और कितना मजा आएगा।
दरवाजा धीरे से खुला और आदित्य अंदर आया। वह अभी भी शेरवानी में था लेकिन पगड़ी उतार दी थी, उसके बाल बिखरे हुए थे और आंखों में शराब का हल्का नशा था जो उसे और भी आकर्षक बना रहा था। उसने कमरे का ताला लगाया और अंजली की ओर बढ़ा। उसके कदम धीरे थे लेकिन आत्मविश्वास से भरे हुए, जैसे वह जानता हो कि आज रात वह क्या करने वाला है।
“घूंघट हटाओ,” आदित्य ने आदेश दिया, उसकी आवाज में एक अजीब सा वशीकरण था।
अंजली ने धीरे से अपना घूंघट उठाया, उसका चेहरा शर्म से लाल हो रहा था, आंखें नीचे जमीन पर टिकी हुई थीं। वह इतनी सुंदर लग रही थी कि आदित्य उसे देखता ही रह गया। उसके गुलाबी गाल, काली घनी पलकें, और वह शर्म जो उसके चेहरे पर छाई हुई थी, सब कुछ आदित्य को उत्तेजित कर रहा था।
“तुम सच में बहुत सुंदर हो,” आदित्य मुस्कुराया, “मैंने तुम्हें मेले में देखा था जब तुम झूले पर झूल रही थी। तुम्हारे चूचे उस समय भी ऐसे ही उछल रहे थे, मैंने उसी पल तय कर लिया था कि इस दशहरे पर मैं तुम्हें अपनी बनाऊंगा, तुम्हारी चूत का दहन करूंगा।”
अंजली ने नीचे देखा, उसकी शर्म और बढ़ गई, उसके गाल और भी ज्यादा लाल हो गए। वह नहीं जानती थी कि आदित्य उसे उस दिन से देख रहा था।
आदित्य उसके पास बैठा और उसका हाथ पकड़ा। उसके हाथ ठंडे थे, कांप रहे थे। आदित्य ने उसे अपने करीब खींचा, “डरो मत, मैं तुम्हें दर्द नहीं दूंगा। शुरू में थोड़ा होगा, फिर मजा आएगा, इतना मजा कि तुम रोज रात मुझसे यही मांगोगी।”
वह अंजली के हाथ को चूमा, फिर उसकी कलाई पर चूमना शुरू किया, फिर धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ा। अंजली के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई, उसने कभी किसी मर्द के इतने करीब अनुभव नहीं किया था। आदित्य ने उसे खड़ा होने के लिए कहा, “खड़ी हो जाओ, मैं तुम्हें देखना चाहता हूं, तुम्हारे शरीर को, तुम्हारे चूचों को, तुम्हारी चूत को।”
अंजली खड़ी हुई, आदित्य उसके चारों ओर घूमकर उसे देख रहा था। उसकी आंखें उसके चूचों पर टिकी हुई थीं जो ब्लाउज में कसे उभर रहे थे, फिर उसकी संकरी कमर पर गई, फिर उसके गोल नितंबों पर। “तुम्हारा फिगर बहुत ही कमाल का है, बिल्कुल फिल्मी हीरोइन जैसा,” आदित्य ने फुसफुसाते हुए कहा और उसके कान में फूंक मारी।
अंजली के शरीर में फिर से सिहरन दौड़ गई, उसके रोंगटे खड़े हो गए। आदित्य ने उसके पीछे खड़े होकर उसके कंधों पर हाथ रखे, उसके हाथ गरम थे और अंजली के ठंडे शरीर को छूते ही वह कांप उठी। आदित्य ने धीरे से उसके बालों को एक तरफ किया और उसकी गर्दन पर चूमना शुरू कर दिया, हल्के-हल्के चुंबन, फिर जीभ से चाटना, फिर हल्का काटना।
“आह्ह्ह…” अंजली से हल्की सी आवाज निकल गई, उसे अजीब सा लग रहा था, दर्द नहीं था लेकिन एक अजीब सी सनसनी जो उसके शरीर में फैल रही थी।
आदित्य ने धीरे से उसके ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए, एक-एक करके, धीरे-धीरे, हर हुक खोलने पर उसकी पीठ को चूमता, जीभ से चाटता, कभी दांतों से हल्का काटता। अंजली की सांसें तेज हो गईं, उसके चूचे ऊपर-नीचे हो रहे थे। जब आखिरी हुक खुला ब्लाउज ढीला हो गया, आदित्य ने कहा, “पलटो, मैं तुम्हारे चूचे देखना चाहता हूं।”
अंजली ने धीरे से अपना चेहरा उसकी ओर किया, आदित्य ने उसका ब्लाउज उतार दिया। अब वह सिर्फ ब्रा में थी, उसके चूचे ब्रा में कसे उभर रहे थे, गोल, मुलायम, और निप्पल ब्रा के कपड़े में खड़े हो रहे थे। आदित्य ने उसे देखा, उसकी आंखों में लालसा थी, “क्या तुम जानती हो तुम्हारे चूचे कितने सुंदर हैं? मैं इन्हें चूसना चाहता हूं, इन निप्पलों को काटना चाहता हूं, इन्हें अपने हाथों में भरकर मसलना चाहता हूं।”
वह अंजली के सामने घुटनों के बल बैठ गया और उसकी ब्रा के हुक पीछे से खोले। ब्रा हटते ही उसके चूचे आजाद हो गए, गोल, गुलाबी निप्पल के साथ, मध्यम आकार के लेकिन कसे हुए और उठे हुए। आदित्य ने उन्हें देखा, फिर एक हाथ से एक चूचा उठाया और मुंह में ले लिया, चूसना शुरू किया जोर-जोर से, कभी निप्पल को दांतों से हल्का काटता, कभी जीभ से घुमाता, कभी पूरा चूचा मुंह में भरकर चूसता।
“उह्ह्ह… आह्ह्ह…” अंजली से आवाजें निकलने लगीं, उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके पेट में तितलियां उड़ रही हों, उसकी चूत में कुछ हो रहा था, गीली हो रही थी। आदित्य का एक हाथ दूसरे चूचे को दबा रहा था, निप्पल को उंगली और अंगूठे से मसल रहा था, घुमा रहा था, खींच रहा था।
“कैसा लग रहा है मेरे चूचे चुसवाने में?” आदित्य ने पूछा मुंह में चूचा लिए हुए, अंजली शर्म से लाल हो गई, बोल नहीं पाई। आदित्य ने दूसरा चूचा भी मुंह में ले लिया और उसे भी वैसे ही चूसने लगा, जोर-जोर से, कभी हल्का काटता, कभी जीभ से चाटता। अंजली का शरीर अकड़ने लगा, उसे अजीब सा सुख मिल रहा था जो उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था, उसकी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी।
आदित्य ने अंजली को पूरी तरह बिस्तर पर लिटा दिया, उसके ऊपर आ गया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एक लंबा गहरा चुंबन, उसकी जीभ अंजली के मुंह में घुसी और उसकी जीभ के साथ खेलने लगी, उसे चूसने लगी, काटने लगी। अंजली ने भी धीरे-धीरे जवाब देना शुरू कर दिया, उसकी जीभ भी आदित्य की जीभ के साथ खेलने लगी।
आदित्य का एक हाथ उसके पेट पर था, धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ रहा था, उसकी नाभि पर घूम रहा था, फिर नीचे। उसने लहंगे की नाड़ी खोली और हाथ अंदर डाल दिया। अंजली ने कसकर अपने पैर बंद कर लिए, “डरो मत, मैं सिर्फ तुम्हें छू रहा हूं, तुम्हारी चूत को महसूस कर रहा हूं,” आदित्य ने फुसफुसाया।
उसने धीरे से अंजली के पैरों को खोलने की कोशिश की, अंजली ने थोड़ी झिझक के बाद पैर खोले। आदित्य का हाथ उसकी जांघों पर था, उसकी मुलायम त्वचा को सहला रहा था, धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहा था, उसकी जांघों के अंदरूनी हिस्से को छू रहा था जो बहुत संवेदनशील था।
आदित्य ने अंजली का लहंगा और पेटीकोट पूरी तरह उतार दिया, अब वह सिर्फ पैंटी में थी। उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी, उसकी चूत का रस उसे भीगो रहा था। आदित्य उसके पैरों के बीच में जगह बनाकर झुक गया, उसने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फेरा, “यहां तो पहले से ही गीली हो गई हो, तुम्हारी चूत मुझे अंदर आने के लिए बुला रही है,” आदित्य मुस्कुराया।
अंजली ने देखा उसकी पैंटी का एक हिस्सा सचमुच गीला था, उसे शर्म आई, लेकिन आदित्य ने उसे शांत किया, “यह अच्छा है, इसका मतलब है तुम्हें मजा आ रहा है, तुम्हारी चूत तैयार है मेरे लंड को अपने अंदर लेने के लिए।”
आदित्य ने उसकी पैंटी उतार दी, अंजली की चूत सामने थी। वह बिल्कुल साफ शेव की हुई थी, गुलाबी रंग की, और पहले से ही गीली, चमक रही थी। चूत के दाने थोड़े बाहर निकले हुए थे, उत्तेजना से लाल हो रहे थे। आदित्य ने उसे देखा, फिर उस पर अपनी उंगली फेरी, “कितनी सुंदर है तुम्हारी चूत, गुलाबी, चिकनी, और इतनी टाइट लग रही है,” कहकर उंगली को थोड़ा अंदर डाल दिया।
“आह्ह्ह…” अंजली ने आवाज निकाली, उसे थोड़ा दर्द हुआ लेकिन ज्यादा मजा, उसकी चूत उंगली को कसकर पकड़ ली। आदित्य ने उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया, धीरे-धीरे फिर तेजी से, कभी घुमाते हुए, कभी अंदर की तरफ दबाते हुए। अंजली की आवाजें निकलने लगीं, “आह्ह्ह… उह्ह्ह… हाह्ह्ह…”
फिर आदित्य ने अपना मुंह उसकी चूत पर लगा दिया, जीभ से उसकी चूत के दाने को छुआ। अंजली का शरीर कांप उठा, उसने पहले कभी ऐसा अनुभव नहीं किया था। आदित्य ने जीभ से चूत को चाटना शुरू किया, ऊपर से नीचे तक, फिर क्लिटोरिस पर घुमाना, फिर चूत के छेद में जीभ डालकर अंदर-बाहर करना।
“आह्ह्ह… उह्ह्ह… हाह्ह्ह… प्लीज… और मत करो… मैं पागल हो जाऊंगी…” अंजली के मुंह से आवाजें निकल रही थीं, उसका शरीर अकड़ रहा था, उसे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ऊंचाई से गिर रही हो। आदित्य ने रुकने का नाम नहीं लिया, उसने अपनी जीभ को चूत के अंदर डाल दिया जितनी दूर जा सकती थी, चूत के अंदरूनी हिस्सों को चाट रहा था।
अंजली के हाथ बिस्तर की चादरों को कसकर पकड़े हुए थे, उसके चूचे उठे हुए थे, उसकी सांसें तेज हो गई थीं। आदित्य ने अपनी एक उंगली चूत में डाली, फिर दूसरी, अब दो उंगलियां अंदर-बाहर हो रही थीं, चूत की आवाजें आ रही थीं चपचपाहट की। “तुम्हारी चूत बहुत टाइट है, मेरे लंड को बहुत मजा देगी,” आदित्य ने कहा।
आदित्य ने अपने कपड़े उतार दिए, उसका लंड बिल्कुल खड़ा था, करीब 7 इंच लंबा और काफी मोटा, नसें उभरी हुई थीं, सिरा लाल हो रहा था और उससे पानी की बूंदें निकल रही थीं। अंजली उसे देखकर डर गई, “यह तो बहुत बड़ा है, मुझे बहुत दर्द होगा, मेरी चूत फट जाएगी।”
“पहले थोड़ा होगा फिर मजा आएगा, बहुत मजा,” आदित्य ने कहा और उसके पास लेट गया। उसने अंजली को अपने ऊपर बिठाने की कोशिश की, “इस तरह तुम्हें कम दर्द होगा, तुम अपने हिसाब से अंदर ले सकती हो।”
अंजली ने हिचकिचाते हुए अपने पैर उसके दोनों तरफ किए, आदित्य ने अपने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर लगाया। लंड गरम था, कठोर था, और अंजली की चूत के मुहाने को चीर रहा था। “धीरे से बैठो, अपनी चूत को मेरे लंड पर बैठाओ,” आदित्य ने कहा।
अंजली ने धीरे से नीचे बैठने की कोशिश की, लंड का सिरा चूत में घुसा और उसे तेज दर्द हुआ, “आह्ह्ह… बहुत दर्द हो रहा है… निकालो इसे…” उसने चिल्लाया। आदित्य ने उसे शांत किया, उसके चूचे दबाए, उसे चूमा, “थोड़ा सहन करो, अभी खून भी निकलेगा, यह तुम्हारी कुंवारी चूत की निशानी है, इसके बाद तुम्हें बहुत मजा आएगा।”
अंजली ने एक जोरदार धक्का दिया और आदित्य का लंड आधा अंदर चला गया, उसे ऐसा लगा जैसे कोई तेज चाकू चूत में घुस रहा हो, उसकी आंखों से आंसू निकल आए। लेकिन आदित्य ने उसे रुकने नहीं दिया, उसने उसकी कमर पकड़ी और नीचे की ओर दबाया, “थोड़ा और अंदर जाने दो, पूरा लंड लो अपनी चूत में।”
अंजली ने दर्द सहते हुए बाकी आधा लंड भी अपनी चूत में ले लिया, अब पूरा लंड अंदर था, उसकी चूत पूरी तरह भरी हुई थी। उसे पूरा महसूस हो रहा था – लंड की गर्मी, उसकी कठोरता, और अपनी चूत की चपेट जो उसे कसकर पकड़े हुए थी। आदित्य ने नीचे से धक्के मारने शुरू किए, धीरे-धीरे फिर तेजी से।
अंजली को पहले दर्द हुआ लेकिन फिर दर्द कम होने लगा और एक अजीब सा मजा आने लगा। उसके चूचे उछल रहे थे हर धक्के के साथ, और उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके शरीर में बिजली दौड़ रही हो। “आह्ह्ह… हाह्ह्ह… उह्ह्ह… और जोर से… और तेज…” अंजली के मुंह से अब अनायास ही आवाजें निकल रही थीं।
आदित्य ने तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए, “चपक-चपक-चपक” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं, लंड के चूत में अंदर-बाहर होने की, गीली चूत की चपचपाहट की। यह आवाज अंजली को और उत्तेजित कर रही थी। “तुम्हारी चूत बहुत टाइट है, बहुत मजा आ रहा है, तुम बहुत अच्छी चुदाई कर रही हो,” आदित्य ने कहा।
आदित्य ने उसे नीचे लेटा दिया और खुद उसके ऊपर आ गया, उसने अंजली के पैरों को उठाकर अपने कंधों पर रख लिए और फिर से चुदाई शुरू कर दी। इस बार लंड और गहराई तक जा रहा था, उसकी चूत के सबसे अंदरूनी हिस्से को छू रहा था, जिसे उसने कभी नहीं छुआ था। “आह्ह्ह… मर गई… बहुत अंदर जा रहा है… मेरी चूत फट जाएगी…” अंजली चीख रही थी।
फिर आदित्य ने उसे घोड़ी बनने के लिए कहा, अंजली ने घुटनों के बल आकर अपने नितंब ऊपर उठा दिए। आदित्य ने पीछे से अपना लंड उसकी चूत पर लगाया और एक ही जोरदार धक्के में पूरा अंदर डाल दिया। “आह्ह्ह… मां…” अंजली चीखी, इस पोजीशन में लंड और भी गहरा जा रहा था।
अब आदित्य पीछे से धक्के मार रहा था, उसके हाथ उसकी कमर पर थे, कभी-कभी नीचे जाकर उसके चूचों को भी दबाते, खींचते। अंजली का सिर बिस्तर पर टिका हुआ था, बाल बिखरे हुए थे, और वह “आह्ह्ह… उह्ह्ह… हाह्ह्ह… और जोर से…” की आवाजें निकाल रही थी।
“तुम्हारे नितंब कितने गोल और मुलायम हैं, मैं इन्हें मारना चाहता हूं,” आदित्य ने कहा और एक हाथ से उसके नितंबों को दबाया, फिर उन पर थप्पड़ मारा। “आह्ह्ह… क्यों मार रहे हो…” अंजली ने पूछा। “मजा आ रहा है ना, यह भी मजे का ही हिस्सा है, तुम्हें और मजा आएगा,” आदित्य ने कहा और थप्पड़ मारना जारी रखा, साथ में चुदाई भी।
अंजली को ऐसा लग रहा था जैसे उसके शरीर में कोई गर्म लहर दौड़ रही हो, उसके पेट में अजीब सा खिंचाव महसूस हो रहा था, उसकी चूत में सनसनी हो रही थी। “मुझे कुछ होने वाला है… ऐसा लग रहा है जैसे पेशाब आ रहा हो…” अंजली ने कहा। “रुकना मत, जाने दो… यह ऑर्गेज्म है, यही असली मजा है,” आदित्य ने कहा और अपनी गति तेज कर दी।
अंजली का शरीर अकड़ गया, उसके पैर कांपने लगे, और फिर उसे ऐसा लगा जैसे उसका पूरा शरीर एक गर्म लहर में डूब गया हो। उसकी चूत ने बार-बार सिकुड़ना शुरू कर दिया, आदित्य के लंड को कसकर पकड़ लिया, और फिर एक गर्म तरल पदार्थ निकला जो उसकी जांघों पर बह गया। “आह्ह्ह… आह्ह्ह… मैं गई… मैं गई…” अंजली चीखी और बिस्तर पर गिर गई।
आदित्य ने उसे फिर से पीठ के बल लिटाया, उसका लंड अभी भी खड़ा था और वह फिर से चुदाई करने लगा, इस बार वह और तेज था और ज्यादा गहरा। “मैं भी आने वाला हूं… तुम्हारी चूत में ही निकालूं?” आदित्य ने पूछा। “हां… अंदर ही डाल दो… मुझे गर्मी महसूस होगी…” अंजली ने कहा।
आदित्य ने कुछ और तेज धक्के मारे और फिर उसका शरीर अकड़ गया। अंजली ने महसूस किया कि उसकी चूत में एक गर्म तरल बह रहा है जो उसके अंदरूनी हिस्सों को भर रहा है, गर्म गर्म वीर्य जो उसकी चूत को और भी गीला कर रहा था। आदित्य ने “आह्ह्ह…” की आवाज निकाली और अंजली के ऊपर गिर गया। दोनों करीब दस मिनट तक वैसे ही लेटे रहे, एक-दूसरे को पसीने से लथपथ शरीर में कसे हुए।
यह सिर्फ शुरुआत थी। उस रात आदित्य ने अंजली को कई बार चोदा, हर बार नई पोजीशन में, हर बार नए तरीके से। एक बार उसने उसे सोफे पर बैठाया और खड़े होकर उसके मुंह में अपना लंड डाला, उसे चूसवाया। अंजली ने पहले तो हिचकिचाई लेकिन फिर वह भी मजे से चूसने लगी, उसके होंठ लंड पर चपचपाहट की आवाज कर रहे थे।
फिर उन्होंने बाथरूम में किया, गीले फर्श पर अंजली को दीवार से सटाकर चोदा, पानी की बौछार के नीचे नंगे बदन एक-दूसरे को पकड़े हुए। फिर उन्होंने फर्श पर किया, एक कंबल बिछाकर उसपर अंजली को लिटाकर, उसके पैरों को हवा में उठाकर चोदा।
एक बार आदित्य ने अंजली को उल्टा लिटाकर उसके नितंबों के बीच अपनी उंगली डाली, “मैं यहां भी करना चाहता हूं,” उसने कहा। अंजली ने मना किया लेकिन आदित्य ने उसे मनाया, धीरे से उंगली डाली, फिर लंड पर तेल लगाकर धीरे से उसके गुदा में डाला। अंजली को बहुत दर्द हुआ लेकिन फिर वह भी मजे से कांपने लगी।
उस रात आदित्य ने अंजली की चूत को तीन बार अपने वीर्य से भरा, उसके चूचों को इतना चूसा कि वे लाल हो गए, उसके शरीर पर हर जगह चुंबन के निशान छोड़ दिए। अंजली की चूत में दर्द था लेकिन उसके चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान थी, उसने अपनी पहली रात का हर पल महसूस किया – हर छूने को, हर चुंबन को, हर धक्के को, हर आवाज को, हर ऑर्गेज्म को।
सुबह जब सूरज निकला, अंजली आदित्य की बांहों में सो रही थी। उसके शरीर पर पसीने और वीर्य के निशान थे, उसके चूचों पर हिक्की के निशान थे, उसकी चूत अभी भी गर्म वीर्य से भरी हुई थी और आदित्य के लंड का एहसास दे रही थी। यह थी दशहरा की रात, जब रावण के दहन के बाद, अंजली की कुंवारी चूत का भी दहन हुआ, और वह एक औरत बनकर उभरी, पूरी तरह से संतुष्ट, पूरी तरह से आदित्य की।
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