बस में मिली कॉलेज लड़की की चूत की कहानी
भाग 1: पहली मुलाकात
दिल्ली की धूल भरी सड़कें, भीड़ भाड़ वाले मेट्रो स्टेशन, और हर रोज़ की भागमभाग। मैं एक साधारण लड़का था, दिल्ली का रहने वाला, जो हर सुबह बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से उतरता था और ग्रेटर नोएडा की बस पकड़कर अपनी नौकरी पर जाता था। बस में मिली कॉलेज लड़की की चूत की कहानी
वो दिन भी किसी और दिन की तरह शुरू हुआ था। सुबह 8 बजे की भीड़, लोगों का धक्का-मुक्की, और मैं अपने ईयरफोन लगाकर अपनी दुनिया में खोया हुआ। तभी एक धक्का लगा और मेरा फोन हाथ से छूटकर नीचे गिर गया।
“ओह, सॉरी!” एक मीठी आवाज़ आई।
मैंने झुककर अपना फोन उठाया और जब ऊपर देखा तो मेरी आँखें वहीं टिक गईं। सामने एक लड़की खड़ी थी, करीब 19-20 साल की, कॉलेज की यूनिफॉर्म में। उसके बाल कंधे तक आते थे, हल्का कर्ल उनमें था। उसकी आँखें… वो काली, गहरी आँखें जिनमें एक मासूमियत और शरारत का मिश्रण था।
“कोई बात नहीं,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।
“मैं गीता,” उसने हाथ आगे बढ़ाया, “और तुम?”
“राहुल,” मैंने हाथ मिलाया, उसके हाथ की नरमी ने कुछ पल के लिए मुझे चौंका दिया।
“सॉरी फिर से, मैं जल्दी में थी,” वो शर्माते हुए बोली।
“कोई बात नहीं, दिल्ली की मेट्रो में तो यही होता है,” मैंने कहा।
हम दोनों एक ही दिशा में जा रहे थे। बस स्टॉप पर खड़े होकर हम बातें करने लगे। पता चला कि वो एक प्राइवेट कॉलेज में पढ़ती थी, और मैं उसी रास्ते पर नौकरी करने जाता था। बस में मिली कॉलेज लड़की की चूत की कहानी
“नंबर… शेयर कर लें?” मैंने हिम्मत करके पूछा, “कभी-कभार बात हो जाएगी।”
उसने कुछ पल सोचा, फिर मुस्कुराते हुए अपना नंबर दे दिया।
भाग 2: दोस्ती का सफर
शुरुआत में हमारी बातें सामान्य थीं। गुड मॉर्निंग, कैसे हो, खाना खाया… लेकिन धीरे-धीरे हमारी बातें गहरी होने लगीं।
एक रात करीब 11 बजे उसका मैसेज आया: “राहुल, तुम सोए नहीं अभी तक?”
“नहीं, तुम?”
“मुझे नींद नहीं आ रही। अकेली महसूस कर रही हूँ।”
“क्यों? क्या हुआ?”
“पता नहीं… मेरे कोई दोस्त नहीं बनते। मैं बहुत रिज़र्व हूँ। लोग मुझे अजीब समझते हैं।”
मैंने उसे समझाया, “तुम अजीब नहीं हो, बस थोड़ा शर्मीली हो। और ये कोई बुरी बात नहीं है।”
“तुम मुझे समझते हो ना?” उसने पूछा।
“हाँ, बिल्कुल।”
उस रात हम 3 बजे तक बातें करते रहे। उसने अपने बारे में बताया – कैसे उसके माता-पिता सख्त थे, कैसे उसे कॉलेज के बाद सीधे घर जाना पड़ता था, कैसे उसने कभी किसी लड़के से दोस्ती नहीं की। बस में मिली कॉलेज लड़की की चूत की कहानी
“तुम मेरे पहले असली दोस्त हो,” उसने कहा।
मैंने उसे प्रपोज़ नहीं किया। हम बस दोस्त थे, लेकिन एक अलग तरह की दोस्ती जिसमें कुछ और भी था, कुछ जो शब्दों में नहीं कहा जा सकता था।
भाग 3: दिल्ली दर्शन और रोमांटिक पल
एक हफ्ते बाद मैंने उसे प्रपोज़ किया: “आओ, दिल्ली घूमते हैं। तुमने कभी पूरा दिल्ली देखा है?”
“नहीं, मम्मी-पापा कहीं जाने नहीं देते,” वो उदास होकर बोली। बस में मिली कॉलेज लड़की की चूत की कहानी
“तो छुट्टी वाले दिन चलेंगे। बहाना बना लेना – कॉलेज का प्रोजेक्ट या कुछ।”
उसने मान लिया।
हमारा पहला स्टॉप था लाल किला। सुबह 9 बजे, सर्दियों की धूप, और वो मेरे बगल में चल रही थी। उसने नीली जींस और सफेद कुर्ता पहना था, बाल खुले छोड़े थे।
“वाह!” वो किले को देखकर चौंकी, “ये तो बहुत बड़ा है!”
मैंने उसे इतिहास बताया, कैसे शाहजहाँ ने इसे बनवाया, कैसे यहाँ स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराया जाता है।
दीवारों के पास चलते समय, भीड़ में एक अचानक धक्का लगा और वो मुझसे टकराई। मेरा हाथ उसकी कमर पर चला गया उसे संभालने के लिए। हमारी आँखें मिलीं। कुछ सेकंड, या शायद कुछ मिनट… समय रुक सा गया।
“सॉरी,” मैंने हाथ हटाते हुए कहा।
“कोई बात नहीं,” वो शर्माते हुए बोली, उसके गालों पर एक हल्की सी लाली थी।
अगला स्टॉप था कुतुब मीनार। वहाँ एक कोने में, जहाँ कोई नहीं था, मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।
“राहुल…” वो चौंकी।
“बस एक पल के लिए,” मैंने कहा, “तुम्हारा हाथ बहुत ठंडा है।”
उसने विरोध नहीं किया। हम हाथ पकड़े-पकड़ाए मीनार के इर्द-गिर्द घूमे। फिर एक जगह जहाँ पत्थर की बेंच थी, हम बैठ गए।
“तुम बहुत अच्छे हो,” उसने कहा, “मैंने कभी सोचा नहीं था कि कोई लड़का मुझे इतना समझेगा।”
“तुम भी बहुत खास हो, गीता।”
उसने मेरी तरफ देखा। मैंने भी उसकी तरफ देखा। हमारे चेहरे करीब थे। मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था। मैंने धीरे से आगे बढ़ा और उसके गाल पर एक हल्का सा चूमा लगा दिया।
वो पल भर के लिए स्तब्ध रही, फिर शर्मा कर नीचे देखने लगी।
“मुझे माफ़ करना अगर…” मैंने कहना शुरू किया।
“चुप,” उसने मेरी उंगली मेरे होंठों पर रखकर कहा, “कुछ मत कहो।”
शाम को हम बंगला साहिब गए। वहाँ की शांति, सरोवर का पानी, और शाम की आरती। हम दोनों वहाँ बैठे, हाथों में हाथ डाले। कोई हमें बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड नहीं मान रहा था, लेकिन हम दोनों जानते थे कि ये दोस्ती से ज्यादा था।
अगले हफ्ते हम साइबर सिटी, गुर्गांव गए। वहाँ के ऊँचे-ऊँचे टावर, रोशनी, और रात का माहौल। हमने एक रेस्टोरेंट में खाना खाया। मोमबत्ती की रोशनी में उसका चेहरा इतना खूबसूरत लग रहा था कि मैं खाना भूलकर उसे ही देखता रहा। बस में मिली कॉलेज लड़की की चूत की कहानी
“क्या देख रहे हो?” उसने पूछा।
“तुम्हें,” मैंने सच कहा।
उसने मुस्कुराते हुए अपना हाथ मेज़ पर रखा। मैंने अपना हाथ उसके ऊपर रख दिया। हमारी उँगलियाँ एक-दूसरे में उलझ गईं।
भाग 4: वो रात और उसका डर
एक महीने बाद, हमारी दोस्ती गहरी हो चुकी थी। हम रोज़ बात करते, कभी-कभी मिलते, और हर मुलाकात में कुछ नया, कुछ और करीबी।
एक शाम मैंने उसे फोन किया: “आज क्या कर रही हो?”
“कुछ खास नहीं, घर पर हूँ।”
“आओ ना, आज कहीं चलते हैं।”
“कहाँ?”
मैंने हिम्मत करके कहा: “होटल चलें? थोड़ा अकेले में समय बिताएँ। बहुत दिन हो गए तुमसे मिले।”
फोन पर अचानक शांति छा गई। कुछ सेकंड बाद उसकी आवाज़ आई, लेकिन वो अलग थी, गुस्से में या शायद डरी हुई।
“राहुल, तुम्हें क्या लगता है मैं कौन हूँ?” वो चिल्लाई, “मैं कोई… कोई…” वो रोने लगी, “मैं तुम्हारे साथ ऐसा कुछ नहीं कर सकती।”
“गीता, सुनो…” मैंने समझाने की कोशिश की।
“नहीं, मत बोलो!” उसने फोन काट दिया।
मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या हुआ। मैंने उसे मैसेज किए, फोन किए, लेकिन वो नहीं उठा रही थी। मुझे लगा कि मैंने सब खो दिया, कि मेरी एक गलती ने हमारी दोस्ती तोड़ दी।
लेकिन मैं नहीं जानता था कि उस रात उसके साथ क्या हुआ।
भाग 5: उसकी रात – अनकही बात
उस रात, जब हमारी बात बीच में ही टूट गई, गीता अपने कमरे में अकेली बैठी रो रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्यों इतना रिएक्ट कर रही है। वो मुझे पसंद करती थी, ये वो जानती थी। लेकिन होटल… वो शब्द उसके लिए अजनबी था, डरावना।
उसके माता-पिता की सख्ती ने उसे हमेशा एक खोल में रखा था। “लड़कों से दूर रहो,” “अच्छी लड़कियाँ ऐसा नहीं करतीं,” “शादी से पहले कुछ नहीं” – ये बातें उसके दिमाग़ में भरी हुई थीं।
लेकिन साथ ही, एक और भाव था। एक जिज्ञासा, एक चाहत। वो मुझे देखकर क्या महसूस करती थी, वो खुद नहीं समझ पा रही थी।
रात के 2 बजे, जब वो सो नहीं पा रही थी, उसने अपना फोन उठाया। इंस्टाग्राम खोला, और अनजाने में उसने कुछ हैशटैग्स सर्च किए। #कपल #collegesex #Couplesex #रोमांस #लव…
फिर कुछ और वीडियोज़ आईं। शुरू में वो देखकर शर्मा गई, फोन नीचे रख दिया। लेकिन फिर से उठाया। एक वीडियो, फिर दूसरा, फिर तीसरा…
वो वीडियोज़ उसके लिए नए थे। उसने कभी ऐसा कुछ नहीं देखा था। लेकिन देखते-देखते, उसे समझ आया कि वो क्यों डर रही थी। वो डर रही थी अपनी ही भावनाओं से, अपनी इच्छाओं से।
उस रात उसने बहुत सारे वीडियोज़ देखे। और जब सुबह उठी, तो उसने एक फैसला किया।
भाग 6: वो दिन – मुलाकात
तीन दिन बाद मुझे उसका मैसेज आया: “मिलोगे?”
“कहाँ? कब?” मैंने तुरंत जवाब दिया।
“आज शाम। वही जगह, बॉटनिकल गार्डन के पास।”
मैं वहाँ पहुँचा तो वो पहले से मौजूद थी। और जो मैंने देखा, वो मैं कभी नहीं भूल सकता।
उसने एक हरे रंग का क्रॉप टॉप पहना था, जो उसकी कमर पर ठीक खत्म होता था। काली, बिल्कुल फिटेड ट्राउजर जो उसकी लंबी टांगों को और आकर्षक बना रही थी। उसकी आँखों में काजल, और होंठों पर हल्का गुलाबी लिपस्टिक।
“गीता…” मैं उसके पास गया, “तुम…”
“चलो,” उसने मुस्कुराते हुए कहा, “आज मैं तुम्हें कहीं लेकर जाना चाहती हूँ।”
“कहाँ?”
वो शर्माते हुए बोली, “वहीं… जहाँ तुम ले जाना चाहते थे।”
मुझे समझने में कुछ पल लगे, फिर मेरी आँखें चौड़ी हो गईं। “तुम्हें… तुम्हें यकीन है?”
“हाँ,” उसने कहा, “लेकिन पहले थोड़ा घूमें?”
हम दोनों ने मिलकर कुछ समय बिताया। कॉफी पी, बातें कीं। वो अलग थी आज, ज्यादा खुला, ज्यादा बोलने वाली। उसने मुझे बताया कि उस रात उसने क्या महसूस किया, कैसे उसे समझ आया कि वो मुझसे क्या चाहती थी।
“मैं डरी हुई थी, राहुल,” उसने कहा, “डरी हुई थी अपने आप से। लेकिन अब नहीं।”
शाम ढलने लगी थी। मैंने एक होटल बुक किया, एक अच्छा सा, साफ-सुथरा, जहाँ कोई सवाल नहीं पूछेगा।
भाग 7: होटल का कमरा
कमरा साधारण था लेकिन साफ। एक बड़ा बेड, सफेद चादरें, और खिड़की से आती हुई शाम की हल्की रोशनी।
जब हम अंदर आए, तो गीता थोड़ा घबरा रही थी। मैंने उसे आराम से बैठने के लिए कहा।
“पानी पीओगे?” मैंने पूछा।
“हाँ,” उसने कहा, उसकी आवाज़ हल्की कांप रही थी।
मैंने उसे पानी दिया। वो पीते-पीते मुझे देख रही थी। मैंने उसके पास बैठा, धीरे से उसका हाथ पकड़ा।
“डर रही हो?” मैंने पूछा।
“थोड़ा,” उसने सच कहा, “ये मेरे लिए पहली बार है।”
“हम कुछ नहीं करेंगे जो तुम नहीं चाहती,” मैंने वादा किया, “मैं यहीं हूँ, तुम्हारे साथ।”
उसने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन मुस्कान भी थी।
“शेव… शेव किया है मैंने,” उसने शर्माते हुए कहा, “तुमने कहा था ना कि…”
मैं समझ गया। मैंने एक बार मज़ाक में कहा था कि मुझे क्लीन शेव पसंद है। और उसने याद रखा।
“तुम बहुत खूबसूरत हो,” मैंने धीरे से कहा।
मैंने धीरे से उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। उसकी आँखों में देखा। फिर धीरे-धीरे उसके करीब आया। हमारे होंठ मिले।
पहले तो हल्का, शर्माता हुआ चुंबन था। फिर गहरा, प्यार भरा। उसके होंठ नरम थे, मीठे। मैंने धीरे से उसकी कमर में हाथ डाला और उसे अपनी ओर खींचा।
हमारे शरीर एक-दूसरे से मिले। मुझे उसकी धड़कन महसूस हो रही थी, तेज़, घबराहट भरी। लेकिन उसने मुझे धक्का नहीं दिया।
“राहुल…” उसने मेरी गर्दन में साँस लेते हुए कहा।
“हाँ?”
“प्यार से… प्यार से करना।”
भाग 8: पहला स्पर्श
मैंने उसे बेड पर बैठने के लिए कहा। वो बैठ गई, मैं उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। मैंने धीरे से उसके जूते उतारे। उसके पैर छोटे, सुंदर थे। मैंने उन पर हल्का चूमा किया।
“राहुल…” वो शर्मा गई।
“शhh… बस मुझे तुम्हें देखने दो,” मैंने कहा।
मैंने धीरे से उसके ट्राउजर के बटन खोले। वो कांप रही थी, लेकिन उसने रोकने की कोशिश नहीं की। मैंने ट्राउजर नीचे खींचा, धीरे-धीरे। वो सफेद रंग की पैंटी पहने हुए थी, साधारण लेकिन सुंदर।
मैंने उसके पैरों को सहलाया, फिर धीरे से ऊपर बढ़ा। उसकी जांघें कांप रही थीं। मैंने उन पर भी चूमे किए, हल्के, प्यार भरे।
“मुझे… मुझे अजीब लग रहा है,” उसने कहा।
“अच्छा अजीब या बुरा?” मैंने पूछा।
“पता नहीं… दोनों।”
मैंने उसे खड़ा किया। अब हम एक-दूसरे के सामने खड़े थे। मैंने धीरे से उसका टॉप उठाया, ऊपर की ओर। उसने हाथ ऊपर उठाए और मैंने टॉप निकाल दिया।
उसने एक सफेद रंग की ब्रा पहनी थी। उसकी त्वचा गोरी, नरम, बिल्कुल दूध की तरह। मैंने उसे देखा, उसकी खूबसूरती का जायज़ा लिया।
“तुम्हें पता है तुम कितनी खूबसूरत हो?” मैंने पूछा।
वो शर्मा कर नीचे देखने लगी। मैंने उसका चेहरा ऊपर उठाया और फिर से चूमा।
अब मेरे हाथ उसकी पीठ पर थे, फिर धीरे से ब्रा के हुक की ओर बढ़े। मैंने एक-एक करके हुक खोले। ब्रा ढीली हो गई। मैंने धीरे से आगे की ओर खींचा और वो उतर गई।
उसकी छाती… वो देखकर मेरी साँसें रुक सी गईं। गोल, सुडौल, गुलाबी निपल्स जो कसकस से कड़े हो रहे थे। मैंने धीरे से अपने हाथ उन पर रखे।
“आह…” उसकी से एक हल्की सी आवाज़ निकली।
मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया, उसकी नंगी छाती मेरी छाती से मिल रही थी। हम एक-दूसरे को कसकर पकड़े खड़े थे, हमारे दिल एक साथ धड़क रहे थे।
भाग 9: स्पर्शों की भाषा – विस्तृत वर्णन
गालों पर पहला चुंबन
मैंने उसे बेड के किनारे बैठने के लिए कहा। वो बैठ गई, उसके हाथ अपनी जांघों पर थे, उँगलियाँ कांप रही थीं। मैं उसके सामने घुटनों के बल बैठा, उसकी आँखों में देखा। वो शर्मा रही थी, पलकें झुकी हुई थीं।
“डरो मत,” मैंने धीरे से कहा, “बस मुझे तुम्हें महसूस करने दो।”
मैंने धीरे से अपने हाथ उसके गालों पर रखे। उसकी त्वचा गरम, नरम थी। मैंने एक गाल पर अपने होंठ रखे, हल्का सा चूमा, फिर धीरे से चूसा। वो स्तब्ध रही, उसकी साँसें थम सी गईं।
“आह…” एक हल्की सी आवाज़ उसके मुँह से निकली।
मैंने दूसरे गाल पर भी वैसे ही किया, इस बार थोड़ा लंबा, थोड़ा गहरा। मेरे होंथ उसकी त्वचा पर चिपके थे, मेरी जीभ ने हल्का सा स्वाद लिया। वो शर्म से लाल हो रही थी।
हाथों की पूजा
फिर मैंने उसके हाथ उठाए। छोटे, कोमल हाथ, नरम उँगलियाँ। मैंने एक-एक करके उसकी उँगलियों को चूमा, फिर उसकी हथेली पर अपने होंठ रखे। वो देख रही थी, उसकी आँखों में अजीब सा नशा था।
“तुम्हारे हाथ बहुत खूबसूरत हैं,” मैंने कहा, फिर उसकी कलाई के अंदरूनी हिस्से पर चूमा, जहाँ नसें धड़क रही थीं।
मैंने धीरे से उसके हाथ अपने कंधों पर रखे, फिर उसकी बाँहों पर चूमते हुए ऊपर बढ़ा। उसकी बाँहें कांप रही थीं, रोंगटे खड़े थे।
पेट पर चुंबन और टॉप उतारना
मैंने उसके सामने खड़े होकर उसके क्रॉप टॉप को ऊपर उठाया। वो थोड़ा ऊपर उठी ताकि मैं उसे निकाल सकूँ। मैंने धीरे से टॉप ऊपर किया, उसकी पेट की त्वचा दिखने लगी। हल्की सी तोंद, कोमल, गोरी।
टॉप अभी ऊपर नहीं हुआ था, बस पेट दिख रहा था। मैंने घुटनों के बल बैठकर उसके पेट पर चूमना शुरू किया। नाभि के चारों ओर, फिर नाभि के अंदर। मेरी जीभ ने उसकी नाभि को चखा।
“ऊह… राहुल…” वो कांप उठी, उसके हाथ मेरे बालों में चले गए।
मैंने धीरे से टॉप और ऊपर किया, अब उसकी ब्रा दिखने लगी थी। सफेद रंग की, कोमल कपड़े की। मैंने टॉप उसके सिर के ऊपर से निकाला और फेंक दिया।
वो अब ब्रा में थी, उसके गोल कंधे, कोमल गर्दन, और वो हरा रंग का क्रॉप टॉप जो अब बेड पर पड़ा था।
ब्रा पर चुंबन
मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही चूमना शुरू किया। पहले ब्रा की पट्टियाँ, फिर बीच का हिस्सा जहाँ ब्रा जुड़ती थी। मैंने अपना चेहरा उसकी छाती पर रखा, साँसें लीं, उसकी खुशबू सूँघी।
“तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो,” मैंने कहा।
मैंने ब्रा के कप के ऊपर से ही चूमा, हल्का सा दबाव डाला। वो कांप रही थी, उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं। मैंने एक हाथ उसकी पीठ के पीछे ले जाकर ब्रा के हुक की ओर बढ़ाया।
हाथ का सफर नीचे
मेरा दूसरा हाथ धीरे से उसकी जांघों पर आया। वो कांप उठी। मैंने धीरे से उसकी जांघ को सहलाया, फिर ऊपर की ओर बढ़ा। उसकी ट्राउजर अभी भी पहनी हुई थी, लेकिन मैं उसके ऊपर से ही वहाँ हाथ रखता रहा जहाँ गर्मी सबसे ज्यादा थी।
“राहुल… वहाँ…” वो शर्मा गई।
“क्या?” मैंने पूछा, हाथ वहीं रखे हुए।
“कुछ नहीं…” उसने नीचे देख लिया।
मैंने धीरे से दबाव डाला, वो एकदम सीधी हो गई, उसकी आँखें बंद हो गईं।
ब्रा उतारना और स्तनों की पूजा
मैंने अब पीछे से ब्रा के हुक खोलने शुरू किए। एक… दो… तीन… ब्रा ढीली हो गई। मैंने धीरे से आगे की ओर खींचा, उसने थोड़ा आगे झुककर मदद की, और ब्रा उतर गई।
उसकी छाती… वो दृश्य मैं कभी नहीं भूल सकता। दो गोल, सुडौल पहाड़ियाँ, गुलाबी चोटियाँ जो कसकस से कड़ी हो रही थीं। मैंने एक पल के लिए उसे देखा, उसकी खूबसूरती का जायज़ा लिया।
फिर मैंने धीरे से एक हाथ उठाया, एक स्तन को सहलाया। वो नरम, कोमल, गरम था। मैंने धीरे से दबाया, वो “आह…” कर उठी।
मैंने झुककर पहले एक निपल को होंठों में लिया। हल्का सा चूमा, फिर धीरे से चूसना शुरू किया। वो पागल हो रही थी, उसके हाथ मेरे सिर को और अपनी ओर दबा रहे थे।
“राहुल… और… और जोर से…” वो कह रही थी।
मैंने दूसरे निपल को भी वैसे ही चूसा, जीभ से चटखारे लिए, हल्के दाँतों से काटा। वो कराह रही थी, उसकी कमर ऊपर उठ रही थी।
कमर और पीठ पर चुंबन
मैंने उसे खड़ा किया। वो खड़ी हुई, मैं उसके पीछे गया। मैंने उसकी कमर पर, जहाँ ट्राउजर की लाइन थी, वहाँ चूमा। फिर धीरे से ऊपर बढ़ता गया, उसकी पीठ की हड्डियों के बीच, कंधों के बीच।
मैंने उसे घुमाया और अब उसकी पीठ मेरे सामने थी। मैंने उसकी पीठ पर चूमते हुए नीचे बढ़ा, कमर के नीचे, जहाँ उसकी गोलाई शुरू होती थी।
ट्राउजर और पैंटी उतारना
मैंने अब उसकी ट्राउजर के बटन खोले। धीरे से नीचे खींचा। वो थोड़ा पैर उठाकर मदद कर रही थी। ट्राउजर नीचे गई, अब वो सिर्फ सफेद पैंटी में थी।
मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से चूमा, वहाँ की गर्मी महसूस की। फिर धीरे से पैंटी के किनारे से अंदर हाथ डाला।
“राहुल… मैं… मैं कांप रही हूँ…” वो कह रही थी।
“शांत रहो,” मैंने कहा, “मैं हूँ ना।”
मैंने उसकी पैंटी नीचे खींची। वो पूरी तरह नंगी हो गई। उसका शरीर एकदम गोरा, चिकना, बिना बालों का, बिल्कुल क्लीन शेव।
चूत की सेवा
मैंने उसे फिर से बेड पर लिटा दिया। उसके पैर खुले थे। मैंने उसकी जांघों पर चूमते हुए ऊपर बढ़ा, फिर उसकी चूत के पास आया।
वो गुलाबी, गीली, कोमल थी। मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और धीरे से चाटना शुरू किया।
“ऊह… आह… राहुल… ये क्या… ये बहुत…” वो चीख रही थी, उसके हाथ बेडशीट को कसकर पकड़े थे।
मैंने उसकी क्लिटोरिस को चूसा, जीभ से चटखारे लिए, उँगली से अंदर बाहर किया। वो पागल हो रही थी, उसकी कमर ऊपर उठ रही थी, मुझे और अपनी ओर खींच रही थी।
पहला प्रवेश – दर्द और आँसू
मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा लिंग कड़ा, तनाव में था। मैंने उसके पैरों के बीच जगह बनाई, उसके घुटनों को मोड़ा।
मैंने अपने लिंग के सिरे को उसकी चूत के मुँह पर रखा। गरमी महसूस हो रही थी, नमी थी।
“तैयार हो?” मैंने पूछा।
“हाँ… लेकिन… धीरे…” उसने कहा, उसकी आँखों में डर था।
मैंने धीरे से आगे बढ़ाया। सिरा अंदर गया। वो कांपी, उसके चेहरे पर दर्द का भाव आया।
“दर्द हो रहा है?” मैंने रुककर पूछा।
“थोड़ा… और अंदर…” उसने कहा।
मैंने थोड़ा और आगे बढ़ाया। एक रुकावट महसूस हुई – उसकी झिल्ली। मैंने एक जोरदार धक्का लगाया।
“आह! बहुत दर्द हो रहा है!” वो चीखी, उसकी आँखों से आँसू निकल आए, “रुको… प्लीज़…”
मैंने रुककर उसे चूमा, उसके आँसू पोंछे। “शांत हो जाओ, मैं रुका हूँ।”
कुछ पल बाद उसने कहा, “अब ठीक है… आगे बढ़ो… लेकिन धीरे…”
मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। शुरू में वो दर्द से कराह रही थी, उसके चेहरे पर तकलीफ थी, आँसू बह रहे थे।
“माफ़ करना… माफ़ करना…” मैंने कहते हुए चोदना जारी रखा।
गति बढ़ना और चरम सीमा
धीरे-धीरे उसके चेहरे के भाव बदलने लगे। दर्द की जगह सुख आने लगा। उसकी कराहें अब आवाज़ें बन गईं।
“और तेज़… राहुल… और तेज़…” वो चिल्लाने लगी, “मुझे… मुझे कुछ हो रहा है…”
मैंने गति बढ़ा दी। बेड कड़कड़ा रहा था, हमारी आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं।
“आह! हाँ! वहीं! और जोर से!” वो चीख रही थी, उसकी छाती कांप रही थी।
मैंने उसके निपलों को भींचा, एक हाथ उसकी कमर पर रखा और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।
अंतिम क्षण और झड़ना
“मैं… मैं निकलने वाली हूँ… राहुल… मैं…” वो कांपने लगी, उसकी योनि मेरी गिरफ्त में कसने लगी, उसका पानी निकलने लगा।
मैं भी अपनी सीमा पर था। “मैं भी… मैं अंदर ही…”
“हाँ… अंदर… प्लीज़… भर दो मुझे…” वो चीखी।
मैंने आखिरी जोरदार धक्के लगाए और अंदर ही झड़ गया। मेरा गरम वीर्य उसकी गहराइयों में भर गया। हम दोनों कांप रहे थे, एक-दूसरे में समाए हुए।
पीछे से – गांड मारना
कुछ देर आराम करने के बाद, जब हमारी साँसें थमीं, मैंने उसे घुमाया। वो अब कुत्ते की तरह चारों खुटनों पर थी, उसकी गोल गांड मुझे दिख रही थी।
“एक बार और…?” मैंने पूछा।
“लेकिन… वहाँ?” उसने पीछे देखते हुए पूछा, “दर्द होगा…”
“धीरे करूँगा… अगर ज्यादा दर्द हो तो बता देना,” मैंने कहा।
मैंने थूक से अपने लिंग को गीला किया, फिर उसकी गांड के छेद पर लगाया। वो कांप रही थी।
“आह… धीरे… बहुत मोटा है…” वो कराही।
मैंने धीरे से आगे बढ़ाया। सिरा अंदर गया। वो चीखी, “बहुत दर्द हो रहा है! रुको!”
मैंने रुककर उसकी कमर सहलाई, “शांत हो जाओ… थोड़ा सहन करो…”
थोड़ी देर बाद उसने कहा, “अब ठीक है… थोड़ा और…”
मैंने धीरे-धीरे पूरा अंदर किया। वो दर्द से कराह रही थी, उसके हाथ बेडशीट को कसकर पकड़े थे, उसकी आँखों में आँसू थे।
फिर मैंने अंदर-बाहर करना शुरू किया। धीरे-धीरे उसे भी मज़ा आने लगा। वो अब “आह… हाँ… और तेज़…” कह रही थी।
मैंने पूरी गति से उसकी गांड मारी। उसकी गांड की थपथपाहट की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। वो चीख रही थी, “मारो! और जोर से मारो!”
मैंने कुछ मिनट तक उसे पीछे से चोदा, फिर अंदर ही झड़ गया। हम दोनों थककर बेड पर गिर गए।
हम एक-दूसरे में समाए हुए लेटे थे। उसकी आँखों में अभी भी आँसू थे, लेकिन मुस्कान भी थी।
“बहुत दर्द हुआ?” मैंने पूछा।
“शुरू में बहुत हुआ,” उसने कहा, “लेकिन फिर… फिर मज़ा आ गया।”
मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया, उसके आँसू पोंछे, उसके चेहरे पर चूमे।
जब वो जाने लगी, मैंने उसे कसकर गले लगाया।
“कब मिलेंगे?” मैंने पूछा।
“जल्दी,” उसने कहा, “मैं तुम्हें मैसेज करूँगी।”
“तुम ठीक तो हो ना? कोई पछतावा तो नहीं?”
“बिल्कुल नहीं,” उसने मेरी गाल पर चूमा, “ये मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन था।”
वो चली गई, लेकिन उसकी खुशबू, उसकी यादें, उसकी आवाज़ मेरे साथ रह गईं।
हमारी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। वो शुरुआत थी एक लंबे सफर की, जहाँ हमने एक-दूसरे को प्यार से, समझ से, और बहुत सारी चाहत से जाना।
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