पड़ोस वाली भाभी की चुदाई: एक अधूरी जवानी की प्यास
भाग 1: पहली नजर और चोरी-छिपे इशारे
नोएडा सेक्टर-15, ब्लॉक-सी, फ्लैट नंबर 302। यह वो जगह थी जहां मैं, आलोक शर्मा, पिछले दो साल से किराए पर रह रहा था। मेरी उम्र 28 साल थी, हाइट 5’10”, रंग गोरा और बिल्ड एथलेटिक। मैं एक आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, दिनभर लैपटॉप के सामने बैठने के बाद शाम को जब मैं अपनी बालकनी में चाय पीने आता था, तो मेरी नजर अक्सर सामने वाले फ्लैट की बालकनी में खड़ी एक खूबसूरत औरत पर पड़ती थी। पड़ोस वाली भाभी की चुदाई
उसका नाम था तमन्ना। पड़ोसी उसे “तमन्ना भाभी” कहते थे, लेकिन मेरे लिए वो सिर्फ एक भाभी नहीं थीं। वो एक ज्वालामुखी थी जो धीरे-धीरे जल रही थी, एक ऐसी औरत जिसकी खूबसूरती दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही थी, लेकिन उसकी जिंदगी में कोई ऐसा नहीं था जो उस ज्वालामुखी की आग को शांत कर सके।
तमन्ना की उम्र करीब 30-31 साल होगी। उसकी शादी को पांच साल हो चुके थे। उसका पति रोहित एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर था, लेकिन किस्मत ने उनके साथ एक ऐसा खेल खेला था जो शायद ही किसी को पता था। रोहित को एक ऐसी बीमारी थी जिसके बारे में वो किसी से बात नहीं कर सकता था – वो सेक्सुअली इंपोटेंट था। उसका लिंग कभी खड़ा नहीं हो पाता था, चाहे वो कितनी भी कोशिश कर ले।
यह बात मुझे बहुत बाद में पता चली, लेकिन पहले मैं सिर्फ तमन्ना को देखता था। वो एक ऐसी औरत थी जिसे देखकर कोई भी मर्द रुक जाता। उसकी कमर, हे भगवान! वो कटिली कमर जैसे किसी मूर्तिकार ने तराशी हो। उसकी कमर इतनी पतली थी कि हाथ रखते ही उंगलियां आपस में मिल जातीं, और ऊपर से उसके कूल्हे, वो उभरे हुए, भरपूर कूल्हे जो हर साड़ी, हर सूट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे।
उसके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी थी। पांच साल की शादी, कोई बच्चा नहीं, और एक पति जो उसकी जवानी की प्यास बुझा नहीं सकता था। यह सब मैं धीरे-धीरे समझा, लेकिन शुरुआत तो सिर्फ एक नजर से हुई थी।
यह बात तकरीबन छह महीने पहले की है। मार्च का महीना था, गर्मी की शुरुआत हो रही थी। मैं अपनी बालकनी में खड़ा था, जब तमन्ना अपनी बालकनी में आई। उसने हल्की सी गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी, जिसका ब्लाउज गहरे गले वाला था। उसके बाल गीले थे, शायद अभी-अभी नहाकर आई थी। जब उसने अपने बाल झाड़े, तो एक बूंद पानी की उसके गले से होती हुई उसके ब्लाउज के अंदर चली गई।
मेरी सांस थम सी गई। उसने मुझे देखा, और मैंने तुरंत अपनी नजरें झुका लीं, लेकिन उसने मुस्कुराया। वो एक अजीब सी मुस्कान थी, जैसे वो जानती हो कि मैं उसे देख रहा हूं, और उसे इस बात से कोई एतराज नहीं था।
“नमस्ते,” उसने दूर से हाथ हिलाया।
“नमस्ते भाभी,” मैंने जवाब दिया।
यह हमारी पहली बातचीत थी। उसके बाद धीरे-धीरे यह नमस्ते वाला सिलसिला शुरू हुआ। रोज सुबह जब मैं ऑफिस के लिए निकलता, वो अपने दरवाजे पर खड़ी मिलती, और हम एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराते। कभी-कभी वो मुझसे पूछती, “आलोक जी, आपका खाना हो गया?” या “आज ऑफिस जल्दी जा रहे हो?”
ये छोटी-छोटी बातें थीं, लेकिन इनमें एक अजीब सा तनाव था। मैं महसूस कर सकता था कि वो मुझे कुछ कहना चाहती है, लेकिन कह नहीं पाती। उसकी आंखों में एक प्यास थी, एक तड़प थी जो शब्दों में बयान नहीं की जा सकती थी।
अप्रैल आया। एक दिन शाम को मैं जब लौटा, तो देखा कि तमन्ना अपने फ्लैट के बाहर खड़ी है, उसका चेहरा उतरा हुआ था।
“क्या हुआ भाभी?” मैंने पूछा।
“कुछ नहीं, बस… लाइट चली गई है अंदर, और मोबाइल भी डेड हो गया है। रोहित जी तो ऑफिस से आएंगे देर से,” उसने कहा।
“आप मेरे फ्लैट में आ जाइए, मैं चार्जर दे देता हूं,” मैंने कहा।
उसने थोड़ी हिचकिचाहट दिखाई, फिर मान गई। यह पहली बार था जब वो मेरे फ्लैट में आ रही थी।
जब वो अंदर आई, तो मैंने पहली बार उसे इतने करीब से देखा। उसने नीले रंग का सूट पहना हुआ था, दुपट्टा सिर पर नहीं था। उसके गालों पर एक हल्की सी लाली थी, और उसके होंठ… ओह, उसके होंठ गुलाबी, मुलायम, चूसने के लिए बने हुए लगते थे।
“बैठिए ना,” मैंने कहा।
“नहीं, बस चार्जर दे दीजिए, मैं चली जाऊंगी,” उसने कहा।
मैंने अपना चार्जर निकाला और उसे दिया। जब उसने हाथ बढ़ाया, तो हमारी उंगलियां छू गईं। एक करंट सा लगा, और मैंने देखा कि उसकी आंखें एक पल के लिए बंद हुईं, फिर खुलीं।
“धन्यवाद,” उसने धीरे से कहा और चली गई।
उस रात मैं सो नहीं पाया। मेरे दिमाग में सिर्फ वो पल था जब हमारी उंगलियां छूई थीं। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है, लेकिन मेरे अंदर एक आग जल रही थी।
अगले दिन से, हमारी बातचीत बढ़ने लगी। वो कभी-कभी चाय के लिए आ जाती, कभी कुछ सामान मांगने। और हर बार जब वो आती, तो उसकी नजरें मुझे कुछ कहतीं जो शब्द नहीं कह पातीं।
मई का महीना था। गर्मी अपने चरम पर थी। एक दिन शाम को, मैंने देखा कि तमन्ना अपनी बालकनी में पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी है। उसने अपनी साड़ी उतार दी थी, शायद गर्मी से बचने के लिए। वो सफेद रंग का पेटीकोट पहने हुए थी, और उसका ब्लाउज गहरे गले वाला काला रंग का था।
मैं अपनी बालकनी में खड़ा होकर उसे देख रहा था। वो जानती थी कि मैं देख रहा हूं, और वो जानबूझकर अपने बालों में कंघी कर रही थी। जब वो हाथ उठाती, तो उसकी कमर का कुछ हिस्सा दिख जाता, वो कटिली कमर जिसे देखकर मेरा लिंग खड़ा हो जाता।
“आलोक जी,” उसने अचानक बुलाया।
“हां भाभी?” मैंने जवाब दिया।
“आपके पास पानी है? मेरे घर का फिल्टर खराब हो गया है,” उसने कहा।
“हां, आइए ले जाइए,” मैंने कहा।
वो अपने फ्लैट से निकली और मेरे दरवाजे पर आई। उसने अभी भी वही पेटीकोट और ब्लाउज पहना हुआ था। जब वो अंदर आई, तो मैंने पहली बार उसे इतने कम कपड़ों में इतने करीब से देखा।
उसका पेटीकोट कमर से थोड़ा नीचे बंधा था, और उसकी नाभि दिख रही थी। वो गहरी, सेक्सी नाभि जिसमें मैं अपनी जीभ डालना चाहता था। उसके ब्लाउज के बटन में से उसकी ब्रा का किनारा दिख रहा था, और उसकी चूचियां… वो भरी हुई, तनी हुई चूचियां जो ब्लाउज को फाड़ने की कोशिश कर रही थीं।
“पानी कहां है?” उसने पूछा, उसकी आवाज में एक अजीब सी कंपन थी।
“किचन में,” मैंने कहा, और उसके पीछे-पीछे चलने लगा।
जब वो किचन में पहुंची, तो उसने बोतल उठाई। मैं उसके पीछे खड़ा था, और मुझसे रहा नहीं गया। मैंने धीरे से कहा, “भाभी, आप बहुत खूबसूरत हैं।”
वो रुक गई। उसने बोतल नीचे रखी और पलटी। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन साथ में एक प्यास भी थी।
“आलोक जी, आपको पता है मेरी शादी को पांच साल हो गए हैं,” उसने कहा, उसकी आवाज कांप रही थी।
“हां, मुझे पता है,” मैंने कहा।
“आपको पता है मेरे कोई बच्चा क्यों नहीं है?” उसने पूछा।
मैंने सिर हिलाया।
“क्योंकि… क्योंकि रोहित जी… वो… वो मुझे…” वो रोने लगी।
मैंने हिम्मत करके उसके कंधे पर हाथ रखा। वो कांप रही थी, उसका बदन गर्म था।
“क्या हुआ भाभी? बताइए ना,” मैंने धीरे से पूछा।
“वो मुझे चोद नहीं सकते,” उसने एकदम से कह दिया, और फिर रोने लगी।
मैं चौंक गया। मैंने सोचा नहीं था कि वो इतनी सीधी होगी, लेकिन शायद पांच साल की दबी हुई प्यास किसी को क्या नहीं करा सकती।
“उनका लिंग… खड़ा नहीं होता,” उसने रोते हुए कहा। “पांच साल से मैं… मैं कुंवारी हूं, आलोक जी। मैंने कभी मजा नहीं लिया सेक्स का।”
मेरा दिल धड़कने लगा। मेरा लिंग तनकर खड़ा हो गया था, और मैं जानता था कि यह वो मौका है जिसका मैं इंतजार कर रहा था।
“भाभी,” मैंने धीरे से उसका चेहरा उठाया। उसके आंसू पोंछे। “आप रोइए मत।”
उसने मेरी आंखों में देखा। वो देख रही थी कि क्या मैं सच में उसकी मदद कर सकता हूं। और मैंने अपनी आंखों में वही प्यास दिखाई जो उसकी आंखों में थी।
“आलोक जी…” उसने धीरे से कहा, “क्या आप… क्या आप मेरी मदद करेंगे?”
मैंने जवाब नहीं दिया। मैंने बस उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
भाग 2: पहला चुंबन और उतरते कपड़े
जब मैंने तमन्ना के होंठों पर अपने होंठ रखे, तो वो एकदम से कांप उठी। शायद पांच साल बाद कोई उसके होंठों को छू रहा था, कोई उसे चूम रहा था।
मैंने धीरे-धीरे उसके होंठों को चूमना शुरू किया। वो होंठ इतने मुलायम थे, इतने रसीले, जैसे गुलाब की पंखुड़ियां हों। मैंने अपने होंठों से उसके ऊपरी होंठ को चूमा, फिर निचले होंठ को। वो सांस लेने के लिए अपना मुंह खोलती, तो मैं उसकी जीभ को अपने होंठों से पकड़ लेता।
“आह…” उसने हल्की सी आवाज निकाली।
यह उसकी पहली कराह थी, और यह आवाज मेरे कानों में आज भी गूंजती है। वो एक ऐसी आवाज थी जो किसी भी मर्द को पागल बना दे।
मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया। उसका बदन मेरे बदन से सटा हुआ था। मैं महसूस कर सकता था कि उसकी चूचियां मेरे सीने पर दब रही थीं, और मेरा खड़ा हुआ लिंग उसके पेट पर टिका हुआ था।
“आलोक जी…” उसने मेरे कान में धीरे से कहा, “यह गलत है… लेकिन मुझे… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।”
“शhh… कुछ मत बोलो,” मैंने कहा और उसके होंठों पर फिर से अपने होंठ रख दिए।
इस बार मैंने उसकी जीभ को अपने मुंह में खींच लिया। वो एकदम से कांप उठी, उसके शरीर में एक झनझनाहट दौड़ गई। मैंने उसकी जीभ को चूसना शुरू किया, धीरे-धीरे, और वो मेरे मुंह में अपनी जीभ घुमाने लगी।
हमारी जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं, एक-दूसरे को चूम रही थीं, एक-दूसरे को चाट रही थीं। मैंने अपने हाथ उसकी कमर पर रखे, वो कटिली कमर जिसे मैं महीनों से देख रहा था। मैंने उसकी कमर को सहलाना शुरू किया, धीरे-धीरे अपने हाथों को ऊपर की तरफ ले जाते हुए।
जब मेरे हाथ उसकी पीठ पर पहुंचे, तो मैंने महसूस किया कि उसका ब्लाउज कितना पतला था। मैं उसकी त्वचा को अपनी उंगलियों से महसूस कर सकता था, उसकी गर्मी को, उसकी कांपन को।
“आह… ओह…” वो मेरे मुंह से हटकर हल्की-हल्की आवाजें निकालने लगी।
मैंने उसके गले पर चूमना शुरू किया। उसका गला इतना कोमल था, इतना सुंदर, जैसे मखमल हो। मैंने उसके गले पर किस किया, फिर नीचे की तरफ बढ़ा, उसकी कंधे की हड्डी पर, फिर उसके कॉलरबोन पर।
“आह… हां…” उसने सिर पीछे की तरफ झुकाया, मुझे और जगह देने के लिए।
मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके, धीरे-धीरे। पहला बटन खुला, तो उसकी ब्रा का ऊपरी हिस्सा दिखने लगा। वो एक काले रंग की लेस वाली ब्रा थी, जिसमें से उसकी चूचियों का ऊपरी हिस्सा दिख रहा था।
दूसरा बटन खुला, और अब उसकी ब्रा पूरी तरह से दिख रही थी। वो चूचियां कितनी बड़ी थीं, कितनी गोल, और वो ब्रा उन्हें ऊपर की तरफ उठाए हुए थी, जैसे दो पहाड़ हों।
तीसरा बटन खुला, और अब उसका ब्लाउज खुला हुआ था, सिर्फ उसकी ब्रा ही उसकी चूचियों को ढके हुए थी।
मैंने उसके ब्लाउज को उतार दिया। वो अब सिर्फ अपनी ब्रा और पेटीकोट में थी। उसकी त्वचा गोरी, चमकदार, और इतनी मुलायम लग रही थी कि मैं उसे छूने से रह नहीं पाया।
मैंने अपने हाथ उसकी कमर से ऊपर की तरफ बढ़ाए, और उसकी ब्रा को छूने लगा। वो एकदम से कांप उठी।
“प्लीज… धीरे…” उसने कहा।
मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को सहलाना शुरू किया। वो कितनी नरम थीं, कितनी मुलायम, लेकिन साथ में तनी हुई भी। मैंने अपने अंगूठे से उसकी निपल्स को ब्रा के ऊपर से ही सहलाया, और वो “आह” करके कांप उठी।
“यह… यह कितना अच्छा लग रहा है…” उसने धीरे से कहा।
मैंने उसकी ब्रा के पीछे के हुक को खोला। एक क्लिक की आवाज हुई, और उसकी ब्रा खुल गई। मैंने धीरे से उसकी ब्रा को उतारा, और वो सामने खड़ी थी, अपनी नंगी चूचियों के साथ।
उसकी चूचियां देखकर मैं दंग रह गया। वो कितनी सुंदर थीं, कितनी गोल, कितनी बड़ी। उसकी निपल्स गुलाबी रंग की थीं, छोटी-छोटी, लेकिन तनी हुईं। मैंने उन्हें देखते ही अपने हाथों से पकड़ लिया।
“ओह गॉड…” मैंने धीरे से कहा।
मैंने उसकी चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ा, और उन्हें सहलाना शुरू किया। वो कितनी नरम थीं, जैसे दो गेंदे हों जो दबने को तरस रही हों। मैंने उन्हें दबाया, मसला, और फिर उसकी निपल्स को अपनी उंगलियों से घुमाया।
“आह… हां… ओह…” तमन्ना की आवाजें निकलने लगीं।
मैंने एक चूची को अपने मुंह में ले लिया। मैंने उसकी निपल को अपने होंठों से पकड़ा, और चूसना शुरू किया। वो एकदम से ऊपर की तरफ उछल पड़ी, उसके शरीर में एक झटका लगा।
“आह… हां… चूसो… चूसो और…” वो बोलने लगी।
मैंने उसकी निपल को जीभ से चाटना शुरू किया, फिर उसे दांतों से हल्का सा काटा। वो “ओह” करके चिल्लाई, लेकिन उसने मेरे सिर को अपनी चूची पर और दबा दिया, मुझे और चूसने के लिए कह रही थी।
मैं एक चूची को चूस रहा था, और दूसरे हाथ से दूसरी चूची को मसल रहा था। मैं उन्हें बारी-बारी से चूसता, चाटता, काटता, और वो पागलों की तरह कराह रही थी।
“आह… ओह… हां… और तेज… चूसो और तेज…” उसकी आवाजें मेरे कानों में गूंज रही थीं।
मैंने उसकी दूसरी चूची को भी अपने मुंह में ले लिया। अब मैं दोनों चूचियों को बारी-बारी से चूस रहा था, और वो मेरे सिर को अपने सीने पर दबाए हुए थी, मेरे बालों को खींच रही थी।
“बस… बस… अब और नहीं…” वो कांपते हुए कह रही थी, लेकिन मैंने नहीं रुका।
मैंने उसकी चूचियों से नीचे की तरफ चूमना शुरू किया। उसकी नाभि, वो गहरी, सेक्सी नाभि जिसे मैं महीनों से देख रहा था। मैंने उसमें अपनी जीभ डाली, और वो “आह” करके कांप उठी।
“यह… यह क्या कर रहे हो…” उसने पूछा, लेकिन उसकी आवाज में कोई शिकायत नहीं थी, सिर्फ प्यास थी।
मैंने उसके पेटीकोट की नाड़ी को खोलना शुरू किया। वो सफेद रंग का पेटीकोट था, और जब मैंने नाड़ी खोली, तो वो एकदम से ढीला हो गया।
“रुको… रुको…” उसने कहा, “पहले… पहले तुम भी तो…”
मैंने समझ गया। मैंने अपनी टी-शर्ट उतारी, फिर अपनी पैंट। मैं सिर्फ अपनी अंडरवियर में था, और मेरा लिंग उसमें से बाहर निकलने को तरस रहा था, एक तेंदुए की तरह जो पिंजरे में कैद हो।
तमन्ना ने मेरे लिंग को देखा, और उसकी आंखें चौड़ी हो गईं। “यह… यह इतना बड़ा है…” उसने धीरे से कहा।
मैंने अपनी अंडरवियर उतारी, और मेरा लिंग बाहर आ गया। वो करीब 7 इंच लंबा था, और काफी मोटा। तमन्ना उसे देखकर डर भी रही थी और उत्साहित भी।
“क्या… क्या यह दर्द नहीं देगा?” उसने पूछा।
“शुरू में थोड़ा होगा,” मैंने कहा, “लेकिन फिर… फिर तुम्हें मजा आएगा जो तुमने कभी सोचा भी नहीं होगा।”
मैंने उसका पेटीकोट नीचे खींचा, और वो उसके पैरों से अलग हो गया। अब वो सामने खड़ी थी, सिर्फ अपनी पैंटी में, और मैं भी नंगा था।
उसकी पैंटी सफेद रंग की थी, और उसमें से उसकी चूत की खुशबू आ रही थी। वो एक ऐसी खुशबू थी जो किसी भी मर्द को पागल बना दे।
मैंने उसकी पैंटी को भी नीचे खींचा, और वो पूरी तरह से नंगी हो गई।
भाग 3: पहली चुदाई और कराहती आवाजें
जब तमन्ना पूरी तरह से नंगी हुई, तो मैं उसे कुछ पलों के लिए देखता रहा। वो कितनी खूबसूरत थी, कितनी बेमिसाल। उसकी चूचियां गोल और तनी हुई, उसकी कमर पतली जैसे कमरकस्सा बंधा हो, और उसकी चूत… ओह, उसकी चूत।
उसने अपनी चूत पर बाल नहीं रखे थे, वो पूरी तरह से साफ थी। उसकी चूत की दोनों फांकें गुलाबी रंग की थीं, और बीच में उसकी क्लिटोरिस छोटी सी, लेकिन साफ दिख रही थी। उसकी चूत से पानी टपक रहा था, वो इतनी गीली थी।
“तुम… तुम इतनी खूबसूरत हो…” मैंने धीरे से कहा।
मैंने उसे अपनी बांहों में उठाया और बेडरूम की तरफ ले जाने लगा। वो मुझे चूम रही थी, मेरे गले पर, मेरे कंधों पर, मेरे सीने पर।
जब हम बेडरूम में पहुंचे, तो मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। वो पीठ के बल लेटी हुई थी, और उसकी चूचियां ऊपर की तरफ उठी हुई थीं। मैं उसके ऊपर लेट गया, और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
हम एक-दूसरे को पागलों की तरह चूम रहे थे। मेरा लिंग उसकी चूत पर रगड़ रहा था, और वो “आह… ओह…” की आवाजें निकाल रही थी।
“प्लीज… अब डाल दो…” उसने कहा, “मुझसे… मुझसे और इंतजार नहीं हो रहा…”
मैंने अपने लिंग को अपने हाथ में लिया, और उसकी चूत के मुंह पर रखा। वो इतनी गीली थी कि मेरा लिंग उसमें आसानी से घुस सकता था, लेकिन मैंने धीरे-धीरे आगे बढ़ाया।
“आह…” उसने दर्द से आवाज निकाली।
मैंने रुक गया। “दर्द हो रहा है?” मैंने पूछा।
“हां… थोड़ा… लेकिन… लेकिन चलो…” उसने कहा।
मैंने थोड़ा और आगे बढ़ाया। मेरा लिंग उसकी चूत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर जा रहा था। वो कसी हुई थी, इतनी टाइट कि मुझे लगा जैसे मैं किसी कुंवारी लड़की को चोद रहा हूं।
“आह… ओह… बहुत बड़ा है…” वो कह रही थी, “धीरे… धीरे करो…”
मैंने आधा लिंग अंदर डाल दिया, और फिर थोड़ी देर के लिए रुक गया, उसे समायोजित होने का मौका दिया। उसकी सांसें तेज चल रही थीं, और उसकी आंखें बंद थीं।
“ठीक है?” मैंने पूछा।
“हां… अब… अब पूरा डाल दो…” उसने कहा।
मैंने एक धक्का दिया, और मेरा पूरा लिंग उसकी चूत में समा गया। वो “आहhhhhh” करके चिल्लाई, और उसके शरीर में एक झनझनाहट दौड़ गई।
मैंने उसके होंठों को फिर से चूमना शुरू किया, और धीरे-धीरे अपने लिंग को अंदर-बाहर करना शुरू किया। शुरू में धीरे-धीरे, फिर थोड़ा तेज।
“आह… ओह… हां… यह… यह बहुत अच्छा लग रहा है…” उसने कहना शुरू किया।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई। अब मैं उसे तेजी से चोद रहा था, मेरा लिंग उसकी चूत में आगे-पीछे हो रहा था, और आवाजें आ रही थीं “पच… पच… पच…”
“आह… हां… और तेज… चोदो मुझे… चोदो…” तमन्ना पागल हो रही थी।
उसने अपने पैरों को मेरी कमर के पीछे बांध लिया, और मुझे और अंदर खींच रही थी। मैं भी पूरी तरह से उसमें समा जाना चाहता था, उसकी गहराइयों तक पहुंचना चाहता था।
“ओह… गॉड… यह… यह क्या हो रहा है…” वो चिल्ला रही थी, “मुझे… मुझे कुछ होने वाला है…”
मैंने समझ लिया कि वो ऑर्गेज्म की तरफ बढ़ रही है। मैंने और तेजी से चोदना शुरू किया, मेरे लिंग से उसकी चूत की दीवारें रगड़ खा रही थीं, और वो पागलों की तरह चीख रही थी।
“आह… ओह… हां… आ रहा है… आ रहा है…” वो चिल्लाई, और फिर एकदम से उसका शरीर कांपने लगा, उसकी चूत ने मेरे लिंग को जोर से पकड़ लिया, और वो झड़ गई।
उसका पानी मेरे लिंग पर गिरा, गर्म, गाढ़ा। मैंने उसे झड़ते हुए देखा, उसका चेहरा लाल हो गया था, उसकी आंखें बंद थीं, और वो “आह… आह…” की आवाजें निकाल रही थी।
मैंने नहीं रुका। मैंने उसे चोदना जारी रखा, और कुछ ही देर में मुझे भी महसूस हुआ कि मैं झड़ने वाला हूं।
“मैं… मैं झड़ने वाला हूं…” मैंने कहा।
“अंदर… अंदर ही छोड़ दो…” उसने कहा, “मुझे… मुझे तुम्हारा सब कुछ चाहिए…”
मैंने एक आखिरी जोरदार धक्का दिया, और मेरा वीर्य उसकी चूत में उतर गया। गर्म, गाढ़ा, और बहुत सारा। मैंने उसे अपने अंदर भर दिया, और वो मुझे कसकर पकड़े हुए थी।
हम दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे, पसीने में लथपथ, सांसें तेज चल रही थीं। मैंने उसके होंठों पर एक हल्का सा किस किया।
“कैसा लगा?” मैंने पूछा।
उसने अपनी आंखें खोलीं, और मुझे देखा। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन यह खुशी के आंसू थे।
“यह… यह स्वर्ग था,” उसने धीरे से कहा, “मैंने… मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह इतना अच्छा हो सकता है…”
मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया, और हम दोनों वहीं सो गए।
भाग 4: दूसरी बार और नई-नई चीजें
जब मैं जागा, तो रात हो चुकी थी। तमन्ना मेरे बगल में लेटी हुई थी, और वो मुझे देख रही थी।
“कब जागी?” मैंने पूछा।
“अभी-अभी,” उसने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम बहुत प्यारे सोते हो।”
मैंने उसके होंठों पर किस किया। उसकी चूचियां बाहर थीं, और मैंने एक को अपने हाथ में ले लिया।
“फिर से?” उसने पूछा, उसकी आंखों में एक शरारती चमक थी।
“क्या तुम्हें फिर से चाहिए?” मैंने पूछा।
“हां…” उसने शर्माते हुए कहा, “पांच साल की भूख है… एक बार से कैसे मिटेगी?”
मैंने उसे ऊपर की तरफ खींचा, और वो मेरे ऊपर आ गई। अब वो मेरे ऊपर बैठी हुई थी, उसकी चूचियां मेरे सामने थीं, और मैं उन्हें चूसने लगा।
“आह…” उसने आवाज निकाली, और अपनी चूत को मेरे लिंग पर रगड़ने लगी।
मेरा लिंग फिर से खड़ा हो गया था, और वो उसे अपने हाथ में लेकर अपनी चूत पर रखने लगी।
“इस बार… इस बार मैं ऊपर रहूंगी,” उसने कहा।
मैंने समझ गया। वो काउगर्ल पोजीशन में चोदना चाहती थी। मैंने हां में सिर हिलाया।
वो धीरे-धीरे नीचे बैठी, और मेरा लिंग उसकी चूत में समा गया। इस बार वो ज्यादा गीली थी, और मेरा लिंग आसानी से अंदर चला गया।
“ओह…” उसने गहरी सांस ली, और फिर अपने कूल्हों को हिलाना शुरू किया।
वो ऊपर-नीचे हो रही थी, और मैं नीचे से उसे धक्के दे रहा था। उसकी चूचियां उछल रही थीं, और मैं उन्हें पकड़कर मसल रहा था।
“आह… हां… यह… यह बहुत गहरा जा रहा है…” वो कह रही थी।
वो अपनी स्पीड बढ़ा रही थी, और मैं भी नीचे से और जोर से धक्के दे रहा था। हमारी आवाजें कमरे में गूंज रही थीं, “पच… पच… आह… ओह…”
“चोदो मुझे… चोदो…” वो चिल्ला रही थी, “मैं… मैं फिर से झड़ने वाली हूं…”
मैंने उसकी क्लिटोरिस को अपनी उंगली से सहलाना शुरू किया, और वो एकदम से ऊपर की तरफ उछल पड़ी।
“आहhhhhh” वो चिल्लाई, और झड़ गई।
लेकिन मैंने नहीं रुका। मैंने उसे पलट दिया, और अब वो पेट के बल लेट गई। मैंने उसके पीछे से उसकी चूत में अपना लिंग डाला, और तेजी से चोदना शुरू किया।
“ओह… यह… यह पोजीशन…” वो कह रही थी, “यह… यह बहुत गहरा है…”
मैं उसके कूल्हों को पकड़कर जोर-जोर से धक्के दे रहा था, और वो चीख रही थी, “आह… हां… और तेज… फाड़ दो मेरी चूत…”
मैंने उसके बाल पकड़े, और उसका सिर पीछे की तरफ खींचा। वो एकदम से ऊपर उठी, और मैंने उसकी पीठ पर चूमना शुरू किया, फिर उसके कंधे, फिर उसके गाल।
“मैं… मैं फिर से झड़ने वाला हूं…” मैंने कहा।
“अंदर… अंदर छोड़ दो…” वो कह रही थी।
मैंने जोर से धक्का दिया, और मेरा वीर्य उसकी चूत में फिर से भर गया। वो भी उसी वक्त झड़ गई, और हम दोनों एक-दूसरे से चिपककर गिर गए।
भाग 5: रोजाना की चुदाई और नए-नए तरीके
उस दिन के बाद, तमन्ना और मेरी रोजाना मुलाकात होने लगी। रोहित सुबह 9 बजे ऑफिस चले जाते, और 7-8 बजे तक लौटते। इस बीच के समय में हम एक-दूसरे को चोदते।
हम हर जगह चोदते – मेरे फ्लैट में, उसके फ्लैट में, कभी-कभी बाथरूम में, कभी-कभी किचन में। हम हर पोजीशन में चोदते – मिशनरी, डॉगी स्टाइल, काउगर्ल, रिवर्स काउगर्ल, स्टैंडिंग, सिटिंग।
तमन्ना सीखने में बहुत तेज थी। वो जानना चाहती थी कि और क्या-क्या किया जा सकता है, और मैंने उसे सब कुछ सिखाया।
एक दिन मैंने उसे ब्लोजॉब करने के लिए कहा। वो शुरू में हिचकिचाई, लेकिन फिर मान गई।
वो मेरे लिंग के सामने बैठी, और उसे अपने हाथ में लिया। फिर उसने धीरे से अपने होंठों से मेरे सुपाड़े को चूमना शुरू किया।
“आह…” मैंने आवाज निकाली।
उसने अपनी जीभ निकाली, और मेरे सुपाड़े को चाटना शुरू किया। फिर उसने धीरे से मेरा लिंग अपने मुंह में ले लिया।
वो उसे चूसने लगी, धीरे-धीरे, फिर थोड़ा तेज। मैं उसके बालों को पकड़कर उसके सिर को आगे-पीछे करने लगा।
“आह… हां… और तेज चूसो…” मैंने कहा।
वो और तेज चूसने लगी, और मैंने महसूस किया कि मैं झड़ने वाला हूं।
“रुको… रुको…” मैंने कहा, “मैं… मैं झड़ने वाला हूं…”
उसने नहीं रुका। उसने और तेज चूसना जारी रखा, और मैंने अपना सारा वीर्य उसके मुंह में छोड़ दिया।
वो उसे पी गई, हर एक बूंद, और फिर मुझे देखकर मुस्कुराई।
“कैसा लगा?” उसने पूछा।
“बहुत अच्छा,” मैंने कहा, और उसे अपनी बांहों में भर लिया।
एक और दिन, मैंने उसे 69 पोजीशन में चोदा। वो मेरे ऊपर लेटी हुई थी, अपनी चूत मेरे मुंह के पास, और वो मेरा लिंग चूस रही थी।
मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया, उसकी क्लिटोरिस को अपनी जीभ से सहलाया, और वो “आह… ओह…” की आवाजें निकालते हुए मेरा लिंग चूस रही थी।
हम दोनों एक-दूसरे को मजा दे रहे थे, और जल्द ही हम दोनों एक साथ झड़ गए।
भाग 6: पेटीकोट और ब्लाउज में खास मुलाकात
एक दिन, जब मैं ऑफिस से लौटा, तो तमन्ना मेरे दरवाजे पर खड़ी थी। उसने हल्के हरे रंग का पेटीकोट और ब्लाउज पहना हुआ था, और वो इतनी खूबसूरत लग रही थी कि मैं उसे देखता ही रह गया।
“क्या हुआ?” मैंने पूछा।
“कुछ नहीं,” उसने मुस्कुराते हुए कहा, “बस… बस तुमसे मिलने का मन किया।”
मैंने उसे अंदर खींचा, और दरवाजा बंद कर दिया। मैंने उसे दीवार से लगा दिया, और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
“आह…” उसने आवाज निकाली।
मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके, और उसकी ब्रा दिखने लगी। वो आज एक लाल रंग की लेस वाली ब्रा पहने हुए थी, जो उसकी गोरी त्वचा पर बहुत सुंदर लग रही थी।
मैंने उसकी ब्रा उतारी, और उसकी चूचियों को पकड़कर मसलने लगा। वो “आह… ओह…” की आवाजें निकाल रही थी, और मैं उसके होंठों को चूम रहा था।
“पेटीकोट… पेटीकोट भी उतार दो…” उसने कहा।
मैंने उसकी पेटीकोट की नाड़ी खोली, और वो नीचे गिर गई। अब वो सिर्फ अपनी पैंटी में थी, और मैंने उसे गोद में उठा लिया।
मैं उसे बेडरूम में ले गया, और बिस्तर पर गिरा दिया। मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी, और उसकी चूत को चाटना शुरू किया।
“आह… हां… चाटो… चाटो मेरी चूत…” वो चिल्ला रही थी।
मैंने उसकी क्लिटोरिस को अपने होंठों से पकड़ा, और चूसना शुरू किया। वो पागल हो रही थी, उसके शरीर में कंपन हो रहा था।
“ओह… गॉड… यह… यह बहुत अच्छा है…” वो कह रही थी, “मैं… मैं झड़ने वाली हूं…”
मैंने और तेज चूसना जारी रखा, और वो एकदम से ऊपर उठी, और झड़ गई। उसका पानी मेरे मुंह में आ गया, और मैंने उसे पी लिया।
“अब… अब तुम्हारी बारी…” उसने कहा, और मेरा लिंग अपने मुंह में ले लिया।
वो उसे चूसने लगी, और फिर मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। वो मेरे ऊपर बैठी, और मेरा लिंग अपनी चूत में ले लिया।
“आह…” हम दोनों ने एक साथ आवाज निकाली।
वो ऊपर-नीचे होने लगी, और मैं उसकी चूचियों को पकड़कर मसल रहा था। वो तेजी से उछल रही थी, और मैं नीचे से धक्के दे रहा था।
“चोदो मुझे… चोदो…” वो चिल्ला रही थी, “मैं… मैं तुम्हारी हूं… मुझे… मुझे अपना बना लो…”
मैंने उसे पलट दिया, और अब मैं ऊपर था। मैंने उसके पैरों को ऊपर उठाया, और जोर-जोर से धक्के देने लगा।
“आह… ओह… हां… और तेज… फाड़ दो…” वो चीख रही थी।
मैंने उसे बहुत तेजी से चोदा, और फिर मैंने अपना वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया। वो भी झड़ गई, और हम दोनों एक-दूसरे से चिपककर लेट गए।
भाग 7: खतरे का खेल और और भी मजा
अब हमारी चुदाई एक रूटीन बन गई थी, लेकिन हम खतरे का खेल भी खेलने लगे थे। कभी-कभी जब रोहित घर पर होते, तो भी हम एक-दूसरे को इशारे करते, या बालकनी में छोटी-छोटी मुलाकातें करते।
एक दिन, रोहित घर पर ही थे, और तमन्ना ने मुझे मैसेज किया, “आ जाओ, वो सो रहे हैं।”
मैं उनके फ्लैट में गया, और तमन्ना ने मुझे बेडरूम में खींच लिया। रोहित बगल के कमरे में सो रहे थे, और हम यहां चुदाई कर रहे थे।
वो मुझे बहुत तेजी से चूस रही थी, और मैं उसकी चूत को चाट रहा था। हम दोनों आवाजें निकाल रहे थे, लेकिन दबी हुई आवाजें, “आह… ओह…”
फिर मैंने उसे पलटा, और उसकी चूत में अपना लिंग डाल दिया। मैं धीरे-धीरे चोद रहा था, ताकि ज्यादा आवाज न हो, लेकिन वो मुझे और तेज करने के लिए कह रही थी।
“और तेज… और तेज…” वो धीरे से कह रही थी।
मैंने थोड़ा तेज किया, और वो “आह…” करके कांप उठी।
हम दोनों झड़ गए, और फिर मैं वहां से निकल गया।
भाग 8: अलग-अलग जगहों पर चुदाई
हमने अलग-अलग जगहों पर चुदाई करने की कोशिश की। एक दिन हम बाथरूम में गए, और शावर के नीचे चोदा।
पानी की बूंदें हम पर गिर रही थीं, और मैं उसे दीवार से लगाकर चोद रहा था। वो “आह… ओह…” की आवाजें निकाल रही थी, और पानी की आवाजें उसकी आवाजों को ढक रही थीं।
“यह… यह बहुत मजा आ रहा है…” वो कह रही थी।
एक और दिन, हमने किचन में चुदाई की। वो काउंटर पर बैठी हुई थी, और मैं उसके बीच में खड़ा होकर उसे चोद रहा था।
“आह… हां… चोदो…” वो चिल्ला रही थी, “मुझे… मुझे और चाहिए…”
मैंने उसे बहुत तेजी से चोदा, और फिर हम दोनों झड़ गए।
भाग 9: रात भर की चुदाई
एक दिन रोहित को काम से बाहर जाना पड़ा, दो दिन के लिए। तमन्ना ने मुझे मैसेज किया, “आज रात मेरे यहां रुक जाओ।”
मैं रात को उसके फ्लैट में गया, और हमने पूरी रात चुदाई की। हम सोए नहीं, बस चोदते रहे।
हमने हर पोजीशन में चोदा, हर तरीके से। मैंने उसकी चूत को चाटा, उसकी गांड को सहलाया, उसके मुंह में अपना लिंग डाला, और वो भी मुझे हर तरह से मजा दे रही थी।
“आह… ओह… हां… और तेज…” वो रात भर यही कहती रही।
हम दस बार झड़े उस रात, और सुबह जब मैं निकला, तो वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी।
“यह… यह बहुत अच्छा था,” उसने कहा।
भाग 10: लंबी कहानी का अंत नहीं
यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। तमन्ना और मैं आज भी एक-दूसरे को चोदते हैं, जब भी मौका मिलता है। उसकी प्यास अब कम हो गई है, लेकिन अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है।
वो अब और भी खूबसूरत लगती है, और हमारी चुदाई और भी मजेदार हो गई है। हमने नए-नए तरीके सीखे हैं, नई-नई जगहों पर चुदाई की है, और हमारा यह सिलसिला जारी है।
रोहित को अब भी नहीं पता कि उसकी पत्नी हर रोज मेरे साथ चुदती है, और वो शायद कभी नहीं जान पाएगा। लेकिन तमन्ना खुश है, और मैं भी खुश हूं।
यह थी हमारी कहानी, एक पड़ोसन की अधूरी जवानी की प्यास, और मेरे लिंड ने उसकी प्यास बुझाई।
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