
आज मैं उसके बेडरूम की प्रॉपर्टी बन गई
गायत्री शर्मा 24 साल की एक जवान, हसीन और खूबसूरत लड़की थी। उसका बदन ऐसा था कि कोई भी मर्द उसे देखकर मदहोश हो जाए। उसकी हाइट 5 फुट 6 इंच थी और वजन करीब 55 किलो – एकदम परफेक्ट फिगर। आज मैं उसके बेडरूम की प्रॉपर्टी बन गई
उसके स्तन मध्यम आकार के थे, लगभग 34 इंच के, एकदम गोल और उठे हुए, जो किसी भी कपड़े में उसका आकार साफ दिखाते थे। उसकी कमर बेहद पतली थी, 28 इंच की, जो उसके ऊपरी और निचले हिस्से के बीच एक खूबसूरत वक्र बनाती थी। लेकिन सबसे खास थी उसकी गांड – 36 इंच की, एकदम गोल, उठी हुई और मक्खन जैसी मुलायम। जब वो चलती थी तो उसकी गांड ऐसे हिलती थी जैसे कोई जेलरी हो।
उसका चेहरा गोरा और बेदाग था। बड़ी-बड़ी काली आंखें जिनमें हमेशा एक शरारती चमक रहती थी। लंबे काले बाल जो उसकी कमर तक आते थे और जब वो हवा में उड़ते तो लगता जैसे कोई परी हो। उसके होंठ गुलाबी, मुलायम और चूसने के लिए एकदम बने थे।
उस शाम गायत्री खास तौर पर तैयार हो रही थी। आज वो कमल से मिलने जा रही थी और उसे पता था कि आज कुछ खास होने वाला है। उसने अपनी अलमारी से सबसे खूबसूरत साड़ी निकाली – हल्की नीली रंग की शिफॉन साड़ी जो थोड़ी पारदर्शी थी। साड़ी पर सुनहरी किनारी थी जो रोशनी में चमकती थी।
उसने साड़ी के साथ एक डीप नेक ब्लाउज पहना जो उसके स्तनों को बखूबी दिखा रहा था। ब्लाउज का रंग साड़ी से थोड़ा गहरा नीला था और पीछे से डोरी वाला था जिससे उसकी पीठ की खूबसूरती साफ दिख रही थी। ब्लाउज इतना टाइट था कि उसके स्तनों का आकार साफ नजर आ रहा था और निपल्स की उभार भी हल्की सी दिख रही थी।
अंदर उसने सफेद रंग की लेस वाली ब्रा और मैचिंग पैंटी पहनी थी। ये उसके गोरे बदन पर बहुत खूबसूरत लग रहे थे।
उसने कानों में लंबे सिल्वर झुमके पहने जो उसके गालों को छूते थे। गले में एक पतली चांदी की चेन, कलाई पर सफेद चूड़ियां, और पैरों में चांदी की पायल। उसने हल्का मेकअप किया – गुलाबी लिपस्टिक जो उसके होंठों को और भी रसीला बना रही थी, थोड़ा आईलाइनर जो उसकी आंखों को और बड़ा दिखा रहा था, और गालों पर हल्का गुलाबी ब्लश।
वो आईने में देख रही थी और उसे खुद पर गर्व हो रहा था। वो एकदम तैयार थी कमल को अपना बनाने के लिए।
शाम के 5 बजे गायत्री अपने घर से निकली। उसने एक ऑटो लिया और कमल के अपार्टमेंट की तरफ चल पड़ी। रास्ते में उसके दिल की धड़कन तेज हो रही थी। वो सोच रही थी कि आज क्या होगा, कैसे होगा। उसके मन में उत्साह भी था और घबराहट भी।
उसने अपने फोन पर कमल का मैसेज देखा: “जल्दी आना, तुम्हारा इंतजार रहेगा।”
ये मैसेज पढ़कर उसके शरीर में एक अजीब सी लहर दौड़ गई। उसे लगा जैसे उसकी चूत में हल्की सी खुजली हो रही है। वो जानती थी कि आज वो कमल के बेडरूम में जाएगी और वहां कुछ खास होगा।
शाम के 6 बजे गायत्री कमल के अपार्टमेंट बिल्डिंग के सामने पहुंची। ये शहर का एक अमीर इलाका था। बिल्डिंग बहुत ऊंची और आलीशान थी। उसने लिफ्ट ली और 10वें फ्लोर पर पहुंची।
दरवाजे के सामने खड़ी होकर उसने अपनी सांसों को नियंत्रित किया। उसने अपनी साड़ी ठीक की, बालों में हाथ फेरा, और दरवाजे की बेल बजाई।
कुछ पलों में दरवाजा खुला और कमल सामने खड़ा था। उसने काली रंग की टी-शर्ट और डार्क जींस पहनी हुई थी। उसके बाहों में पंप्स दिख रहे थे और छाती चौड़ी थी। उसके चेहरे पर वो शरारती मुस्कान थी जो गायत्री को पागल कर देती थी।
“वाह गायत्री, तुम तो आज परी लग रही हो,” कमल ने कहा और उसे अंदर आने का इशारा किया।
“धन्यवाद कमल, तुम भी कम नहीं लग रहे,” गायत्री ने शर्माते हुए कहा और अंदर आ गई।
कमल का अपार्टमेंट बहुत बड़ा और शानदार था। लिविंग रूम में इटालियन सोफे थे, एक बड़ी सी एलईडी टीवी, और फर्श पर महंगा कालीन बिछा हुआ था। एक तरफ बड़ी सी खिड़की से शहर का नजारा दिख रहा था।
लेकिन गायत्री का ध्यान उस कमरे पर गया जो सबसे अंदर था – कमल का बेडरूम। दरवाजा थोड़ा खुला था और अंदर से हल्की सी खुशबू आ रही थी। वो सोच रही थी कि उस कमरे में क्या-क्या होगा, कैसा होगा।
“बैठो, मैं कुछ पीने के लिए लाता हूं,” कमल ने कहा और किचन की तरफ गया।
गायत्री सोफे पर बैठ गई। उसकी नजरें बार-बार उस बेडरूम के दरवाजे पर जा रही थीं। उसे लग रहा था जैसे वो दरवाजा उसे बुला रहा हो। वो सोच रही थी कि आज वो उसी कमरे में जाएगी और कमल उसे अपना बना लेगा।
कमल वापस आया और उसके हाथ में दो गिलास थे। एक में रेड वाइन थी और दूसरे में ऑरेंज जूस।
“लो, तुम्हारे लिए जूस,” कमल ने जूस का गिलास उसे दिया।
“तुम वाइन पी रहे हो?” गायत्री ने पूछा।
“हां, आज थोड़ा सेलिब्रेट करने का मन है। वैसे भी, आज तुम आई हो तो जश्न तो बनता है,” कमल ने आंख मारते हुए कहा।
गायत्री को उसकी ये बात अच्छी लगी। वो उसके करीब बैठ गया और उनकी बातें शुरू हुईं। वो कॉलेज की यादें साझा कर रहे थे, पुरानी बातें कर रहे थे। लेकिन दोनों के बीच एक अलग सी तनावपूर्ण माहौल बन रहा था – एक सेक्सुअल टेंशन जो दोनों महसूस कर रहे थे।
कमल का हाथ धीरे से गायत्री के हाथ पर आ गया। उसकी उंगलियां उसकी कोमल त्वचा को छू रही थीं। गायत्री ने अपना हाथ नहीं हटाया। वो उसके छूने का आनंद ले रही थी। उसके शरीर में एक हल्की सी झनझनाहट हो रही थी।
“तुम्हें पता है गायत्री, मैं पहले दिन से ही तुम्हें पसंद करता हूं,” कमल ने अचानक कहा और उसकी आंखों में देखा।
गायत्री ने उसकी तरफ देखा। उसकी आंखों में सच्चाई थी और कुछ और भी – एक जलन, एक चाहत, एक हवस।
“मैं भी…” गायत्री ने हल्की आवाज में कहा।
कमल ने उसका हाथ पकड़ लिया और अपने हाथों में भर लिया। उसकी उंगलियां उसकी उंगलियों में फंस गईं। “तो फिर आज हम कुछ खास कर सकते हैं?”
गायत्री समझ गई कि वो क्या कह रहा था। उसके दिल की धड़कन तेज हो गई। उसके पेट में तितलियां उड़ने लगीं। वो चाहती थी कि हां, आज कुछ खास हो, लेकिन वो शर्मा भी रही थी।
“मतलब?” उसने नाटकीय ढंग से पूछा, जानबूझकर।
“मतलब ये कि आज मैं तुम्हें अपने बेडरूम में ले जाना चाहता हूं,” कमल ने सीधे कह दिया, उसकी आंखों में एक जोश था।
गायत्री का चेहरा लाल हो गया। उसने नीचे देख लिया। उसके मन में हजारों विचार आ रहे थे। क्या वो तैयार थी? क्या ये सही समय था? लेकिन उसके दिल में एक आवाज कह रही थी – हां, तुम तैयार हो, तुम ये चाहती हो, तुम कमल को चाहती हो।
“ठीक है,” उसने बहुत ही धीमी आवाज में कहा, लगभग फुसफुसाते हुए।
कमल ने मुस्कुराते हुए उसका हाथ पकड़ा और उसे खड़ा किया। वो उसे अपने बेडरूम की तरफ ले जाने लगा। गायत्री के पैर कांप रहे थे, लेकिन वो चल रही थी। उसकी पायल की खनखनाहट कमरे में गूंज रही थी।
जैसे-जैसे वो बेडरूम के करीब पहुंच रही थी, उसकी सांसें तेज हो रही थीं। वो देख रही थी कि बेडरूम का दरवाजा थोड़ा खुला है और अंदर से हल्की सी रोशनी आ रही है।
कमल ने दरवाजा पूरी तरह खोला और गायत्री को अंदर ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया। वो आवाज से दरवाजा लॉक हो गया।
कमल का बेडरूम बहुत बड़ा और आलीशान था। बीच में एक विशाल बेड था जिस पर सफेद चादरें बिछी हुई थीं और गोल तकिए रखे थे। एक तरफ बड़ी अलमारी थी, और दूसरी तरफ एक बड़ा आईना जिसमें बेड का पूरा नजारा दिखता था। कमरे में हल्की सी खुशबू थी – पुरुषों वाली परफ्यूम की जो गायत्री को बहुत पसंद आ रही थी।
एक तरफ बेडसाइड टेबल पर एक लैंप जल रहा था जिसकी पीली रोशनी कमरे को एक रोमांटिक माहौल दे रही थी। एयर कंडीशनर चल रहा था और कमरा ठंडा था।
कमल ने गायत्री को बेड के पास खड़ा किया और खुद उसके सामने खड़ा हो गया। उसकी आंखों में एक अलग सी चमक थी – जैसे वो शिकार को देख रहा हो और अब उसे खाने का समय आ गया हो।
“तुम्हें पता है गायत्री, मैंने इस पल का इंतजार बहुत दिनों से किया है,” कमल ने कहा और उसके चेहरे पर अपना हाथ फेरा। उसकी उंगलियां उसके गालों पर, फिर उसके होंठों पर चल रही थीं।
गायत्री ने अपनी आंखें बंद कर लीं। उसे उसके हाथ की गर्माहट महसूस हो रही थी। कमल ने उसके गाल को छुआ और फिर धीरे से उसकी ठोड़ी को उठाया।
“देखो मेरी तरफ,” कमल ने कहा।
गायत्री ने आंखें खोलीं। कमल का चेहरा उसके बहुत करीब था। उसकी सांसें उसके चेहरे पर महसूस हो रही थीं। और फिर, कमल ने धीरे से अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।
पहली चुंबन थी। नरम, प्यार भरी, लेकिन फिर भी पूरी तरह से भावुक। कमल ने धीरे-धीरे उसके होंठों को चूसना शुरू किया। गायत्री ने भी अपनी आंखें बंद कर लीं और उसके चुंबन का जवाब देने लगी।
कमल का एक हाथ उसकी कमर पर था और दूसरा हाथ उसके बालों में फंसा हुआ था। वो उसे अपनी तरफ खींच रहा था, और गायत्री भी उसकी तरफ बढ़ रही थी। उसके स्तन कमल की छाती से दब रहे थे।
चुंबन और गहरी हो गई। कमल ने अपनी जीभ से उसके होंठों को खोला और अंदर घुसने की कोशिश की। गायत्री ने अपने दांतों को थोड़ा खोला और कमल की जीभ अंदर आ गई। दोनों की जीभें एक-दूसरे से मिलीं और एक नृत्य करने लगीं – एक सेक्सुअल डांस जो दोनों को उत्तेजित कर रहा था।
गायत्री को ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी और दुनिया में पहुंच गई हो। उसके शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी। उसके निपल्स कड़े होने लगे थे और उसकी चूत में गीली होने लगी थी। वो कमल को और करीब खींच रही थी।
कमल ने चुंबन तोड़ी और उसके गालों पर, आंखों पर, नाक पर चूमने लगा। फिर वो उसके गर्दन पर उतर गया। उसने गायत्री के गले पर अपने होंठ रखे और चूसने लगा, काटने लगा।
“आह… कमल… धीरे…” गायत्री ने एक हल्की सी आवाज निकाली।
“पसंद आया?” कमल ने पूछा, उसकी सांसें तेज थीं।
“हां… बहुत…” गायत्री ने शर्माते हुए कहा।
कमल ने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया और उसके कंधे पर चूमने लगा। उसकी साड़ी का ब्लाउज डीप नेक था जिसमें से उसका गोरा बदन दिख रहा था। कमल ने उसके कंधों पर किस किया और फिर उसके गले के नीचे उतरा।
“तुम बहुत खूबसूरत हो गायत्री, मैं तुम्हें देखते ही पागल हो जाता हूं,” कमल ने कहा और उसके ब्लाउज के ऊपर से ही उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया।
गायत्री ने अपने हाथों से बेड का सहारा लिया। उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक रही हो। कमल के हाथ उसके स्तनों पर थे और वो उन्हें मसल रहा था, दबा रहा था। उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी सपने में हो।
“कमल…” उसने धीमी आवाज में कहा।
“हां बेबी, बोलो,” कमल ने कहते हुए उसके ब्लाउज के पीछे के डोरी खोलने शुरू किए।
एक-एक करके डोरी खुलने लगीं और गायत्री का ब्लाउज ढीला हो गया। कमल ने आगे के बटन भी खोल दिए और ब्लाउज हटा दिया। अंदर सफेद रंग की लेस वाली ब्रा थी जो उसके स्तनों को ढक रही थी। लेकिन वो ब्रा भी उसके बढ़े हुए स्तनों को पूरी तरह से नहीं ढक पा रही थी – ऊपर से थोड़ा गोरा हिस्सा दिख रहा था।
“वाह, क्या माल है,” कमल ने उसके स्तनों को देखते हुए कहा, उसकी आंखों में हवस थी।
गायत्री ने शर्म से अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया। लेकिन कमल ने उसका चेहरा वापस अपनी तरफ किया और फिर से उसके होंठों पर चुंबन करने लगा। इस बार चुंबन और भी जोशिली थी।
कमल ने उसे कसकर पकड़ लिया था और उसके शरीर को अपने शरीर से सटा लिया था। गायत्री महसूस कर सकती थी कि कमल का लिंग कितना कड़ा हो चुका था। वो उसके पेट पर दब रहा था, उसकी कमर से टकरा रहा था।
“तुम्हें पता है गायत्री, आज के बाद तुम मेरी हो जाओगी,” कमल ने चुंबन तोड़ते हुए कहा।
“मतलब?” गायत्री ने पूछा, हालांकि वो समझ रही थी।
“मतलब ये कि आज मैं तुम्हें पूरी तरह से अपना बना लूंगा। तुम मेरे बेडरूम की प्रॉपर्टी बन जाओगी – मेरी हो, मेरे कब्जे में,” कमल ने कान में फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज में एक दबंगई थी।
गायत्री को उसकी ये बात अजीब लगी लेकिन अच्छी भी लगी। वो चाहती थी कि कमल उसे अपना बना ले, उसे पूरी तरह से अपने कब्जे में ले ले।
“मैं तैयार हूं,” उसने कहा, उसकी आवाज कांप रही थी।
कमल ने गायत्री को बेड पर बैठने के लिए कहा। वो बेड के किनारे बैठ गई और कमल उसके सामने खड़ा हो गया। उसने अपनी टी-शर्ट उतारी और उसका जिम में तराशा हुआ बदन सामने आ गया।
उसकी छाती चौड़ी थी और पेट एकदम फ्लैट। बाहों में पंप्स थे और कंधे चौड़े। उसके शरीर पर हल्के-हल्के बाल थे जो उसे और भी मर्दाना बना रहे थे। उसकी जींस के ऊपर से उसके लिंग की उभार साफ दिख रही थी।
“तुम्हें पसंद आया?” कमल ने पूछा।
गायत्री ने हां में सिर हिलाया। उसे कमल का बदन बहुत पसंद आ रहा था। वो चाहती थी कि वो उसे छुए, उसे चूमे।
कमल ने अपनी जींस भी उतार दी। अब वो सिर्फ अंडरवियर में था और उसका अंडरवियर भी उसके कड़े लिंग को ढक नहीं पा रहा था। एक बड़ी सी उभार साफ दिख रही थी जो गायत्री को देखकर और भी बड़ी हो रही थी।
“अब तुम्हारी बारी,” कमल ने कहा।
गायत्री खड़ी हुई और कमल ने उसकी मदद की। उसने पहले उसकी साड़ी खोली। साड़ी धीरे-धीरे उसके शरीर से फिसलती हुई नीचे गिर गई। अब वो सिर्फ ब्लाउज (जो पहले ही खुला हुआ था) और पेटीकोट में थी।
कमल ने उसका ब्लाउज पूरी तरह से उतार दिया। उसकी सफेद लेस वाली ब्रा सामने थी जिसमें से उसके गोरे स्तनों का ऊपरी हिस्सा दिख रहा था। कमल ने उसकी ब्रा के पीछे का हुक खोला और वो भी उतर गई।
गायत्री के स्तन आजाद हो गए। वो मध्यम आकार के थे लेकिन एकदम सही आकार में। निपल्स गुलाबी रंग के थे और कड़े हो चुके थे। कमल की आंखें उसके स्तनों पर टिक गईं।
“क्या खूबसूरती है,” कमल ने कहा और उसके स्तनों को अपने हाथों में भर लिया।
गायत्री ने अपनी आंखें बंद कर लीं। कमल के हाथ उसके स्तनों पर थे और वो उन्हें मसल रहा था, दबा रहा था, उंगलियों से निपल्स को कुचल रहा था। उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो स्वर्ग में हो।
“तुम्हारे स्तन एकदम परफेक्ट हैं,” कमल ने कहा और फिर एक स्तन को अपने मुंह में ले लिया।
गायत्री की सांसें तेज हो गईं। कमल ने अपनी जीभ से उसके निपल को चाटना शुरू किया और फिर चूसने लगा। दूसरे हाथ से वो दूसरे स्तन को दबा रहा था।
“आह… कमल… धीरे…” गायत्री ने कहा।
लेकिन कमल धीरे नहीं कर रहा था। वो और जोर से चूसने लगा। उसकी जीभ उसके निपल के चारों ओर घूम रही थी और फिर वो दूसरे स्तन पर चला गया।
गायत्री का पेटीकोट भी उतार दिया गया। अब वो सिर्फ पैंटी में थी। उसकी सफेद पैंटी भी गीली हो चुकी थी और उसके अंदर के हिस्से का आकार साफ दिख रहा था – उसकी चूत की उभार।
कमल ने उसे बेड पर लेटा दिया और खुद उसके ऊपर आ गया। उसने उसके पैरों के बीच में अपना एक पैर रखा और उसकी पैंटी पर हाथ फेरने लगा।
“तुम तो पहले से ही गीली हो चुकी हो,” कमल ने मुस्कुराते हुए कहा।
गायत्री ने शर्म से अपना चेहरा हाथों में छुपा लिया। लेकिन कमल ने उसके हाथ हटाए और उसके होंठों पर चुंबन करने लगा।
कमल ने गायत्री की पैंटी उतार दी। अब वो पूरी तरह से निर्वस्त्र थी। उसकी चूत बिल्कुल साफ थी, कोई बाल नहीं थे। गुलाबी रंग की चूत जो पानी से तर हो चुकी थी। उसकी चूत की दरार साफ दिख रही थी और अंदर से गीली हो रही थी।
“वाह, क्या गजब की चूत है तुम्हारी,” कमल ने कहा और उसकी चूत को देखने लगा।
गायत्री ने अपने पैरों को थोड़ा खोला ताकि कमल अच्छे से देख सके। कमल ने अपनी उंगली उसकी चूत पर रखी और धीरे से अंदर डालने की कोशिश की।
“उम्म…” गायत्री ने आवाज निकाली।
“दर्द हो रहा है?” कमल ने पूछा।
“नहीं, बस अजीब सा लग रहा है,” गायत्री ने कहा।
कमल ने अपनी उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया। गायत्री को मजा आने लगा। उसकी चूत और गीली हो गई और कमल की उंगली आसानी से अंदर-बाहर होने लगी। वो उंगली को घुमा रहा था, उसकी चूत की दीवारों को छू रहा था।
“कमल… प्लीज… अब और मत तड़पाओ,” गायत्री ने कहा।
“क्या चाहिए तुम्हें?” कमल ने शरारत से पूछा।
“तुम्हें… तुम्हारा…” गायत्री ने शर्माते हुए कहा।
“क्या? मेरा क्या?” कमल ने पूछा।
“तुम्हारा लिंग… मुझे चोदो प्लीज,” गायत्री ने आखिरकार कह ही दिया।
कमल ने मुस्कुराते हुए अपना अंडरवियर उतार दिया। उसका लिंग बाहर आ गया। वो लगभग 7 इंच का था और काफी मोटा। उसके ऊपर नसें उभरी हुई थीं और सिर लाल हो चुका था। नीचे अंडे भी बड़े-बड़े थे।
गायत्री ने उसके लिंग को देखा और उसकी आंखें बड़ी हो गईं। वो इतना बड़ा था कि उसे डर लगने लगा कि कहीं ये उसकी चूत में जाएगा भी या नहीं।
“डरो मत, मैं धीरे से करूंगा,” कमल ने समझाते हुए कहा।
कमल ने बेड के पास रखे कंडोम का पैकेट उठाया और एक निकाला। उसने कंडोम अपने लिंग पर चढ़ाया और फिर गायत्री के पैरों के बीच आ गया।
“तैयार हो?” कमल ने पूछा।
“हां,” गायत्री ने कहा और अपने पैरों को और खोल दिया।
कमल ने अपने लिंग का सिरा उसकी चूत के मुंह पर रखा और धीरे से धक्का दिया।
पहले तो सिरा ही अंदर गया और गायत्री को थोड़ा दर्द महसूस हुआ। उसकी चूत काफी तंग थी क्योंकि वो कुछ समय से सेक्स नहीं कर रही थी।
“आह… धीरे कमल… दर्द हो रहा है,” गायत्री ने कहा।
“रिलैक्स करो, थोड़ी देर में मजा आने लगेगा,” कमल ने कहा और थोड़ा रुक गया।
वो उसके ऊपर लेट गया और उसके स्तनों को चूसने लगा। इससे गायत्री का ध्यान दर्द से हट गया और वो रिलैक्स होने लगी। कमल ने फिर से धक्का दिया और इस बार आधा लिंग अंदर चला गया।
“उम्म्म…” गायत्री ने आंखें बंद करते हुए आवाज निकाली।
कमल ने धीरे-धीरे अपने लिंग को अंदर-बाहर करना शुरू किया। धीरे-धीरे गायत्री को मजा आने लगा। दर्द की जगह अब एक अजीब सी खुशी महसूस हो रही थी।
“और अंदर डालो…” गायत्री ने कहा।
कमल ने एक जोरदार धक्का दिया और पूरा लिंग अंदर चला गया। गायत्री की चीख निकल गई लेकिन फिर वो शांत हो गई। कमल का पूरा लिंग उसकी चूत में था और वो महसूस कर सकती थी कि वो कितना गहरा जा रहा था।
“कैसा लग रहा है?” कमल ने पूछा।
“बहुत अच्छा… अब चोदो मुझे,” गायत्री ने कहा।
कमल ने धक्के लगाने शुरू किए। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज-तेज। उसका लिंग गायत्री की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था और चपचप की आवाजें आ रही थीं।
गायत्री ने अपने पैरों को कमल की कमर के चारों ओर लपेट लिया और उसे और अपनी तरफ खींचने लगी। वो चाहती थी कि वो और गहरा जाए, और जोर से उसे चोदे।
“ओह… कमल… और तेज… और तेज…” गायत्री ने कहा।
कमल ने अपनी गति बढ़ा दी। वो अब पूरी तेजी से उसे चोद रहा था। बेड पर थपथप की आवाजें गूंज रही थीं और दोनों की सांसें तेज हो चुकी थीं।
“तुम्हारी चूत बहुत मस्त है गायत्री… इतनी टाइट… इतनी गर्म,” कमल ने कहते हुए धक्के लगाए जा रहे थे।
गायत्री के मुंह से अब बस आहें और उहें निकल रही थीं। उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी और ही दुनिया में पहुंच गई हो। उसके शरीर में एक अजीब सी लहर दौड़ रही थी जो उसे पागल कर रही थी।
“मैं झड़ने वाली हूं…” गायत्री ने कहा।
“रुको, मैं भी आ रहा हूं,” कमल ने कहा।
दोनों ने एक साथ अपनी गति तेज कर दी। कमल जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और गायत्री नीचे से अपनी कमर उठा-उठा कर उसका साथ दे रही थी।
और फिर, एक साथ दोनों ने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया। गायत्री झड़ गई और उसकी चूत ने रस छोड़ दिया। कमल ने भी अपना वीर्य कंडोम में ही छोड़ दिया और गायत्री के ऊपर गिर पड़ा।
दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए लेटे रहे। कमल ने अपना लिंग बाहर निकाला और कंडोम फेंक दिया। फिर वो गायत्री के बगल में आकर लेट गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया।
“कैसा लगा?” कमल ने पूछा।
“बहुत अच्छा… ये मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा अनुभव था,” गायत्री ने कहा और उसके छाती पर सिर रख दिया।
कुछ देर आराम करने के बाद, कमल फिर से उत्तेजित होने लगा। उसका लिंग फिर से खड़ा हो गया और वो गायत्री को देखने लगा जो उसके बगल में लेटी हुई थी।
“एक बार और करें?” कमल ने पूछा।
गायत्री ने मुस्कुराते हुए हां में सिर हिलाया। वो भी फिर से तैयार थी।
इस बार कमल ने उसे डॉगी स्टाइल में चोदने का सोचा। उसने गायत्री को घुटनों और हाथों के बल होने के लिए कहा। गायत्री उठी और बेड पर घुटनों और हाथों के बल हो गई। उसकी गांड ऊपर की तरफ थी और कमल उसे पीछे से देख रहा था।
“क्या गांड है तुम्हारी,” कमल ने कहा और उसकी गांड पर थप्पड़ मारा।
“आह…” गायत्री ने आवाज निकाली।
कमल ने उसकी गांड को सहलाया और फिर उसकी चूत पर अपना लिंग रखा। एक जोरदार धक्के के साथ उसने पूरा लिंग अंदर डाल दिया।
“ओह माय गॉड…” गायत्री ने चिल्लाते हुए कहा।
पीछे से चुदाई में लिंग और भी गहरा जाता था। गायत्री को बहुत मजा आ रहा था। कमल ने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए।
“चप चप चप” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। गायत्री के स्तन आगे-पीछे हो रहे थे और कमल उसे पूरी तरह से चोद रहा था।
“कमल… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…” गायत्री ने कहा।
कमल ने अपनी गति और तेज कर दी। वो अब पूरी तरह से जानवर बन चुका था और उसे बस चोदना चाहता था। उसका लिंग गायत्री की चूत में पूरी तरह से घुस-निकल हो रहा था।
“तुम मेरी हो गायत्री… मेरी प्रॉपर्टी हो…” कमल ने कहते हुए धक्के लगाए जा रहे थे।
“हां… मैं तुम्हारी हूं… तुम्हारी प्रॉपर्टी हूं… चोदो मुझे…” गायत्री ने कहा।
कमल ने उसके बाल पकड़े और उसका सिर पीछे खींचा। अब उसकी पीठ थोड़ी ऊपर उठ गई और कमल और भी गहरा जा पा रहा था।
“ऐसे ही… और गहरा… आह…” गायत्री ने कहा।
कमल ने लगातार 15-20 मिनट तक उसे इसी पोजीशन में चोदा। फिर उसने अपना लिंग बाहर निकाला और गायत्री को पलटा दिया।
“अब तुम ऊपर आओ,” कमल ने कहा।
गायत्री समझ गई। वो काउगर्ल पोजीशन में आ गई। उसने कमल के लिंग को पकड़ा और अपनी चूत पर रखा। फिर धीरे से बैठ गई।
पूरा लिंग अंदर चला गया और गायत्री ने अपनी आंखें बंद कर लीं। वो ऊपर-नीचे होने लगी और कमल नीचे से धक्के लगा रहा था।
इस पोजीशन में गायत्री को पूरा नियंत्रण था। वो जैसे चाहे वैसे हिल सकती थी। उसने अपनी गति तेज कर दी और कमल के लिंग पर जोर-जोर से बैठने लगी।
“ओह गॉड… गायत्री… तुम तो एकदम पोर्नस्टार की तरह कर रही हो,” कमल ने कहा।
गायत्री ने मुस्कुराते हुए अपने स्तनों को कमल के मुंह के पास लाए। कमल ने एक स्तन को पकड़ा और चूसने लगा। गायत्री और भी तेज हो गई।
“मैं झड़ने वाली हूं… कमल…” गायत्री ने कहा।
“मैं भी… साथ में आते हैं,” कमल ने कहा।
दोनों ने एक साथ अपनी गति तेज कर दी। गायत्री जोर-जोर से ऊपर-नीचे हो रही थी और कमल नीचे से धक्के लगा रहा था। और फिर, एक साथ दोनों ने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया।
गायत्री झड़ गई और उसकी चूत ने रस छोड़ दिया। कमल ने भी अपना वीर्य कंडोम में ही छोड़ दिया। गायत्री कमल के ऊपर गिर पड़ी और दोनों एक-दूसरे से लिपटे रहे।
रात हो चुकी थी और दोनों थके हुए थे, लेकिन उनकी हवस अभी भी शांत नहीं हुई थी। वो पूरी रात एक-दूसरे को चोदते रहे, अलग-अलग पोजीशन में, अलग-अलग तरीकों से।
कभी कमल ऊपर होता, कभी गायत्री। कभी साइड में, कभी खड़े होकर। हर बार नया मजा, नया अनुभव।
सुबह 4 बजे जब दोनों पूरी तरह से थक चुके थे, तब वो एक-दूसरे से लिपटकर सो गए।
सुबह की रोशनी खिड़की से आ रही थी। गायत्री अपनी आंखें खोली और कमल को अपने बगल में देखा। वो अभी भी सो रहा था। उसने उसके माथे पर चूमा और फिर खुद को देखा।
वो पूरी तरह से निर्वस्त्र थी और बेडशीट में लिपटी हुई थी। उसके शरीर पर कमल के चुंबनों और काटने के निशान थे। उसकी चूत में हल्का सा दर्द था, लेकिन एक अजीब सी खुशी भी थी।
कमल भी जाग गया। उसने गायत्री को देखा और मुस्कुराया।
“कैसी हो मेरी प्रॉपर्टी?” कमल ने कहा।
गायत्री ने शर्माते हुए कहा, “तुम्हारी प्रॉपर्टी बहुत खुश है।”
दोनों ने फिर से एक-दूसरे को चूमा और फिर साथ में बाथरूम में गए। नहाते समय भी दोनों ने एक-दूसरे को छुआ, चूमा, और फिर एक बार और बाथरूम में ही चुदाई की।
उस दिन के बाद गायत्री कमल की हो गई। वो उसके बेडरूम की प्रॉपर्टी बन गई – उसकी गर्लफ्रेंड, उसकी रखैल, उसकी सब कुछ।
वो अक्सर उसके अपार्टमेंट में आती और पूरी रात उसके साथ बिताती। कमल का बेडरूम उनकी चुदाई का गवाह बन गया। वहां हर कोने में, हर जगह, हर पोजीशन में उन्होंने सेक्स किया।
गायत्री आज भी याद करती है उस पहली रात को जब वो कमल के बेडरूम में प्रवेश की और उसकी प्रॉपर्टी बन गई। वो रात उसकी जिंदगी की सबसे यादगार रात थी।
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