
गाँव की अनोखी पड़ोसन
गाँव की सुबहें कुछ अलग ही होती हैं। जब सूरज की पहली किरणें खेतों से होकर घरों में दाखिल होती हैं, तो पूरा गाँव जाग उठता है। ऐसी ही एक सुबह थी जब मैंने उर्मिला को पहली बार देखा। गाँव की अनोखी पड़ोसन
मेरा नाम रामू है और मैं एक साधारण गाँव का लड़का हूँ। मेरी उम्र 24 साल है और मैंने अभी-अभी कॉलेज की पढ़ाई पूरी की है। गाँव लौटने के बाद मेरे दिन खेतों में काम करने और शाम को दोस्तों के साथ बिताने में गुजर रहे थे।
उर्मिला हमारे पड़ोस में रहने वाली मोहन लाल की बहू थी। उसके ससुराल वाले शहर गए हुए थे और वह अकेली घर संभाल रही थी। उसकी उम्र करीब 26-27 साल की होगी, लेकिन उसकी सुंदरता किसी 20 साल की लड़की को मात देती थी।
पहली बार जब मैंने उसे देखा, वह अपने आँगन में कपड़े सुखा रही थी। हल्की नीली साड़ी में उसका गोरा बदन चमक रहा था। उसके बाल खुले हुए थे और हवा में लहरा रहे थे। जब उसने मुझे देखा, तो शर्माते हुए अपनी आँखें झुका लीं, लेकिन उसके ओठों पर एक हल्की सी मुस्कान थी।
“नमस्ते भाभी,” मैंने अपने आँगन से बोला।
“नमस्ते,” उसकी आवाज़ इतनी मधुर थी कि मेरे कानों में गूंजती रही।
उस दिन के बाद से, हमारी नज़रें अक्सर मिलने लगीं। कभी वह छत पर चाय पीती हुई दिखती, तो कभी दरवाज़े पर खड़ी होकर सड़क देखती। मुझे उसकी मौजूदगी का एहसास होने लगा था, और शायद उसे भी मेरी।
एक हफ्ते बाद की बात है। गाँव में बिजली गुल हो गई थी और गर्मी बहुत थी। मैं अपने आँगन में चारपाई पर लेटा हुआ था, जब उर्मिला अपने आँगन में नहाने का पानी गर्म कर रही थी। हमारे आँगन एक-दूसरे से सटे हुए थे, बस एक छोटी सी दीवार थी।
“रामू भाई, सो रहे हो?” उसकी आवाज़ आई। गाँव की अनोखी पड़ोसन
“नहीं भाभी, गर्मी में नींद कहाँ आती है,” मैंने जवाब दिया।
“तुम्हारे यहाँ पानी है? मेरे यहाँ मोटर नहीं चल रही,” वह पूछी।
“हाँ भाभी, आ जाइए,” मैंने कहा।
कुछ देर बाद, उर्मिला एक लोटे में पानी लेकर आई। वह सफेद साड़ी में थी जो गर्मी के कारण उसके शरीर से चिपकी हुई थी। उसके बदन के उभार साफ़ दिख रहे थे। मेरी नज़रें उस पर टिकी रह गईं।
“क्या देख रहे हो?” उसने शर्माते हुए पूछा।
“कुछ नहीं भाभी,” मैंने हकलाते हुए कहा।
“तुम भी ना,” वह मुस्कुराई और पानी लेकर चली गई।
उस रात मैं सो नहीं पाया। मेरे मन में उर्मिला का ख्याल आ रहा था। उसके गोरे बदन की कल्पना मुझे उत्तेजित कर रही थी। मैंने सोचा, क्या वह भी मुझे उसी नज़र से देखती है?
जुलाई का महीना था और बारिश का मौसम शुरू हो गया था। एक रात ज़ोरों की बारिश हो रही थी। मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था, जब दरवाज़े पर दस्तक हुई।
“कौन है?” मैंने पूछा।
“मैं हूँ, उर्मिला,” आवाज़ आई।
मैंने दरवाज़ा खोला। उर्मिला भीगी हुई साड़ी में खड़ी थी। उसके बाल पानी से चिपके हुए थे और साड़ी उसके शरीर से चिपकी हुई थी। उसके गोरे गोरे जांघें और कमर साफ़ दिख रहे थे। मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा।
“क्या हुआ भाभी?” मैंने पूछा।
“मेरे घर की छत टपक रही है, क्या मैं थोड़ी देर यहाँ रुक सकती हूँ?” उसकी आँखों में विनती थी।
“आइए, आइए,” मैंने उसे अंदर बुलाया।
वह अंदर आई और मैंने दरवाज़ा बंद किया। कमरे में सिर्फ़ एक मोमबत्ती जल रही थी। उर्मिला अपने बालों को निचोड़ रही थी। उसकी साड़ी पूरी तरह भीगी थी और उसके अंदर का ब्लाउज और पेटीकोट साफ़ दिख रहे थे। गाँव की अनोखी पड़ोसन
“तुम्हें ठंड लग रही होगी,” मैंने कहा।
“हाँ, थोड़ी,” वह कांपते हुए बोली।
मैंने अपना कम्बल उठाया और उसे देने लगा। जब मैं उसके पास पहुँचा, तो मेरा हाथ उसके गीले हाथ से छू गया। एक करंट सा लगा। हम दोनों एक-दूसरे को देखने लगे।
“रामू…” उसने धीरे से मेरा नाम लिया।
“हाँ भाभी,” मैंने कहा।
“तुम मुझे भाभी मत कहो,” उसने कहा।
“तो क्या कहूँ?” मैंने पूछा।
“उर्मिला कहो,” वह मुस्कुराई।
उसकी मुस्कान में कुछ अलग था। मैं समझ गया कि यह सही मौका है। मैंने हिम्मत की और उसका हाथ पकड़ लिया। उसने विरोध नहीं किया। बल्कि, उसने अपने हाथ को मेरे हाथ में दबा दिया।
मैंने धीरे से उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। उसकी आँखें बंद हो गईं। मैंने अपने ओठ उसके ओठों पर रख दिए। वह पहले तो सकपका गई, फिर धीरे-धीरे रिस्पॉन्ड करने लगी।
हमारे ओठ एक-दूसरे से मिले। उसके ओठ इतने नरम थे, जैसे गुलाब की पंखुड़ियाँ हों। मैंने धीरे से अपनी जीभ उसके मुँह में डाली। उसने भी अपनी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी।
“म्म्म…” उसकी आवाज़ निकली।
मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया। उसका भीगा हुआ शरीर मेरे शरीर से चिपक गया। मैं उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा। उसकी पीठ इतनी नरम थी, गोरी और चिकनी।
“रामू, यह गलत है,” उसने धीरे से कहा, लेकिन उसका शरीर मुझे और पास खींच रहा था।
“कुछ गलत नहीं है, उर्मिला,” मैंने कहा और उसे और कसके पकड़ लिया।
मैंने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया। उसका गीला ब्लाउज उसके स्तनों को कसे हुए था। मैंने धीरे से अपना हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर रखा। उसने एक लंबी साँस ली।
“आह…” उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
मैंने उसके स्तनों को सहलाना शुरू किया। वह मेरे स्पर्श से कांप रही थी। उसके स्तन इतने मुलायम और बड़े थे, करीब 36 इंच के। मैंने उसके निप्पles को उंगलियों से कुचलना शुरू किया।
“ओह रामू… धीरे…” वह कराहने लगी।
मैंने उसका ब्लाउज खोलना शुरू किया। पीछे के हुक खोले और ब्लाउज हटाया। उसके गोरे गोरे स्तन आज़ाद हो गए। उसके निप्पles गुलाबी रंग के थे और कड़क हो चुके थे।
मैंने एक स्तन को हाथ में लिया और चूसने लगा। मेरी जीभ उसके निप्पle को चाट रही थी। वह मेरे सिर को अपने स्तनों में दबा रही थी।
“चूसो… और चूसो…” वह बड़बड़ा रही थी।
मैंने दूसरे स्तन को भी वैसे ही चूसा। फिर मैं नीचे उतरा। उसका पेट नाव की तरह था, इतना सुंदर। मैंने उसके पेट पर चूमे लिए। वह कांप रही थी।
मैंने उसकी साड़ी खोलनी शुरू की। वह खड़ी हो गई और साड़ी खुद उतार दी। अब वह सिर्फ़ पेटीकोट और पैंटी में थी। उसके जांघें इतनी गोरी और मुलायम थीं कि मैं उन्हें देखता ही रह गया।
“क्या देख रहे हो?” उसने शर्माते हुए पूछा।
“तुम्हें, तुम्हारी खूबसूरती को,” मैंने कहा।
मैंने उसे अपनी गोद में उठा लिया और चारपाई पर लिटा दिया। वह चारपाई पर लेटी हुई थी, उसका शरीर मोमबत्ती की रोशनी में चमक रहा था। मैंने उसके पैरों के पास बैठकर उसके पैरों को चूमना शुरू किया।
“आह… रामू…” वह सिसकियाँ ले रही थी।
मैं धीरे-धीरे ऊपर बढ़ रहा था। उसके पैर, फिर टखने, फिर जांघें। मैंने उसके जांघों पर चूमे लिए। वह अपने पैर फैला रही थी। मैंने उसका पेटीकोट ऊपर उठाया। उसकी सफेद पैंटी दिख गई जो पानी से गीली थी – शायद बारिश का पानी, शायद उसकी चूत का पानी।
मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाया। वह उछल पड़ी।
“आह… मत करो…” लेकिन उसकी आवाज़ में कोई विरोध नहीं था।
मैंने उसकी पैंटी खोल दी। उसकी चूत साफ़ शेव थी, गुलाबी रंग की। उसकी चूत के ओंठ मोटे थे और बीच में से पानी टपक रहा था। मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में डाली।
“ओह…” वह चीखी।
उसकी चूत इतनी गर्म और गीली थी। मैंने उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू की। वह अपनी कमर हिला रही थी। फिर मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया।
“रामू… यह क्या कर रहे हो?” वह शर्मा गई।
“तुम्हें खुश कर रहा हूँ,” मैंने कहा और अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दी।
मेरी जीभ उसकी चूत के ओंठों को चाट रही थी। वह पागल हो रही थी। उसने मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा दिया।
“चाटो… और चाटो…” वह चीख रही थी।
मैंने उसकी क्लिटोरिस को मुँह में लिया और चूसा। वह ज़ोर-ज़ोर से साँसें ले रही थी। उसकी चूत से पानी की धार बह रही थी, वह झड़ने वाली थी।
“आह… मैं आ रही हूँ… मैं…” वह चीखी और एक ज़ोरदार झटके के साथ झड़ गई।
उसका पानी मेरे मुँह में भर गया। मैंने उसका सारा रस पी लिया। वह थक कर चारपाई पर गिर गई।
थोड़ी देर बाद उर्मिला ने अपनी आँखें खोलीं। उसके चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान थी।
“रामू, यह पहली बार किसी ने मुझे ऐसा महसूस कराया है,” उसने कहा।
“तुम्हारे पति?” मैंने पूछा।
“वो तो महीने में एक बार आते हैं और वो भी दो मिनट में निपटा देते हैं,” उसने गुस्से में कहा।
मैंने अपने कपड़े उतार दिए। मेरा लंड पहले से ही कड़ा हो चुका था, करीब 7 इंच लंबा और मोटा। जब उर्मिला ने मेरा लंड देखा, तो उसकी आँखें बड़ी हो गईं।
“इतना बड़ा?” वह हैरान थी।
“डरो मत,” मैंने कहा और उसके पास लेट गया।
मैंने उसे किस किया। हमारे शरीर एक-दूसरे से चिपक गए। मेरा लंड उसकी जांघों के बीच में था। मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को रगड़ना शुरू किया।
“आह… डाल दो… अंदर डाल दो…” वह बेकरार हो रही थी।
मैंने धीरे से अपने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत के मुँह पर रखा। वह गीली थी, इसलिए आसानी से अंदर जाने लगा।
“धीरे… धीरे…” वह कराही।
मैंने एक धक्का दिया और आधा लंड अंदर चला गया। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि मुझे लगा जैसे कोई चिमटी पकड़े हुए हो।
“बहुत मोटा है…” वह साँसें ले रही थी।
मैंने दूसरा धक्का दिया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया। मेरे लंड के बाल उसकी चूत के बालों से मिल गए।
“आह… रामू… मर गई…” वह चीखी।
मैंने उसके ऊपर लेटकर उसके स्तनों को पकड़ लिया और धक्के देने शुरू किए। धीरे-धीरे, फिर तेज़-तेज़।
“ठप… ठप… ठप…” की आवाज़ कमरे में गूंज रही थी।
“और ज़ोर से… और तेज़…” वह चीख रही थी।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। मेरा लंड उसकी चूत में पिस्टन की तरह अंदर-बाहर हो रहा था। उसकी चूत का पानी मेरे लंड को गीला कर रहा था, जिससे आवाज़ और तेज़ हो रही थी।
“चोदो मुझे… चोदो…” वह गालियाँ दे रही थी।
मैंने उसके पैरों को ऊपर उठाया और उसके कंधों के पास रख दिया। अब मेरा लंड और गहराई तक जा रहा था। मेरा सुपाड़ा उसकी चूत के गहरे हिस्से को छू रहा था।
“गहरा… बहुत गहरा…” वह पागल हो रही थी।
मैंने 15-20 मिनट तक उसे इसी पोजीशन में चोदा। फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया। वह चारों खानों चित हो गई और मैंने पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया।
“ओह… यह तो और अंदर जा रहा है…” वह चीखी।
इस पोजीशन में मेरा लंड उसकी चूत की पिछली दीवार को छू रहा था। मैंने उसकी कमर पकड़ी और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने शुरू किए।
“ठप… ठप… ठप…”
“मैं झड़ने वाली हूँ… और तेज़ करो…” वह चिल्लाई।
मैंने पूरी ताकत से धक्के दिए। वह एक बार फिर झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया और मसलने लगी।
“मैं भी आ रहा हूँ…” मैंने कहा।
“अंदर ही डाल दो… मैं गोली खाती हूँ…” वह बोली।
मैंने एक आखिरी ज़ोरदार धक्का दिया और मेरा लंड उसकी चूत में फट पड़ा। मेरा गाढ़ा वीर्य उसकी चूत की गहराई में भर गया। मैंने करीब 10-15 सेकंड तक अपना लंड उसी में रखा और उसका सारा रस उसकी चूत में छोड़ दिया।
उस रात के बाद, उर्मिला और मेरे बीच का रिश्ता बदल गया। अब वह सिर्फ़ पड़ोसन नहीं थी, वह मेरी प्रेमिका थी, मेरी रखैल थी।
अगली सुबह जब मैं उठा, तो वह जा चुकी थी। लेकिन चारपाई पर उसकी सुगंध थी, और एक चिट्ठी जिस पर लिखा था: “रात को आना, ससुराल वाले नहीं हैं।”
पूरे दिन मैं उसी ख्याल में खोया रहा। शाम को जब मैं उसके घर गया, तो दरवाज़ा खुला था। मैं अंदर गया, वह बेडरूम में सजी हुई थी। लाल रंग की साड़ी, गजरे से सजे बाल, और आँखों में काजल।
“क्या लग रही हो,” मैंने कहा।
“तुम्हारी होने के लिए तैयार,” वह मुस्कुराई।
वह उठी और मेरे पास आई। उसने मेरे गाल पर किस किया और मेरा हाथ पकड़कर बेडरूम में ले गई।
“आज पूरी रात तुम्हारी हूँ,” उसने कहा।
बेडरूम में मोमबत्तियाँ जल रही थीं। बिस्तर पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछी हुई थीं। उर्मिला ने मेरे सामने अपनी साड़ी उतारी। आज उसने लाल रंग की लैंगरी पहनी थी – ब्रा और पैंटी दोनों।
“तुमने यह सब मेरे लिए किया?” मैंने पूछा।
“हाँ, मैं चाहती हूँ कि हमारी हर रात यादगार हो,” वह बोली।
मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया। हमने एक लंबा किस किया। मेरी जीभ उसके मुँह की गहराई में जा रही थी। उसकी जीभ मेरी जीभ से लिपटी हुई थी।
मैंने उसकी ब्रा खोली। उसके स्तन आज़ाद हो गए। मैंने एक स्तन को मुँह में लिया और दूसरे को हाथ से मसला। वह मेरे बालों में उंगलियाँ फेर रही थी।
“आह… रामू… बहुत मज़ा आ रहा है…”
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी पैंटी उतार दी। उसकी चूत आज साफ़ शेव थी, बिल्कुल चिकनी। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर फिराई।
“ओह… हाँ… वहीं…”
मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। मेरी जीभ उसकी चूत के अंदर-बाहर हो रही थी। वह अपनी कमर हवा में उठा रही थी। फिर मैंने उसकी क्लिटोरिस को चूसा।
“आह… मर गई…”
वह झड़ गई। उसका पानी मेरी जीभ पर आया, मैंने उसे चाट लिया।
आज रात हमने कई पोजीशन ट्राई कीं। पहले मिशनरी, फिर डॉगी स्टाइल, फिर काउगर्ल।
जब वह मेरे ऊपर बैठी, तो उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उसकी कमर पकड़ी और नीचे से धक्के देने लगा।
“और तेज़… और तेज़…” वह चीख रही थी।
उसकी चूत मेरे लंड को पूरी तरह निगल चुकी थी। वह ऊपर-नीचे हो रही थी, और मैं नीचे से धक्के दे रहा था।
फिर हमने साइड बाय साइड पोजीशन ट्राई की। मैंने पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाला और उसके स्तनों को पकड़कर धक्के दिए।
“यह तो और अंदर जा रहा है…” वह कराही।
उस रात हमने तीन बार सेक्स किया। हर बार वह झड़ी और हर बार मैंने अपना वीर्य उसकी चूत में भरा।
सुबह होने से पहले, हम एक-दूसरे की बाहों में लेटे हुए थे।
“रामू, क्या तुम मुझसे शादी करोगे?” उसने पूछा।
“लेकिन तुम तो शादीशुदा हो,” मैंने कहा।
“मैं तलाक ले लूँगी, मैं नहीं रह सकती उसके साथ,” उसने कहा।
मैंने उसे किस किया। “मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगा,” मैंने कहा।
उसके बाद से, उर्मिला और मैं रोज़ मिलने लगे। कभी उसके घर, कभी मेरे घर, कभी खेतों में, कभी नदी के किनारे।
एक दिन हम खेतों में मिले। वह पानी लेने आई थी और मैं खेत जोत रहा था। जब कोई नहीं देख रहा था, मैंने उसे खेतों में पकड़ लिया।
“यहाँ कोई आ जाएगा,” वह डरी।
“कोई नहीं आएगा,” मैंने कहा और उसे खेतों में लिटा दिया।
मैंने उसकी साड़ी ऊपर उठाई और उसकी चूट में अपना लंड डाल दिया। धूप में, खेतों में, हम दोनों चुदाई कर रहे थे। पसीने से हमारे शरीर तर थे, लेकिन हम रुकने वाले नहीं थे।
“और तेज़… और तेज़…” वह चीख रही थी।
मैंने उसे खेतों में ही चोदा और अपना वीर्य उसकी चूत में डाल दिया।
एक और दिन, हम नदी के किनारे मिले। वह नहाने आई थी। मैंने उसे पानी में ही पकड़ लिया।
“यहाँ कोई देख लेगा,” वह शर्मा रही थी।
“पानी में कोई नहीं देखेगा,” मैंने कहा।
मैंने उसे पानी में ही नंगा किया और उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया। पानी का झाग हमारे चारों ओर था। वह मेरे ऊपर लटकी हुई थी और मैं नीचे से धक्के दे रहा था।
“पानी के अंदर ही मज़ा आ रहा है…” वह कह रही थी।
गाँव में हमारे रिश्ते की खबर फैलने लगी। कुछ औरतें उर्मिला से जलने लगीं, कुछ उससे दोस्ती करना चाहती थीं।
एक दिन, गाँव की सरपंच की बीवी सरिता ने उर्मिला को बुलाया। सरिता की उम्र 35 साल थी, लेकिन वह अभी भी जवान दिखती थी। उसके पति अक्सर शहर जाते रहते थे।
“उर्मिला, मैंने सुना है तुम और रामू…” सरिता ने शुरुआत की।
“क्या सुना है?” उर्मिला ने पूछा।
“अच्छा है, मुझे भी कोई चाहिए,” सरिता ने कहा।
उर्मिला ने मुझे बताया। मैंने सोचा, क्यों ना एक साथ दोनों को चोदूँ?
अगले दिन, हम तीनों सरिता के घर मिले। सरिता ने शराब निकाली और हम तीनों ने पी।
“रामू, तुम्हारा लंड कितना बड़ा है?” सरिता ने पूछा।
“देख लो,” मैंने अपने कपड़े उतार दिए।
मेरा लंड पहले से ही कड़ा था। दोनों औरतें उसे देखकर हैरान थीं।
“इतना बड़ा?” सरिता ने हाथ में लिया।
“मुझे भी चाहिए,” उर्मिला ने कहा।
दोनों ने मेरा लंड चूसना शुरू किया। एक सुपाड़ा चूस रही थी, तो दूसरी अंडकोश चाट रही थी। मैं स्वर्ग में था।
फिर मैंने सरिता को चोदना शुरू किया। वह उर्मिला से ज़्यादा एक्सपीरियंस्ड थी। उसने अलग-अलग पोजीशन बताईं।
“ऐसे करो… और तेज़…”
उर्मिला उसके स्तन चूस रही थी और मैं उसकी चूत चोद रहा था। फिर हमने स्विच किया। उर्मिला की चूत में मेरा लंड गया और सरिता के स्तन मैं चूस रहा था।
वो रात हम तीनों ने साथ बिताई। दोनों औरतें मेरे लंड से संतुष्ट हुईं।
अब हम और खुले हो गए। एक दिन उर्मिला ने कहा, “रामू, मैं चाहती हूँ कि हम खुलेआम करें।”
“कैसे?” मैंने पूछा।
“मेरे घर के बरामदे में,” वह बोली।
उस दिन दोपहर को, जब सब सो रहे थे, हम उसके बरामदे में मिले। वह पूरी नंगी थी, मैंने भी कपड़े उतार दिए।
मैंने उसे दीवार से सटाया और पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया।
“ओह… कोई देख लेगा…” वह कह रही थी, लेकिन मज़ा भी आ रहा था।
धूप में, खुले बरामदे में, मैं उसे चोद रहा था। उसकी चूत से आवाज़ें आ रही थीं “ठप… ठप…”
“और तेज़… और तेज़…”
मैंने पूरी ताकत से धक्के दिए और उसकी चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया।
हमने कई नई चीज़ें ट्राई कीं। एक दिन उर्मिला ने कहा, “मैंने सुना है, पीछे से भी करते हैं।”
“तुम चाहती हो?” मैंने पूछा।
“हाँ, ट्राई करते हैं,” वह बोली।
मैंने उसे घोड़ी बनाया और उसकी गांड में थूक लगाया। फिर धीरे से अपने लंड का सुपाड़ा उसकी गांड के छेद पर रखा।
“धीरे से… पहली बार है,” वह कह रही थी।
मैंने धीरे से धक्का दिया। उसकी गांड बहुत टाइट थी। थोड़ी देर में मेरा पूरा लंड अंदर चला गया।
“आह… बहुत मोटा है…” वह कराही।
मैंने धीरे-धीरे धक्के देने शुरू किए। फिर तेज़ हो गया।
“मज़ा आ रहा है… और तेज़ करो…”
उसकी गांड चोदने में और भी मज़ा आ रहा था। वह बहुत टाइट थी। मैंने 20 मिनट तक उसकी गांड चोदी और फिर अंदर ही झड़ गया।
छह महीने बीत गए। उर्मिला के पति आ गए थे और वह शहर जाने वाली थी।
आखिरी रात, हमने पूरी रात सेक्स किया। हमने हर पोजीशन में चुदाई की। वह रो रही थी, मैं भी उदास था।
“रामू, मैं तुम्हें कभी नहीं भूलूँगी,” वह कह रही थी।
“मैं भी नहीं,” मैंने कहा।
मैंने उसकी चूत, उसकी गांड, उसके मुँह – हर जगह अपना वीर्य डाला। हमने 10 बार सेक्स किया उस रात।
सुबह जब वह जाने लगी, तो उसने एक चिट्ठी दी। उस पर लिखा था: “तुम्हारी उर्मिला, हमेशा।”
मैंने उसे देखते रहे जब तक वह सड़क पर से ओझल नहीं हो गई।
यह थी मेरी और उर्मिला की कहानी। एक गाँव की अनोखी पड़ोसन जिसने मुझे प्यार करना सिखाया, सेक्स करना सिखाया, और जीना सिखाया।
आज भी जब मैं उसके घर के सामने से गुज़रता हूँ, तो उसकी याद आती है। उसके स्तन, उसकी चूत, उसकी गांड – सब कुछ याद आता है।
शायद कभी फिर मिलें, शायद ना मिलें। लेकिन यह यादें, यह रातें, यह चुदाई – यह हमेशा मेरे दिल में रहेंगी।
New Sex Story :- Saas Ne Beti Ke Pati Se Chudwaya
New Sex Story :- ऑफिस में लेट नाइट ओवरटाइम