
मेरी मुस्लिम कज़िन की चूत
मेरा नाम राम है और मैं आज आपको अपनी जिंदगी की सबसे रोमांचक, सबसे यादगार और सबसे गर्म कहानी सुनाने जा रहा हूँ। यह कहानी उस समय की है जब मैं स्कूल में पढ़ता था और जवानी की दहलीज पर खड़ा था, जब मेरे शरीर में हरकतें आ रही थीं और मन हर समय कुछ अलग सा सोचता रहता था। मैं एक गोरा, आकर्षक और हाइट में लंबा लड़का था, मेरी हाइट पाँच फुट दस इंच थी और मेरा बदन एथलेटिक बन चुका था। मेरे गाँव का घर बिहार के एक छोटे से जिले में था, जहाँ हमारा एक पुराना सा बड़ा घर था जिसमें दादा-दादी और पापा रहते थे। मेरी माँ अक्सर पटना में रहती थीं क्योंकि वहाँ मेरी पढ़ाई का इंतजाम था, लेकिन छुट्टियों में मैं गाँव आ जाता था। दिन के समय पापा ऑफिस चले जाते और घर में सिर्फ बुजुर्ग दादा-दादी रहते जो अपने कमरे में ही रहते थे। मेरी मुस्लिम कज़िन की चूत ।
मेरी फुआ का नाम रहीमन था और उनकी शादी पास के ही गाँव में एक मुस्लिम परिवार में हुई थी। फुआ की एक बेटी थी जिसका नाम सुंदरी था, और यह नाम उस पर बिल्कुल फिट बैठता था क्योंकि वह सचमुच बहुत सुंदर थी। सुंदरी उम्र में मुझसे दो साल बड़ी थी लेकिन हम दोनों की उम्र लगभग एक जैसी ही थी। बचपन से ही सुंदरी मुझे बहुत पसंद करती थी, जब भी वह हमारे घर आती, मेरे पीछे-पीछे घूमती रहती और मुझसे हर समय बातें करती रहती। वह अक्सर मुझसे पूछती, “राम, तुमसे शादी करोगे? मुझे अपनी दुल्हन बनाओगे?” मैं उस समय छोटा था और समझता नहीं था कि यह प्यार की शुरुआत है, मुझे लगता था कि यह बस बचपन की शरारत है।
साल बीतते गए और हम दोनों बड़े होने लगे। सुंदरी का बदन फूलने लगा था, उसके चूचे उभर आए थे और गाँड का आकार भी बदलने लगा था। वह अब एक खूबसूरत जवान लड़की बन चुकी थी जिसे देखकर कोई भी मर्द उसकी तरफ आकर्षित हो जाता। उसका रंग गोरा था और आँखें बड़ी-बड़ी काली, जिनमें काजल लगाने की कोई जरूरत नहीं होती थी। उसके बाल लंबे और काले थे जो उसकी पीठ तक आते थे। उसका फिगर लगभग छत्ती-चौंतीस-अड़तीस का था, बिल्कुल परफेक्ट जिसे देखकर कोई भी मर्द उसे चोदने का ख्याल सोच बैठे। उसके चूचे गोल और उभरे हुए थे, किसी भी ब्रा के बिना भी वह बहुत सेक्सी दिखती थी। उसकी गाँड भी बड़ी और गोल थी, जिसे देखकर मेरा लंड अक्सर खड़ा हो जाता था। मेरी मुस्लिम कज़िन की चूत
मैं भी अब जवान हो चुका था। मेरी हाइट पाँच फुट दस इंच हो गई थी और बदन भी अच्छा बन गया था। मेरी छाती चौड़ी हो गई थी और पेट एकदम फिट था। लड़कियाँ मुझे देखती रहती थीं, स्कूल में भी कई लड़कियाँ मुझे पसंद करती थीं। लेकिन मेरे मन में सिर्फ सुंदरी का ख्याल आता था। मैं जब भी उसे देखता, उसके गोल-गोल चूचों को देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता। उसकी उभरी हुई गाँड देखकर मैं सोचता कि काश एक बार इसे चोदने को मिल जाए। मैंने अभी-अभी सेक्स के बारे में कुछ-कुछ सुना था, स्कूल के लड़कों से और कुछ बुक्स पढ़कर। मुझे पता था कि लंड को चूत में डालते हैं और वह मजा आता है, लेकिन अभी तक मैंने कभी किसी लड़की को नहीं चोदा था।
एक बार की बात है, गर्मियों की छुट्टियाँ थीं और मैं गाँव आया हुआ था। फुआ के घर पर कुछ काम चल रहा था, घर में तोड़फोड़ और मरम्मत का काम था क्योंकि बरसात आने वाली थी और छत टपकती थी। मेरे पापा ने मुझे फुआ के घर भेज दिया कि उनकी मदद कर आऊँ, कुछ भारी सामान उठाने में मदद करनी थी। मैं शाम को फुआ के घर पहुँचा, सूरज डूबने ही वाला था और आसमान में लाली छाई हुई थी। मेरी मुस्लिम कज़िन की चूत
फुआ का घर एक पुराने ढंग का बड़ा घर था, जो उनके पुरखों का था। नीचे दो कमरे और ऊपर एक छोटा सा अटारी जैसा कमरा था जो कभी-कभी मेहमानों के लिए इस्तेमाल होता था। काम चलने के कारण नीचे के कमरों में सामान बिखरा पड़ा था और रात को सोने की जगह नहीं थी। मैंने फुआ से कहा कि मैं वापस चला जाऊँगा लेकिन फुआ ने मना कर दिया और कहा कि रात हो गई है, सुबह जाना।
रात को खाना खाने के बाद, फुआ ने मुझसे कहा, “राम बेटा, आज तुम ऊपर वाले कमरे में सो जाना। वहाँ बिस्तर लगा हुआ है और पंखा भी है। नीचे तो सामान पड़ा है और मजदूर भी सो रहे हैं।” मैंने कहा ठीक है और ऊपर चला गया। ऊपर वाला कमरा छोटा सा था लेकिन साफ-सुथरा था। एक बड़ा बिस्तर था, एक पुराना अलमारी थी और एक खिड़की से थोड़ी रोशनी आ रही थी।
मैंने अपना बैग रखा और बिस्तर पर बैठ गया। तभी सीढ़ियों से आवाज़ आई और सुंदरी ऊपर आई। वह अब बड़ी हो गई थी और उसने हल्का गुलाबी रंग का सूट पहना हुआ था जो उसके गोरे रंग पर बहुत अच्छा लग रहा था। उसके बाल खुले थे और गीले लग रहे थे, शायद अभी नहाकर आई थी। वह कहने लगी, “नीचे मम्मी-पापा सो रहे हैं और मुझे भी ऊपर ही सोना है क्योंकि नीचे जगह नहीं है। तुम एक तरफ सो जाना, मैं दूसरी तरफ सो लूँगी। दीवार की तरफ मैं सोऊँगी, तुम बाहर की तरफ सोना।” मैंने कहा ठीक है कोई बात नहीं, हम दोनों भाई-बहन हैं तो कोई परेशानी नहीं। मेरी मुस्लिम कज़िन की चूत
कमरे में एक ही बिस्तर था जो कि बड़ा था, करीब छह फुट चौड़ा। हम दोनों ने अपने-अपने कपड़े बदले। मैंने शर्ट उतारी और लोअर पहन लिया, ऊपर से केवल बनियान थी। सुंदरी ने भी सलवार-कमीज पहनी हुई थी लेकिन वह कमरे के कोने में जाकर अपना दुपट्टा उतारा और फिर बिस्तर पर आई। उसने कहा कि वह बहुत थकी हुई है और सोना चाहती है। हम दोनों बिस्तर पर लेट गए, मैं एक तरफ और वह दूसरी तरफ। बीच में करीब एक फुट का गैप था। कमरे में अँधेरा था, सिर्फ खिड़की से थोड़ी चाँदनी आ रही थी जो सुंदरी के चेहरे पर पड़ रही थी और वह और भी खूबसूरत लग रही थी।
सुंदरी का फिगर बिल्कुल परफेक्ट था, जैसे किसी मूर्तिकार ने ध्यान से तराशा हो। उसकी कमीज हल्की और चिपचिपी थी, जो उसके गोल और उभरे हुए चूचों को बिल्कुल साफ़ दिखा रही थी। उसके बूब्स का साइज़ लगभग 36 इंच का था, पूरी तरह से कसे हुए और उभरे हुए, जैसे दो गोल संतरे हों जो किसी भी पल कमीज फाड़कर बाहर आने को बेताब हों। उसकी कमर बहुत पतली और टाइट थी, लगभग 24 इंच की, जो उसके चूचों और गाँड के बीच एकदम सही तरह से मुड़ी हुई थी।
जब वह दुपट्टा उतारकर बिस्तर पर आई, तो उसकी कमर का हल्का हिलना मेरे दिल को धड़का रहा था। उसकी सलवार उसकी गोल और भारी गाँड को बिल्कुल फिट बैठी हुई थी, जिसका साइज़ लगभग 38 इंच का था। उसकी गाँड एकदम उभरी हुई और टाइट थी, जैसे दो गोल गुब्बारे हों जो हर कदम पर मचलते हुए लग रहे थे। चाँदनी उसके चेहरे पर तो पड़ ही रही थी, लेकिन जब वह लेटी, तो वह रोशनी उसके गले से होती हुई उसके चूचों पर पड़ी और वह एकदम चमक उठे।
मुझे जल्दी नींद लग गई क्योंकि मैं दिन भर मेहनत करके आया था। मैं गहरी नींद में सो रहा था। रात को करीब दो बजे, मुझे अजीब सा महसूस हुआ। ऐसा लगा जैसे कोई मेरे लंड पर कुछ रगड़ रहा है, कोई नरम और गर्म चीज़। मैंने आँखें खोलीं तो देखा कि सुंदरी मेरी तरफ मुँह करके लेटी है और अपनी चूत मेरे लंड पर रगड़ने की कोशिश कर रही है। मेरा लंड उसकी चूत की गर्मी महसूस करके धीरे-धीरे खड़ा होने लगा था। मेरी मुस्लिम कज़िन की चूत
मैंने देखा कि सुंदरी ने अपनी सलवार का नाड़ा खोल रखा था और उसका हाथ अपनी चूत के पास था। वह धीरे-धीरे अपनी चूत को मेरे लंड से सहला रही थी। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था और उसकी चूत की गर्मी महसूस कर रहा था। मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूँ, मैं डर गया था लेकिन मजा भी आ रहा था। मैंने आँखें बंद कर लीं और सोने का नाटक करने लगा। लेकिन मेरा लंड बेताब हो रहा था और पूरा खड़ा हो गया था। सुंदरी धीरे-धीरे अपनी चूत मेरे लंड पर रगड़ रही थी और उसकी साँसें तेज हो रही थीं। वह धीरे-धीरे आहें भर रही थी।
अचानक मुझे लगा कि मैं पानी छोड़ने वाला हूँ। मैं डर गया कि कहीं पानी निकलकर सुंदरी को पता न चल जाए कि मैं जाग रहा हूँ। मैंने हिम्मत करके उठकर कहा, “मुझे टॉयलेट जाना है।” सुंदरी डर के मारे एकदम पीठ के बल लेट गई और कुछ नहीं बोली, उसका चेहरा लाल हो गया था शायद। मैं उठकर टॉयलेट चला गया। वहाँ जाकर मैंने अपना लंड हिलाया और पानी निकाला। फिर मैं वापस आया और दूसरी तरफ मुँह करके सो गया। सुंदरी भी शांत हो गई थी और वह भी सोने का नाटक करने लगी। उस रात कुछ नहीं हुआ लेकिन मेरे मन में अब उसके लिए अलग तरह की भावनाएँ आने लगी थीं। मेरी मुस्लिम कज़िन की चूत
सुबह हम दोनों उठे तो सुंदरी शर्मा रही थी और मुझसे आँख नहीं मिला पा रही थी। उसने नाश्ता बनाया और हम दोनों मेरे घर चले आए। रास्ते में हम दोनों चुप थे, कोई बात नहीं कर रहा था। लेकिन मेरे मन में अब उसे चोदने की इच्छा जाग उठी थी। मैं सोच रहा था कि वह भी यही चाहती है, तभी तो रात को वैसे कर रही थी।
मेरे घर आने के बाद, सुंदरी ने मुझसे कहा, “राम, तुम्हारे घर में तो अभी कोई नहीं है। मैं आज रात यहीं रुकूँगी। मम्मी-पापा को मैंने बता दिया है कि मैं यहीं रुकूँगी।” मैंने कहा ठीक है रुक जाओ। दरअसल मेरे मन में भी अब उसके साथ कुछ करने की इच्छा थी और मैं यह जानना चाहता था कि वह आगे क्या करती है।
रात को खाना खाने के बाद, हम दोनों फिर से एक साथ सोने वाले थे। इस बार मेरे घर का कमरा थोड़ा अलग था, यह एक छोटा सा कमरा था जिसमें एक बिस्तर था और दीवारें पतली थीं। रात को खाना खाने के बाद, सुंदरी ने कहा, “आज मैं दीवार की तरफ सोऊँगी, तुम बाहर की तरफ सोना।” मैंने कहा ठीक है। हम दोनों बिस्तर पर लेट गए। मैंने शर्ट उतार दी और शॉर्ट्स पहन लिया। सुंदरी ने भी अपनी सलवार उतारी और केवल कमीज और पैंटी में आकर बिस्तर पर लेट गई। उसकी कमीज हल्की थी और उसके चूचों का आकार साफ दिख रहा था। मेरी मुस्लिम कज़िन की चूत
मुझे फिर से नींद आ गई लेकिन आज मैं थोड़ा हल्की नींद में था क्योंकि मैं जानबूझकर जाग रहा था। रात को करीब एक बजे, मुझे फिर वही अहसास हुआ। कुछ गर्म और नरम चीज़ मेरे लंड पर रगड़ रही थी। मैंने आँखें खोलीं तो देखा कि सुंदरी ने अपनी कमीज भी उतार दी थी और वह केवल ब्रा और पैंटी में थी। उसने मेरा मुँह अपने चूचों में दबा रखा था और अपनी चूत मेरे लंड पर रगड़ रही थी। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था और उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। वह धीरे-धीरे आवाज़ें निकाल रही थी, “आह… उह… हम्म…”
मैं समझ गया कि वह जाग रही है और जानबूझकर यह सब कर रही है। मैंने हिम्मत करके अपना हाथ उसकी पीठ पर रख दिया। वह एकदम से रुक गई लेकिन फिर शांत हो गई और मेरे हाथ को वहाँ ही रहने दिया। मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी गाँड पर फेरना शुरू किया। उसकी गाँड बहुत मुलायम और गोल थी, एकदम टाइट। मैं उसे सहलाने लगा और दबाने लगा। वह मेरे लंड पर और ज़ोर से रगड़ने लगी और उसकी साँसें और तेज हो गईं। मेरी मुस्लिम कज़िन की चूत
मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। उसके चूचे आज़ाद हो गए, वह कसे हुए और गोल थे, गुलाबी निप्पल थे जो कड़े हो गए थे। मैंने एक चूची को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। वह “आह… हाँ… और चूसो… मजा आ रहा है…” कहने लगी। मैं दूसरे चूचे को हाथ से मसलने लगा। मैं उन्हें चाट रहा था और हल्के से काट भी रहा था। वह मदहोश हो रही थी और मेरे सिर को अपने चूचों पर दबा रही थी।
फिर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल दिया। उसकी चूत गीली थी और गर्म। उसने झाँट साफ किए हुए थे, केवल थोड़े से बाल थे जो बहुत सॉफ्ट थे। मैंने उसकी चूत में उंगली डाली तो वह एकदम से कांप उठी। “आह… राम… धीरे… पहली बार कोई हाथ लगा रहा है…” वह कहने लगी। मैं समझ गया कि वह अभी कुंवारी थी और किसी ने उसे नहीं छुआ था। मैं उसकी चूत में उंगली करने लगा, धीरे-धीरे अंदर-बाहर कर रहा था। वह पागल हो रही थी और आवाज़ें निकाल रही थी।
उसकी चूत से रस निकल रहा था जो मेरे हाथ पर लग रहा था। मैंने उंगली तेज़ कर दी और उसकी चूत की दीवारों को चिकना कर दिया। वह “आह… हाँ… और तेज़… मैं झरने वाली हूँ… राम… और तेज़ करो…” कहने लगी। कुछ ही देर में वह झड़ गई। उसकी चूत से पानी निकलकर मेरे हाथ पर आ गया और उसका पूरा शरीर कांपने लगा। वह थककर मेरे ऊपर ही गिर गई और मेरे छाती पर साँसें लेने लगी।
कुछ देर बाद वह उठी और टॉयलेट चली गई। वापस आकर उसने कहा, “राम, मुझे बहुत मज़ा आया। लेकिन अभी तुमने अपना लंड मेरी चूत में नहीं डाला। मैं तुम्हारा लंड अपनी चूत में महसूस करना चाहती हूँ।” मैंने कहा, “कल डालूँगा जब हम फुआ के घर जाएँगे। आज तो तुम झड़ चुकी हो और अभी हिम्मत नहीं है। वहाँ एक अलग माहौल होगा।” वह मुस्कुराई और मेरे पास आकर लेट गई। इस बार वह मुझसे लिपटकर सोई और मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़कर रखा। उस रात हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे से लिपटकर सोए।
उसके बाद मैं पटना चला गया। वहाँ मेरी पढ़ाई चल रही थी। एक साल तक मैं घर नहीं आया। सुंदरी से कोई संपर्क नहीं हुआ लेकिन मेरे मन में उसकी यादें ताज़ा थीं। मैं अक्सर रात को हस्तमैथुन करते समय उसी का ख्याल करता था। मैं सोचता था कि काश वह मेरे साथ होती और मैं उसे चोद पाता। मेरी मुस्लिम कज़िन की चूत
एक साल बाद जब मैं घर आया, तो देखा कि सुंदरी मेरे घर आई हुई है। मेरी माँ पटना में थीं और पापा दिन में ऑफिस चले जाते थे। दादा-दादी अपने कमरे में रहते थे। सुंदरी ने मुझे देखते ही कहा, “राम, तुम आ गए! मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी।” मैंने पूछा, “क्यों? क्या काम था?” वह शर्मा गई और बोली, “वही काम जो अधूरा रह गया था। मुझे पूरा करना है।” मैं समझ गया कि वह क्या कहना चाह रही है।
रात को खाना खाने के बाद, सुंदरी ने कहा, “आज मैं यहीं रुकूँगी। तुम्हारी माँ ने कहा है कि मैं तुम्हारे साथ ही सोऊँगी क्योंकि और कोई जगह नहीं है।” मैंने कहा, “ठीक है।” रात को हम दोनों कमरे में चले गए। इस बार सुंदरी ने सीधे अपने कपड़े उतार दिए। वह केवल ब्रा और पैंटी में थी। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और केवल अंडरवियर में रह गया। मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो रहा था और अंडरवियर में से उसका आकार साफ दिख रहा था।
हम दोनों बिस्तर पर लेट गए। सुंदरी ने कहा, “राम, इस बार कुछ करना है या फिर से सो जाओगे? मैं एक साल से इंतज़ार कर रही हूँ। मुझे तुम्हारा लंड चाहिए अपनी चूत में।” मैंने कहा, “इस बार कुछ करूँगा जो तुम कभी नहीं भूलोगी। तुम्हें पूरी तरह संतुष्ट करूँगा।” मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया। उसका बदन गर्म था और कपड़े उतारने के बाद वह और भी सेक्सी लग रही थी। मेरी मुस्लिम कज़िन की चूत
मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे और किस करने लगा। वह भी मेरा साथ देने लगी और हमारी जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं। मैं उसके होंठों को चूस रहा था और वह मेरे होंठों को। फिर मैंने उसकी गर्दन पर किस किया, उसके गालों पर, उसकी आँखों पर। वह “आह… राम… बहुत मजा आ रहा है…” कहने लगी।
मैंने उसकी ब्रा खोली। उसके चूचे मेरे सामने थे, गोल और कसे हुए। मैं उन्हें चूसने लगा, पहले एक को फिर दूसरे को। वह “आह… हाँ… और चूसो… मेरे चूचे चूसो…” कहने लगी। मैं उसके निप्पलों को काट भी रहा था हल्के से। वह मदहोश हो रही थी। फिर मैंने उसकी पैंटी खींचकर उतार दी। उसकी चूत साफ शेव की हुई थी, गुलाबी और गीली। उसकी चूत की दरार गीली थी और चमक रही थी।
मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। “आह… राम… यह क्या कर रहे हो… बहुत मजा आ रहा है… पहली बार कोई चाट रहा है…” वह कहने लगी। मैं उसकी चूत में जीभ डाल-डालकर चाट रहा था। उसकी चूत का स्वाद मीठा था और गर्म। वह मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा रही थी और अपनी कमर उठा-उठाकर मेरे मुँह पर रगड़ रही थी। मैंने उसकी चूत के दाने को भी चूसा जो अब कड़ा हो गया था। वह पागल हो रही थी। मेरी मुस्लिम कज़िन की चूत
फिर मैंने अपना अंडरवियर उतार दिया। मेरा लंड सात इंच लंबा और मोटा था, एकदम लाल हो गया था और फड़फड़ा रहा था। उसे देखकर सुंदरी की आँखें खुली रह गईं। “इतना बड़ा! यह तो मेरी चूत में जाएगा ही नहीं। मेरी चूत तो छोटी है।” वह चौंकी। मैंने कहा, “डरो मत, धीरे-धीरे अंदर जाएगा। पहले थोड़ा चिकनाहट लगाते हैं।”
मैंने उसके पैर फैलाए और अपने लंड को उसकी चूत पर रखा। उसकी चूत गीली थी लेकिन फिर भी मैंने थूक लगाकर उसे और चिकना किया। मैंने धीरे से अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया। वह “आह… हाँ… डालो… अंदर डालो…” कहने लगी। मैंने एक ज़ोर का धक्का लगाया और मेरा लंड आधा अंदर चला गया। वह “आह… दर्द हो रहा है… रुको… थोड़ा रुको…” चीखी और अपनी आँखें बंद कर लीं।
मैंने रुककर उसके चूचे चूसे। कुछ देर बाद जब वह शांत हुई, मैंने दूसरा धक्का लगाया। इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। वह “आह… हाँ… अब तेज़ करो… मजा आ रहा है…” कहने लगी। मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई। मैं उसे तेज़ी से चोदने लगा। बिस्तर की क्विज़किज़ की आवाज़ आ रही थी। उसकी चूत से आवाज़ें आ रही थीं, “फच… फच… फच…”
वह “आह… हाँ… और तेज़… मेरी चूत फाड़ दो… मैं झरने वाली हूँ… राम… और तेज़…” चिल्ला रही थी। मैंने और ज़ोर लगाया। मेरे थप्पड़ उसकी चूत में तेज़ी से पड़ रहे थे। मैं उसके चूचे भी दबा रहा था। कुछ ही देर में वह झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया और उसकी चूत से गर्म पानी निकलने लगा। मैंने भी अपना स्पर्म उसकी चूत में ही छोड़ दिया। गर्म गर्म पानी उसकी चूत में भर गया। वह थककर लेट गई और मैं भी उसके ऊपर गिर गया।
हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। कुछ देर बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो देखा कि खून लगा हुआ था। मैंने पूछा, “यह खून?” वह बोली, “हाँ, मेरी सील टूट गई। मैं अब तुम्हारी हो गई।” मैंने उसे किस किया और कहा, “मैं तुम्हें कभी नहीं भूलूँगा।”
उस रात हम दोनों ने तीन बार सेक्स किया। पहली बार के बाद, हमने कुछ देर आराम किया। फिर मैंने उसे कुत्ते की पोज़िशन में बनाया। वह अपने हाथों से सहारा देकर खड़ी हो गई और मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया। “आह… यह पोज़िशन भी अच्छी है… और गहरा जा रहा है…” वह कहने लगी। मैंने उसकी गाँड पकड़कर तेज़ी से धक्के मारे। उसकी गाँड के थप्पड़ बज रहे थे। वह “आह… हाँ… और तेज़… मेरी चूत को चोदो… मैं फिर से झरने वाली हूँ…” चिल्ला रही थी। मैंने उसे करीब पंद्रह मिनट तक इसी पोज़िशन में चोदा। फिर मैंने अपना पानी उसकी चूत में ही छोड़ दिया। मेरी मुस्लिम कज़िन की चूत
तीसरी बार, मैंने उसे अपने ऊपर बिठाया। वह मेरे लंड पर बैठकर कूदने लगी। उसके चूचे मेरे मुँह के सामने उछल रहे थे। मैं उन्हें चूस रहा था। “आह… राम… मैं फिर से झरने वाली हूँ… और तेज़…” वह कहने लगी। और वह झड़ गई। मैंने भी अपना पानी निकाल दिया।
सुबह जब हम उठे, तो सुंदरी ने कहा, “राम, यह मेरी सबसे अच्छी रात थी। मैं तुमसे शादी करना चाहती हूँ। मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।” मैंने कहा, “यह संभव नहीं है। हम कज़िन हैं, हमारे परिवार कभी नहीं मानेंगे। लेकिन मैं तुम्हें जब भी मौका मिलेगा, चोदूँगा ज़रूर। हमारा यह रिश्ता हमेशा रहेगा।” वह मुस्कुराई और मुझे किस करने लगी।
उसके बाद से जब भी मौका मिलता, हम दोनों एक-दूसरे से मिलते और सेक्स करते। कभी मेरे घर, कभी उसके घर, और कभी किसी खेत में। सुंदरी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। उसने मुझे बताया कि लड़कियों को कैसे संतुष्ट करते हैं, कहाँ कहाँ छुआ जाए तो उन्हें मजा आता है। मैंने भी उसे हर तरह से खुश किया।
एक बार तो हम दोनों ने पूरे दिन सेक्स किया था। सुबह से लेकर शाम तक। हमने अलग-अलग पोज़िशन ट्राई कीं। कभी सिक्स्टीनाइन, कभी डॉगी, कभी काउगर्ल, कभी मिशनरी। हमने बाथरूम में भी सेक्स किया, किचन में भी, और बरामदे में भी।
सुंदरी अब भी मुझसे प्यार करती है। हम दोनों जानते हैं कि हम शादी नहीं कर सकते, लेकिन हमारा यह रिश्ता हमेशा रहेगा। वह अब शादीशुदा है लेकिन फिर भी जब भी मौका मिलता है, हम मिलते हैं और पुरानी यादें ताज़ा करते हैं। यह थी मेरी पहली चुदाई की कहानी, मेरी फुआ की बेटी सुंदरी के साथ। आशा करता हूँ कि आप सबको पसंद आई होगी। यह एक रियल सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी थी जो मैंने अपनी जिंदगी में जीई।
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