दिवाली की सफाई में भाभी की चुदाई
हैलो दोस्तों। कैसे हो आप सब? मैं आपका दोस्त, अपनी एक और सच्ची घटना लेकर आया हूं — और ये वो घटना है जो इस दिवाली की सफाई के दौरान मेरे और मेरी भाभी के बीच हुई। हां वही भाभी, जिसे देखकर मेरा लंड खुद-ब-खुद खड़ा हो जाता था। दिवाली की सफाई में भाभी की चुदाई
पहले परिचय दे देता हूं, फिर आपका टाइम बर्बाद नहीं करता।
मेरा नाम आदित्य है, उम्र 24 साल, हाइट 5 फुट 10 इंच, बॉडी थोड़ी दुबली पर मस्कुलर। जिम जाता हूं, तो शेप में हूं। और हां, वो चीज़ भी कुछ कम नहीं — लंड लगभग 7 इंच का, मोटा और सीधा।
अब सुनिए भाभी के बारे में। मेरी भाभी का नाम रिया (बदला हुआ नाम) है। उम्र 29 साल, हाइट 5 फुट 4 इंच। रंग गोरा-सांवला, गालों पर हल्की लाली। भाभी का बदन बहुत कसा हुआ है — उभरे हुए भरे बूब्स, चौड़े गोल कूल्हे और मांसल गांड। कमर पतली, जिससे उनका पूरा शरीर घंटी जैसा लगता है। नाभि गहरी और साफ़।
भाभी घर में ज्यादातर साड़ी या ढीली सूती कुर्ती-सलवार ही पहनती हैं। घर की सारी सफाई, रसोई, सब वो खुद संभालती हैं। और जब भी वो झुककर कुछ उठाती हैं या कपड़े तानती हैं, तो उनका पीछा इतना साफ दिखता है कि नज़र हटानी मुश्किल हो जाती है। भैया दूध की डेयरी चलाते हैं, तो सुबह-शाम घर पर कम रहते हैं।
ये तो हो गया परिचय। अब बढ़ते हैं असल कहानी की तरफ, और जो ज़रूरी बात होगी, बीच-बीच में बताता रहूंगा। दिवाली की सफाई में भाभी की चुदाई
तो हुआ यूं कि दिवाली बस एक हफ्ते दूर थी, और घर में सफाई-कलर का काम शुरू हो चुका था। हमारे यहां सब लोग ज्यादातर रात में ही सफाई और पुताई का काम करते हैं, क्योंकि दिन में सब अपने काम पर होते हैं। भैया को उसी वक्त दिवाली के लिए दुकान का माल लेने बाहर के शहर जाना पड़ा — पूरे तीन दिन का प्रोग्राम। मां-पापा भी उसी हफ्ते नानी के घर गए हुए थे। घर में अब बस मैं, भाभी और उनकी दो साल की बेटी।
भाभी को अपने और भैया के कमरे की सफाई और पुताई का काम करना था। चूंकि भैया थे नहीं, तो मां ने कह दिया — “आदित्य मदद कर देगा।” भाभी ने शाम करीब साढ़े सात बजे काम शुरू किया।
दोस्तों, सारा काम आराम से चलता रहा। बच्ची आज मां के कमरे में सोई थी, क्योंकि सारा सामान इधर-उधर फैला हुआ था। बस मैं और भाभी काम में लगे हुए थे। भाभी ने सफाई के लिए पुरानी सूती साड़ी पहनी हुई थी, जिसमें पल्लू छोटा करके कमर में खोंस लिया था। पीछे से कमर और गांड का उभार साफ दिख रहा था, और ऊपर ब्लाउज भी उन्होंने ढीला-सा पहना था, जिससे बूब्स का हल्का हिस्सा झलक रहा था। दिवाली की सफाई में भाभी की चुदाई
काम करते-करते रात के साढ़े ग्यारह बज गए, और काम बस खत्म ही होने वाला था। भाभी कमरे के कोने में झाड़ू लगा रही थीं। जब वो सामान के नीचे झुकीं, तो उनकी साड़ी पीछे से चिपक गई और गांड की दरार में फंस गई। मैं एकटक देखता रह गया।
फिर भाभी ने पसीना पोंछते हुए कहा —
भाभी: “आदित्य, सारा काम हो गया है। तुम चाहो तो अब जाकर नहा लो और आराम करो। मैं भी दस-पंद्रह मिनट में बचा हुआ काम करके नहा कर सो जाऊंगी।”
मैं: “ठीक है भाभी, मैं जाता हूं फिर।”
मैं अपने कमरे की तरफ बढ़ा ही था कि भाभी ने पीछे से कहा —
भाभी: “आदित्य… कमर में बहुत दर्द हो रहा है। दिन भर झुक-झुक कर सफाई की। ज़रा सरसों का तेल ले आ, थोड़ा सेक कर दे।”
मैंने कहा ठीक है, और आंगन में रखी सरसों के तेल की बोतल उठा लाया।
भाभी ने कमरे के बीचों-बीच जमीन पर एक चादर बिछाई और उस पर पेट के बल लेट गईं, और साड़ी को धीरे से कमर तक ऊपर सरका लिया। दोस्तों, जो नज़ारा मेरे सामने था, वो कम नहीं था — कमर का खुला हिस्सा, गहरी नाभि, और उससे ठीक ऊपर भाभी की चौड़ी, मांसल गांड, जो पतली लेगिंग में भरी हुई उभर रही थी।
मैंने तेल हाथों पर लिया और कमर पर लगाने लगा। शुरुआत में दोनों चुप थे। बस तेल की खुशबू और भाभी की धीमी सांसों की आवाज़। दिवाली की सफाई में भाभी की चुदाई
भाभी: “आदित्य… थोड़ा नीचे भी लगा दे, कमर के नीचे भी दर्द है।”
अब मेरा हाथ कमर के नीचे, यानी गांड के ठीक ऊपर वाले हिस्से पर पहुंच गया। जैसे ही उंगलियां वहां फिसलीं, भाभी के मुंह से हल्की सी “उफ़” निकल गई।
मैं: “दर्द हो रहा है भाभी?”
भाभी: “नहीं… नहीं, लगाते रहो। अच्छा लग रहा है।”
बस फिर क्या था। मैं तेल हाथों में लेकर पूरी गांड और कूल्हों पर धीरे-धीरे मालिश करने लगा। भाभी की गांड इतनी मुलायम और भरी हुई थी कि हाथ वहीं अटक जाता। मैंने थोड़ी हिम्मत करके अंगूठों से उनकी गांड की दरार के दोनों तरफ दबाना शुरू किया। भाभी की सांसें तेज़ हो गईं, वो धीरे-धीरे सिसकारने लगीं। दिवाली की सफाई में भाभी की चुदाई
और फिर अचानक उन्होंने पलट कर मेरी तरफ देखा — आंखों में वही नशा, वही वासना।
भाभी: “आदित्य… तेरे हाथ में बड़ा दम है।”
मैं: “आपके बदन में है भाभी, हाथ में क्या है।”
मैंने तेल हाथ में लेकर सीधे उनकी गांड पर लगाया और दोनों हाथों से मालिश करने लगा। भाभी की कमर बेकाबू होकर हिलने लगी। तभी मैंने एक हाथ उनकी पीठ के नीचे से आगे बढ़ाया और सीधे उनके भारी बूब्स पर रख दिया — तेल और पसीने से भीगे, बिल्कुल गर्म। दिवाली की सफाई में भाभी की चुदाई
भाभी: “आह्ह… आदित्य…”
मैं: “भाभी, ब्लाउज उतार दें? तेल लगाने में आसानी होगी।”
भाभी ने बिना जवाब दिए खुद ही उठीं और ब्लाउज सिर के ऊपर से निकाल दिया। नीचे उन्होंने ब्रा नहीं पहना था। दोस्तों, जो भरे हुए गोल बूब्स देखे, निप्पल खड़े हुए, गहरे गुलाबी — उस पर तो मैं पागल ही हो गया।
भाभी फिर पेट के बल लेट गईं। अब मैं उनकी नंगी पीठ पर तेल डालकर मालिश करने लगा, और मेरी उंगलियां कमर से नीचे फिसल कर पेटीकोट की कमर पर पहुंचीं। मैंने धीरे से पेटीकोट को नीचे खींचना शुरू किया। भाभी ने कमर उठाकर सहयोग किया, और पेटीकोट घुटनों से नीचे सरक गया। नीचे उन्होंने पैंटी भी नहीं पहनी थी।
यानी भाभी अब पूरी तरह नंगी थीं, सिर्फ गले में मंगलसूत्र, कानों में झुमके और हाथों में चूड़ियां। उनकी गांड के बीच की दरार और नीचे की गीली चूत का हल्का झलक मैं साफ देख पा रहा था।
मैंने अपनी निकर उतार दी। लंड पूरे शबाब पर तना हुआ। जैसे ही मैं उनके ऊपर झुका, मेरा लंड सीधे उनकी गांड की दरार पर आ टिका। दिवाली की सफाई में भाभी की चुदाई
भाभी ने एक गहरी सांस ली और धीरे से बोलीं — “आदित्य… अंदर कर दे।”
मैंने कोई इंतज़ार नहीं किया। हाथ से लंड पकड़ा और उनकी चूत के मुंह पर रखा। चूत पहले से ही तेल और गीलापन से फिसलन भरी थी। मैंने एक ही झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
भाभी: “आह्ह्ह… हां… आहhh…”
उनकी चूत इतनी गर्म और टाइट थी कि लगा अभी खतम हो जाऊंगा। पर मैंने खुद को संभाला और धीरे-धीरे धक्के देने लगा। पेट के बल की पोज़िशन में मेरा लंड उनकी चूत की सबसे ऊपर की दीवार से रगड़ खा रहा था, और हर धक्के पर भाभी की गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। दिवाली की सफाई में भाभी की चुदाई
भाभी: “धीरे… धीरे आदित्य… बच्ची जाग जाएगी।”
मैंने उनके दोनों कूल्हे पकड़ लिए और अब तेज़, गहरे धक्के देने लगा। चूत की पकड़ इतनी मजबूत थी कि हर बार लंड बाहर आते ही चूत का मुंह चिपचिपाते हुए पकड़ लेता। भाभी ने मुंह चादर में दबा लिया और ज़ोर से सिसकारने लगीं। दिवाली की सफाई में भाभी की चुदाई
करीब दस मिनट इसी पोज़िशन में चुदाई के बाद भाभी की चूत से गाढ़ा पानी बह निकला। मैंने लंड बाहर निकाला और भाभी को पलटकर चित लिटा दिया।
अब उनके सामने की सारी चीज़ मेरे सामने थी — भरे बूब्स जो अब तक हिल रहे थे, फैली हुई गोरी जांघें, और बीच में लाल, फूली हुई, पानी से भीगी चूत, जिसके ऊपर का उभार साफ दिख रहा था। मैंने भाभी के दोनों पैर कंधों पर उठाए और लंड फिर उनकी चूत पर रखा।
भाभी: “आदित्य, अब ज़ोर से करो।”
मैंने पूरी ताकत से धक्के देने शुरू किए। हर धक्के पर भाभी की चूड़ियां खनकतीं, पायल बजती और बूब्स ऊपर-नीचे उछलते। भाभी अब आवाज़ नहीं रोक पा रहीं थीं — “आह… आह… आह… आदित्य… मर गई…” — और अपने हाथों से मेरी पीठ खरोंच रही थीं। दिवाली की सफाई में भाभी की चुदाई
मैंने झुककर उनके निप्पल अपने मुंह में ले लिए और चूसने लगा। भाभी की चूत और भी कसने लगी।
भाभी: “अब… अब आ गया…”
मैंने आखिरी तीन-चार बहुत तेज़ और गहरे धक्के दिए, और भाभी की चूत मेरे लंड को पूरी तरह निचोड़ने लगी। भाभी का पूरा शरीर अकड़ गया, नाखून मेरी पीठ में धंस गए, और एक लंबी आह के साथ उनका सारा नियंत्रण छूट गया। मैंने भी उसी समय पूरा माल उनकी चूत के अंदर ही उंडेल दिया — गरम, गाढ़ा, झर-झर। दिवाली की सफाई में भाभी की चुदाई
दोनों लंबी सांसें भरते हुए वैसे ही लिपटे पड़े रहे। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत के अंदर धड़क रहा था।
फिर भाभी ने मेरी छाती पर अपना हाथ रखा, आंखों में देखा और मुस्कुरा कर बोलीं —
भाभी: “पता है आदित्य, तेरे भैया इतनी देर तक कभी नहीं करते। आज तो लगा दिवाली पहले ही मन गई।”
मैं हंस पड़ा। “तो भाभी, अगली बार भैया जब भी बाहर जाएं, मुझे पहले ही बता देना।”
भाभी ने मेरे कान में धीरे से कहा — “अब तू रोज़ आ। भैया चाहे घर पर हो या न हो, मुझे तो सफाई के बहाने कमर में दर्द रोज़ होता है।” दिवाली की सफाई में भाभी की चुदाई
बस, यहीं खत्म हुई वो रात। पर अगली सुबह जब भाभी नहाकर निकलीं, उन्होंने सिर्फ गीली साड़ी पहनी थी, अंदर कुछ नहीं। और जब वो आंगन में चलीं, तो पता चल गया कि ये सिलसिला अब खत्म होने वाला नहीं है।
क्या हुआ अगली सुबह, और कैसे एक बार भैया के घर होते हुए भी भाभी मेरे साथ सोई — वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा।
तो दोस्तों, ये थी मेरी कहानी। कैसी लगी, कमेंट में ज़रूर बताएं। गलतियां होना स्वाभाविक है, मैं कोई प्रोफेशनल लेखक नहीं हूं।
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