गलत पार्सल – करवाचौथ की अनोखी शाम
अध्याय 1: साड़ी का आगमन और पहली गलतफहमी
करवाचौथ से एक दिन पहले शाम के लगभग पांच बजे थे। आकाश में हल्के बादल छाए हुए थे और हवा में ठंडक थी। रिया अपने अपार्टमेंट में अकेली बैठी कॉफी पी रही थी। उसके पति रोहन दो दिन पहले ही बिजनेस ट्रिप पर बाहर गए थे और अगले हफ्ते ही वापस आने वाले थे। करवाचौथ पर उनका न आना रिया के दिल में एक खालीपन सा महसूस करा रहा था। करवाचौथ की रात पड़ोसन के साथ
दरवाजे की घंटी बजी। रिया ने मेज पर रखी कॉफी का कप नीचे रखा और उठकर दरवाजे की ओर गई। उसने आईहोल से बाहर देखा – सामने एक कूरियर वाला खड़ा था, हाथ में एक बड़ा सा आलीशान बॉक्स लिए हुए।
“मैडम, आपके लिए पार्सल है,” कूरियर वाले ने कहा।
रिया ने दरवाजा खोला। “मेरे लिए? किसने भेजा है?”
“पता नहीं मैडम, ऊपर तो आपका नाम और पता लिखा है,” कूरियर वाले ने कहा और डिलिवरी का गैजेट आगे बढ़ाया।
रिया ने साइन किया और पार्सल ले लिया। वह बॉक्स को देखने लगी – यह बेहद खूबसूरत तरीके से पैक किया हुआ था। गोल्डन रंग का रैपर, ऊपर लाल रिबन बंधी हुई, और एक छोटा सा कार्ड भी था जिस पर लिखा था: “करवाचौथ की शुभकामनाएं – आपके खास के लिए।”
रिया का दिल खुशी से धड़कने लगा। उसे लगा कि यह रोहन ने भेजा होगा – दूर रहकर भी उसे खुश करने की कोशिश। वह बेहद उत्साहित होकर बॉक्स को लिविंग रूम की मेज पर रखा और धीरे-धीरे खोलने लगी।
रैपर खोला, ऊपर का कार्ड हटाया, और फिर बॉक्स का ढक्कन उठाया। अंदर से एक बेहद खूबसूरत लाल बनारसी साड़ी निकली। वह साड़ी इतनी खूबसूरत थी कि रिया की आंखें चौड़ी हो गईं। शुद्ध सिल्क का कपड़ा, सोने की जरी की कढ़ाई, किनारों पर मोतियों की लड़ी, और बीच में बने हुए इंट्रिकेट पैटर्न।
“वाह… यह तो बेहद खूबसूरत है,” रिया ने अनायास ही कहा।
उसने तुरंत अपने पति को फोन करने की कोशिश की लेकिन फोन नहीं लगा – शायद वे मीटिंग में होंगे। रिया ने सोचा, “क्यों ना मैं इसी साड़ी में करवाचौथ मनाऊं? यह तो वैसे भी मेरे लिए ही आई है।”
उसने साड़ी को बड़े प्यार से निकाला और आईने के सामने खड़ी होकर खुद कल्पना की कि वह इसे पहनेगी तो कैसी लगेगी। साड़ी का कपड़ा इतना नरम था कि हाथों में फिसल रहा था। करवाचौथ की रात पड़ोसन के साथ
अध्याय 2: करवाचौथ की रात पड़ोसन के साथ :- पड़ोसन से पहली मुलाकात
अगले दिन करवाचौथ की शाम थी। रिया पूरी तरह तैयार हो चुकी थी। उसने पार्लर से मेहंदी लगवाई थी, बालों में स्टाइलिंग करवाई थी, और वही खूबसूरत लाल साड़ी पहनी हुई थी जो कल आई थी।
साड़ी उस पर बेहद खूबसूरत लग रही थी। लाल रंग उसके गोरे बदन पर चमक रहा था। उसने लाल बिंदी लगाई थी, कानों में लाल झुमके, और हाथों में सफेद-लाल चूड़ियां। वह आईने में खुद को देखकर मुस्कुरा रही थी।
तभी दरवाजे की घंटी बजी। रिया ने सोचा कि शायद कोई दोस्त आया होगा करवाचौथ मनाने के लिए। उसने दरवाजा खोला।
सामने एक औरत खड़ी थी – लगभग 30-32 साल की, बेहद खूबसूरत, और थोड़ी परेशान और घबराई हुई दिख रही थी। उसने साधारण सा सूट पहना हुआ था और हाथ में एक कागज था।
“जी… आप कौन?” रिया ने पूछा।
“मैं… मैं बगल वाले फ्लैट में रहती हूं। अपार्टमेंट नंबर 1204,” उस औरत ने कहा। “मेरा नाम काव्या है।”
रिया ने सिर हिलाया। “हां, बोलिए।”
काव्या ने घबराते हुए कहा, “दरअसल… मैं यह पूछने आई थी कि कल शाम क्या आपके यहां कोई पार्सल आया था? एक साड़ी का?”
रिया का दिल धड़कने लगा। “हां… आया था। लेकिन…”
काव्या ने कागज आगे बढ़ाया। “यह देखिए… यह मेरे पति का ऑर्डर था। उन्होंने मेरे लिए करवाचौथ की साड़ी ऑर्डर की थी। लेकिन कूरियर वाले से पता चला कि गलती से वह आपके यहां डिलीवर हो गया।”
रिया का चेहरा पीला पड़ गया। उसने वही साड़ी पहनी हुई थी। वह बेहद शर्मिंदा महसूस कर रही थी।
“ओह माय गॉड… मुझे माफ कर दीजिए,” रिया ने घबराते हुए कहा। “मुझे लगा कि यह मेरे पति ने मेरे लिए भेजी है। मैंने तो इसे पहन भी लिया।”
काव्या ने अंदर देखा। रिया को वह साड़ी में देखकर उसकी आंखें चौड़ी हो गईं। वह साड़ी रिया पर बेहद खूबसूरत लग रही थी – जैसे यह उसी के लिए बनी हो।
“वाह…” काव्या ने अनायास ही कहा। “आप पर तो यह बेहद खूबसूरत लग रही है।”
रिया शर्मिंदा होकर खड़ी थी। “मैं… मैं तुरंत उतारकर लाती हूं।”
“नहीं… रुकिए,” काव्या ने कहा। “मैं अंदर आ सकती हूं? थोड़ी देर बैठना चाहती थी। मेरे पति भी बाहर गए हुए हैं और घर में बेहद अकेलापन महसूस हो रहा है।” करवाचौथ की रात पड़ोसन के साथ
रिया ने उसे अंदर आने दिया। “जी जरूर… आइए।”
अध्याय 3: करवाचौथ की रात पड़ोसन के साथ:- दो अकेले दिलों की बातचीत
काव्या अंदर आई और सोफे पर बैठ गई। रिया ने उसके लिए पानी का गिलास लाया और उसके सामने बैठ गई।
“आपके पति भी बाहर हैं?” रिया ने पूछा।
“हां… उन्हें बिजनेस ट्रिप पर जाना पड़ा। करवाचौथ पर वापस आने वाले थे लेकिन फ्लाइट कैंसिल हो गई,” काव्या ने उदास होकर कहा। “मैंने व्रत रखा है लेकिन वो… वो यहां नहीं हैं।” करवाचौथ की रात पड़ोसन के साथ
रिया ने समझदारी से सिर हिलाया। “मेरे पति भी बाहर हैं। मुझे भी बेहद अकेलापन महसूस हो रहा था। इसलिए जब यह साड़ी आई तो मुझे लगा कि यह उन्होंने भेजी है।”
दोनों एक-दूसरे को देखने लगीं। दोनों की आंखों में एक जैसा दर्द था – अकेलेपन का, अपने-अपने पतियों के दूर रहने का।
“कभी-कभी लगता है कि शादी करके भी इंसान कितना अकेला हो सकता है,” काव्या ने धीमी आवाज में कहा।
“हां… सब कुछ होते हुए भी कुछ खाली सा लगता है,” रिया ने कहा।
काव्या ने अपने हाथ कपड़े पर रखे। “मैंने आपको अक्सर इस सोसाइटी में देखा है लेकिन कभी बात नहीं हुई। आपका नाम…?”
“रिया,” रिया ने कहा।
“सुंदर नाम,” काव्या ने मुस्कुराते हुए कहा। “मैं काव्या… मेरे पति का नाम अर्जुन है।”
दोनों ने एक-दूसरे को देखा। धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई। वे अपने-अपने पतियों के बारे में बात करने लगे, अपने अकेलापन के बारे में, और इस करवाचौथ की शाम के बारे में जो दोनों के लिए उदासी भरी थी।
“मैंने सोचा था कि इस बार मैं पहली बार करवाचौथ का व्रत रखूंगी और मेरे पति मेरे साथ होंगे,” रिया ने कहा और उसकी आंखें नम हो गईं।
काव्या ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और रिया का हाथ पकड़ लिया। “रोइए मत… हम दोनों एक-दूसरे के साथ हैं ना।”
रिया ने काव्या का हाथ पकड़ा। उसका हाथ बेहद नरम और गर्म था। उस स्पर्श से रिया को कुछ अजीब सा लगा – एक दिलासा, एक सहारा।
“आप… आप बेहद अच्छी हैं,” रिया ने कहा।
काव्या ने मुस्कुराया। “आप भी।”
अध्याय 4: धीरे-धीरे नजदीकियां
बातचीत करते-करते समय बीतता गया। दोनों एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझने लगीं थीं। काव्या ने बताया कि उसके और अर्जुन के बीच कुछ समय से अनबन चल रही थी। रिया ने भी बताया कि रोहन के साथ उसके रिश्ते में दूरी आ गई थी।
“शायद इसलिए हम दोनों आज यहां अकेले हैं,” काव्या ने कहा।
“हां… शायद,” रिया ने कहा।
काव्या ने अपने हाथ रिया के हाथ पर रखे और धीरे से सहलाया। “लेकिन आज… आज मुझे आपके साथ बैठकर अच्छा लग रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे किसी करीबी से मिल रही हूं।”
रिया ने महसूस किया कि काव्या की आंखों में एक अजीब सी चमक थी। वह उसे किसी और नजर से देख रही थी – सिर्फ दोस्ती की नजर से नहीं, बल्कि कुछ और।
“मुझे भी… अच्छा लग रहा है,” रिया ने धीमी आवाज में कहा।
काव्या ने धीरे से अपना हाथ रिया के गाल पर रखा। “आपकी आंखें… बेहद खूबसूरत हैं।”
रिया ने अपनी आंखें झुका लीं। “शुक्रिया…”
काव्या ने उसका चेहरा धीरे से ऊपर उठाया। “शर्माइए मत…”
दोनों एक-दूसरे की आंखों में देखने लगीं। उनके बीच की दूरी धीरे-धीरे कम हो रही थी। हवा में एक अजीब सा तनाव था – चाहत का, प्यास का।
अध्याय 5: पहला इशारा और पहला स्पर्श
काव्या ने धीरे से अपना हाथ रिया के बालों में फेरा। “आपके बाल… बेहद सुंदर हैं।”
रिया ने महसूस किया कि उसके शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। काव्या का स्पर्श बेहद कोमल था लेकिन उसमें एक गर्माहट थी।
“धन्यवाद,” रिया ने धीमी आवाज में कहा।
काव्या ने अपना हाथ रिया के बालों से नीचे लाया और उसके गाल पर रख दिया। “आपकी त्वचा… बेहद नरम है।”
रिया ने अपनी आंखें बंद कर लीं। वह काव्या के स्पर्श का आनंद ले रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह सही है या गलत, लेकिन उसके शरीर ने विरोध नहीं किया। करवाचौथ की रात पड़ोसन के साथ
“काव्या… मैं…” रिया कुछ कहने की कोशिश कर रही थी।
“शhh…” काव्या ने अपनी उंगली रिया के होंठों पर रख दी। “कुछ मत कहिए… बस महसूस कीजिए।”
और फिर काव्या ने अपने होंठ रिया के होंठों के पास ले आईं। उनके होंठ कुछ इंच की दूरी पर थे। रिया ने अपनी आंखें खोलीं और काव्या को देखा।
“क्या… क्या हम…” रिया ने धीमी आवाज में पूछा।
“अगर आप मना करेंगी तो मैं रुक जाऊंगी,” काव्या ने कहा।
रिया ने कुछ नहीं कहा। वह बस खड़ी रही। यह उसकी चुप्पी थी जो काव्या को आगे बढ़ने का संकेत दे रही थी।
काव्या ने धीरे से अपने होंठ रिया के होंठों पर रख दिए।
अध्याय 6: पहला चुंबन और बढ़ती जज्बात
यह पहला चुंबन था – हल्का, कोमल, और बेहद नरम। काव्या ने रिया के निचले होंठ को अपने होंठों के बीच लिया और धीरे से चूसा।
“उम्म्म…” रिया की आवाज निकली।
काव्या ने चुंबन गहरा किया। उसने अपनी जीभ बाहर निकाली और रिया के होंठों को चाटना शुरू कर दिया। रिया ने भी अपने होंठ खोले और काव्या की जीभ को अपने मुंह में स्वीकार कर लिया।
“उम्म्म… चुप… चुप…” आवाजें निकलने लगीं।
दोनों एक-दूसरे को गहराई से चूम रही थीं। काव्या ने अपने हाथ रिया की पीठ पर रखे और उसे अपनी ओर खींचा। रिया ने अपने हाथ काव्या की कमर पर रख दिए।
“आप… बेहद अच्छी लग रही हैं,” काव्या ने चुंबन तोड़कर कहा।
रिया ने शर्माते हुए सिर झुकाया। “मुझे भी… आप अच्छी लग रही हैं।”
काव्या ने उसका चेहरा ऊपर उठाया। “देखिए मुझे… मैं चाहती हूं कि आप मेरी आंखों में देखें।”
रिया ने अपनी आंखें उठाईं। दोनों एक-दूसरे की आंखों में देखने लगीं। उनकी आंखों में अब सिर्फ चाहत थी – बिना किसी शर्म, बिना किसी झिझक के।
“मैं आपको छूना चाहती हूं… हर जगह,” काव्या ने धीमी आवाज में कहा। करवाचौथ की रात पड़ोसन के साथ
रिया ने हल्के से सिर हिलाया। “हां… मुझे भी…”
अध्याय 7: साड़ी का खुलना – पहला कपड़ा
काव्या ने रिया की साड़ी को धीरे से छूना शुरू किया। उसने साड़ी के किनारे को पकड़ा और धीरे से खींचना शुरू किया।
“यह साड़ी… मुझसे ज्यादा आपकी है,” काव्या ने कहा।
रिया खड़ी रही, उसकी आंखें बंद थीं। काव्या ने साड़ी का पल्लू धीरे से खींचा। पल्लू रिया के सिर से खिसका और फिर कंधे से नीचे आ गया।
“आपका ब्लाउज… बेहद खूबसूरत है,” काव्या ने कहा।
रिया ने लाल रंग का ब्लाउज पहना हुआ था जो उसके स्तनों को बेहद कसकर पकड़े हुए था। ब्लाउज का डिजाइन थोड़ा डीप था – आगे से उसकी गोलाई का हल्का सा हिंट मिल रहा था।
काव्या ने अपने हाथ रिया के ब्लाउज पर रखे। उसने धीरे से ब्लाउज के किनारे को छुआ और फिर अंदर की ओर बढ़ी।
“उम्म्म…” रिया ने हल्की सी आवाज निकाली।
काव्या ने ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। पहला बटन खुला – रिया की गोरी त्वचा दिखने लगी। फिर दूसरा बटन खुला – अब ब्लाउज खुला हुआ था और अंदर लाल रंग की ब्रा दिख रही थी।
“वाह… बेहद सुंदर,” काव्या ने कहा।
अध्याय 8: ब्रा का खुलना – दूसरा कपड़ा
काव्या ने रिया की ब्रा के पीछे हाथ ले जाकर हुक खोल दिया। ब्रा धीरे से आगे की ओर खिसक गई और काव्या ने उसे पूरी तरह हटा दिया।
रिया के स्तन बाहर आ गए – गोल, मुलायम, गोरे, और बिल्कुल सही आकार के। उनके ऊपर छोटे-छोटे गुलाबी निपल्स थे जो उत्तेजना में कड़े हो गए थे।
“बेहद खूबसूरत,” काव्या ने कहा और अपने हाथ एक स्तन पर रख दिया।
उसने धीरे से दबाया और फिर निपल को अपनी उंगलियों से घुमाना शुरू कर दिया।
“उईईई… आह्ह…” रिया की आवाज निकली। करवाचौथ की रात पड़ोसन के साथ
काव्या ने और जोर से दबाया और फिर नीचे झुककर एक निपल को अपने मुंह में ले लिया।
“उम्म्म… चुप… चुप…” आवाजें निकलीं।
काव्या ने निपल को चूसना शुरू कर दिया। उसकी जीभ निपल पर घूम रही थी और उसे कड़ा कर रही थी। रिया ने अपने हाथ काव्या के सिर पर रख दिए।
“उम्म्म… आह्ह… हां… और जोर से…” रिया फुसफुसाई।
अध्याय 9: साड़ी का पूरी तरह खुलना
काव्या ने रिया की साड़ी को पूरी तरह खोल दिया। अब साड़ी सिर्फ उसके पेटीकोट में लिपटी हुई थी। काव्या ने पेटीकोट का नाड़ा खोला और पेटीकोट भी नीचे गिरा दिया।
अब रिया सिर्फ अपनी पैंटी में थी। उसने एक लाल रंग की लेस वाली पैंटी पहनी हुई थी।
“आप… बेहद सेक्सी हैं,” काव्या ने कहा।
उसने अपने हाथ रिया की पैंटी के किनारे पर रखे और धीरे से नीचे खींचना शुरू किया। पैंटी नीचे खिसक रही थी और रिया के बाल दिखने लगे थे।
फिर उसकी चूत दिखी – गुलाबी, चिकनी, और बेहद खूबसूरत। काव्या की आंखें उस पर टिक गईं।
“वाह… बेहद खूबसूरत चूत है आपकी,” काव्या ने कहा।
अध्याय 10: पहली चूत चाटना और उत्तेजना
काव्या ने अपने हाथ रिया की चूत पर रखे और धीरे से सहलाया।
“उईईई…” रिया ने आवाज निकाली।
काव्या ने अपनी एक उंगली अंदर डाली। उंगली आसानी से अंदर चली गई क्योंकि चूत पूरी तरह गीली थी।
“उईईई… आह्ह… हां…” रिया ने कहा।
काव्या ने अपनी उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। फिर उसने अपना मुंह रिया की चूत पर रख दिया और चाटना शुरू कर दिया।
“उईईई… आह्ह… ओह्ह… हां… ऐसे ही…” रिया चिल्लाने लगी।
काव्या ने चूत को बेहद प्यार से चाटा। उसने अपनी जीभ को अंदर डाला और घुमाना शुरू कर दिया।
“उईईई… आह्ह… मैं… मैं झड़ने वाली हूं… उईईई…” रिया चिल्लाई।
और फिर वह झड़ गई। उसकी चूत से पानी निकला और काव्या ने सब कुछ पी लिया।
अध्याय 11: काव्या का कपड़ा उतरना
अब रिया की बारी थी। काव्या खड़ी हुई और रिया ने उसकी ओर देखा। काव्या ने अपना दुपट्टा निकाला और फिर अपने सूट का कुर्ता उतारना शुरू किया।
रिया ने उसकी मदद की। उसने कुर्ते के बटन खोले। अब काव्या का कुर्ता खुला हुआ था और अंदर गुलाबी रंग की ब्रा थी।
रिया ने कुर्ता उतार दिया। काव्या ऊपर से केवल ब्रा में थी। रिया ने अपने हाथ उसके स्तनों पर रखे और धीरे से दबाया।
“उम्म्म…” काव्या ने आवाज निकाली।
रिया ने उसकी ब्रा खोल दी। काव्या के स्तन बाहर आ गए। रिया ने उन्हें पकड़ा और चूसना शुरू कर दिया।
“उईईई… आह्ह… हां…” काव्या ने कहा।
रिया ने काव्या की सलवार और पैंटी भी उतार दी। अब काव्या पूरी तरह नंगी थी।
अध्याय 12: 69 की मजेदार पोजीशन
दोनों 69 की पोजीशन में आ गईं। रिया का मुंह काव्या की चूत के पास था और काव्या का मुंह रिया की चूत के पास।
“चाटो… मेरी चूत चाटो…” काव्या ने कहा।
रिया ने चूत को चाटना शुरू कर दिया। काव्या ने भी रिया की चूत चूसना शुरू कर दिया।
“उम्म्म… चुप… चुप…” आवाजें निकलने लगीं।
“उईईई… आह्ह… हां… ऐसे ही…” दोनों चिल्लाने लगीं।
रिया ने काव्या की क्लिटोरिस चूसी और काव्या ने भी रिया की क्लिटोरिस चूसी।
“उईईई… आह्ह… मैं झड़ने वाली हूं…” काव्या ने कहा।
“मैं भी…” रिया ने कहा।
दोनों एक साथ झड़ गईं।
अध्याय 13: अंतिम पल और वादा
69 के बाद दोनों एक-दूसरे से अलग हुईं। काव्या ने रिया को गले लगाया।
“यह… यह बेहद अच्छा था,” काव्या ने कहा।
“हां…” रिया ने कहा।
“क्या हम… फिर से मिल सकती हैं?” काव्या ने पूछा।
रिया ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। “हां… जब चाहें।”
दोनों ने एक-दूसरे को लंबा चुंबन दिया। फिर काव्या ने अपने कपड़े पहने और चली गई।
रिया दरवाजे पर खड़ी रही। उसे पता था कि यह सिर्फ शुरुआत थी। उन दोनों के बीच और भी मुलाकातें होंगी।
करवाचौथ की वह रात रिया के लिए हमेशा यादगार रही – एक रात जब एक गलत पार्सल ने उसे एक नए रिश्ते से मिलाया।
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