करवाचौथ की शाम ढल चुकी थी। पूरे आसमान में बादलों की हल्की सी परत थी जो धीरे-धीरे छंट रही थी। सोसाइटी की छत पर रंगीन लाइटें लगी हुई थीं जो रात के अंधेरे में एक अजीब सा नूर बिखेर रही थीं। अंकित सीढ़ियों से ऊपर आ रहा था। उसके कदम धीरे-धीरे बढ़ रहे थे। उसने नीले रंग की शर्ट पहनी हुई थी जो उसके कंधों पर कसी हुई थी। उसके बाल हल्के बिखरे हुए थे और चेहरे पर दिन भर की थकान और घरेलू तनाव के भाव थे।करवाचौथ पे चुदी पड़ोसन भाभी
जैसे ही उसने छत का भारी लोहे का दरवाजा धक्का देकर खोला, ठंडी हवा का एक झोंका उसके चेहरे से टकराया। वह अंदर आया और दरवाजा पीछे से बंद कर दिया। छत पर अभी कोई नहीं था। सब नीचे अपने-अपने घरों में पूजा की तैयारी में व्यस्त थे। अंकित आगे बढ़ा और रेलिंग के पास जाकर खड़ा हो गया। नीचे शहर की रोशनी चमक रही थी। सड़कों पर गाड़ियों की आवाजें आ रही थीं।
तभी उसने पीछे से किसी के आने की आहट सुनी। जल्दबाजी में कदमों की आवाज। जैसे ही वह मुड़ने वाला था, एक नरम सा धक्का उसके सीने से लगा। सामने से आती एक औरत उससे टकरा गई। अंकित ने रिफ्लेक्स में अपने हाथ आगे बढ़ाए और सामने वाली को पकड़ लिया।
उसके हाथों में एक कोमल, नरम शरीर था। अंकित ने देखा कि सामने एक खूबसूरत औरत खड़ी थी जिसके हाथ में पूजा की थाली थी। थाली हिली लेकिन गिरी नहीं क्योंकि अंकित ने एक हाथ से उसे भी संभाल लिया था।
“उफ्फ…” एक धीमी सी आवाज निकली उस औरत के होंठों से।
अंकित ने उसे ठीक से देखा। वह सिमरन थी। उसी सोसाइटी में रहने वाली। उसने आज लाल रंग की बनारसी साड़ी पहनी हुई थी। साड़ी का पल्लू उसके सिर पर था और हाथों में भारी-भरकम गजरे लगे हुए थे। उसके माथे पर एक बड़ी लाल बिंदी चमक रही थी और आंखों में काजल लगा हुआ था। उसकी सांसें तेज चल रही थीं और छाती ऊपर-नीचे हो रही थी।
“आराम से… आप ठीक तो हैं?” अंकित ने अपनी गहरी आवाज में पूछा। उसके हाथ अभी भी सिमरन की कमर पर थे, उसे संभाले हुए।
सिमरन ने अपनी आंखें उठाकर अंकित को देखा। उसकी आंखें हल्की घबराई हुई थीं लेकिन उनमें एक अजीब सी चमक भी थी। “हां… मैं ठीक हूं। थैंक यू,” उसकी आवाज बेहद मधुर और रेशमी थी। उसने अपना पल्लू ठीक किया और अंकित के हाथों से खुद को छुड़ाया।
अंकित ने थाली उसे वापस कर दी। “आप इतनी जल्दबाजी में कहां जा रही थीं? और इस वक्त छत पर… अकेले?”
सिमरन ने नीचे देखा, फिर अंकित की आंखों में झांका। “नीचे घर में बहुत अकेलापन महसूस हो रहा था। मेरे… वो आज भी बाहर हैं। बिजनेस ट्रिप पर। तो सोचा छत पर आकर चांद का इंतजार कर लूं।” करवाचौथ पे चुदी पड़ोसन भाभी
अंकित समझ गया। उसने भी अपने घरेलू तनाव में ऊपर आने का फैसला किया था। “किस्मत का खेल देखिए, मेरा भी नीचे मन नहीं लग रहा था। तो मैं भी सुकून की तलाश में ऊपर आ गया।”
दोनों एक-दूसरे को देखने लगे। हवा में एक अजीब सा तनाव था। सिमरन के गजरों की खुशबू अंकित के नथुनों में भर रही थी। वह खुशबू बेहद मादक थी – गेंदे के फूलों की, मेहंदी की, और किसी महंगे इत्र की।
“मैं सिमरन,” उसने हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा।
“अंकित,” उसने उसका हाथ पकड़ा।
जैसे ही उसने सिमरन का हाथ छुआ, एक बिजली सी दौड़ गई। सिमरन का हाथ बेहद नरम था, ठंडा था, लेकिन उसमें एक करंट सा था। अंकित ने थोड़ी देर तक उसका हाथ अपने हाथ में रखा। उसकी उंगलियां सिमरन की हथेली पर धीरे से घूम रही थीं।
सिमरन ने अपना हाथ नहीं खींचा। वह भी उस स्पर्श का आनंद ले रही थी। उसकी आंखें बंद हो गईं और वह एक गहरी सांस ली। “आपके हाथ… गर्म हैं,” उसने धीरे से कहा।
“और आपके बेहद ठंडे,” अंकित ने जवाब दिया और उसका हाथ और जोर से दबा लिया।
वे दोनों रेलिंग के पास खड़े हो गए। सिमरन ने अपनी थाली एक तरफ रख दी। हवा चल रही थी और उसके पल्लू को हिला रही थी। अंकित की नजरें उसके चेहरे से नीचे उतर रही थीं। उसने देखा कि सिमरन का गला बेहद सुंदर था – गोरा, चिकना, और गहरे गले में एक सुंदर हार लटका हुआ था।
“कभी-कभी सब कुछ होते हुए भी इंसान कितना अकेला हो जाता है न?” सिमरन ने कहा, नीचे शहर की रोशनी को देखते हुए।
“हां… लेकिन कभी-कभी वही अकेलापन दो अजनबियों को बहुत करीब ले आता है,” अंकित ने कहा और सिमरन की तरफ मुड़ गया।
सिमरन ने भी उसकी तरफ देखा। उनकी नजरें मिलीं। उस एक पल में दोनों ने एक-दूसरे के दिल के खालीपन को महसूस कर लिया। वे दोनों जानते थे कि इस रात कुछ खास होने वाला है। कुछ ऐसा जो उन्हें याद रहेगा। करवाचौथ पे चुदी पड़ोसन भाभी
पहला इशारा, पहली नजदीकी
अंकित ने एक कदम आगे बढ़ाया। अब वह सिमरन से बेहद करीब था। उसे सिमरन के बालों की खुशबू आ रही थी – केसर और नारियल के तेल की महक। सिमरन ने अपनी पलकें झुका लीं। उसकी सांसें तेज हो गईं। अंकित ने अपना हाथ उठाया और धीरे से सिमरन के गाल को छुआ।
“आप बेहद खूबसूरत हैं,” अंकित ने फुसफुसाते हुए कहा।
सिमरन ने अपनी आंखें खोलीं। उनमें एक अजीब सी चमक थी – चाहत की, प्यास की। “आप भी… अच्छे लग रहे हैं,” उसने शर्माते हुए कहा।
अंकित का हाथ सिमरन के गाल से होता हुआ उसके कंधे पर आ गया। उसने धीरे से साड़ी का पल्लू जो उसके सिर पर था, हटाया। सिमरन के बाल खुल गए। लंबे, काले, घने बाल जो हवा में उड़ रहे थे।
“यह रात… बहुत खास है,” अंकित ने कहा।
“हां… करवाचौथ की रात,” सिमरन ने कहा और उसकी आंखों में एक गहरा दर्द दिखा। “लेकिन मैंने आज व्रत नहीं रखा। किसके लिए रखती?”
अंकित ने समझदारी से सिर हिलाया। “मैं भी… अकेला हूं आज।”
दोनों चुप हो गए। लेकिन उनकी चुप्पी में भी बातें हो रही थीं। अंकित का हाथ सिमरन के कंधे से होता हुआ उसकी पीठ पर आ गया। उसने धीरे से उसे अपनी ओर खींचा। सिमरन ने कोई विरोध नहीं किया। वह धीरे से अंकित की ओर झुक गई।
अब उनके शरीर एक-दूसरे से छू रहे थे। सिमरन की साड़ी का कपड़ा अंकित की जींस से टकरा रहा था। अंकित ने अपना दूसरा हाथ सिमरन की कमर पर रख दिया। सिमरन ने अपने हाथ अंकित की छाती पर रख दिए। उसे अंकित की धड़कनें तेज़ी से महसूस हो रही थीं – धड़क, धड़क, धड़क।
“आपका दिल… बहुत तेज धड़क रहा है,” सिमरन ने कहा।
“क्योंकि आप मेरे पास हैं,” अंकित ने जवाब दिया।
तभी बादलों के पीछे से चांद निकला। पूर्णिमा का चांद – बेहद चमकीला, बेहद खूबसूरत। नीचे से ढोल और शंख की आवाजें आने लगीं। लोग चिल्ला रहे थे – “चांद निकला!”
सिमरन ने मुड़कर चांद को देखा। उसका चेहरा चांदनी में बेहद खूबसूरत लग रहा था। अंकित उसे देखता रहा। वह चांद से ज्यादा सिमरन को देख रहा था।
“चलिए… पूजा कर लेते हैं,”
सिमरन ने थाली उठाई लेकिन उसके हाथ कांप रहे थे। अंकित ने देखा कि उसकी उंगलियां थाली के किनारे पर सफेद पड़ गई थीं – वह इतनी जोर से थाली पकड़े हुए थी जैसे उसे कोई संभालने वाला न हो। अंकित ने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया और थाली के नीचे अपनी हथेली रख दी। अब थाली दोनों के हाथों में थी।
“आप कांप रही हैं,” अंकित ने फुसफुसाते हुए कहा। उसकी आवाज इतनी धीमी थी कि हवा में बिखरने से पहले ही सिमरन के कानों में समा गई।
सिमरन ने अपनी आंखें उठाकर उसे देखा। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी – डर और चाहत का मिश्रण। “मुझे… मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा,” उसने कहा और उसकी आवाज में एक हल्की सी कंपन थी।
“समझने की जरूरत नहीं है,” अंकित ने कहा और थाली को एक तरफ रख दिया। अब उसके हाथ आजाद थे। उसने अपने दोनों हाथ सिमरन के चेहरे पर रखे और धीरे से उसका चेहरा अपनी ओर उठाया। “बस महसूस कीजिए।” करवाचौथ पे चुदी पड़ोसन भाभी
सिमरन ने अपनी आंखें बंद कर लीं। उसकी सांसें और तेज हो गईं। उसके होंठ हल्के हल्के कांप रहे थे। अंकित ने धीरे से अपना चेहरा नीचे किया। उसके होंठ सिमरन के होंठों से कुछ इंच की दूरी पर थे। उसे सिमरन के मुंह से निकली गर्म सांसें अपने चेहरे पर महसूस हो रही थीं।
“मैं… मैं…” सिमरन कुछ कहने की कोशिश कर रही थी लेकिन शब्द उसके गले में अटक गए।
“शhh…” अंकित ने अपनी उंगली उसके होंठों पर रख दी। “कुछ मत कहिए।”
और फिर उसने अपने होंठ सिमरन के होंठों पर रख दिए।
पहला चुंबन धीमा था – बेहद हल्का, बेहद कोमल। जैसे कोई तितली के पंख छुए। अंकित ने सिमरन के निचले होंठ को अपने होंठों के बीच लिया और धीरे से चूसा। सिमरन की सांसें रुक सी गईं। उसने अपने हाथ अंकित की कमर पर रख दिए और उसे अपनी ओर खींच लिया।
अब उनके शरीर पूरी तरह एक-दूसरे से सटे हुए थे। सिमरन की साड़ी का कपड़ा अंकित के कपड़ों में समा रहा था। अंकित ने अपनी जीभ से सिमरन के होंठों को चाटा और फिर धीरे से उसके मुंह में प्रवेश किया।
“उम्म्म…” सिमरन की गले से एक धीमी सी आवाज निकली।
अंकित ने उसकी जीभ को अपनी जीभ से छुआ। वे दोनों एक-दूसरे के मुंह का स्वाद ले रहे थे। सिमरन के मुंह में मेहंदी की, गुलाब की, और किसी मिठाई की खुशबू थी। अंकित ने उसकी जीभ को चूसना शुरू कर दिया – धीरे-धीरे, फिर तेजी से।
“उम्म्म… अह्ह्ह…” सिमरन की आवाजें हवा में गूंज रही थीं।
अंकित ने अपने हाथ सिमरन की पीठ पर घुमाए और धीरे से उसकी साड़ी के पल्लू को पकड़ा। उसने पल्लू को खींचना शुरू किया। साड़ी का कपड़ा धीरे-धीरे खुल रहा था। सिमरन ने अपने हाथ अंकित के बालों में डाल दिए और उसके सिर को अपनी ओर दबाया। वह चुंबन में और गहराई चाहती थी।
“उम्म्म… हां… और जोर से…” सिमरन फुसफुसाई।
अंकित ने चुंबन तोड़ा। सिमरन की साड़ी का पल्लू अब पूरी तरह खुल चुका था। उसके बाल खुले थे और चेहरा चांदनी में चमक रहा था। अंकित ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा। उसने लाल रंग का ब्लाउज पहना हुआ था जो उसके बदन पर कसा हुआ था। ब्लाउज के बटन तनकर तैयार थे और गोलाई साफ दिख रही थी। करवाचौथ पे चुदी पड़ोसन भाभी
“आप… बेहद खूबसूरत हैं,” अंकित ने कहा और अपना हाथ उसके गले पर रखा। उसकी उंगलियां सिमरन के गले की नरम त्वचा को छू रही थीं।
सिमरन ने अपनी आंखें खोलीं। उनमें एक पागलपन सा था। “मुझे… मुझे आपको छूना है,” उसने कहा और अपने हाथ अंकित की शर्ट के बटन की ओर बढ़ाए।
अंकित ने उसकी मदद की। उसने अपनी शर्ट के ऊपर के दो बटन खोल दिए। सिमरन ने अपने हाथ अंदर डाले और अंकित की छाती को छुआ। उसकी उंगलियां अंकित की छाती के बालों में फंस गईं।
“आप… बहुत मजबूत हैं,” सिमरन ने कहा और उसकी उंगलियां अंकित की छाती पर घूमने लगीं।
अंकित ने एक गहरी सांस ली। सिमरन के हाथों का स्पर्श उसे बेहद उत्तेजित कर रहा था। उसने अपने हाथ सिमरन की कमर पर रखे और उसे अपनी ओर खींचा। अब उनके शरीर पूरी तरह एक-दूसरे से सटे थे। अंकित ने महसूस किया कि सिमरन के स्तन उसकी छाती पर दब रहे थे – नरम, गोल, और कसे हुए।
“उफ्फ…” सिमरन ने एक हल्की सी आवाज निकाली।
करवाचौथ पे चुदी पड़ोसन भाभी : साड़ी का खुलना – पहला कपड़ा
अंकित ने अपने हाथ सिमरन की साड़ी पर रखे। उसने साड़ी के किनारे को पकड़ा और धीरे से खींचना शुरू किया। साड़ी का कपड़ा धीरे-धीरे खुल रहा था। सिमरन खड़ी रही, उसकी आंखें बंद थीं और वह अंकित के हर स्पर्श का आनंद ले रही थी।
“मेरी साड़ी…,” सिमरन ने धीमी आवाज में कहा।
“मैं खोल रहा हूं,” अंकित ने फुसफुसाते हुए कहा। “एक-एक करके।”
साड़ी का पहला फोल्ड खुला। अब सिमरन का पेट दिखाई देने लगा था। उसने पेटीकोट पहना हुआ था जो उसकी नाभि के नीचे तक था। उसकी त्वचा बेहद गोरी और चिकनी थी। अंकित ने अपने हाथ उसके पेट पर रखे और धीरे से सहलाना शुरू किया।
“आह्ह…” सिमरन की सांसें तेज हो गईं।
अंकित ने साड़ी और खींची। अब साड़ी उसके कंधों से नीचे खिसक गई थी। सिमरन का ब्लाउज पूरी तरह दिखाई दे रहा था। लाल रंग का ब्लाउज जिसके आगे छोटे-छोटे बटन थे। अंकित ने अपने हाथ सिमरन की पीठ पर ले गए और ब्लाउज के बटन खोलने की कोशिश की।
“रुकिए…,” सिमरन ने कहा और अंकित का हाथ रोक दिया। “पहले… पहले आप भी तो…”
अंकित समझ गया। उसने अपनी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके। पहला बटन खुला, फिर दूसरा, फिर तीसरा। उसकी छाती दिखने लगी – मांसल, बालों वाली, और बेहद मजबूत। सिमरन ने अपनी आंखें खोलकर देखा। उसके मुंह से एक अनायास ही आवाज निकली – “वाह…”
अंकित ने अपनी शर्ट उतार दी। अब वह ऊपर से नंगा था। उसके शरीर की मांसलता चांदनी में चमक रही थी। सिमरन ने अपने हाथ उठाए और अंकित की छाती पर रखे। उसकी उंगलियां अंकित की छाती के बालों में घूम रही थीं, फिर धीरे-धीरे नीचे उतर रही थीं – पेट पर, फिर नाभि पर।
“आप… बहुत सेक्सी हैं,” सिमरन ने कहा और उसकी आवाज में एक कामुकता थी जो पहले नहीं थी।
अंकित ने मुस्कुराते हुए अपने हाथ फिर से सिमरन की ओर बढ़ाए। इस बार सिमरन ने रोकने की कोशिश नहीं की। अंकित ने उसके ब्लाउज के पहले बटन को पकड़ा और धीरे से खोला।
“टिक…” बटन खुला।
सिमरन की सांसें और तेज हो गईं। अंकित ने दूसरा बटन खोला।
“टिक…” फिर तीसरा।
अब सिमरन का ब्लाउज खुला हुआ था। अंदर उसने लाल रंग की ब्रा पहनी हुई थी जो उसके स्तनों को बेहद खूबसूरती से ढके हुए थी। लेकिन अब ऊपर का हिस्सा दिखाई दे रहा था – गोरा, चिकना, और दोनों स्तनों के बीच की दरार।
अंकित ने अपने होंठ उस दरार पर रखे और चूमना शुरू कर दिया।
“उम्म्म… आह्ह…” सिमरन ने अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया।
अंकित ने अपनी जीभ से उसकी त्वचा को चाटा और फिर धीरे से ब्लाउज को खींचकर उतार दिया। अब सिमरन ऊपर से केवल ब्रा में थी। लाल रंग की ब्रा जो उसके गोर बदन पर बेहद खूबसूरत लग रही थी।
ब्रा का खुलना – दूसरा कपड़ा
अंकित ने अपने हाथ सिमरन की ब्रा के पीछे ले गए। उसने हुक खोलने की कोशिश की लेकिन उसके हाथ कांप रहे थे। सिमरन ने मुस्कुराते हुए अपने हाथ पीछे किए और खुद ही हुक खोल दिया।
“मैं करती हूं,” उसने फुसफुसाते हुए कहा।
ब्रा का हुक खुला और ब्रा धीरे से आगे की ओर खिसक गई। अंकित ने ब्रा को पूरी तरह हटा दिया और फिर जो देखा, उसकी सांसें रुक सी गईं।
सिमरन के स्तन – गोल, मुलायम, गोरे, और बिल्कुल सही आकार के। उनके ऊपर छोटे-छोटे गुलाबी निपल्स थे जो उत्तेजना में कड़े हो गए थे। अंकित ने अपने हाथ उठाए और धीरे से एक स्तन को पकड़ लिया।
“उफ्फ…” सिमरन की आवाज निकली।
अंकित ने उस स्तन को धीरे से दबाया। वह बेहद नरम था, मुलायम था, जैसे कोई गर्म रोटी हो। उसने अपने अंगूठे से निपल को छुआ और फिर उसे घुमाना शुरू किया।
“आह्ह… हां… ऐसे ही…” सिमरन फुसफुसाई।
अंकित ने अपना मुंह उस स्तन पर रखा और निपल को अपने होंठों के बीच ले लिया। उसने धीरे से चूसना शुरू किया।
“उम्म्म… आह्ह… हां… और जोर से…” सिमरन की आवाजें तेज होने लगीं।
अंकित ने दूसरे हाथ से दूसरे स्तन को भी पकड़ लिया और दोनों को बारी-बारी से चूसने लगा। उसकी जीभ निपल्स पर घूम रही थी, उन्हें कड़ा कर रही थी।
“उम्म्म… आह्ह… उईईई… बहुत मजा आ रहा है…” सिमरन की आवाजें छत पर गूंज रही थीं।
अंकित ने चूसना जारी रखा। वह सिमरन के स्तनों को अपने हाथों में भरकर मसल रहा था, दबा रहा था, चूस रहा था। सिमरन ने अपने हाथ अंकित के सिर पर रखे और उसे अपने स्तनों पर और जोर से दबाया।
“चूसिए… और जोर से चूसिए… आह्ह… हां… ऐसे ही…” सिमरन चिल्लाने लगी थी।
अंकित ने लगभग पांच मिनट तक उसके स्तनों का दुहन किया। सिमरन की त्वचा गर्म हो गई थी और उसके शरीर पर पसीने की बूंदें आ गई थीं। अंकित ने अपना मुंह उसके स्तनों से हटाया और ऊपर देखा। सिमरन का चेहरा लाल हो गया था और उसकी आंखों में एक पागलपन सा था।
“अब… अब नीचे…,” सिमरन ने कहा और अपने हाथ अपनी साड़ी की ओर बढ़ाए।
साड़ी का पूरी तरह खुलना
अंकित ने सिमरन की साड़ी को पूरी तरह खोल दिया। अब साड़ी सिर्फ उसके पेटीकोट में लिपटी हुई थी। सिमरन ने पेटीकोट का नाड़ा खोला और पेटीकोट भी नीचे गिरा दिया। अब वह सिर्फ अपनी पैंटी में थी।
उसने एक सफेद रंग की लेस वाली पैंटी पहनी हुई थी जो उसकी गोरी जांघों पर बेहद खूबसूरत लग रही थी। अंकित ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा। उसका शरीर एकदम परफेक्ट था – गोरा, चिकना, और बेहद सेक्सी।
“आप… बेहद खूबसूरत हैं,” अंकित ने कहा।
सिमरन ने शर्माते हुए अपने हाथ अपने शरीर पर रखे। “अब आप भी… अपने कपड़े उतारिए,” उसने कहा।
अंकित ने अपनी जींस का बटन खोला और जिप नीचे की। उसने जींस नीचे खींची और उतार दी। अब वह सिर्फ अपने अंडरवियर में था। उसका अंडरवियर तनकर तैयार था क्योंकि उसका लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था और अंडरवियर को ऊपर की ओर उठाए हुए था।
सिमरन ने उसकी तरफ देखा और उसकी आंखें उसके अंडरवियर पर टिक गईं। “वाह… आपका… बहुत बड़ा लग रहा है,” उसने कहा और उसकी आवाज में एक उत्सुकता थी।
अंकित ने अपना अंडरवियर नीचे खींचा। जैसे ही अंडरवियर नीचे उतरा, उसका लंड बाहर निकल आया – लंबा, मोटा, और बेहद कड़ा।
“ओह माय गॉड…” सिमरन ने अपने हाथ अपने मुंह पर रखे। “यह… यह बहुत बड़ा है।”
अंकित का लंड लगभग 8 इंच लंबा था और काफी मोटा था। उसका सुपाड़ा लाल हो गया था और उसमें से पानी की बूंदें निकल रही थीं। अंकित ने अपने हाथ में लंड पकड़ा और उसे आगे-पीछे किया।
“क्या आप इसे छूना चाहेंगी?” अंकित ने पूछा।
सिमरन ने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया। उसने अंकित के लंड को छुआ और फिर उसे पकड़ लिया। वह बेहद गर्म था, कड़ा था, और कांप रहा था।
“उफ्फ… यह… यह बहुत गर्म है,” सिमरन ने कहा।
उसने अपने हाथ से लंड को धीरे से सहलाना शुरू किया। ऊपर से नीचे, फिर नीचे से ऊपर। अंकित ने एक गहरी सांस ली। सिमरन के हाथ का स्पर्श उसे बेहद अच्छा लग रहा था।
“आह्ह… हां… ऐसे ही…” अंकित ने कहा।
सिमरन ने लंड को और जोर से पकड़ लिया और सहलाने की गति तेज कर दी। “क्या यह अच्छा लग रहा है?” उसने पूछा।
“हां… बहुत अच्छा…,” अंकित ने कहा।
पैंटी का खुलना – आखिरी कपड़ा
अंकित ने अपने हाथ सिमरन की पैंटी पर रखे। उसने पैंटी के किनारे को पकड़ा और धीरे से नीचे खींचना शुरू किया। सिमरन ने अपने पैर थोड़े फैला दिए ताकि पैंटी आसानी से उतर सके।
पैंटी धीरे-धीरे नीचे खिसक रही थी। पहले उसकी नाभि दिखी, फिर उसके बाल दिखे – काले, घने, और बेहद सुंदर ढंग से कटे हुए। फिर उसकी चूत दिखी – गुलाबी, चिकनी, और बेहद खूबसूरत।
“वाह…” अंकित ने कहा और उसकी आंखें सिमरन की चूत पर टिक गईं।
सिमरन की चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। उसकी दोनों फांके सूजी हुई थीं और बीच से चमकीला पानी निकल रहा था। अंकित ने अपने हाथ उसकी चूत पर रखे और धीरे से सहलाया।
“उईईई…” सिमरन ने एक तेज आवाज निकाली और अपने पैर कांपने लगे।
“क्या हुआ? दर्द हुआ?” अंकित ने पूछा।
“नहीं… बहुत मजा आ रहा है… आह्ह… और कीजिए…” सिमरन ने कहा।
अंकित ने अपनी एक उंगली सिमरन की चूत पर रखी और धीरे से अंदर डालने की कोशिश की। उंगली आसानी से अंदर चली गई क्योंकि चूत पूरी तरह गीली थी।
“उईईई… आह्ह… हां… अंदर डालिए…” सिमरन चिल्लाई।
अंकित ने अपनी उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे, फिर तेजी से। सिमरन की चूत बेहद टाइट थी लेकिन गीली होने की वजह से उंगली आसानी से अंदर-बाहर हो रही थी।
“आह्ह… उईईई… हां… और तेज… और तेज…” सिमरन की आवाजें तेज होती जा रही थीं।
अंकित ने एक और उंगली अंदर डाल दी। अब दो उंगलियां उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रही थीं। सिमरन ने अपने हाथ अंकित के कंधों पर रखे और खुद को संभालने की कोशिश की। उसके पैर कांप रहे थे और उसका शरीर एक अजीब सी सिहरन महसूस कर रहा था।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… माय गॉड… बहुत मजा आ रहा है…” सिमरन चिल्ला रही थी।
अंकित ने अपनी उंगलियों को और तेजी से अंदर-बाहर किया। उसने अपनी उंगलियों को घुमाना भी शुरू कर दिया – अंदर की दीवारों को छूते हुए।
“उईईई… आह्ह… वहां… वहीं… हां… ऐसे ही…” सिमरन ने अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया।
अंकित समझ गया कि उसने उसकी जी-स्पॉट को छू लिया था। उसने अपनी उंगलियों को उसी जगह पर घुमाना जारी रखा।
“उईईई… आह्ह… मैं… मैं झड़ने वाली हूं… उईईई…” सिमरन चिल्लाने लगी।
और फिर वह झड़ गई। उसकी चूत से एक तेज धारा निकली और अंकित के हाथ पर गिरी। उसका पानी बेहद गर्म था और चिपचिपा था। सिमरन का पूरा शरीर कांपने लगा और वह अंकित पर गिर पड़ी।
अंकित ने उसे पकड़ा और धीरे से जमीन पर बिठा दिया। छत पर एक पुराना गद्दा पड़ा हुआ था जो शायद किसी ने सुखाने के लिए रखा था। अंकित ने सिमरन को उस गद्दे पर लिटा दिया।
पहली चुदाई – लंड का प्रवेश
सिमरन अब गद्दे पर लेटी हुई थी। उसका शरीर अभी भी कांप रहा था और उसकी सांसें तेज चल रही थीं। अंकित उसके ऊपर आ गया। उसने सिमरन के पैर फैलाए और खुद उनके बीच में आ गया।
उसका लंड अभी भी पूरी तरह खड़ा था और सिमरन की चूत के मुंह पर टिका हुआ था। अंकित ने अपने हाथ से लंड पकड़ा और उसे सिमरन की चूत पर रगड़ना शुरू किया।
“उईईई…” सिमरन ने फिर से आवाज निकाली।
“तैयार हैं?” अंकित ने पूछा।
“हां… डाल दीजिए… अपना लंड… अंदर…” सिमरन ने कहा और अपने हाथ अंकित की कमर पर रखे।
अंकित ने धीरे से अपने कूल्हे आगे बढ़ाए। उसका लंड सिमरन की चूत के मुंह पर टिका और फिर धीरे से अंदर जाने लगा।
“उईईई… आह्ह… धीरे… धीरे…” सिमरन ने कहा।
लंड का सुपाड़ा अंदर चला गया। सिमरन की चूत बेहद टाइट थी और लंड को कसकर पकड़े हुए थी। अंकित ने एक और धक्का लगाया और लंड का आधा हिस्सा अंदर चला गया।
“उईईई… आह्ह… बहुत बड़ा है… मेरी चूत फट रही है…” सिमरन चिल्लाई।
“सहन कीजिए थोड़ी देर… फिर मजा आएगा,” अंकित ने कहा और एक और जोरदार धक्का लगाया।
पूरा लंड अंदर चला गया। अंकित का लंड सिमरन की चूत में पूरी तरह समा गया था। दोनों के शरीर एक-दूसरे से सटे हुए थे। अंकित ने रुककर सिमरन को थोड़ा आराम दिया।
“कैसा लग रहा है?” अंकित ने पूछा।
“बहुत… बहुत अच्छा… आपका लंड… मेरी चूत को भर दिया है…” सिमरन ने कहा।
अंकित ने धीरे से अपने कूल्हे पीछे खींचे और फिर आगे धकेले। यह पहला स्ट्रोक था।
“उईईई… आह्ह…” सिमरन की आवाज निकली।
अंकित ने फिर से पीछे खींचा और आगे धक्का दिया। यह दूसरा स्ट्रोक था, और फिर तीसरा, चौथा, पांचवां…
“उईईई… आह्ह… हां… ऐसे ही… और तेज… और तेज…” सिमरन चिल्लाने लगी।
अंकित की गति तेज हो गई। वह अब तेजी से अपने कूल्हे आगे-पीछे कर रहा था। उसका लंड सिमरन की चूत में तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था। चप-चप-चप की आवाजें छत पर गूंज रही थीं।
“चप… चप… चप…”
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… फक मी… फक मी हार्ड…” सिमरन चिल्ला रही थी।
“तुम्हें अच्छा लग रहा है?” अंकित ने पूछा और उसकी सांसें भी तेज चल रही थीं।
“हां… बहुत अच्छा… आह्ह… मेरी चूत… फाड़ दीजिए… उईईई…” सिमरन ने कहा।
अंकित ने और जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। उसका लंड अब पूरी तरह बाहर निकलता और फिर पूरी तरह अंदर जाता। हर धक्के के साथ सिमरन की चूत से पानी निकल रहा था और उन दोनों के शरीर गीले हो रहे थे।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… माय गॉड… बहुत गहरा जा रहा है… उईईई…” सिमरन की आवाजें रात में गूंज रही थीं।
अंकित ने सिमरन के पैर अपने कंधों पर रख लिए और और जोर से चोदना शुरू कर दिया। इस पोजीशन में उसका लंड और भी गहराई तक जा रहा था।
“उईईई… आह्ह… हां… वहीं… वहीं… मेरी जी-स्पॉट… उईईई…” सिमरन चिल्लाई।
अंकित समझ गया। उसने अपने कूल्हे थोड़ा ऊपर उठाए ताकि उसका लंड सिमरन की चूत की ऊपरी दीवार को छुए। और फिर उसने तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… मैं… मैं फिर से झड़ने वाली हूं… उईईई…” सिमरन ने कहा।
“मैं भी… मैं भी झड़ने वाला हूं…” अंकित ने कहा।
दोनों एक साथ झड़ने वाले थे। अंकित ने अपनी गति और तेज कर दी। वह अब बहुत तेजी से सिमरन की चूत में अपना लंड अंदर-बाहर कर रहा था।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… अह्ह… फक… फक… फक मी…” सिमरन चिल्ला रही थी।
और फिर वह दोनों एक साथ झड़ गए। सिमरन की चूत ने तेजी से अंकित के लंड को कसा और अंकित का वीर्य उसकी चूत में भर गया। गर्म, चिपचिपा वीर्य सिमरन की चूत की गहराइयों में जा रहा था।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… माय गॉड…” दोनों एक साथ चिल्लाए।
अंकित सिमरन के ऊपर गिर पड़ा। दोनों एक-दूसरे से सटे हुए थे, सांसें तेज चल रही थीं, और शरीर पसीने से तर थे। अंकित का लंड अभी भी सिमरन की चूत के अंदर था और धीरे-धीरे ढीला पड़ रहा था।
दूसरा राउंड – और तेज, और जोरदार
कुछ देर तक दोनों एक-दूसरे से सटे लेटे रहे। फिर अंकित ने अपना मुंह उठाया और सिमरन को देखा। उसके चेहरे पर संतुष्टि की एक हल्की सी मुस्कान थी।
“कैसा लगा?” अंकित ने पूछा।
“बेहद… बेहद अच्छा,” सिमरन ने कहा और अंकित के गाल पर चूमा। “लेकिन…”
“लेकिन क्या?”
“मैं और चाहती हूं,” सिमरन ने शर्माते हुए कहा। “मेरा मन नहीं भरा।”
अंकित मुस्कुराया। “मेरा भी नहीं भरा।”
उसने अपना लंड सिमरन की चूत से बाहर निकाला। अभी भी उसका लंड काफी हद तक कड़ा था। उसने सिमरन को उठने में मदद की और उसे घुटनों के बल ले आया।
“अब पीछे से…” अंकित ने कहा।
सिमरन समझ गई। वह घुटनों के बल हो गई और अपना सिर नीचे झुका दिया। उसकी गांड ऊपर उठी हुई थी – गोल, मुलायम, और बेहद खूबसूरत। अंकित ने उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ा और दबाया।
“क्या आपकी गांड…?” अंकित ने पूछा।
“हां… मारिए… गांड मारिए मेरी…” सिमरन ने कहा।
अंकित ने अपने हाथ से अपने लंड पर सिमरन की चूत का पानी लगाया जो उसकी चूत से निकल रहा था। फिर उसने अपने लंड को सिमरन की गांड के छेद पर रखा।
“तैयार हैं?”
“हां… धीरे से शुरू कीजिए…” सिमरन ने कहा।
अंकित ने धीरे से अपने कूल्हे आगे बढ़ाए। उसका लंड सिमरन की गांड के छेद पर दबा और फिर धीरे से अंदर जाने लगा।
“उईईई… आह्ह… धीरे… बहुत तंग है…” सिमरन चिल्लाई।
अंकित ने धीरे-धीरे लंड को अंदर धकेलना जारी रखा। सिमरन की गांड बेहद टाइट थी और लंड को कसकर पकड़े हुए थी।
“उईईई… आह्ह… हां… और अंदर…” सिमरन ने कहा।
पूरा लंड अंदर चला गया। अंकित ने रुककर सिमरन की कमर को सहलाया। फिर उसने धीरे से अपने कूल्हे पीछे खींचे और फिर आगे धकेले।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह…” सिमरन की आवाज निकली।
अंकित की गति तेज हो गई। वह अब तेजी से सिमरन की गांड मार रहा था। चप-चप-चप की आवाजें फिर से छत पर गूंजने लगीं।
“चप… चप… चप…”
“उईईई… आह्ह… हां… और तेज… मेरी गांड फाड़ दीजिए… उईईई…” सिमरन चिल्ला रही थी।
अंकित ने उसकी कमर पकड़ी और और जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। उसका लंड अब पूरी तरह बाहर निकलता और फिर पूरी तरह अंदर जाता। हर धक्के के साथ सिमरन की गांड से एक अजीब सी आवाज आ रही थी।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… फक… फक मी… फक मी हार्ड…” सिमरन चिल्ला रही थी।
अंकित ने एक हाथ आगे बढ़ाया और सिमरन के स्तन को पकड़ लिया। वह एक हाथ से उसके स्तन दबा रहा था और दूसरे हाथ से उसकी कमर पकड़कर उसे पीछे की ओर धकेल रहा था।
“उईईई… आह्ह… हां… ऐसे ही… और जोर से… उईईई…” सिमरन की आवाजें तेज होती जा रही थीं।
अंकित ने अपनी गति और तेज कर दी। वह अब बहुत तेजी से सिमरन की गांड मार रहा था। उसका लंड सिमरन की गांड में पूरी तरह समा रहा था और फिर बाहर निकल रहा था।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… मैं… मैं झड़ने वाली हूं… उईईई…” सिमरन ने कहा।
अंकित ने भी महसूस किया कि वह फिर से झड़ने वाला है। उसने अपनी गति और तेज कर दी।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… अह्ह… माय गॉड…” दोनों एक साथ चिल्लाए और एक साथ झड़ गए।
अंकित का वीर्य सिमरन की गांड में भर गया। गर्म, चिपचिपा वीर्य उसकी गांड की गहराइयों में जा रहा था। सिमरन का शरीर कांपने लगा और वह गद्दे पर गिर पड़ी।
अंकित भी उसके ऊपर गिर गया। दोनों एक-दूसरे से सटे हुए थे, सांसें तेज चल रही थीं, और शरीर पसीने से तर थे।
तीसरा राउंड – मुंह का मजा
कुछ देर आराम करने के बाद, अंकित ने अपना लंड सिमरन की गांड से बाहर निकाला। उसका लंड अभी भी काफी हद तक कड़ा था और उस पर उसका और सिमरन का पानी लगा हुआ था।
सिमरन ने पलटकर देखा और अंकित के लंड को देखा। “आपका… अभी भी कड़ा है,” उसने कहा।
“तुम्हारे लिए हमेशा,” अंकित ने कहा।
सिमरन ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और अंकित के लंड को पकड़ लिया। उसने उसे सहलाया और फिर अपने मुंह के पास ले आई।
“मैं इसे चूसना चाहती हूं,” उसने कहा।
“क्या तुम…?” अंकित ने पूछा।
“हां… मैंने कभी नहीं किया… लेकिन आज करना चाहती हूं,” सिमरन ने कहा।
उसने अपने होंठ खोले और अंकित के लंड के सुपाड़े को अपने मुंह में ले लिया।
“उम्म्म…” अंकित ने एक गहरी सांस ली।
सिमरन ने धीरे से अपनी जीभ से लंड के सुपाड़े को चाटना शुरू किया। वह बेहद कोमल तरीके से उसे चाट रही थी, फिर चूस रही थी।
“उम्म्म… चुप… चुप…” आवाजें निकल रही थीं।
“आह्ह… हां… बहुत अच्छा लग रहा है…” अंकित ने कहा।
सिमरन ने धीरे से और लंड अपने मुंह में ले लिया। अब आधा लंड उसके मुंह के अंदर था। उसने अपने होंठों को कसकर बंद किया और सिर को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।
“चुप… चुप… चुप…” आवाजें तेज हो गईं।
“उम्म्म… आह्ह… हां… और अंदर… पूरा अंदर लो…” अंकित ने कहा।
सिमरन ने कोशिश की और थोड़ा और लंड अपने मुंह में ले लिया। अब लगभग पूरा लंड उसके गले तक जा रहा था। उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे लेकिन वह रुकी नहीं।
“उम्म्म… ग्लुप… ग्लुप…” आवाजें आ रही थीं।
“आह्ह… हां… बहुत अच्छा… तुम बेहद अच्छा कर रही हो…” अंकित ने कहा और सिमरन के सिर पर हाथ रख दिया।
उसने सिमरन के सिर को पकड़ा और अपने कूल्हे आगे-पीछे करने लगा। अब वह सिमरन के मुंह को चोद रहा था।
“चुप… चुप… चुप…” आवाजें तेज हो गईं।
“उम्म्म… ग्लुप… ग्लुप…” सिमरन की आवाजें भी तेज हो गईं।
अंकित ने तेजी से अपने कूल्हे आगे-पीछे किए और फिर एक जोरदार धक्का लगाया। उसका पूरा लंड सिमरन के गले तक गया और फिर वह झड़ गया।
“उईईई… आह्ह…” अंकित चिल्लाया।
उसका वीर्य सिमरन के मुंह में भर गया। गर्म, चिपचिपा वीर्य उसके गले में उतर रहा था। सिमरन ने सब कुछ निगल लिया और फिर धीरे से लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला।
“कैसा था?” अंकित ने पूछा।
“बेहद… बेहद अच्छा,” सिमरन ने कहा और उसके मुंह से थोड़ा वीर्य बाहर निकला जिसे उसने अपनी जीभ से चाट लिया।
चौथा राउंड – 69 की मजेदार पोजीशन
अब सिमरन भी पूरी तरह उत्तेजित हो चुकी थी और वह और चाहती थी। अंकित ने उसे लेटने के लिए कहा और खुद उसके ऊपर आ गया, लेकिन इस बार उल्टी तरफ।
अब अंकित का मुंह सिमरन की चूत के पास था और सिमरन का मुंह अंकित के लंड के पास। यह 69 की पोजीशन थी।
“चाटिए… मेरी चूत चाटिए…” सिमरन ने कहा।
अंकित ने अपनी जीभ निकाली और सिमरन की चूत पर रख दी। वह धीरे-धीरे उसे चाटने लगा – पहले बाहर की फांकों को, फिर अंदर की दीवारों को, और फिर क्लिटोरिस को।
“उईईई… आह्ह… हां… ऐसे ही… और जोर से…” सिमरन चिल्लाई।
उसने भी अंकित के लंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। दोनों एक-दूसरे को मजा दे रहे थे।
“चाट… चाट… चुप… चुप…” आवाजें छत पर गूंज रही थीं।
“उम्म्म… आह्ह… हां… बहुत अच्छा…” दोनों एक-दूसरे को प्रोत्साहित कर रहे थे।
अंकित ने अपनी जीभ सिमरन की चूत के अंदर डाल दी और अंदर-बाहर करने लगा। सिमरन ने भी लंड को गले तक ले लिया और चूस रही थी।
“उईईई… आह्ह… मैं… मैं झड़ने वाली हूं…” सिमरन ने कहा।
“मैं भी…” अंकित ने कहा।
और फिर दोनों एक साथ झड़ गए। सिमरन की चूत से पानी निकला और अंकित के मुंह में भर गया। अंकित का वीर्य भी सिमरन के मुंह में भर गया।
दोनों ने एक-दूसरे का सारा रस पिया और फिर एक-दूसरे से अलग हुए।
पांचवां राउंड – स्टैंडिंग पोजीशन
अब दोनों की ऊर्जा फिर से भर चुकी थी। अंकित ने सिमरन को खड़ा किया और उसे छत की रेलिंग के पास ले गया।
“यहां… यहां से पकड़िए,” उसने कहा।
सिमरन ने रेलिंग पकड़ ली और अपनी गांड अंकित की ओर उठा दी। अंकित ने उसके पैर थोड़े फैलाए और अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया।
“तैयार हैं?”
“हां… डाल दीजिए…”
अंकित ने एक जोरदार धक्का लगाया और पूरा लंड अंदर चला गया।
“उईईई… आह्ह…” सिमरन चिल्लाई।
अंकित ने उसकी कमर पकड़ी और तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए। यह पोजीशन बेहद गहरी थी और लंड पूरी तरह अंदर जा रहा था।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… हां… और तेज… और तेज…” सिमरन चिल्ला रही थी।
अंकित ने और जोर से धक्के लगाए। उसके कूल्हे सिमरन की गांड से टकरा रहे थे और एक तेज आवाज हो रही थी।
“थप… थप… थप…”
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… मेरी चूत… फाड़ दी… उईईई…” सिमरन चिल्ला रही थी।
अंकित ने एक हाथ आगे बढ़ाया और उसके स्तन पकड़ लिए। वह एक हाथ से उसके स्तन दबा रहा था और दूसरे हाथ से उसकी कमर पकड़े हुए उसे चोद रहा था।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… मैं… मैं झड़ने वाली हूं… उईईई…” सिमरन ने कहा।
“मैं भी… एक साथ…” अंकित ने कहा।
और फिर दोनों एक साथ झड़ गए। अंकित का वीर्य सिमरन की चूत में भर गया और सिमरन का पानी उसके लंड पर गिरा।
दोनों एक-दूसरे से सटे खड़े रहे, सांसें तेज चल रही थीं।
छठा राउंड – सोफे पर
अब दोनों थक चुके थे लेकिन अभी भी उनका मन नहीं भरा था। छत पर एक पुराना सोफा पड़ा हुआ था जो शायद किसी ने फेंकने के लिए रखा था। अंकित ने सिमरन को वहां ले जाकर बिठाया।
“अब आप मेरे ऊपर आइए,” उसने कहा।
सिमरन समझ गई। अंकित सोफे पर लेट गया और सिमरन उसके ऊपर आ गई। उसने अंकित के लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर रखा। फिर धीरे से नीचे बैठ गई।
“उईईई… आह्ह…” दोनों एक साथ आवाज निकाली।
सिमरन अब अंकित के ऊपर थी और उसकी चूत में अंकित का लंड पूरी तरह समा गया था। उसने अपने हाथ अंकित की छाती पर रखे और अपने कूल्हे आगे-पीछे करने शुरू कर दिए।
“उईईई… आह्ह… हां… ऐसे ही…” अंकित ने कहा।
सिमरन ने अपनी गति तेज कर दी। वह अब तेजी से अपने कूल्हे आगे-पीछे कर रही थी और अंकित का लंड उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… हां… और तेज… और तेज…” सिमरन चिल्ला रही थी।
उसके स्तन उछल रहे थे और अंकित ने उन्हें पकड़ लिया। वह उनके स्तन दबा रहा था और सिमरन उसके ऊपर उछल रही थी।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… माय गॉड… बहुत गहरा जा रहा है… उईईई…” सिमरन चिल्ला रही थी।
अंकित ने अपने कूल्हे भी ऊपर उठाने शुरू कर दिए ताकि और गहराई तक जा सके।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… मैं… मैं झड़ने वाली हूं… उईईई…” सिमरन ने कहा।
“मैं भी… एक साथ…” अंकित ने कहा।
और फिर दोनों एक साथ झड़ गए। यह उनका सबसे तीव्र ओर्गेज्म था। दोनों के शरीर कांप रहे थे और एक-दूसरे से सटे हुए थे।
सातवां राउंड – साइड पोजीशन
अब रात काफी हो चुकी थी लेकिन दोनों अभी भी रुकने को तैयार नहीं थे। अंकित ने सिमरन को सोफे पर सीधा लेटा दिया और खुद उसके बगल में आकर लेट गया। उसने सिमरन का एक पैर उठाया और अपने कंधे पर रख लिया।
“अब इस तरफ से…” अंकित ने कहा।
उसने अपना लंड सिमरन की चूत पर रखा और धीरे से अंदर डाल दिया।
“उईईई… आह्ह…” सिमरन ने आवाज निकाली।
यह पोजीशन भी बेहद गहरी थी। अंकित ने अपने कूल्हे आगे-पीछे करने शुरू किए और सिमरन को चोदना शुरू कर दिया।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… हां… और तेज… और तेज…” सिमरन चिल्ला रही थी।
अंकित ने एक हाथ सिमरन के स्तन पर रखा और दूसरा हाथ उसकी कमर पर। वह तेजी से धक्के लगा रहा था।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… मेरी चूत… बहुत अच्छी लग रही है ना… उईईई…” सिमरन ने कहा।
“हां… बहुत टाइट है… बहुत गर्म है…” अंकित ने कहा।
दोनों तेजी से एक-दूसरे को मजा दे रहे थे। अंकित का लंड सिमरन की चूत में तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… मैं… मैं फिर से झड़ने वाली हूं… उईईई…” सिमरन ने कहा।
“मैं भी… इस बार मैं आपके मुंह में झड़ना चाहता हूं…” अंकित ने कहा।
“हां… निकालिए… मेरे मुंह में निकालिए…” सिमरन ने कहा।
अंकित ने अपना लंड बाहर निकाला और सिमरन के मुंह के पास ले आया। सिमरन ने तुरंत उसे पकड़ा और अपने मुंह में ले लिया।
“उम्म्म… चुप… चुप…” आवाजें निकलीं।
और फिर अंकित झड़ गया। उसका वीर्य सिमरन के मुंह में भर गया। सिमरन ने सब कुछ निगल लिया और फिर लंड को चाट-चाटकर साफ कर दिया।
आठवां राउंड – एक और गांड मारी
अब दोनों थक चुके थे लेकिन अभी एक बार और करना चाहते थे। अंकित ने सिमरन को घुटनों के बल लाया और इस बार वह पीछे से उसकी चूत मारने वाला था।
“इस बार… इस बार मेरी चूत…” सिमरन ने कहा।
“हां… चूत ही…” अंकित ने कहा।
उसने अपना लंड सिमरन की चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का लगाया।
“उईईई… आह्ह…” सिमरन चिल्लाई।
अंकित ने तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए। वह अब बहुत तेजी से सिमरन की चूत मार रहा था।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… हां… और तेज… और तेज… फक मी… फक मी हार्ड…” सिमरन चिल्ला रही थी।
अंकित ने और जोर से धक्के लगाए। उसके कूल्हे सिमरन की गांड से टकरा रहे थे और तेज आवाज हो रही थी।
“थप… थप… थप…”
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… माय गॉड… बहुत गहरा… उईईई…” सिमरन चिल्ला रही थी।
अंकित ने सिमरन के बाल पकड़े और उसका सिर पीछे खींचा। अब वह उसे और जोर से चोद रहा था।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… मैं… मैं झड़ने वाली हूं… उईईई…” सिमरन ने कहा।
“मैं भी… एक साथ…” अंकित ने कहा।
और फिर दोनों एक साथ झड़ गए। यह उनका आठवां और अंतिम ओर्गेज्म था। दोनों एक-दूसरे से सटे रहे और फिर गद्दे पर गिर पड़े।
अंतिम क्षण
दोनों एक-दूसरे से सटे लेटे हुए थे। उनके शरीर पसीने से तर थे और सांसें तेज चल रही थीं। चांद अभी भी ऊपर चमक रहा था और उनकी नंगी बॉडी पर अपनी रोशनी बिखेर रहा था।
“यह… यह रात… कभी नहीं भूलूंगी,” सिमरन ने धीमी आवाज में कहा।
“मैं भी…” अंकित ने कहा और उसके माथे पर चूमा।
सिमरन ने उसकी ओर मुड़कर देखा। “क्या… क्या हम फिर से मिल सकते हैं?”
“हां… जब चाहें…” अंकित ने कहा।
दोनों ने एक-दूसरे को चूमा और फिर एक-दूसरे से सटे हुए लेटे रहे। करवाचौथ की वह रात उन दोनों के लिए एक यादगार रात बन गई थी – एक रात जिसमें दो अकेले दिलों ने एक-दूसरे को वो मजा दिया जो वे कब से तलाश रहे थे।
और इसी के साथ यह कहानी समाप्त होती है – एक कहानी जो शुरू हुई थी एक अकेली छत पर और खत्म हुई दो शरीरों के मिलन पर। हर कपड़े के खुलने का एहसास, हर चुंबन की गर्माहट, हर धक्के की तीव्रता, और हर झड़ने की उत्तेजना – सब कुछ यादगार था, सब कुछ अद्भुत था।
ये कहानी उस करवाचौथ की है जहां बीवी की जगह मैंने सिमरन की चुदाई का मजा लिया
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