बहन की चुदाई देख साली चोदी -3
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जानवी का फैसला और सबकी एकता
जानवी के मुंह से यह बात सुनकर मैं हैरान रह गया। सुधा, अकांक्षा, अनिका और नीता सब उसे देख रही थीं, उनकी आंखों में आश्चर्य था।
“दीदी… तुम…” सुधा कांपते हुए बोली।
“हां… मैंने सोच लिया है… अगर गुलशन ने तुम सबको चोदा है… तो अब हम सब एक साथ रहेंगे… लेकिन एक शर्त पर…” जानवी ने कहा, उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी।
“क्या शर्त?” मैंने पूछा।
“तुम मुझे भी उसी तरह चोदोगे जैसे इन सबको चोदते हो… और आज रात… हम सब एक साथ…” जानवी ने अपने कपड़े उतारने शुरू किए।
मैं उसे देखता रहा। वो अपनी कमीज उतार रही थी, फिर सलवार। जल्दी ही वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। उसके स्तन उभरे हुए थे, उसकी गांड गोल और मादक।
“आज से… यह घर एक अश्लील घर है… जहां सब एक-दूसरे को चोदेंगे…” जानवी ने कहा।
सुधा, अकांक्षा, अनिका और नीता एक-दूसरे को देख रही थीं। फिर सुधा ने भी अपने कपड़े उतारने शुरू किए। एक के बाद एक, सब नंगी हो गईं।
पांच नंगी औरतें एक कमरे में – जानवी, सुधा, अकांक्षा, अनिका और नीता। सबकी चूतें अलग-अलग तरह की – जानवी की अनुभवी, सुधा की मोटी, अकांक्षा की मासूम, अनिका की बड़ी, और नीता की छोटी-कुंवारी।
मेरा लंड खड़ा हो गया। वो सबसे बड़ा था जो कभी हुआ था – 7 इंच का, मोटा, नसों से भरा हुआ, और सुपाड़ा लाल।
पहला दौर – एक-एक करके सबकी चूत
मैंने जानवी को बिस्तर पर लेटाया। “आज पहले तुम्हारी बारी… फिर बाकी सबकी…”
जानवी लेट गई, उसने अपने पैर फैलाए। उसकी चूत गीली थी, उसकी योनि के होंठ खुले हुए थे। उसने अपनी पैंटी उतार दी, अब वह पूरी तरह नंगी थी। उसके स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे, सांस तेज चल रही थी।
मैं उसके ऊपर झुका। उसके स्तन चूसने लगा। वो कराहने लगी।
“उम्म्म्म… हां… ऐसे ही…”
मैंने उसके निप्पles काटे। वो चीखी।
“आह्ह्ह… दर्द… लेकिन अच्छा…”
फिर मैं नीचे गया। उसकी चूत को चाटने लगा। वो गीली थी, स्वाद नमकीन था। मैंने जीभ अंदर डाली।
“उफ्फ्फ… हां… और अंदर…” जानवी चीखी।
मैंने उसे पांच मिनट तक चाटा। फिर उठा। मेरा लंड कड़क था, लाल हो गया था, सुपाड़ा फूला हुआ।
मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का दिया।
“घुस्स्स…” की आवाज आई और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया।
“आह्ह्ह… हां… यही चाहिए था…” जानवी चीखी।
मैंने उसे जोर-जोर से चोदा। “थप थप थप…” की आवाजें गूंज रही थीं। उसके स्तन उपर-नीचे हो रहे थे, मैं उन्हें दबा रहा था।
“और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” जानवी चीखी।
मैंने और जोर लगाया। मेरे थूक से उसका मुँह भीग गया। मैंने उसे चूमा, उसकी जीभ चूसी।
“कितनी गहरी है तुम्हारी चूत…” मैंने कहा।
“हां… और गहरा घुसाओ… आह्ह्ह…” वो बोली।
मैंने उसे बीस मिनट तक चोदा। वो दो बार झड़ चुकी थी। उसकी चूत रस से भरी थी, मेरे लंड पर चमक रही थी।
“अब सुधा…” मैंने जानवी से निकाला और सुधा की तरफ बढ़ा।
सुधा ने अपने पैर फैलाए। वह मोटी थी, उसकी चूत भी मोटी थी, गुलाबी, बड़े-बड़े होंठ। मैंने उसकी चूत में लंड घुसाया। वो गीली थी, गरम थी, और इतनी गहरी कि मेरा लंड आराम से घुस गया।
“आह्ह्ह… जीजू… और जोर से…” सुधा चीखी।
मैंने उसे घोड़ी बनाया। वह अपने घुटनों पर थी, उसकी गांड मेरी तरफ थी। मैंने पीछे से लंड डाला।
“थप थप थप…” की आवाजें तेज हो गईं। उसकी गांड हिल रही थी, मैं उसे पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था।
“मेरी गांड भी मारो… लेकिन पहले चूत…” सुधा चीखी।
मैंने उसे दस मिनट तक चोदा। वो बार-बार झड़ रही थी। उसकी चूत से पानी निकल रहा था, बिस्तर गीला हो गया।
फिर अकांक्षा की तरफ गया।
अकांक्षा कांप रही थी। वह सबसे मासूम थी। “प्लीज… हल्के…”
मैंने उसकी चूत में लंड डाला। वो चीखी, क्योंकि वो कसी थी।
“आह्ह्ह… दर्द… बहुत बड़ा है…” वो रोने लगी।
“शांत रहो, अभी मजा आएगा,” मैंने कहा, धीरे-धीरे धक्के लगाते हुए।
थोड़ी देर में उसे मजा आने लगा। “आह्ह्ह… अच्छा लग रहा है… और तेज…”
मैंने उसे तेजी से चोदा। उसकी छोटी चूत मेरे लंड को कस रही थी। मजा आ रहा था।
“कितनी कसी है तुम्हारी चूत…” मैंने कहा।
“हां… तुम्हारा बहुत मोटा है…” वो बोली।
मैंने उसे पंद्रह मिनट तक चोदा। वो तीन बार झड़ी। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन मुस्कान भी थी।
फिर अनिका की बारी आई। उसने अपने बड़े स्तन उठाए और मुझे बुलाया।
“आओ… मेरी चूत भी भरो…”
मैंने उसकी चूत में लंड घुसाया। वो इतनी गहरी थी कि मेरा लंड पूरी तरह समा गया, फिर भी उसे और ज्यादा चाहिए था। बहन की चुदाई देख साली चोदी -3
“आह्ह्ह… बहुत गहरा… और अंदर… पूरा अंदर…” अनिका चीखी।
मैंने उसके स्तन पकड़े, उन्हें मसला, और जोर-जोर से चोदा। वो चीख रही थी, मजे ले रही थी।
“मेरी चूत का भोसड़ा बना दो… आह्ह्ह…” वो चीखी।
मैंने उसे तेजी से चोदा। उसकी चूत अनुभवी थी, वो जानती थी कैसे लेना है। उसने अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेट लीं, और मुझे अंदर खींचा।
“और गहरा… आह्ह्ह…” वो चीखी।
मैंने उसे बीस मिनट तक चोदा। वो चार बार झड़ी। उसकी चूत से रस बह रहा था, मेरे लंड पर लगा हुआ था।
अंत में नीता आई। वो अभी भी डरी हुई थी।
“प्लीज… मेरी चूत अभी तक दर्द कर रही है… पहले बहुत तंग थी…”
“शांत रहो…” मैंने उसकी छोटी चूत में लंड डाला। वो चीखी, क्योंकि वो सबसे कसी थी।
“आह्ह्ह्ह्ह… मर गई…” नीता चीखी।
मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाए। उसकी चूत गर्म थी, रसीली थी, लेकिन बहुत तंग। मेरा लंड उसे चीरता हुआ अंदर जा रहा था।
“दर्द… बहुत दर्द…” वो रो रही थी।
“थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा,” मैंने कहा, धीरे-धीरे चोदते हुए।
दस मिनट बाद उसे मजा आने लगा। “आह्ह्ह… अब अच्छा लग रहा है… और तेज…”
मैंने तेजी से धक्के लगाए। उसकी छोटी चूत मेरे लंड को कस रही थी। मजा आ रहा था।
“कितनी तंग है तुम्हारी चूत…” मैंने कहा।
“हां… तुम्हारा बहुत बड़ा है…” वो बोली।
मैंने उसे चोदा। वो झड़ी, उसकी चूत ने मेरे लंड को दबाया। मजा आ गया।
दूसरा दौर – सबकी गांड मारी
अब बारी थी गांड की। मैंने जानवी को घोड़ी बनाया।
“आज तुम्हारी गांड भी लूंगा…”
“नहीं… वहां नहीं… बहुत दर्द होगा…” जानवी घबराई।
“शांत रहो…” मैंने उसकी गांड में थूका और अपने लंड को उसके नितंब के छेद पर रखा।
मैंने एक जोरदार धक्का दिया।
“आह्ह्ह्ह्ह… मर गई…” जानवी चीखी।
मेरा लंड उसकी गांड में घुस गया। वो इतनी तंग थी कि मुझे जोर लगाना पड़ा। उसकी गांड गोल थी, मोटी थी, और गर्म थी।
मैंने उसकी गांड जोर-जोर से मारी। “थप थप थप…” की आवाजें गूंज रही थीं। उसकी गांड लाल हो गई, मेरे थप्पड़ों से।
“और जोर से… मेरी गांड फाड़ दो…” जानवी चीखी।
मैंने और जोर लगाया। मेरा लंड उसकी गांड में पूरा घुस रहा था, बाहर आ रहा था, फिर घुस रहा था।
“कितनी गर्म है तुम्हारी गांड…” मैंने कहा।
“आह्ह्ह… हां… और गहरा घुसाओ…” वो बोली।
मैंने उसे पंद्रह मिनट तक गांड मारी। वो दो बार झड़ी, उसकी चूत से पानी निकला, लेकिन मैं उसकी गांड में ही था।
फिर सुधा की बारी आई। उसकी गांड मोटी थी, गोल थी, बहुत मादक।
“आह्ह्ह… मेरी गांड फाड़ दो…” सुधा चीखी।
मैंने उसकी गांड में लंड डाला और जोर-जोर से धक्के लगाए। उसकी गांड इतनी मोटी थी कि मेरा लंड आराम से घुस गया, फिर भी तंग थी।
“थप थप थप…” की आवाजें तेज हो गईं। मैंने उसके बाल पकड़े, उसे पीछे की तरफ खींचा, और और जोर से चोदा।
“आह्ह्ह… मेरी गांड का भोसड़ा बना दो…” सुधा चीखी।
मैंने उसे बीस मिनट तक गांड मारी। वो तीन बार झड़ी। उसकी गांड लाल हो गई, फैल गई।
अकांक्षा की गांड छोटी थी, मैंने उसे भी घोड़ी बनाकर मारी।
“आह्ह्ह… बहुत गहरा… दर्द…” वो रो रही थी, लेकिन मजा ले रही थी।
मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाए। उसकी गांड बहुत तंग थी, मुझे जोर लगाना पड़ा।
“शांत रहो, अभी ठीक होगा,” मैंने कहा।
थोड़ी देर में उसे मजा आने लगा। “आह्ह्ह… अब अच्छा लग रहा है… और तेज…”
मैंने तेजी से धक्के लगाए। उसकी छोटी गांड मेरे लंड को कस रही थी।
“कितनी तंग है…” मैंने कहा।
“हां… तुम्हारा बहुत मोटा है…” वो बोली।
मैंने उसे पंद्रह मिनट तक गांड मारी। वो दो बार झड़ी।
अनिका की गांड मोटी थी, मैंने उसे भी पीछे से चोदा।
“और जोर से… मेरी गांड का भोसड़ा बना दो…” अनिका चीखी।
मैंने जोर-जोर से धक्के लगाए। उसकी गांड इतनी गहरी थी कि मेरा लंड पूरा घुस गया, फिर भी उसे और चाहिए था।
“और गहरा… आह्ह्ह…” वो चीखी।
मैंने उसे बीस मिनट तक गांड मारी। वो चार बार झड़ी। उसकी गांड फैल गई, लाल हो गई।
अंत में नीता की छोटी गांड आई। मैंने उसमें भी अपना लंड घुसाया।
“आह्ह्ह्ह्ह… मर गई…” नीता चीखी।
मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाए। उसकी गांड सबसे तंग थी, मुझे बहुत जोर लगाना पड़ा।
“दर्द… बहुत दर्द…” वो रो रही थी।
“शांत रहो, अभी मजा आएगा,” मैंने कहा।
दस मिनट बाद उसे मजा आने लगा। “आह्ह्ह… अब अच्छा लग रहा है… और तेज…”
मैंने तेजी से धक्के लगाए। उसकी छोटी गांड मेरे लंड को कस रही थी।
“कितनी तंग है तुम्हारी गांड…” मैंने कहा।
“हां… तुम्हारा बहुत बड़ा है…” वो बोली।
मैंने उसे पंद्रह मिनट तक गांड मारी। वो तीन बार झड़ी।
तीसरा दौर – लेस्बियन का खेल
अब मैंने उन्हें आपस में चोदने का आदेश दिया।
“जानवी… तुम सुधा की चूत चोदो अपनी उंगली से…”
जानवी ने सुधा की चूत में उंगली डाली। सुधा चीखी।
“आह्ह्ह… दीदी… और जोर से…”
जानवी ने दो उंगलियां डालीं, फिर तीन। सुधा की चूत गीली थी, आसानी से उंगलियां घुस गईं।
“उम्म्म्म… हां… और अंदर…” सुधा चीखी।
जानवी ने उसे दस मिनट तक उंगली से चोदा। सुधा दो बार झड़ी।
फिर मैंने अकांक्षा को अनिका की चूत चाटने का आदेश दिया।
“चाटो उसकी चूत… जीभ से…”
अकांक्षा ने अनिका की चूत चाटनी शुरू की। अनिका चीखने लगी।
“आह्ह्ह… हां… ऐसे ही… और अंदर जीभ डालो…”
अकांक्षा ने अपनी जीभ अनिका की चूत में डाली। अनिका चीखी।
“उम्म्म्म… बहुत मजा आ रहा है…” अनिका बोली।
अकांक्षा ने उसे पंद्रह मिनट तक चाटा। अनिका तीन बार झड़ी।
नीता को मैंने जानवी के स्तन चूसने के लिए कहा।
“चूसो इन चूचों को…”
नीता ने जानवी के स्तन चूसने शुरू किए। जानवी कराहने लगी।
“उम्म्म्म… हां… ऐसे ही चूसो… और जोर से…”
नीता ने उसके निप्पles काटे। जानवी चीखी।
“आह्ह्ह… दर्द… लेकिन अच्छा…”
फिर मैंने सुधा को अकांक्षा की चूत चाटने का आदेश दिया।
“चाटो उसकी चूत…”
सुधा ने अकांक्षा की चूत चाटी। अकांक्षा चीखी।
“आह्ह्ह… हां… बहुत अच्छा लग रहा है…”
सुधा ने उसे दस मिनट तक चाटा। अकांक्षा दो बार झड़ी।
फिर मैंने अनिका को नीता की चूत चाटने का आदेश दिया।
“चाटो उसकी छोटी चूत…”
अनिका ने नीता की चूत चाटी। नीता चीखी।
“आह्ह्ह… हां… ऐसे ही…”
अनिका ने उसे पंद्रह मिनट तक चाटा। नीता तीन बार झड़ी।
फिर मैंने जानवी को अनिका की गांड चाटने का आदेश दिया।
“चाटो उसकी गांड…”
जानवी ने अनिका की गांड चाटी। अनिका चीखी।
“आह्ह्ह… हां… बहुत मजा आ रहा है…”
जानवी ने उसे दस मिनट तक चाटा। अनिका दो बार झड़ी।
चौथा दौर – डबल पेनिट्रेशन
अब मैंने डबल पेनिट्रेशन शुरू किया।
“सुधा… तुम लेट जाओ… मैं तुम्हारी चूत में लंड डालूंगा… और अकांक्षा तुम्हारी गांड में उंगली करेगी…”
सुधा लेट गई। मैंने उसकी चूत में लंड डाला। अकांक्षा ने उसकी गांड में उंगली डाली।
“आह्ह्ह… दोनों तरफ… बहुत मजा आ रहा है…” सुधा चीखी।
मैंने उसकी चूत चोदी, अकांक्षा ने उसकी गांड उंगली से चोदी। सुधा चीख रही थी, मजे ले रही थी।
“और जोर से… दोनों तरफ…” वो चीखी।
मैंने उसे बीस मिनट तक चोदा। वो चार बार झड़ी।
फिर अकांक्षा की बारी आई। मैंने उसकी चूत में लंड डाला, और अनिका ने उसकी गांड में उंगली डाली।
“आह्ह्ह… हां… बहुत अच्छा लग रहा है…” अकांक्षा चीखी।
मैंने उसे पंद्रह मिनट तक चोदा। वो तीन बार झड़ी।
फिर अनिका की बारी आई। मैंने उसकी चूत में लंड डाला, और नीता ने उसकी गांड में उंगली डाली।
“आह्ह्ह… हां… और जोर से…” अनिका चीखी।
मैंने उसे बीस मिनट तक चोदा। वो चार बार झड़ी।
अंत में नीता की बारी आई। मैंने उसकी चूत में लंड डाला, और जानवी ने उसकी गांड में उंगली डाली।
“आह्ह्ह… हां… बहुत मजा आ रहा है…” नीता चीखी।
मैंने उसे पंद्रह मिनट तक चोदा। वो तीन बार झड़ी।
पांचवां दौर – ओरल सेक्स
अब मैंने ओरल सेक्स शुरू किया।
“जानवी… तुम मेरा लंड चूसो…”
जानवी ने मेरा लंड मुँह में लिया। वो चूसने लगी, जीभ से सुपाड़ा चाटने लगी।
“उम्म्म्म… हां… ऐसे ही…” मैंने कहा।
उसने मेरे लंड को पूरा मुँह में लिया, गले तक। फिर बाहर निकाला, फिर अंदर किया।
“कितना बड़ा है…” वो बोली।
फिर सुधा ने चूसा। उसने मेरे लंड को अपने मुँह में लिया, और जोर-जोर से चूसा।
“उम्म्म्म… हां… और जोर से…” मैंने कहा।
उसने मेरे लंड को चूसते हुए मेरे अंडकोष भी सहलाए।
फिर अकांक्षा ने चूसा। वो धीरे-धीरे चूस रही थी, मासूम तरीके से।
“उम्म्म्म… अच्छा लग रहा है…” मैंने कहा।
उसने मेरे लंड को चूसते हुए मुझे आंखों में देखा। वो शर्मा रही थी, लेकिन चूस रही थी।
फिर अनिका ने चूसा। उसने मेरे लंड को पूरा मुँह में लिया, और गले तक ले गई।
“उम्म्म्म… हां… बहुत अच्छा…” मैंने कहा।
उसने मेरे लंड को चूसते हुए अपने हाथ से भी हिलाया।
अंत में नीता ने चूसा। वो हिचकिचा रही थी, लेकिन मैंने उसे मजबूर किया।
“चूसो… पूरा मुँह में लो…”
उसने मेरा लंड मुँह में लिया। वो छोटा था, इसलिए उसे आसानी हो रही थी।
“उम्म्म्म… हां… ऐसे ही…” मैंने कहा।
उसने मेरे लंड को चूसते हुए मुझे देखा। उसकी आंखों में शर्म थी, लेकिन मजा भी था।
छठा दौर – टाइटल स्ट्रिंग
अब मैंने टाइटल स्ट्रिंग शुरू किया।
“सब एक लाइन में लेट जाओ…”
जानवी, सुधा, अकांक्षा, अनिका और नीता – सब एक लाइन में लेट गईं। मैंने एक-एक करके सबकी चूत चोदी।
पहले जानवी की चूत में लंड डाला, फिर बाहर निकालकर सुधा की चूत में, फिर अकांक्षा की, फिर अनिका की, फिर नीता की।
सब चीख रही थीं, कराह रही थीं, मजा ले रही थीं।
“थप थप थप…” की आवाजें पूरे घर में गूंज रही थीं।
मैंने एक-एक करके सबको दस-दस मिनट तक चोदा। सब कई बार झड़ चुकी थीं।
फिर मैंने वही काम गांड के साथ किया। एक-एक करके सबकी गांड मारी।
जानवी की गांड, फिर सुधा की, फिर अकांक्षा की, फिर अनिका की, फिर नीता की।
सब चीख रही थीं, मजे ले रही थीं।
“थप थप थप…” की आवाजें तेज हो गईं।
सातवां दौर – ग्रुप सेक्स
अब मैंने ग्रुप सेक्स शुरू किया।
“सब एक-दूसरे को चोदो…”
जानवी ने सुधा की चूत में उंगली डाली, सुधा ने अकांक्षा की चूत चाटी, अकांक्षा ने अनिका के स्तन चूसे, अनिका ने नीता की चूत में उंगली डाली, और नीता ने जानवी के स्तन चूसे।
सब एक-दूसरे को चोद रही थीं, चाट रही थीं, चूस रही थीं।
“आह्ह्ह… हां… बहुत मजा आ रहा है…” सब चीख रही थीं।
मैं उन्हें देख रहा था, मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।
मैंने जानवी को बुलाया। “आओ, मेरा लंड चूसो…”
जानवी ने मेरा लंड चूसना शुरू किया, और सुधा की चूत में उंगली करती रही।
फिर मैंने सुधा को बुलाया। “तुम मेरा लंड चूसो…”
सुधा ने मेरा लंड चूसना शुरू किया, और अकांक्षा की चूत चाटती रही।
फिर मैंने अकांक्षा को बुलाया। “तुम मेरा लंड चूसो…”
अकांक्षा ने मेरा लंड चूसना शुरू किया, और अनिका के स्तन चूसती रही।
फिर मैंने अनिका को बुलाया। “तुम मेरा लंड चूसो…”
अनिका ने मेरा लंड चूसना शुरू किया, और नीता की चूत में उंगली करती रही।
अंत में मैंने नीता को बुलाया। “तुम मेरा लंड चूसो…”
नीता ने मेरा लंड चूसना शुरू किया, और जानवी के स्तन चूसती रही।
भाग 10: आठवां दौर – फाइनल चोदाई
अब मैंने फाइनल चोदाई शुरू की।
“सब एक साथ लेट जाओ…”
जानवी, सुधा, अकांक्षा, अनिका और नीता – सब एक साथ लेट गईं। सबकी चूतें एक लाइन में थीं।
मैंने एक-एक करके सबकी चूत में लंड डाला। पहले जानवी, फिर सुधा, फिर अकांक्षा, फिर अनिका, फिर नीता।
सब चीख रही थीं, कराह रही थीं, मजा ले रही थीं।
“थप थप थप…” की आवाजें पूरे घर में गूंज रही थीं।
मैंने जानवी की चूत में अपना माल छोड़ा, फिर सुधा की चूत में, फिर अकांक्षा की चूत में, फिर अनिका की चूत में, और अंत में नीता की चूत में।
सबकी चूतें मेरे वीर्य से भरी हुई थीं, बाहर बह रही थीं।
फिर मैंने सबकी गांड में भी अपना माल डाला – एक-एक करके।
जानवी की गांड में, फिर सुधा की, फिर अकांक्षा की, फिर अनिका की, और अंत में नीता की गांड में।
सबकी गांडें मेरे वीर्य से भरी हुई थीं।
अंत में हम सब एक साथ लेटे हुए थे – मैं और पांच औरतें। सबकी चूतें लाल हो गई थीं, सबकी गांडें फैली हुई थीं, सबके स्तनों पर पसीने की बूंदें थीं।
“आज से… यह हमारा खेल होगा… रोज रात…” मैंने कहा।
सब ने सिर हिलाकर मान लिया। अब यह घर एक अश्लील घर था, जहां रोज रात यह खेल होता।
जानवी ने कहा, “मैं खुश हूं कि हम सब एक साथ हैं।”
सुधा ने कहा, “मुझे बहुत मजा आया।”
अकांक्षा ने कहा, “मैं पहले डर रही थी, लेकिन अब मजा आ रहा है।”
अनिका ने कहा, “मैं और चुदना चाहती हूं।”
नीता ने कहा, “मैं भी… मेरी चूत अभी भी गर्म है।”
मैंने उन्हें देखा। पांच नंगी औरतें, सब मेरी, सब मुझसे चुदवाना चाहती थीं।
“ठीक है, अब सो जाओ। कल रात फिर खेलेंगे,” मैंने कहा।
सबने अपनी-अपनी जगह सोने के लिए चुनी। लेकिन मैंने कहा, “नहीं, आज से हम सब एक ही कमरे में सोएंगे।”
मैंने एक बड़ा बिस्तर बनाया, और सब उस पर लेट गए। मैं बीच में था, और पांच औरतें मेरे चारों तरफ।
जानवी मेरे बगल में, सुधा मेरे पैरों के पास, अकांक्षा मेरे सिर के पास, अनिका मेरे दूसरी तरफ, और नीता मेरे पेट के पास।
मैंने सोचा, यह जिंदगी बहुत अच्छी है। पांच औरतें, सब मेरी, सब मुझसे चुदवाना चाहती हैं।
और यह सिर्फ शुरुआत थी। आगे और भी बहुत कुछ होना था। नए खेल, नए तरीके, नई चीजें।
लेकिन वह कल की बात थी। आज के लिए बस इतना ही।
हम सब सो गए। पांच नंगी औरतें और एक नंगा आदमी, सब एक साथ, एक बिस्तर पर, एक अश्लील घर में।
भाग 12: अगली सुबह
सुबह हुई। सूरज की किरणें खिड़की से अंदर आ रही थीं। मेरी आंख खुली, और मैंने देखा कि पांच नंगी औरतें मेरे चारों तरफ सो रही हैं।
जानवी मेरे बगल में थी, उसके स्तन बाहर थे, मैंने उन्हें दबाया। वो उठी, मुस्कुराई।
“सुबह-सुबह ही शुरू?” उसने कहा।
“क्यों नहीं,” मैंने कहा, उसके स्तन चूसने लगा।
वो कराहने लगी। “उम्म्म्म… हां…”
सुधा भी उठ गई। “मुझे भी चोदो…”
मैंने उसे भी चूमा। फिर अकांक्षा, अनिका और नीता भी उठ गईं।
“आज सुबह-सुबह ही…” अकांक्षा ने कहा, शर्माते हुए।
“हां, कल रात तो हम सब थके हुए थे। आज ताजगी है,” मैंने कहा।
मैंने जानवी को घोड़ी बनाया, और उसकी चूत में लंड डाला।
“आह्ह्ह… सुबह-सुबह…” वो चीखी।
मैंने उसे दस मिनट तक चोदा। फिर सुधा की बारी आई।
“मेरी भी चूत गर्म है…” सुधा ने कहा।
मैंने उसे भी चोदा। फिर एक-एक करके सबको चोदा।
सुबह के नौ बजे तक हम सब चुदाई करते रहे। फिर हमने नहाया, एक साथ, एक बाथरूम में।
सब नंगी थीं, पानी बह रहा था, सब एक-दूसरे को साबुन लगा रही थीं।
मैंने जानवी की चूत में साबुन लगाया, उंगली की। वो चीखी।
“आह्ह्ह… साबुन से जलन हो रही है…”
“शांत रहो, अभी ठीक होगा,” मैंने कहा, उसे पानी से धोया।
फिर मैंने सुधा की चूत में साबुन लगाया, फिर अकांक्षा की, फिर अनिका की, फिर नीता की।
सब चीख रही थीं, लेकिन मजा ले रही थीं।
नहाने के बाद हमने नाश्ता किया। सबने साड़ी पहनी, लेकिन अंदर कुछ नहीं पहना – ना ब्रा, ना पैंटी।
“आज से हम घर में ऐसे ही रहेंगे – बिना अंदर के कपड़ों के,” जानवी ने कहा।
“ठीक है,” सबने कहा।
अब यह घर एक अश्लील घर था, जहां रोज रात और कभी-कभी दिन में भी यह खेल होता।
नए खेल
अगले कुछ दिनों में हमने नए खेल शुरू किए।
एक दिन मैंने सबको बांधा। जानवी को बिस्तर पर बांधा, हाथ और पैर। फिर मैंने उसे चोदा, वो बच नहीं सकती थी।
“आह्ह्ह… बांधकर चोद रहे हो… बहुत मजा आ रहा है…” वो चीखी।
फिर सुधा को बांधा, फिर अकांक्षा को, फिर अनिका को, फिर नीता को।
सबको बांधकर चोदा, सबको बहुत मजा आया।
एक दिन मैंने रोल प्ले किया। मैं डॉक्टर बना, और सब मरीज।
“आओ, मैं तुम्हारी जांच करता हूं,” मैंने कहा।
जानवी मरीज बनी। मैंने उसके स्तन दबाए, “यहां दर्द है?”
“हां, यहां दर्द है…” वो बोली।
मैंने उसके स्तन चूसे, “अब ठीक है?”
“नहीं, और नीचे भी दर्द है…” वो बोली।
मैंने उसकी चूत देखी, “यहां दर्द है?”
“हां, यहां बहुत दर्द है…” वो बोली।
मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाला, “अब ठीक है?”
“आह्ह्ह… हां… अब ठीक है… और जोर से दवाई दो…” वो चीखी।
मैंने उसे चोदा, “यह दवाई है…”
“आह्ह्ह… हां… बहुत अच्छी दवाई है…” वो चीखी।
ऐसे ही मैंने सबकी जांच की, सबको दवाई दी।
एक दिन मैंने टीचर-स्टूडेंट का खेल खेला। मैं टीचर बना, सब स्टूडेंट।
“आओ, मैं तुम्हें पढ़ाता हूं,” मैंने कहा।
जानवी स्टूडेंट बनी। मैंने उसे बेंड किया, और उसकी चूत में लंड डाला।
“यह पहला पाठ है…” मैंने कहा।
“आह्ह्ह… हां… और सिखाओ…” वो चीखी।
मैंने उसे चोदा, “यह पाठ याद रखना…”
“हां… याद रहेगा…” वो बोली।
ऐसे ही मैंने सबको पढ़ाया, सबको बहुत कुछ सिखाया।
भाग 14: बाहर का खेल
एक दिन हमने बाहर जाने का फैसला किया। हम एक झील के पास गए, जहां कोई नहीं था।
“आज यहां चोदेंगे,” मैंने कहा।
“यहां? कोई देख लेगा तो?” नीता ने कहा, घबराते हुए।
“कोई नहीं है, देख ले तो देखे…” मैंने कहा।
मैंने जानवी को पेड़ के सहारे खड़ा किया, और उसकी चूत में लंड डाला।
“आह्ह्ह… बाहर… बहुत मजा आ रहा है…” वो चीखी।
फिर सुधा को घास पर लेटाया, और चोदा।
“आह्ह्ह… प्रकृति में चोद रहे हो…” वो चीखी।
फिर अकांक्षा को पत्थर पर बैठाया, और चोदा।
“आह्ह्ह… ठंडा पत्थर… गर्म लंड… बहुत मजा…” वो चीखी।
फिर अनिका को झील में ले गए, पानी में चोदा।
“आह्ह्ह… पानी में… बहुत गहरा…” वो चीखी।
अंत में नीता को जंगल में ले गए, और चोदा।
“आह्ह्ह… जंगल में… कोई आ सकता है…” वो चीखी, लेकिन मजा ले रही थी।
हमने पूरा दिन बाहर बिताया, और हर जगह चोदा। झील में, जंगल में, घास पर, पत्थर पर – हर जगह।
खत्म नहीं होने वाला खेल
यह खेल कभी खत्म नहीं होता। रोज रात, कभी-कभी दिन में भी, हम एक-दूसरे को चोदते हैं।
जानवी अब मेरी पत्नी भी है, और मेरी मालकिन भी। वो सबको नियंत्रित करती है, बताती है कि क्या करना है।
“आज सुधा की बारी है… उसे पूरा दिन चोदो…” जानवी कहती है।
तो मैं पूरा दिन सुधा को चोदता हूं। उसकी चूत, उसकी गांड, उसके स्तन – सब कुछ।
“आज अकांक्षा की बारी है…” जानवी कहती है।
तो मैं पूरा दिन अकांक्षा को चोदता हूं। उसकी मासूम चूत, उसकी छोटी गांड – सब कुछ।
“आज अनिका की बारी है…”
“आज नीता की बारी है…”
“आज मेरी बारी है…”
हर दिन किसी न किसी की बारी होती है। और कभी-कभी सबकी बारी एक साथ।
यह अश्लील घर अब हमारा घर है। यहां सब कुछ अनुमति है, सब कुछ स्वीकार्य है। कोई शर्म नहीं, कोई रोक-टोक नहीं, केवल खुशी और मजा।
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