
बारिश की रात में अंजान लड़की की चुदाई
बारिश की वो शाम शहर की यादों में हमेशा के लिए दर्ज हो गई थी। आसमान से मूसलाधार बारिश बरस रही थी, जैसे कुदरत ने अपने सारे जज़्बात एक साथ उड़ेल दिए हों। सड़कें खाली हो चुकी थीं, दुकानें बंद थीं, और पूरा शहर एक अजीब से सन्नाटे में डूबा हुआ था—वो सन्नाटा जो बारिश की आवाज़ को और भी ज़्यादा सुनाई देने लगता है। बारिश की रात में अंजान लड़की की चुदाई ।
कैफे “मूनलाइट” की धीमी पीली रोशनी बाहर की गहरी नीली शाम को एक रहस्यमय आभा दे रही थी। कैफे के अंदर लकड़ी की महक, ताज़ी कॉफी की खुशबू और गीली मिट्टी की सोंधी सुगंध मिलकर एक ऐसा माहौल बना रही थी जो दिल को छू लेने वाला था। कांच की खिड़कियों पर बारिश की बूंदें टकरा-टकराकर एक धीमी, मादक धुन बजा रही थीं।
कैफे के कोने वाली मेज पर आरव बैठा था। उम्र लगभग अठाईस साल, लंबा-डीलदार बदन, भूरे बाल जो थोड़े लहराते थे, और वो आँखें—गहरी, चिंतनशील, और किसी गहरे समुंद्र की तरह रहस्यमयी। उसने अपनी कॉफी का कप हाथ में लिए हुए था और खिड़की से बाहर बरसती बारिश को देख रहा था। उसके चेहरे पर एक अकेलेपन की झलक थी, लेकिन वो अकेलापन जो किसी खूबसूरत याद से भरा हो।
तभी कैफे का भारी कांच का दरवाज़ा खुला और ठंडी हवा का एक झोंका अंदर आया। उस झोंके के साथ आई एक हसीना—सिया।
सिया का प्रवेश कैफे में ऐसा था जैसे किसी कविता का एक अद्भुत शेर सुनाई दे जाए। वो पाँच फीट पाँच इंच की थी, इकहरी, सुगठित और सुडौल। उसका बदन ऐसा था कि हर देखने वाले की नज़र उस पर ठहर जाए। उसका फिगर न तो बहुत पतला था और न ही बहुत भारी—बल्कि एक संपूर्ण, ढले हुए सांचे जैसा था, जहाँ हर घुमाव में एक कुदरती कशिश और नज़ाकत थी।
उसने एक गहरे नीले रंग की सूती कुर्ती पहनी हुई थी जो बारिश में भीगकर उसके जिस्म से चिपक गई थी। कुर्ती का गला थोड़ा गहरा था, जिससे उसकी कॉलरबोन और छाती का ऊपरी हिस्सा साफ झलक रहा था। नीचे उसने सफेद फिटेड लेगिंग्स पहनी थी जो उसकी सुडौल जांघों और पतली कमर को बेइंतहा खूबसूरती से उभार रही थीं।
लेकिन सबसे खास था उसका चेहरा—एक ऐसा चेहरा जो किसी मूरतकार की सबसे बेहतरीन रचना लगे। गोरा रंग, बड़ी-बड़ी कजरारी आँखें जिनमें बारिश की बूंदों जैसी चमक थी, तराशी हुई नाक, और वो होंठ—कुदरती गुलाबी, रसीले, और ऐसे जो बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ कह जाते थे। उसके बिखरे हुए रेशमी, घने काले बाल भीगकर उसकी गर्दन और पीठ पर चिपके हुए थे, और उसके गोरे रंग पर एक जादुई कंट्रास्ट बना रहे थे। बारिश की रात में अंजान लड़की की चुदाई ।
उसके हाथ में एक टूटा हुआ छाता था, जो उसकी हालत बयान कर रहा था। उसके चेहरे पर एक झेंप से भरी मुस्कान थी, और उसके पूरे जिस्म से पानी टपक रहा था।
“क्या यहाँ कोई सीट खाली है?” उसकी आवाज़ इतनी मधुर थी कि कैफे में बैठे सभी लोगों ने उसकी ओर देखा।
कैफे का मैनेजर उसकी ओर बढ़ा, “मैडम, बारिश में आप पूरी भीग गई हैं। आइए, मैं आपको कोने वाली सीट पर बिठा देता हूँ।”
लेकिन सिया की नज़रें कैफे के कोने में बैठे आरव से मिल गईं। उस क्षण कैफे का सारा शोर जैसे हवा में विलीन हो गया। आरव की आँखें सिया के उस भीगे हुए, कयामत ढाते रूप पर टिक गईं। उसने कभी इतनी खूबसूरती एक साथ नहीं देखी थी। बारिश की रात में अंजान लड़की की चुदाई ।
सिया ने मैनेजर की ओर देखा और फिर आरव की मेज की ओर इशारा किया, “क्या मैं वहाँ बैठ सकती हूँ? बाकी सब जगह फुल है…”
मैनेजर ने देखा कि आरव अकेला बैठा है, और उसने सिया को आरव की मेज की ओर इशारा कर दिया।
सिया आरव की मेज की ओर बढ़ी। उसके हर कदम के साथ भीगे हुए कपड़ों की सरसराहट हो रही थी। उसकी पतली, लचीली कमर और सुडौल छाती का ढलान उसके हर कदम के साथ एक गज़ब का लोच पैदा कर रहा था। भीगे कपड़ों से छनकर आती उसके जिस्म की कुदरती रंगत और कपड़ों की पारदर्शिता उसके रूप को बेहद कामुक और मोहक बना रही थी।
आरव ने अपनी धड़कनों पर काबू पाते हुए कुर्सी पीछे खिसकाई, “बिल्कुल… यह तो मेरी खुशकिस्मती होगी।”
सिया ने मुस्कुराते हुए आरव के सामने की कुर्सी पर बैठने के लिए कहा, “शुक्रिया।”
जैसे ही वो बैठी, उसकी भीगी हुई कुर्ती और लेगिंग्स से पानी की कुछ बूंदें मेज पर गिर गईं। आरव ने उसे देखा—उसकी सुराहीदार गर्दन और सुडौल कॉलरबोन पर जब पानी की नन्हीं बूंदें फिसलती हुई नीचे ढल रही थीं, तो आरव की सांसें थम सी गईं।
“मैं सिया हूँ,” उसने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा।
“आरव,” उसने उसका हाथ छुआ—ठंडा, गीला, लेकिन इतना नरम कि उसका दिल कांप उठा।
“तुम बहुत भीग गई हो,” आरव ने कहा, “कुछ गर्म पी लो, नहीं तो सर्दी लग जाएगी।”
“हाँ, यह बारिश अचानक ही तेज़ हो गई। मैं तो सिर्फ पास की दुकान से कुछ सामान लेने गई थी, और वापसी में यह हाल हो गया,” सिया ने अपने भीगे बालों को ठीक करते हुए कहा।
वेटर आया और सिया ने गर्म चॉकलेट ऑर्डर की। जब वेटर चला गया, तो दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी छा गई—वो खामोशी जो दो अजनबियों के बीच होती है जो एक-दूसरे को देखना चाहते हैं लेकिन शर्म के मारे देख नहीं पा रहे हैं।
“तुम यहाँ रोज़ आती हो?” आरव ने खामोशी तोड़ी।
“नहीं, आज पहली बार आई हूँ। वैसे तो मैं शहर में नई हूँ, दो हफ्ते पहले ही यहाँ शिफ्ट हुई हूँ,” सिया ने बताया।
“ओह, तो यह तुम्हारी वेलकम पार्टी है—बारिश की शाम में एक अजनबी के साथ कॉफी,” आरव ने मुस्कुराते हुए कहा।
सिया हँस पड़ी। उसकी हँसी इतनी मधुर थी कि आरव का दिल उस पर फिदा हो गया।
“क्या तुम रोज़ यहाँ आते हो?” सिया ने पूछा।
“हाँ, लगभग। मैं एक लेखक हूँ, और यहाँ की शांति मुझे लिखने में मदद करती है,” आरव ने बताया।
“वाह, लेखक! क्या लिखते हो?”
“कहानियाँ, उपन्यास… जो मन में आता है वो,” आरव ने कहा, “लेकिन आज तो मेरी कलम भी तुम्हें देखकर रुक गई होगी।”
सिया के गालों पर हल्की सी लाली छा गई। उसने नीचे देखा और फिर आरव की ओर देखा, “तुम बड़े फ्लर्ट करते हो।”
“सच कहना फ्लर्ट नहीं होता,” आरव ने गंभीरता से कहा, “तुम सच में बेहद खूबसूरत हो।”
इसी बीच सिया की गर्म चॉकलेट आ गई। उसने कप को अपने हाथों में लिया और उसकी गर्माहट महसूस की। आरव उसे देख रहा था—कैसे उसके होंठ कप के किनारे से छूते हैं, कैसे उसकी आँखें बंद होती हैं जब वो पहला घूँट लेती है।
“क्या मैं एक सवाल पूछ सकता हूँ?” आरव ने कहा।
“हाँ, पूछो।”
“क्या तुम्हें पता है कि भीगे हुए कपड़ों में तुम कितनी खूबसूरत लग रही हो? इतनी खूबसूरत कि देखने वाले का दिल धड़कना भूल जाए,” आरव ने धीमी आवाज़ में कहा।
सिया ने अपनी पलकें झुका लीं। उसका चेहरा लाल हो गया था। वो जानती थी कि उसकी कुर्ती भीगकर उसके जिस्म से चिपक गई है और उसके शरीर की हर एक सुडौल बनावट, उसकी पतली कमर का घेरा और उसकी छाती का उभार साफ-साफ उभरकर सामने आ रहा है।
“मुझे… मुझे शर्मिंदा मत करो…” सिया ने धीमी आवाज़ में कहा।
“मैं तुम्हें शर्मिंदा नहीं कर रहा, मैं तो बस तारीफ कर रहा हूँ। तुम्हें पता है, मेरी अगली कहानी की हीरोइन तुम जैसी ही होगी,” आरव ने कहा।
“सच?” सिया ने आँखें उठाईं।
“बिल्कुल सच।”
दोनों ने बातचीत जारी रखी—मौसम, शहर, संगीत, फिल्में। लेकिन जैसे-जैसे बाहर बारिश का जोर बढ़ता गया, वैसे-वैसे टेबल के आमने-सामने बैठे उन दोनों के बीच की दूरी घटने लगी। बारिश की रात में अंजान लड़की की चुदाई ।
सिया जब अपनी भीगी लटों को सुखाने के लिए पीछे झटका देती, तो पानी की ठंडी बूंदें उड़कर आरव के गर्म चेहरे पर आ गिरतीं। बारिश की रात में अंजान लड़की की चुदाई ।
“आई एम सो सॉरी…” सिया ने शर्माते हुए अपनी पलकें झुका लीं।
“अगर ऐसी बूंदें गिरती रहें, तो मुझे ताउम्र इस कैफे में बैठना मंज़ूर है,” आरव ने उसकी आँखों में गहराई से देखते हुए कहा।
सिया के गालों पर हया की सुरखी दौड़ गई। उसकी भीगी कुर्ती के अंदर से उठती उसकी तेज़ सांसें उसके सीने के उभार को और स्पष्ट कर रही थीं। आरव की भूरी आँखें जब सिया के भीगे होठों से होती हुई उसकी नाभि के ऊपर चिपके कपड़े पर टिकीं, तो सिया के जिस्म में एक सिहरन दौड़ गई।
दोनों के बीच कोई अदृश्य खींचतान शुरू हो चुकी थी। एक ऐसा आकर्षण जो शब्दों से नहीं, बल्कि सिर्फ नज़रों से व्यक्त हो रहा था।
दूसरा अध्याय: नज़दीकियों का अहसास और पहला स्पर्श
कैफे की घड़ी रात के दस बजे की सुई दिखा रही थी। बाहर बारिश अब और भी तेज़ हो गई थी। मूसलाधार बारिश की वजह से सड़कें पानी से भर गई थीं और आवाजाही लगभग ठप्प हो चुकी थी।
कैफे में अब सिर्फ आरव और सिया ही बचे थे, और काउंटर पर बैठा एक वेटर जो बार-बार उनकी ओर देखकर मुस्कुरा रहा था।
“लगता है बाहर का हाल बहुत खराब है,” आरव ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा।
“हाँ, मुझे लगता है मुझे यहीं रुकना पड़ेगा। मेरा अपार्टमेंट यहाँ से काफी दूर है,” सिया ने चिंता से कहा।
“तुम्हारा अपार्टमेंट कहाँ है?” आरव ने पूछा।
“शहर के दूसरे छोर पर, करीब आधे घंटे की दूरी पर,” सिया ने बताया।
“इस मौसम में वहाँ पहुँचना मुश्किल होगा। रास्ते में कई जगह पानी भर गया होगा,” आरव ने कहा, “मेरा अपार्टमेंट यहाँ से बस दो गली दूर है। अगर तुम चाहो तो…”
सिया ने आरव की ओर देखा। उसकी आँखों में एक अजीब सा भरोसा था। वो जानती थी कि आरव एक अजनबी है, लेकिन कुछ था उसमें जो उसे भरोसा दिलाता था।
“मैं… मैं नहीं जानती…” सिया ने हिचकिचाते हुए कहा।
“मैं समझ सकता हूँ। तुम्हें एक अजनबी पर भरोसा करना मुश्किल है। लेकिन मैं वादा करता हूँ, मैं तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा। बस इस बारिश में तुम्हें सुरक्षित जगह पहुँचाना चाहता हूँ,” आरव ने ईमानदारी से कहा।
सिया ने कुछ देर सोचा। फिर उसने अपनी कजरारी आँखों से आरव के चेहरे को देखा—वो चेहरा जो ईमानदारी और सच्चाई से भरा था।
“ठीक है,” सिया ने धीमी आवाज़ में कहा।
आरव ने मुस्कुराते हुए बिल चुकाया और सिया के लिए अपनी जैकेट निकाली, “यह लो, इसे ओढ़ लो। तुम पहले से ही बहुत भीगी हो।”
सिया ने आरव की जैकेट ली और उसे अपने कंधों पर डाल ली। जैकेट पर आरव की खुशबू थी—एक मर्दाना, सुरक्षित खुशबू जो सिया को अच्छी लगी।
दोनों कैफे से बाहर निकले। बारिश अब और भी तेज़ हो गई थी। आरव ने अपनी कार की चाबी निकाली और दरवाज़ा खोला।
“मेरी गाड़ी यहाँ है। आओ,” आरव ने कहा।
सिया आरव के साथ उसकी कार की ओर बढ़ी। कार एक मिड-साइज़ सेडान थी, अंदर से साफ सुथरी और आरामदायक। आरव ने सिया के लिए दरवाज़ा खोला और उसे अंदर बैठाया।
जब आरव ड्राइवर की सीट पर बैठा, तो दोनों के बीच की दूरी अब बहुत कम हो गई थी। कार के अंदर का माहौल इतना निजी और करीबी था कि दोनों के दिल तेज़ी से धड़कने लगे।
आरव ने कार स्टार्ट की और धीरे-धीरे सड़क पर चलने लगा। बारिश की वजह से विजिबिलिटी बहुत कम थी, इसलिए आरव बहुत धीरे-धीरे गाड़ी चला रहा था।
“तुम्हें ठंड तो नहीं लग रही?” आरव ने पूछा।
“थोड़ी सी,” सिया ने कांपते हुए कहा।
आरव ने एसी बंद कर दिया और हीटर चालू कर दिया। गर्म हवा कार में फैलने लगी।
“बेहतर?” आरव ने पूछा।
“हाँ, धन्यवाद,” सिया ने मुस्कुराते हुए कहा।
गाड़ी एक सुनसान सड़क पर थी। दोनों ओर पेड़ थे जिनकी टहनियाँ बारिश में झूम रही थीं। आरव ने एक तरफ गाड़ी रोकी।
“क्या हुआ?” सिया ने चौंककर पूछा।
“कुछ नहीं, बस थोड़ा आराम से चल रहा हूँ। रोड स्लिपरी है,” आरव ने कहा।
लेकिन सच यह था कि आरव सिया के करीब आना चाहता था। उसने अपना हाथ स्टीयरिंग से हटाया और सिया की ओर बढ़ाया।
“सिया, क्या मैं… क्या मैं तुम्हारा हाथ पकड़ सकता हूँ?” आरव ने पूछा।
सिया ने आरव की ओर देखा। उसकी आँखों में वही रहस्यमय चमक थी। उसने धीरे से अपना हाथ आरव की ओर बढ़ाया।
आरव ने सिया का हाथ अपने हाथ में ले लिया। वो हाथ ठंडा था, गीला था, लेकिन बेहद नरम था। आरव ने अपनी उंगलियों से सिया की उंगलियों को सहलाना शुरू किया।
“तुम्हारे हाथ बहुत नरम हैं,” आरव ने कहा।
“और तुम्हारे हाथ बहुत गर्म हैं,” सिया ने जवाब दिया।
दोनों के हाथ एक-दूसरे में फंसे हुए थे। आरव ने धीरे से सिया के हाथ को अपने होंठों पर लगाया और उसे चूमा। यह एक बेहद हल्का, पवित्र चुंबन था, लेकिन इसमें इतनी गहराई थी कि सिया का दिल कांप उठा।
“आरव…” सिया ने धीमी आवाज़ में कहा।
“हाँ सिया?”
“मुझे… मुझे अच्छा लग रहा है,” सिया ने शर्माते हुए कहा।
“मुझे भी,” आरव ने कहा और सिया के हाथ को और कसकर पकड़ लिया।
गाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। अब दोनों के बीच की दूरी और भी कम हो गई थी। सिया का एक हाथ आरव के हाथ में था और उसका दूसरा हाथ अपनी गोद में था।
“सिया, क्या तुम जानती हो कि तुम मुझे पहली नज़र में ही पसंद आ गई थीं?” आरव ने कहा।
“सच?” सिया ने पूछा।
“हाँ, जब तुम कैफे में आईं, भीगे हुए कपड़ों में, मैं तो तुम्हें देखता ही रह गया। तुम्हारे बाल, तुम्हारी आँखें, तुम्हारी मुस्कान… सब कुछ,” आरव ने ईमानदारी से कहा।
सिया ने नीचे देखा। उसके गाल लाल हो गए थे।
“तुम्हें पता है, जब तुम मुस्कुराती हो तो तुम्हारे गाल पर एक टिमटिमाती सी डिंपल आती है,” आरव ने कहा।
सिया ने शर्म से अपना चेहरा छुपा लिया, “बंद करो ना…”
“क्यों? सच कह रहा हूँ। तुम बेहद खूबसूरत हो सिया।”
इसी बीच आरव ने गाड़ी एक सुनसान जगह पर रोक दी। यह एक पुरानी सड़क थी जहाँ कोई आवाजाही नहीं थी। चारों ओर अंधेरा था, सिर्फ बारिश की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
“क्यों रोकी गाड़ी?” सिया ने पूछा।
“मैं… मैं तुम्हें कुछ कहना चाहता हूँ,” आरव ने कहा।
“क्या?”
आरव ने सिया की ओर मुड़ा। उसके चेहरे पर एक गंभीर भाव था।
“सिया, मैं जानता हूँ कि हम अजनबी हैं। लेकिन जो मैं महसूस कर रहा हूँ, वो कभी महसूस नहीं किया। मैं तुम्हें अपने करीब महसूस करना चाहता हूँ। क्या… क्या मैं तुम्हें छू सकता हूँ?”
सिया ने आरव की ओर देखा। उसकी आँखों में एक अजीब सा जादू था। वो चाहती थी कि आरव उसे छुए, उसके शरीर को अपने हाथों में महसूस करे।
उसने धीरे से सिर हिलाया—हाँ में।
तीसरा अध्याय: पहली छुअन और बढ़ता जुनून
आरव ने धीरे से अपना हाथ सिया के चेहरे की ओर बढ़ाया। उसकी उंगलियाँ सिया के गाल को छूती हुई उसके कान के पीछे चली गईं। सिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उस छुअन का आनंद लेने लगी।
“तुम्हारी त्वचा इतनी नरम है…” आरव ने फुसफुसाते हुए कहा।
उसकी उंगलियाँ सिया के गाल से होती हुई उसकी ठुड्डी पर आईं, फिर उसके होंठों पर। सिया के होंठ कांप रहे थे—ठंड से नहीं, बल्कि उत्तेजना से।
“क्या मैं… क्या मैं तुम्हें चूम सकता हूँ?” आरव ने पूछा।
सिया ने अपनी आँखें खोलीं। उसकी आँखें आरव की आँखों में डूब गईं। उसने धीरे से आगे झुककर आरव के होठों पर एक हल्का चुंबन किया।
यह एक छोटा सा, हल्का सा चुंबन था, लेकिन इसमें इतनी बिजली थी कि दोनों के शरीर में करंट दौड़ गया।
आरव ने सिया को अपनी ओर खींच लिया। अब दोनों के चेहरे बेहद करीब थे। आरव ने सिया के होठों पर एक गहरा, जोरदार चुंबन किया।
यह चुंबन अलग था—इसमें वर्षों की प्यास और एक पल की बेकाबू चाहत घुली थी। आरव की जीभ ने सिया के मुँह में प्रवेश किया और उसके होठों को चूसने लगी। सिया ने भी पूरी तरह से आरव का साथ दिया। उसके होंठ आरव के होठों के नीचे दबे हुए थे और वह उसके मुँह का रस पी रही थी।
दोनों की लार एक-दूसरे में मिल रही थी। आरव ने सिया को और करीब खींच लिया और उसे अपने सीने से चिपका लिया। सिया का भीगा हुआ शरीर आरव के गर्म शरीर से टकरा रहा था।
“ओह सिया… तुम…” आरव ने चुंबन तोड़ते हुए कहा।
“आरव… मुझे… मुझे अच्छा लग रहा है…” सिया ने कांपते हुए कहा।
आरव ने फिर से सिया के होठों पर चुंबन करना शुरू किया। इस बार उसका चुंबन और भी गहरा और जोरदार था। उसके हाथ सिया की पीठ पर घूम रहे थे—पहले धीरे-धीरे, फिर थोड़ा ज़ोर से।
सिया ने अपने हाथों से आरव के बालों को पकड़ लिया और उसे और करीब खींच लिया। दोनों के शरीर अब पूरी तरह से एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
आरव का एक हाथ धीरे-धीरे सिया की कमर से होता हुआ ऊपर की ओर बढ़ा। उसने सिया की भीगी हुई कुर्ती को छुआ। कपड़ा ठंडा था, लेकिन उसके नीचे की त्वचा गर्म थी।
“क्या मैं… क्या मैं तुम्हारे ऊपर हाथ फेर सकता हूँ?” आरव ने पूछा।
सिया ने शर्म से सिर हिलाया—हाँ में।
आरव ने अपना हाथ सिया की कुर्ती के नीचे डाला। उसका हाथ सिया की पीठ की नरम त्वचा को छूते हुए ऊपर की ओर बढ़ा। सिया की पीठ इतनी चिकनी और नरम थी कि आरव का हाथ उस पर फिसलता हुआ सा लग रहा था।
“तुम्हारी पीठ… इतनी नरम…” आरव ने कहा।
उसका हाथ धीरे-धीरे सिया की पीठ से होता हुआ उसकी ब्रा की पट्टी पर आया। उसने ब्रा की पट्टी को अपनी उंगलियों से छुआ और फिर उसे नीचे की ओर खिसकाने लगा।
“आरव… धीरे…” सिया ने कांपते हुए कहा।
“मैं धीरे ही कर रहा हूँ प्रिये… बस तुम्हें महसूस करना चाहता हूँ,” आरव ने कहा।
आरव ने अपना दूसरा हाथ भी सिया की कुर्ती के नीचे डाल दिया। अब उसके दोनों हाथ सिया की पीठ पर थे। उसने धीरे से अपनी उंगलियों से सिया की पीठ को सहलाना शुरू किया—पहले कंधों से, फिर कमर तक, और फिर वापस ऊपर।
सिया की सांसें तेज़ हो गई थीं। उसका शरीर आरव के हाथों के नीचे कांप रहा था। वो इस छुअन को महसूस करना चाहती थी, याद रखना चाहती थी।
“मुझे… मुझे तुम्हारे सामने वाले हिस्से को भी छूने दो…” आरव ने कहा।
सिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसने अपने हाथों को नीचे किया, जैसे आरव को आमंत्रित कर रही हो।
आरव ने धीरे से अपने हाथ सिया की कुर्ती से बाहर निकाले और फिर उसे सिया के सामने लाए। उसने सिया की कुर्ती के ऊपर से ही उसके सीने को छुआ।
भीगी हुई कुर्ती के नीचे सिया के चूचे साफ झलक रहे थे—गोल, सुडौल, और पूरी तरह से विकसित। आरव ने अपने हाथों से सिया के चूचों को कुर्ती के ऊपर से ही दबाना शुरू किया।
“आह… आरव…” सिया के मुँह से एक धीमी सी कराह निकली।
“क्या अच्छा लग रहा है?” आरव ने पूछा।
“हाँ… बहुत…” सिया ने कहा।
आरव ने सिया के चूचों को ब्रा और कुर्ती के ऊपर से ही सहलाना शुरू किया। उसके हाथ उन गोल आकारों को महसूस कर रहे थे। सिया के चूचे इतने नरम और मुलायम थे कि आरव के हाथ उनमें धँस से जाते थे।
“मैं… मैं तुम्हारे चूचों को देखना चाहता हूँ…” आरव ने कहा।
सिया ने शर्म से अपना चेहरा एक तरफ कर लिया। उसने धीरे से अपने हाथ ऊपर उठाए।
आरव ने समझते हुए सिया की कुर्ती को पकड़ा और उसे ऊपर उठाने लगा। सिया ने थोड़ा ऊपर उठकर अपने हाथ ऊपर किए और आरव ने उसकी कुर्ती उतार दी।
अब सिया के ऊपरी शरीर पर सिर्फ एक पतली, भीगी हुई सफेद ब्रा थी जो उसके सुडौल चूचों को संभाले हुए थी। आरव की नज़रें उस पर टिक गईं।
“बेहद खूबसूरत…” आरव ने फुसफुसाते हुए कहा।
उसने धीरे से अपने हाथ सिया की ब्रा पर रखे और उसके चूचों को ब्रा के ऊपर से ही सहलाने लगा। सिया के चूचों के सिरे अब कड़े हो चुके थे और ब्रा के कपड़े के नीचे से साफ झलक रहे थे।
“प्लीज़… अब और मत तड़पाओ…” सिया ने कांपते हुए कहा।
आरव ने सिया की ब्रा के हुक को खोला। जैसे ही ब्रा ढीली हुई, सिया के चूचे बाहर आ गए—गोल, गुलाबी, और पूरी तरह से विकसित। उनके बीच की दरार गहरी थी और चूचों के सिरे गुलाबी और कड़े हो चुके थे।
“ओह माय गॉड…” आरव ने कहा और अपना मुँह सिया के चूचों पर रख दिया।
चौथा अध्याय: चूचों की पूजा और नीचे की ओर बढ़ते हाथ
आरव ने सिया के दाहिने चूचे को अपने हाथ में भर लिया और उसके गुलाबी सिरे को अपने होंठों में भर लिया। उसने अपनी जीभ से उस चूचे के सिरे को चाटना शुरू किया—पहले धीरे-धीरे घुमाकर, फिर थोड़ा ज़ोर से चूसते हुए।
“आह… आरव… यह… यह बहुत अच्छा लग रहा है…” सिया ने अपने हाथों से आरव के सिर को अपने चूचे पर दबाते हुए कहा।
आरव ने अपने दूसरे हाथ से सिया के बाएं चूचे को भी पकड़ लिया। वह दोनों चूचों को बारी-बारी से चूस रहा था—कभी दाहिने को, कभी बाएं को। उसकी जीभ चूचों के सिरों को चाट रही थी, उन्हें कड़ा कर रही थी, और फिर उन्हें अपने मुँह में भरकर चूस रही थी।
सिया की सिसकियाँ तेज़ हो गई थीं। उसका शरीर कार की सीट पर ऐंठ रहा था। उसने अपनी कमर को ऊपर उठाना शुरू कर दिया—जैसे आरव के मुँह से और ज़्यादा संपर्क चाहती हो।
“और ज़ोर से… प्लीज़… और ज़ोर से…” सिया ने कहा।
आरव ने सिया के चूचे को और गहराई से अपने मुँह में ले लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। उसकी जीभ चूचे के सिरे पर घूम रही थी, उसे उत्तेजित कर रही थी।
इसी बीच आरव का एक हाथ धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ रहा था। उसने सिया की लेगिंग्स के इलास्टिक को छुआ। सिया ने अपनी कमर थोड़ी उठा दी, जिससे आरव को उसकी लेगिंग्स उतारने में आसानी हो।
आरव ने धीरे से सिया की लेगिंग्स को नीचे खींचना शुरू किया। पहले उसकी नाभि दिखी, फिर उसकी चूत के ऊपर की वह उभरी हुई जगह जहाँ उसकी महिलात्व की गर्माहट केंद्रित थी। सिया ने अपने पैर थोड़े फैला दिए और आरव ने उसकी लेगिंग्स पूरी तरह उतार दी।
अब सिया के निचले शरीर पर सिर्फ एक छोटी सी सफेद पैंटी थी जो भीगी हुई थी और उसकी चूत के आकार को पूरी तरह से उभार रही थी। आरव ने सिया की पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को छुआ—वह गर्म और गीली थी, बहुत गीली।
“सिया… तुम बहुत गीली हो चुकी हो…” आरव ने कामुक आवाज़ में कहा।
“तुम्हारी वजह से… सिर्फ तुम्हारी वजह से…” सिया ने शर्माते हुए कहा।
आरव ने सिया की पैंटी के किनारे को पकड़ा और उसे एक तरफ खिसकाया। जैसे ही पैंटी हटी, सिया की चूत का दर्शन हुआ—छोटी, गुलाबी, और बिल्कुल साफ सुथरी। उसकी चूत की दोनों पंखड़ियाँ गीली थीं और बीच से उसकी चूत का मुँह थोड़ा खुला हुआ सा लग रहा था, जैसे आरव के लंड का इंतज़ार कर रहा हो।
“क्या मैं… क्या मैं तुम्हें वहाँ छू सकता हूँ?” आरव ने पूछा।
सिया ने शर्म से अपना चेहरा एक तरफ कर लिया और सिर हिलाया—हाँ में।
आरव ने धीरे से अपनी एक उंगली सिया की चूत पर रखी। सिया की चूत इतनी गीली थी कि उंगली आसानी से उसकी दोनों पंखड़ियों के बीच फिसल गई। आरव ने धीरे से अपनी उंगली को ऊपर की ओर खिसकाया—सिया की चूत की दरार के ऊपर से, जहाँ उसकी क्लिटोरिस थी।
“ओह माय गॉड!” सिया चिल्ला उठी और उसका शरीर एक तार की तरह कस गया।
आरव ने सिया की क्लिटोरिस को अपनी उंगली से धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया। सिया की सिसकियाँ अब चीखों में बदल रही थीं। उसने अपने हाथों से कार की सीट को पकड़ लिया और अपनी कमर को ऊपर उठाना शुरू कर दिया—जैसे आरव की उंगली से और ज़्यादा संपर्क चाहती हो।
“आरव… प्लीज़… अंदर डालो… अपनी उंगली अंदर डालो…” सिया ने बेसब्र होकर कहा।
पाँचवाँ अध्याय: उंगली का प्रवेश और चूत की गहराई
आरव ने अपनी मध्यमा उंगली को सिया की चूत के मुँह पर रखा। सिया की चूत का मुँह इतना गीला था कि उंगली आसानी से उसके अंदर जा सकती थी। आरव ने धीरे से दबाव डाला और उसकी उंगली सिया की चूत में प्रवेश कर गई।
“आह… हाँ… और अंदर… पूरी अंदर…” सिया ने कराहते हुए कहा।
आरव ने अपनी उंगली को धीरे-धीरे अंदर की ओर धकेलना जारी रखा। सिया की चूत की दीवारें उसकी उंगली को कसकर पकड़े हुए थीं—गीली, गर्म, और कसी हुई। जब उसकी उंगली पूरी तरह से अंदर चली गई, तो आरव ने उसे थोड़ा घुमाया।
“ओह… यह… यह बहुत अच्छा लग रहा है…” सिया ने कहा।
आरव ने अपनी उंगली को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। वह सिया की चूत को उंगली से चोद रहा था—पहले धीरे-धीरे, फिर थोड़ा तेज़।
“और तेज़… प्लीज़… और तेज़…” सिया ने कहा।
आरव ने अपनी गति बढ़ा दी। उसकी उंगली अब तेज़ी से सिया की चूत में अंदर-बाहर हो रही थी। सिया की चूत से आवाज़ें आ रही थीं—गीली, चिपचिपी आवाज़ें जो उत्तेजना को और बढ़ा रही थीं।
“आरव… मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…” सिया ने कांपते हुए कहा।
“झड़ जाओ प्रिये… मैं तुम्हें झड़ते हुए देखना चाहता हूँ…” आरव ने कहा।
आरव ने अपनी उंगली को और तेज़ी से सिया की चूत में अंदर-बाहर करना जारी रखा। उसने अपनी दूसरी उंगली से सिया की क्लिटोरिस को भी रगड़ना शुरू कर दिया।
“आह… आह… आह…” सिया की चीखें तेज़ हो गईं।
अचानक सिया का पूरा शरीर कस गया। उसकी कमर ऊपर उठी और वो एकदम स्थिर हो गई। फिर उसके शरीर में एक झटका सा लगा और वो झड़ गई—उसकी चूत से गर्म तरल पदार्थ निकला और आरव की उंगली को गीला कर दिया।
“ओह… ओह… ओह…” सिया ने कराहते हुए कहा।
आरव ने अपनी उंगली को सिया की चूत से बाहर निकाला और उसे अपने होठों पर लगाया। उसने सिया की चूत के रस को चखा—मीठा, खट्टा, और बेहद उत्तेजक।
“तुम्हारी चूत का स्वाद बेहद अच्छा है…” आरव ने कहा।
सिया ने शर्म से अपनी आँखें बंद कर लीं। उसका शरीर अभी भी कांप रहा था।
“मैं… मैं पहली बार… पहली बार किसी के सामने झड़ी हूँ…” सिया ने धीमी आवाज़ में कहा।
“और मैं पहली बार किसी की चूत को इतने करीब से देखा और छुआ है…” आरव ने कहा।
दोनों ने एक-दूसरे को देखा। उनकी आँखों में अब एक अलग ही चमक थी—एक गहरा संबंध, एक अजीब सा जुड़ाव।
“चलो, अब मेरे अपार्टमेंट चलते हैं। यहाँ कार में बहुत देर हो गई है,” आरव ने कहा।
“हाँ,” सिया ने कहा।
सिया ने अपने कपड़े ठीक किए—उसने अपनी ब्रा और कुर्ती पहनी, और लेगिंग्स भी पहन ली, हालाँकि वो अभी भी भीगी हुई थी।
आरव ने कार स्टार्ट की और अपने अपार्टमेंट की ओर बढ़ने लगा। रास्ते में दोनों चुप थे—लेकिन यह एक आरामदायक चुप्पी थी, जिसमें दोनों एक-दूसरे के साथ हुए उस अनुभव को याद कर रहे थे।
करीब दस मिनट की ड्राइव के बाद आरव अपने अपार्टमेंट की बिल्डिंग के सामने पहुँचा। यह एक अच्छी बिल्डिंग थी, चार मंजिला, और आरव का फ्लैट तीसरी मंजिल पर था।
दोनों कार से उतरे और बिल्डिंग के अंदर गए। लिफ्ट में भी दोनों चुप थे, लेकिन उनके हाथ एक-दूसरे में बंधे हुए थे।
लिफ्ट तीसरी मंजिल पर रुकी और दोनों बाहर निकले। आरव ने अपने फ्लैट की चाबी निकाली और दरवाज़ा खोला।
“आओ,” आरव ने कहा।
सिया अंदर दाखिल हुई। फ्लैट बड़ा नहीं था, लेकिन बेहद साफ सुथरा और सजाया हुआ था। एक बड़ा हॉल, एक छोटा सा किचन, और एक बेडरूम।
“यह मेरा छोटा सा घर है,” आरव ने कहा।
“यह बहुत खूबसूरत है,” सिया ने कहा।
“बैठो, मैं तुम्हारे लिए कुछ गर्म करके लाता हूँ,” आरव ने कहा।
“नहीं, मैं ठीक हूँ,” सिया ने कहा और आरव के पास आकर उसे गले लगा लिया।
आरव ने सिया को अपनी बाहों में भर लिया। दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे। सिया का भीगा हुआ शरीर आरव के शरीर से टकरा रहा था।
“मैं… मैं नहाना चाहती हूँ…” सिया ने धीमी आवाज़ में कहा।
“हाँ, बिल्कुल। बाथरूम वहाँ है। मैं तुम्हारे लिए तौलिया रख देता हूँ,” आरव ने कहा।
आरव ने सिया को बाथरूम दिखाया और उसके लिए एक साफ तौलिया निकाला।
“धन्यवाद,” सिया ने कहा और बाथरून में घुस गई।
आरव बाहर बैठा और इंतज़ार करने लगा। उसके दिमाग में सिर्फ सिया का वो भीगा हुआ बदन, उसके चूचे, और उसकी चूत का ख्याल आ रहा था।
करीब पंद्रह मिनट बाद बाथरूम का दरवाज़ा खुला। सिया बाहर निकली—उसने आरव का एक बड़ा टी-शर्ट पहना हुआ था जो उसके घुटनों तक आ रहा था। उसके बाल गीले थे और उसका चेहरा ताज़ा लग रहा था।
“मैंने… मैंने अपने कपड़े धो दिए हैं। वो सूखने के लिए लटका दिए हैं,” सिया ने शर्माते हुए कहा।
“कोई बात नहीं। तुम इसी में आराम से रहो,” आरव ने कहा।
“तुम भी नहा लो… तुम भी भीगे हुए हो…” सिया ने कहा।
“हाँ, अभी नहाता हूँ,” आरव ने कहा।
आरव बाथरूम में गया। सिया हॉल में बैठी थी। उसने आरव के फ्लैट को देखा—दीवारों पर कुछ तस्वीरें, किताबों से भरा एक अलमारी, और एक आरामदायक सोफा।
कुछ देर बाद आरव बाहर निकला—उसने भी एक टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनी थी।
“अब बेहतर लग रहा है?” आरव ने पूछा।
“हाँ,” सिया ने मुस्कुराते हुए कहा।
दोनों सोफे पर बैठे। अब उनके बीच की दूरी और भी कम हो गई थी।
“सिया, मैं… मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ,” आरव ने गंभीर आवाज़ में कहा।
“क्या?” सिया ने पूछा।
“मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ। मुझे पता है यह जल्दी है, लेकिन मैं जो महसूस कर रहा हूँ वो सच है,” आरव ने कहा।
सिया ने आरव की ओर देखा। उसकी आँखों में आँसू थे—खुशी के आँसू।
“मैं भी… मैं भी तुमसे प्यार करने लगी हूँ आरव…” सिया ने कहा।
दोनों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया। इस बार उनका गले मिलना और भी गहरा था, और भी कसकर।
“सिया, क्या… क्या मैं तुम्हें अपने बेडरूम में ले जा सकता हूँ?” आरव ने पूछा।
सिया ने शर्म से सिर हिलाया—हाँ में।
आरव ने सिया का हाथ पकड़ा और उसे अपने बेडरूम की ओर ले गया। बेडरूम बड़ा था, बीच में एक विशाल किंग-साइज बेड था जो सफेद चादरों से ढका हुआ था।
आरव ने सिया को बेड पर बिठाया। सिया बैठी थी और आरव उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया।
“तुम बेहद खूबसूरत हो सिया…” आरव ने कहा।
“तो फिर अब देर कैसी आरव? मुझे अपना बना लो…” सिया ने तड़पकर कहा।
आरव ने धीरे से अपने हाथ सिया के टी-शर्ट के नीचे डाले। उसने सिया की नंगी जांघों को छुआ—गर्म, नरम, और बिल्कुल चिकनी।
“तुम्हारी जांघें…” आरव ने कहा।
उसने धीरे से सिया के टी-शर्ट को ऊपर उठाना शुरू किया। सिया ने थोड़ा ऊपर उठकर अपने हाथ ऊपर किए और आरव ने उसकी टी-शर्ट उतार दी।
अब सिया बेड पर बिल्कुल नंगी थी—उसके चूचे गोल और गुलाबी, उसकी चूत छोटी और गीली, और उसका पूरा बदन एक मूरत की तरह चमक रहा था।
“ओह सिया…” आरव ने कहा और अपना मुँह उसके चूचों पर रख दिया।
सातवाँ अध्याय: चूचों की चूसनी और चूत की चटनी
आरव ने सिया के दोनों चूचों को अपने हाथों में भर लिया। उसने उन्हें दबाना शुरू किया—पहले धीरे-धीरे, फिर थोड़ा ज़ोर से। सिया के चूचे इतने नरम थे कि आरव के हाथ उनमें धँस से जाते थे।
“आह… हाँ… ऐसे ही…” सिया ने कराही।
आरव ने एक चूचे को अपने मुँह में ले लिया और उसे ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। उसकी जीभ चूचे के सिरे को चाट रही थी, उसे कड़ा कर रही थी। सिया का चूचा अब पूरी तरह से कड़ा हो चुका था और आरव के मुँह में था।
“और ज़ोर से… प्लीज़…” सिया ने कहा।
आरव ने और ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया। वह सिया के चूचे को अपने दाँतों से हल्का काट भी रहा था, जिससे सिया को एक अजीब सी सिहरन हो रही थी।
इसी बीच आरव का एक हाथ सिया की चूत की ओर बढ़ा। उसने सिया की चूत को अपनी उंगलियों से छुआ—वह पहले से ही गीली थी, बहुत गीली।
“तुम्हारी चूत फिर से गीली हो गई है…” आरव ने कहा।
“तुम्हारी वजह से…” सिया ने कहा।
आरव ने सिया की चूत की पंखड़ियों को अपनी उंगलियों से फैलाया। उसकी चूत का गुलाबी अंदरूनी हिस्सा दिखने लगा। बीच में उसकी चूत का छोटा सा छेद था जो थोड़ा खुला हुआ सा लग रहा था।
“क्या मैं… क्या मैं तुम्हारी चूत को चाट सकता हूँ?” आरव ने पूछा।
सिया ने शर्म से सिर हिलाया—हाँ में।
आरव ने सिया की जांघों को फैलाया और अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया। उसने अपनी जीभ से सिया की चूत की पंखड़ियों को चाटना शुरू किया—पहले एक तरफ, फिर दूसरी तरफ।
“आह… आरव… यह… यह बहुत अच्छा लग रहा है…” सिया ने कराही।
आरव ने अपनी जीभ को सिया की चूत के छेद पर रखा और उसे अंदर डालने की कोशिश की। सिया की चूत का छेद छोटा था, लेकिन गीला होने की वजह से आरव की जीभ आसानी से अंदर चली गई।
“ओह… हाँ… और अंदर… पूरी अंदर…” सिया ने कहा।
आरव ने अपनी जीभ को सिया की चूत में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। वह उसकी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था। सिया की चूत से गीली आवाज़ें आ रही थीं—चुपचुप की आवाज़ें जो उत्तेजना को और बढ़ा रही थीं।
“आरव… मैं… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ…” सिया ने कहा।
“झड़ जाओ प्रिये… मेरे मुँह में झड़ जाओ…” आरव ने कहा।
आरव ने अपनी जीभ को और तेज़ी से सिया की चूत में अंदर-बाहर करना जारी रखा। उसने अपनी उंगली से सिया की क्लिटोरिस को भी रगड़ना शुरू कर दिया।
“आह… आह… आह…” सिया चीखने लगी।
अचानक सिया का पूरा शरीर कस गया। उसकी कमर ऊपर उठी और उसकी चूत से एक गर्म तरल पदार्थ निकला—वो झड़ गई, और इस बार आरव के मुँह में।
आरव ने सिया के चूत के रस को पी लिया—मीठा, खट्टा, और बेहद उत्तेजक।
“तुम्हारी चूत का स्वाद बेहद अच्छा है…” आरव ने ऊपर देखते हुए कहा।
सिया ने शर्म से अपनी आँखें बंद कर लीं। उसका शरीर अभी भी कांप रहा था।
“मैं… मैं तुम्हारे लिए भी कुछ करना चाहती हूँ…” सिया ने धीमी आवाज़ में कहा।
आठवाँ अध्याय: लंड का उदय और चूसने की कला
सिया ने आरव की ओर देखा। आरव अभी भी अपनी टी-शर्ट और शॉर्ट्स में था, लेकिन उसके शॉर्ट्स के सामने एक बड़ा उभार साफ दिख रहा था।
“क्या… क्या मैं तुम्हें छू सकती हूँ?” सिया ने पूछा।
आरव ने सिर हिलाया—हाँ में।
सिया ने धीरे से अपना हाथ आरव के शॉर्ट्स की ओर बढ़ाया। उसने शॉर्ट्स के इलास्टिक को छुआ और फिर धीरे से अंदर हाथ डाला।
उसका हाथ कुछ गर्म, कड़क, और बड़ी चीज़ को छू गया। वो आरव का लंड था।
“ओह… यह… यह बहुत बड़ा है…” सिया ने कांपते हुए कहा।
“क्या तुम… क्या तुम इसे देखना चाहोगी?” आरव ने पूछा।
सिया ने सिर हिलाया—हाँ में।
आरव ने खड़े होकर अपनी टी-शर्ट उतारी। उसका बदन गोरा था, छाती पर थोड़े बाल थे, और पेट सपाट था। फिर उसने अपनी शॉर्ट्स उतारी।
उसका लंड बाहर आ गया—लंबा, मोटा, और पूरी तरह से कड़ा। उसका सुपाड़ा गुलाबी था और उसके चारों ओर की त्वचा कसी हुई थी। लंड की नसें उभरी हुई थीं और वो एकदम सीधा खड़ा था।
“यह… यह बहुत बड़ा है आरव…” सिया ने कहा।
“क्या तुम इसे छुओगी?” आरव ने पूछा।
सिया ने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया और आरव के लंड को छुआ। वो गर्म था, कड़क था, और उसकी त्वचा नरम थी।
“कैसा लग रहा है?” आरव ने पूछा।
“गर्म… और कड़क…” सिया ने कहा।
सिया ने आरव के लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और उसे सहलाना शुरू कर दिया। वह धीरे-धीरे उसे ऊपर-नीचे कर रही थी। आरव के मुँह से एक कराह निकली।
“और ज़ोर से…” आरव ने कहा।
सिया ने अपनी गति बढ़ा दी। वह आरव के लंड को तेज़ी से हिला रही थी। आरव का लंड और भी कड़ा हो गया था और उसका सुपाड़ा अब पूरी तरह से खुला हुआ था।
“क्या… क्या मैं इसे अपने मुँह में ले सकती हूँ?” सिया ने पूछा।
“हाँ… प्लीज़…” आरव ने कहा।
सिया ने धीरे से अपना मुँह आरव के लंड के पास लाया। उसने अपनी जीभ से लंड के सुपाड़े को चाटा—एक बार, दो बार, तीन बार।
“ओह… सिया…” आरव ने कराही।
सिया ने फिर लंड के सुपाड़े को अपने होठों में ले लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया। उसने अपने होठों को लंड के चारों ओर कसा और धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।
“और अंदर… पूरी अंदर…” आरव ने कहा।
सिया ने धीरे से आरव के लंड को और अंदर ले लिया। वो अब आधा लंड अपने मुँह में ले चुकी थी। उसने अपनी जीभ से लंड की नीचे वाली तरफ को चाटना शुरू कर दिया, जो सबसे संवेदनशील हिस्सा होता है।
“आह… हाँ… ऐसे ही…” आरव ने कहा।
सिया ने अपना सिर आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। वह आरव के लंड को अपने मुँह में अंदर-बाहर कर रही थी—कभी धीरे, कभी तेज़। उसकी लार आरव के लंड पर लग रही थी जिससे वो और भी चिकना हो गया था।
“सिया… मैं… मैं झड़ने वाला हूँ…” आरव ने कहा।
“मेरे मुँह में झड़ जाओ…” सिया ने कहा और लंड को और गहराई से अपने मुँह में ले लिया।
आरव ने अपनी कमर को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। वह सिया के मुँह में अपने लंड को चोद रहा था। कुछ ही देर में उसका शरीर कसा और उसके लंड से गर्म, गाढ़ा वीर्य निकला—सीधे सिया के मुँह में।
“ओह… ओह…” आरव ने कराहते हुए कहा।
सिया ने आरव का सारा वीर्य पी लिया। वो थोड़ा नमकीन था, लेकिन उसे अच्छा लगा।
“कैसा था?” सिया ने ऊपर देखते हुए पूछा।
“बेहद अच्छा… तुम बेहद अच्छा करती हो…” आरव ने कहा।
नवाँ अध्याय: लंड का पुनरुद्धार और चूत में प्रवेश की तैयारी
आरव सिया के पास बैठ गया। दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। उनके बीच अब एक गहरा बंधन बन चुका था।
“मैं… मैं तुम्हें अपने अंदर महसूस करना चाहती हूँ…” सिया ने धीमी आवाज़ में कहा।
“क्या तुम… क्या तुम तैयार हो?” आरव ने पूछा।
“हाँ… मैं तैयार हूँ…” सिया ने कहा।
आरव ने सिया को बेड पर लिटाया। वह उसके ऊपर आ गया। दोनों अब पूरी तरह से नंगे थे—आरव का लंड फिर से कड़ा होना शुरू हो गया था, और सिया की चूत गीली थी।
“मैं… मैं धीरे से करूँगा… अगर दर्द हो तो बताना…” आरव ने कहा।
“हाँ…” सिया ने कहा।
आरव ने अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ा और सिया की चूत के मुँह पर रखा। सिया की चूत का मुँह गीला था और थोड़ा खुला हुआ सा लग रहा था।
“तुम्हारी चूत बहुत गीली है…” आरव ने कहा।
“तुम्हारे लिए…” सिया ने कहा।
आरव ने धीरे से दबाव डाला। उसके लंड का सुपाड़ा सिया की चूत की पंखड़ियों को फैलाता हुआ अंदर जाने लगा।
“आह…” सिया ने एक हल्की सी कराह निकाली।
“दर्द हो रहा है?” आरव ने पूछा।
“थोड़ा सा… लेकिन चलने दो…” सिया ने कहा।
आरव ने धीरे-धीरे अपने लंड को आगे बढ़ाना जारी रखा। सिया की चूत बहुत कसी हुई थी और उसके लंड को कसकर पकड़े हुए थी।
“तुम्हारी चूत बहुत कसी है…” आरव ने कहा।
“क्योंकि यह पहली बार… पहली बार किसी लंड को अपने अंदर ले रही है…” सिया ने शर्माते हुए कहा।
यह सुनकर आरव और भी उत्तेजित हो गया। उसने धीरे से अपने लंड को और अंदर धकेलना जारी रखा।
दसवाँ अध्याय: पहली बार चूत में लंड और कुंवारी चूत की सील टूटना
आरव का लंड अब आधा सिया की चूत में घुस चुका था। सिया की चूत की दीवारें उसके लंड को कसकर पकड़े हुए थीं—गीली, गर्म, और कसी हुई।
“और अंदर… पूरी अंदर…” सिया ने कहा।
“लेकिन दर्द…” आरव ने कहा।
“मैं सहन कर लूँगी… बस पूरी अंदर करो…” सिया ने कहा।
आरव ने एक ज़ोरदार धक्का दिया और उसका पूरा लंड सिया की चूत में घुस गया। सिया की चूत की सील टूट गई और थोड़ा खून निकला, लेकिन बारिश की वजह से और उत्तेजना की वजह से दर्द ज़्यादा नहीं हुआ।
“आह…” सिया ने एक लंबी सांस ली।
“कैसा लग रहा है?” आरव ने पूछा।
“भरा हुआ सा… पूरा भरा हुआ…” सिया ने कहा।
आरव ने धीरे से अपने लंड को पीछे खींचा और फिर आगे धकेल दिया। यह पहला स्ट्रोक था—धीमा, लेकिन गहरा।
“ओह… हाँ…” सिया ने कराही।
आरव ने फिर से अपने लंड को पीछे खींचा और फिर आगे धकेल दिया। यह दूसरा स्ट्रोक था—थोड़ा तेज़।
“और तेज़… प्लीज़…” सिया ने कहा।
आरव ने अपनी गति बढ़ा दी। वह अब तेज़ी से अपने लंड को सिया की चूत में अंदर-बाहर कर रहा था। सिया की चूत से आवाज़ें आ रही थीं—चुपचुप की आवाज़ें जो उत्तेजना को और बढ़ा रही थीं।
“तुम्हारी चूत बहुत अच्छी है…” आरव ने कहा।
“और तुम्हारा लंड… यह मेरी चूत को पूरी तरह से भर रहा है…” सिया ने कहा।
आरव ने सिया की जांघों को और फैलाया और और गहराई से चोदना शुरू कर दिया। उसका लंड अब पूरी तरह से सिया की चूत में घुस रहा था—सुपाड़े से लेकर जड़ तक।
“आह… हाँ… और गहरा… और गहरा…” सिया ने कहा।
आरव ने अपने हाथों से सिया के चूचों को पकड़ लिया और उन्हें दबाते हुए चोदना जारी रखा। सिया के चूचे उसके हाथों में नरमी से दब रहे थे।
“मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…” सिया ने कहा।
“मैं भी… मैं भी झड़ने वाला हूँ…” आरव ने कहा।
“अपना वीर्य… अपना वीर्य मेरी चूत में ही छोड़ दो…” सिया ने कहा।
आरव ने और ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया। उसका लंड अब पूरी तेज़ी से सिया की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। सिया की चूत उसके लंड को कसकर पकड़े हुए थी।
“आह… आह… आह…” दोनों एक साथ चीखने लगे।
अचानक सिया का शरीर कसा और उसकी चूत ने आरव के लंड को और कसकर पकड़ लिया। वो झड़ गई—उसकी चूत से गर्म तरल पदार्थ निकला और आरव के लंड को गीला कर दिया।
उसी पल आरव भी झड़ गया। उसके लंड से गर्म, गाढ़ा वीर्य निकला—सीधे सिया की चूत में। वो वीर्य सिया की चूत की गहराई में जा रहा था, उसे भर रहा था।
“ओह… ओह…” दोनों एक साथ कराहे।
आरव ने अपने लंड को सिया की चूत में ही रखा और उसके ऊपर गिर पड़ा। दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे, दोनों की सांसें तेज़ चल रही थीं।
“यह… यह बेहद अच्छा था…” सिया ने धीमी आवाज़ में कहा।
“हाँ… यह मेरे लिए भी बेहद खास था…” आरव ने कहा।
ग्यारहवाँ अध्याय: पहली बार गांड में लंड और पिछले दरवाज़े की सवारी
कुछ देर आराम करने के बाद दोनों फिर से उत्तेजित होने लगे। आरव का लंड फिर से कड़ा हो गया था और सिया की चूत फिर से गीली हो गई थी।
“सिया… क्या… क्या मैं तुम्हें एक और जगह चोद सकता हूँ?” आरव ने पूछा।
“कहाँ?” सिया ने पूछा।
“तुम्हारी… तुम्हारी गांड में…” आरव ने धीमी आवाज़ में कहा।
सिया ने शर्म से अपना चेहरा छुपा लिया, “मैंने… मैंने कभी नहीं किया…”
“क्या तुम… क्या तुम कोशिश करना चाहोगी?” आरव ने पूछा।
सिया ने कुछ देर सोचा। फिर उसने धीरे से सिर हिलाया—हाँ में।
“लेकिन धीरे से… मुझे डर लग रहा है…” सिया ने कहा।
“मैं बहुत धीरे से करूँगा… और अगर दर्द हो तो बताना…” आरव ने कहा।
आरव ने सिया को पेट के बल लिटाया। उसने सिया की कमर के नीचे एक तकिया रखा ताकि उसकी गांड ऊपर उठी रहे।
सिया की गांड गोल और सुडौल थी। दोनों गाल बिल्कुल गोल और मुलायम थे। आरव ने अपने हाथों से सिया की गांड के गालों को फैलाया। बीच में उसकी गांड का छोटा सा छेद था—गुलाबी और सिकुड़ा हुआ।
“तुम्हारी गांड बहुत खूबसूरत है…” आरव ने कहा।
आरव ने अपनी एक उंगली को अपने मुँह में चूसा और उसे गीला किया। फिर उसने वह उंगली सिया की गांड के छेद पर रखी।
“तैयार हो?” आरव ने पूछा।
“हाँ…” सिया ने कहा।
आरव ने धीरे से दबाव डाला और उसकी उंगली सिया की गांड में घुस गई।
“आह… यह… यह अजीब सा लग रहा है…” सिया ने कहा।
“दर्द हो रहा है?” आरव ने पूछा।
“नहीं… बस अजीब सा…” सिया ने कहा।
आरव ने अपनी उंगली को धीरे-धीरे सिया की गांड में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। सिया की गांड बहुत कसी हुई थी और उसकी उंगली को कसकर पकड़े हुए थी।
“अब मैं… अब मैं अपना लंड डालूँगा…” आरव ने कहा।
“हाँ… लेकिन धीरे से…” सिया ने कहा।
आरव ने अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ा और सिया की गांड के छेद पर रखा। उसने धीरे से दबाव डाला।
सिया की गांड का छेद बहुत कसा हुआ था। आरव के लंड का सुपाड़ा धीरे-धीरे उसे फैलाता हुआ अंदर जाने लगा।
“आह… धीरे… धीरे…” सिया ने कहा।
आरव ने और धीरे से धक्का दिया। उसके लंड का सुपाड़ा सिया की गांड में घुस गया।
“ओह… यह… यह बहुत मोटा है…” सिया ने कहा।
“क्या मैं… क्या मैं और अंदर करूँ?” आरव ने पूछा।
“हाँ… लेकिन बहुत धीरे…” सिया ने कहा।
आरव ने धीरे-धीरे अपने लंड को और अंदर धकेलना जारी रखा। सिया की गांड उसके लंड को कसकर पकड़े हुए थी—और भी कसकर, और भी गर्म।
“तुम्हारी गांड बहुत कसी है…” आरव ने कहा।
“क्योंकि… क्योंकि यह पहली बार है…” सिया ने कहा।
आखिरकार आरव का पूरा लंड सिया की गांड में घुस गया। सिया ने एक लंबी सांस ली।
“अब… अब धीरे-धीरे हिलो…” सिया ने कहा।
आरव ने धीरे से अपने लंड को पीछे खींचा और फिर आगे धकेल दिया। यह पहला स्ट्रोक था—बेहद धीमा, लेकिन गहरा।
“कैसा लग रहा है?” आरव ने पूछा।
“अजीब… लेकिन अच्छा भी…” सिया ने कहा।
आरव ने धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाना शुरू कर दिया। वह अब थोड़ा तेज़ी से अपने लंड को सिया की गांड में अंदर-बाहर कर रहा था।
“और तेज़… अब थोड़ा तेज़ कर सकते हो…” सिया ने कहा।
आरव ने अपनी गति और बढ़ा दी। उसका लंड अब पूरी तेज़ी से सिया की गांड में अंदर-बाहर हो रहा था। सिया की गांड से आवाज़ें आ रही थीं—चुपचुप की आवाज़ें जो उत्तेजना को और बढ़ा रही थीं।
“तुम्हारी गांड बहुत अच्छी है…” आरव ने कहा।
“और तुम्हारा लंड… यह मेरी गांड को पूरी तरह से भर रहा है…” सिया ने कहा।
आरव ने सिया की कमर को पकड़ लिया और और गहराई से चोदना शुरू कर दिया। उसका लंड अब पूरी तरह से सिया की गांड में घुस रहा था।
“मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…” सिया ने कहा।
“मैं भी… मैं भी झड़ने वाला हूँ…” आरव ने कहा।
“अपना वीर्य… अपना वीर्य मेरी गांड में ही छोड़ दो…” सिया ने कहा।
आरव ने और ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया। उसका लंड अब पूरी तेज़ी से सिया की गांड में अंदर-बाहर हो रहा था।
“आह… आह… आह…” दोनों एक साथ चीखने लगे।
अचानक सिया का शरीर कसा और वो झड़ गई। उसी पल आरव भी झड़ गया। उसके लंड से गर्म, गाढ़ा वीर्य निकला—सीधे सिया की गांड में।
“ओह… ओह…” दोनों एक साथ कराहे।
आरव ने अपने लंड को सिया की गांड में ही रखा और उसके ऊपर गिर पड़ा। दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
“यह… यह भी बेहद अच्छा था…” सिया ने धीमी आवाज़ में कहा।
“हाँ… तुम्हारी गांड बहुत अच्छी है…” आरव ने कहा।
रात भर दोनों एक-दूसरे के साथ रहे। उन्होंने विभिन्न आसनों में एक-दूसरे को चोदा—
पहले आरव ने सिया को मिशनरी पोज़िशन में चोदा—सिया पीठ के बल लेटी थी और आरव उसके ऊपर था। उसने सिया की टांगों को अपने कंधों पर रखा और गहराई से चोदा।
फिर डॉगी स्टाइल में—सिया चारों खानों पर थी और आरव उसके पीछे से उसकी चूत चोद रहा था। इस आसन में आरव सिया की गांड के गालों को देख सकता था और उन्हें थपथपा सकता था।
फिर काउगर्ल पोज़िशन में—सिया आरव के ऊपर बैठी थी और उसकी चूत में आरव का लंड था। वह ऊपर-नीचे हो रही थी, और आरव उसके चूचों को दबा रहा था।
फिर स्पूनिंग पोज़िशन में—दोनों एक-दूसरे की तरफ करवट लेटे हुए थे और आरव पीछे से सिया की चूत में अपना लंड डाले हुए था। इस आसन में आरव सिया की पीठ पर चूमन चाटन कर सकता था।
हर आसन में दोनों ने कई बार झड़ा। सिया की चूत और गांड दोनों आरव के वीर्य से भरी हुई थीं।
सुबह की पहली किरण खिड़की से अंदर आ रही थी। दोनों थके हुए थे, लेकिन अभी भी एक-दूसरे के लिए भूखे थे।
“एक बार और…” आरव ने कहा।
“हाँ… एक बार और…” सिया ने कहा।
यह अंतिम बार था। आरव ने सिया को बेड के किनारे बिठाया और खड़े होकर उसकी चूत में अपना लंड डाला। उसने सिया की टांगों को अपने कंधों पर रखा और गहराई से चोदना शुरू कर दिया।
“आह… हाँ… और ज़ोर से…” सिया ने कहा।
आरव ने पूरी ताकत से चोदना शुरू कर दिया। उसका लंड अब पूरी तेज़ी से सिया की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था।
“मैं… मैं झड़ने वाला हूँ…” आरव ने कहा।
“मेरे अंदर… मेरे अंदर ही छोड़ दो…” सिया ने कहा।
आरव ने एक आखिरी ज़ोरदार धक्का दिया और झड़ गया। उसके लंड से गर्म वीर्य निकला और सिया की चूत में भर गया।
दोनों एक-दूसरे से लिपटकर बेड पर गिर पड़े।
चौदहवाँ अध्याय: विदाई और वादा
दोपहर हो चुकी थी। दोनों उठे और नहाए। सिया ने अपने कपड़े पहने जो अब सूख चुके थे।
“मैं… मैं चलती हूँ…” सिया ने कहा।
“क्या… क्या हम फिर मिल सकते हैं?” आरव ने पूछा।
“हाँ… मैं चाहती हूँ…” सिया ने कहा।
दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और एक लंबा चुंबन किया।
“मैं तुमसे प्यार करता हूँ सिया…” आरव ने कहा।
“मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ आरव…” सिया ने कहा।
सिया चली गई। आरव खिड़की से उसे देखता रहा।
वो रात दोनों के लिए हमेशा यादगार रही—एक रात जो बारिश में शुरू हुई थी और दो जिस्मों के मिलन पर खत्म हुई।
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