शादी में मामी और भाभी दोनों के साथ चुदाई – 2
हेलो दोस्तो, मैंने सोचा था कि ऐसी चुदाई का मजा तुम्हें भी मिलेगा, मेरी पहली कहानी थी जिसका नाम, शादी में मामी और भाभी दोनों के साथ चुदाई – 1, अभी दूसरे पार्ट में शादी में मामी और भाभी दोनों के साथ चुदाई – 2 शुरुआत करने जा रहा हूं, तुम्हारी चूत गिल्ली और लंड खड़ा हो जाएगा।
मैं और मामी एक-दूसरे में लिपटे हुए थे। मेरा लंड अभी भी मामी की चूत के अंदर था, और वो गहरी-गहरी सांसें ले रही थीं। उनकी आंखें बंद थीं, उनके गाल लाल हो चुके थे, और उनके स्तन मेरे सीने पर धीमी-धीमी गति से उपर-नीचे हो रहे थे। मेरी जांघें उनकी जांघों से चिपकी हुई थीं, और हमारे बीच का पसीना एक-दूसरे में मिल रहा था।
तभी दरवाजे की कुंडी खुली और रेखा भाभी अंदर आ गईं। उनके हाथ में एक आईफोन था, और वो स्क्रीन की तरफ देखते हुए मुस्कुरा रही थीं। उन्होंने नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी, जो उनके गोरे बदन पर बिल्कुल फब रही थी। उनके स्तन साड़ी के ब्लाउज से इतने उभरे हुए थे कि बटन टूटने को थे।
“वाह वाह… यह तो बहुत ही खूबसूरत नजारा है…” भाभी ने कहा, उनकी आवाज में वो मादकता थी जो किसी भी मर्द को पागल कर दे।
मैं और मामी एक-दूसरे से अलग हुए। मामी शर्म से लाल हो गईं, उन्होंने जल्दी से अपनी साड़ी नीचे की और अपनी चूत ढकने की कोशिश की। मेरा लंड बाहर निकला, और उस पर मामी की चूत का पानी और खून लगा हुआ था – गीला, चिकना, और गाढ़ा।
“भाभी… आप… यहां…” मैंने कहा, मेरी सांसें तेज थीं।
“मैं तो जानबूझकर आई हूं, राहुल…” भाभी ने कहा, उन्होंने अपना मोबाइल उठाया जिसमें वीडियो रिकॉर्डिंग चल रही थी। “मैंने तुम दोनों की पूरी चुदाई रिकॉर्ड कर ली है… मामी की चीखें, तुम्हारे धक्के… सब कुछ…”
मामी की आंखें बड़ी-बड़ी हो गईं। “रेखा… तुम… यह क्या कर रही हो…”
“मैं जो कर रही हूं, वही तुम दोनों भी कर रहे थे…” भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा। उन्होंने अपना मोबाइल जेब में रखा और दरवाजा बंद कर लिया। “अब मेरी भी एक शर्त है…”
“क्या शर्त?” मैंने पूछा, मेरा लंड अभी भी खड़ा था, और वो भाभी को देखकर और भी कड़ा हो गया था। भाभी की साड़ी उनकी कमर से सटी हुई थी, और उनकी गांड की गोलाई साफ दिख रही थी।
“मुझे भी इस खेल में शामिल करो… वरना यह वीडियो सबको दिखा दूंगी…” भाभी ने कहा, उनकी आंखों में वो शरारत थी जो मुझे उत्तेजित कर रही थी।
मामी ने मुझे देखा, फिर भाभी को देखा। “लेकिन… यह…” मामी कुछ बोल नहीं पा रही थीं।
“क्या मामी… तुम तो अपने भतीजे से चुदवा रही थीं… अब मुझे भी मौका दो…” भाभी ने कहा और अपने ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए।
मैं यह सब देखता रहा। भाभी एक-एक करके अपने बटन खोल रही थीं। पहला बटन – उनकी गहरी गर्दन दिखाई दी, पसीने से चमकती हुई। दूसरा बटन – उनका क्लीवेज दिखने लगा, दोनों स्तनों के बीच की दरार। तीसरा बटन – उनका पेट, गोल और सफेद। और चौथा बटन –
“थड़क…” बटन खुला और भाभी के दोनों स्तन बाहर आ गए, ब्लाउज खुल गया।
मेरा दिल धड़क उठा। भाभी के स्तन मामी से भी बड़े थे – लगभग 36 इंच के, गोल, भारी, और गुलाबी निप्पल वाले। वो दोनों स्तन ऐसे लटक रहे थे जैसे दो बड़े तरबूज हों, लेकिन कसे हुए और उभरे हुए।
“कैसे लगे मेरे चूचे, राहुल?” भाभी ने पूछा, उन्होंने अपने हाथों से अपने स्तन उठाए और मुझे बुलाया।
मामी एक तरफ खड़ी थीं, उनकी साड़ी अभी भी उनकी चूत ढक रही थी, लेकिन उनकी आंखें भाभी के स्तनों पर टिकी हुई थीं। उनके अपने स्तन भी उनके ब्लाउज में से उभरे हुए थे, और मैं देख सकता था कि उनके निप्पल खड़े हो चुके थे – शायद भाभी को देखकर उन्हें भी मजा आ रहा था।
“आओ राहुल… पहले मेरे चूचे चूसो…” भाभी ने कहा और मेरे करीब आ गईं।
मैंने अपने हाथ उठाए और भाभी के स्तनों को छुआ। वो इतने नरम थे, इतने गोल, इतने गर्म। मैंने उन्हें दबाया, मसला, और फिर एक स्तन अपने मुंह में ले लिया।
“उम्म्म्म… हां… ऐसे ही…” भाभी ने कराही निकाली, उनका हाथ मेरे सिर पर चला गया और उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए।
मैंने उनके निप्पल को जीभ से चाटा, फिर दांतों से हल्का काटा। वो कड़ा हो गया, गुलाबी, और मोटा।
“आह्ह्ह… और जोर से…” भाभी चीखीं।
मैंने दूसरा स्तन पकड़ा और उसे भी मसलने लगा। दोनों स्तन मेरे हाथों में थे, और मैं उन्हें बारी-बारी से चूस रहा था।
मामी यह सब देख रही थीं। उनका एक हाथ अपनी साड़ी के अंदर चला गया था – वो अपनी चूत सहला रही थीं, जो अभी भी मेरे लंड के कारण गीली थी।
“मामी… तुम भी आओ…” भाभी ने कहा, उन्होंने मामी का हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचा।
मामी शर्माते हुए करीब आईं। भाभी ने मामी का हाथ अपने दूसरे स्तन पर रख दिया।
“इन्हें भी मसलो… तुम्हारे भी तो बहुत सुंदर हैं…” भाभी ने कहा।
मामी ने भाभी के स्तन को मसलना शुरू किया। दोनों औरतें एक-दूसरे के स्तनों को छू रही थीं, और मैं बीच में था।
“राहुल… अब मेरी साड़ी भी उतारो…” भाभी ने कहा।
मैंने उनकी साड़ी का नाड़ा खोला। वो ढीली हो गई, और फिर मैंने उसे नीचे खींचा। भाभी की सफेद जांघें दिखने लगीं, फिर उनकी पैंटी – गोल, गुलाबी, और गीली।
“यह भी उतारो…” भाभी ने कहा।
मैंने उनकी पैंटी नीचे की। उनकी चूत दिखाई दी – बिल्कुल साफ, कोई बाल नहीं, चिकनी, और गीली। उनकी योनि के होंठ छोटे थे, और बीच में से नमी निकल रही थी। वो गुलाबी थी, तरोताजा, और मुझे बुला रही थी।
“कितनी सुंदर चूत है भाभी…” मैंने कहा।
“आज यह तुम्हारी है… आओ… भरो इसे अपने लंड से…” भाभी ने अपने पैर फैलाए और बिस्तर पर लेट गईं।
भाभी की चूत में पहला धक्का – गहराई का मजा
मैंने भाभी के ऊपर झुकते हुए अपने लंड को उनकी चूत के मुंह पर रखा। मेरा लंड अभी भी मामी की चूत के पानी से गीला था, और वो पूरी तरह खड़ा था – 7 इंच का, मोटा, नसों से भरा हुआ, और सुपाड़ा लाल।
“धीरे से… मेरी चूत थोड़ी तंग है…” भाभी ने कहा, उनकी आंखें बंद थीं, उनके होंठ कांप रहे थे।
मैंने धीरे से दबाव डाला। मेरे लंड का सुपाड़ा उनकी योनि के होंठों को फैलाता हुआ अंदर जाने लगा।
“आह्ह्ह… हां… ऐसे ही…” भाभी ने कराही निकाली।
मैंने एक जोरदार धक्का दिया।
“घुस्स्स…” की आवाज आई और मेरा आधा लंड भाभी की चूत में समा गया।
“आह्ह्ह्ह्ह… बहुत बड़ा है… मेरी चूत फट जाएगी…” भाभी चीखीं, उनके हाथ बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ लिए, उनकी पीठ तन गई।
“शांत रहो… अभी तो आधा गया है…” मैंने कहा और उनके स्तनों को पकड़ लिया।
मैंने उनके स्तनों को मसलते हुए एक और जोरदार धक्का दिया।
“आह्ह्ह्ह्ह… मर गई… पूरा अंदर चला गया…” भाभी चीखीं, उनकी आंखें खुल गईं, उनके मुंह से आवाज निकल रही थी जो कमरे में गूंज रही थी।
मेरा पूरा लंड भाभी की गहरी चूत में फंसा हुआ था। उनकी चूत इतनी तंग थी कि मेरा लंड उसे फाड़ता हुआ लग रहा था, लेकिन इतनी गीली भी थी कि अंदर जाने में कोई दिक्कत नहीं हुई।
मैंने रुककर उन्हें थोड़ा आराम दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज।
“थप… थप… थप…” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मेरे अंडे भाभी की चूत से टकरा रहे थे, और उनकी योनि से “पच पच” की आवाजें निकल रही थीं।
“आह्ह्ह… हां… और जोर से… मेरी चूत को भर दो…” भाभी चीख रही थीं, उनकी कमर उछल-उछल कर मेरा साथ दे रही थी।
मैंने उनके पैर अपने कंधों पर रखे और और गहरे धक्के लगाने शुरू किए। मेरा लंड उनकी चूत की सबसे गहरी जगह तक जा रहा था।
“आह्ह्ह… वहां… वहां मजा आ रहा है… और जोर से…” भाभी चीखीं, उनके हाथ मेरे सीने पर थे, उनकी नाखून मेरी त्वचा में गड़ रहे थे।
मैंने लगभग पंद्रह मिनट तक भाभी को इसी तरह चोदा। उनकी चूत ने मेरे लंड को इतनी बार कसा कि मुझे रुकना पड़ा। वो झड़ने वाली थीं।
“मैं आने वाली हूं… मैं आ गई…” भाभी चीखीं और उनकी चूत ने मेरे लंड को इतनी जोर से कसा कि मैं भी रुक गया।
उनकी चूत से पानी निकलने लगा – गरम, गाढ़ा, और बहुत सारा। वो पानी मेरे लंड के ऊपर, मेरी जांघों पर, और बिस्तर पर बिखर गया।
“उह्ह्ह्ह्ह… आह्ह्ह्ह…” भाभी कराहते हुए झड़ गईं, उनका पूरा बदन कांप रहा था, उनके स्तन उपर-नीचे हो रहे थे।
मैंने अपना लंड उनकी चूत से बाहर निकाला। वो अभी भी कड़ा था, भाभी के पानी से चिकना हो गया था।
मामी की गांड की तैयारी – तेल और उंगली
मैंने अपना लंड भाभी की चूत से बाहर निकाला। वो अभी भी पूरी तरह खड़ा था – गीला, चिकना, और लाल हो चुका था भाभी के पानी से। मेरा सुपाड़ा फूला हुआ था, नसें उभरी हुई थीं, और मेरे अंडे भारी होकर नीचे लटक रहे थे।
मामी मुझे देख रही थीं। उनकी आंखें मेरे लंड पर टिकी हुई थीं, उनके होंठ सूखे हुए थे, और वो उन्हें बार-बार चाट रही थीं। उनका बदन कांप रहा था – शायद डर से, शायद उत्तेजना से।
“अब मेरी बारी…” मामी ने फुसफुसाते हुए कहा, उनकी आवाज बहुत धीमी थी, जैसे कोई गहरा राज कह रही हों।
“नहीं मामी… अब मैं आपकी गांड मारूंगा…” मैंने कहा, मेरी आवाज में वो आदेश था जो उन्हें और कमजोर कर रहा था।
मामी के चेहरे पर डर और उत्तेजना का मिश्रण था। “वहां… वहां कैसे… बहुत दर्द होगा… वो जगह तो…” वो कुछ कह नहीं पा रही थीं।
“शांत रहो मामी… मैं हूं ना…” मैंने कहा और उनके करीब गया।
मामी ने अपने हाथों से अपनी पैंटी पकड़ ली, जैसे उसे बचाने की कोशिश कर रही हों। लेकिन मैंने उनके हाथ हटा दिए। उनकी पैंटी गीली थी – उनकी चूत से निकला पानी उसे भीगो चुका था।
“देखो… आप भी तो तैयार हो…” मैंने उनकी पैंटी पर हाथ रखा और उसे सहलाया।
“यह… यह अलग बात है…” मामी ने शर्माते हुए कहा।
भाभी बिस्तर पर लेटी हुई थीं, उनकी चूत से मेरा और उनका पानी मिलकर बाहर बह रहा था। उन्होंने उठकर मामी को पकड़ा।
“प्रिया दी… डरो मत… मजा आएगा… मैं भी तो करवा चुकी हूं…” भाभी ने कहा और मामी को घोड़ी बनने में मदद की।
मामी ने अपने हाथों और घुटनों के बल झुकना स्वीकार किया। उनकी गांड मेरी तरफ थी – वो मोटी, गोल, उभरी हुई गांड जो उनकी साड़ी में से हमेशा मुझे बुलाती थी। अब वो सिर्फ पैंटी में थी, और वो भी मैंने नीचे कर दी।
मामी की गांड की दरार दिखाई दी – गहरी, गोल, और बीच में वो छोटा सा गुलाबी छेद जो कसा हुआ था, जो कभी किसी लंड को अंदर नहीं लिया था।
“कितनी सुंदर गांड है मामी…” मैंने कहा और उनके गालों को सहलाया।
“आह… मत करो… शर्म आ रही है…” मामी ने कहा, उनका चेहरा नीचे झुका हुआ था, उनके बाल बिखरे हुए थे।
मैंने अपने हाथ में तेल लिया – तेल की शीशी पास की मेज पर रखी थी। मैंने तेल को अपने हाथों में गर्म किया और फिर मामी की गांड पर लगाया।
“ठंडा है…” मामी ने कांपते हुए कहा।
“थोड़ी देर में गरम हो जाएगा…” मैंने कहा और तेल को उनकी गांड की दरार में लगाना शुरू किया।
मैंने अपनी उंगली तेल में डुबोई और मामी की गांड के छेद पर रखी। वो कांप उठीं।
“डरो मत… धीरे से करूंगा…” मैंने कहा।
मैंने धीरे से अपनी उंगली का दबाव डाला। मामी की गांड का छेद बहुत तंग था, लेकिन तेल की वजह से मेरी उंगली अंदर चली गई।
“आह्ह्ह… क्या कर रहे हो… बहुत अजीब लग रहा है…” मामी ने कहा, उनकी आवाज कांप रही थी।
“शांत रहो… अभी तो उंगली है…” मैंने उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू की।
मैंने उंगली को अंदर की तरफ घुमाया, मामी की गांड की दीवारों को छूते हुए। वो कराहने लगीं।
“आह्ह्ह… अंदर तक जा रही है…” मामी ने कहा।
मैंने एक और उंगली डाल दी। अब दो उंगलियां मामी की गांड में थीं, और मैं उन्हें अंदर-बाहर कर रहा था।
“उह्ह्ह… दर्द हो रहा है… लेकिन अजीब सा मजा भी आ रहा है…” मामी ने कहा।
भाभी ने मामी के स्तन पकड़ लिए और उन्हें मसलना शुरू कर दिया। “दी… मजा आएगा… थोड़ा दर्द होगा फिर बहुत मजा आएगा…”
मैंने तीन उंगलियां डाल दीं। मामी की गांड फैल गई, उनका छेद खुलने लगा।
“आह्ह्ह्ह्ह… बहुत फैल गया…” मामी चीखीं।
पहला धक्का – मामी की गांड में लंड
मैंने अपने लंड पर तेल लगाया। वो चमक रहा था, नसें उभरी हुई थीं, और सुपाड़ा फूला हुआ था। मैंने उसे मामी की गांड के छेद पर रखा।
“अब तैयार हो जाओ मामी… असली मजा अब आएगा…” मैंने कहा।
“प्लीज… धीरे से… बहुत मोटा है…” मामी ने कहा, उनकी आवाज में डर था।
मैंने धीरे से दबाव डाला। मेरे लंड का सुपाड़ा मामी की गांड के छेद को फैलाता हुआ अंदर जाने लगा।
“आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द…” मामी चीखीं, उनका बदन कांप उठा।
“शांत रहो… अंदर जाने दो…” मैंने कहा और एक जोरदार धक्का दिया।
“चूईईईई…” की आवाज आई और मेरा सुपाड़ा मामी की गांड में घुस गया।
“आह्ह्ह्ह्ह… मर गई… फाड़ दी मेरी गांड…” मामी चीखीं, उनके आंसू निकल आए, उनकी पीठ तन गई।
मैंने रुका। उनकी गांड इतनी तंग थी कि मेरा सुपाड़ा ही अंदर गया था, और वो मेरी उंगलियों से भी ज्यादा कस रही थी।
“थोड़ा सहन करो… अभी आधा और बचा है…” मैंने कहा।
“नहीं… बहुत मोटा है… और मत डालो…” मामी ने कहा, लेकिन भाभी ने उनके स्तन कसकर पकड़ लिए।
“दी… सहन करो… फिर मजा आएगा…” भाभी ने कहा।
मैंने एक और जोरदार धक्का दिया।
“आह्ह्ह्ह्ह… मर गई… पूरा अंदर चला गया…” मामी चीखीं, उनकी आवाज इतनी तेज थी कि बाहर सुनाई दे सकती थी।
मेरा पूरा लंड – सात इंच का, मोटा, कड़ा लंड – मामी की गांड की सबसे गहरी जगह तक पहुंच गया था। उनकी गांड की दीवारें मेरे लंड को कस-कस के पकड़ रही थीं, और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी गर्म, तंग, गीली चूत में हूं, लेकिन यह और भी तंग था।
जोरदार धक्के – मामी की गांड की चुदाई
मैंने रुककर उन्हें थोड़ा आराम दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए।
“थप… थप… थप…” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मेरे अंडे मामी की गांड के नीचे की तरफ टकरा रहे थे, और उनकी गांड के गाल मेरे हर धक्के के साथ हिल रहे थे।
“आह्ह्ह… बहुत गहरा जा रहा है… मेरी गांड का भोसड़ा बन गया…” मामी चीख रही थीं, लेकिन अब उनकी आवाज में दर्द कम और मजा ज्यादा था।
“हां… ऐसे ही… मेरी गांड मारो…” मामी ने अचानक कहा, और मैं हैरान रह गया।
“क्या कहा मामी?” मैंने पूछा।
“और जोर से… मेरी गांड फाड़ दो…” मामी चीखीं, उनकी कमर पीछे की तरफ धकेल रही थी, और वो खुद ही मेरे लंड को और अंदर ले रही थीं।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। “थप थप थप…” की आवाजें तेज हो गईं। मैंने उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।
“आह्ह्ह… हां… और जोर से… मेरी गांड का कचूमर निकाल दो…” मामी चीख रही थीं, उनके बाल बिखरे हुए थे, उनकी पीठ पर पसीने की बूंदें थीं।
भाभी ने मामी के नीचे जाकर उनकी चूत देखी। “दी… आपकी चूत तो पूरी गीली हो गई है… पानी निकल रहा है…”
“हां… बहुत मजा आ रहा है… पीछे से लंड अंदर जा रहा है… और मेरी चूत भी खुश हो रही है…” मामी ने कहा।
भाभी ने मामी की चूत में अपनी उंगली डाल दी। “आह्ह्ह… वहां भी…” मामी चीखीं।
अब मामी दोनों तरफ से मजा ले रही थीं – पीछे से मैं उनकी गांड मार रहा था, और आगे से भाभी उनकी चूत में उंगली कर रही थी।
“उह्ह्ह… मर गई… दोनों तरफ से…” मामी चीखीं।
मैंने लगभग बीस मिनट तक मामी की गांड जोर-जोर से मारी। उनकी गांड अब थोड़ी ढीली हो गई थी, लेकिन फिर भी उतनी ही तंग थी कि मुझे मजा आ रहा था।
अंतिम क्षण – मामी की गांड में वीर्य
मैंने मामी को घोड़ी बनाए रखा, लेकिन अब मैं उनके ऊपर झुक गया। मैंने उनके स्तन पकड़े और उन्हें कस-कस के मसलने लगा, निप्पलों को खींचने लगा।
“आह्ह्ह… मेरे चूचे भी मसलो… और गांड भी मारो…” मामी चीख रही थीं।
“मैं आने वाला हूं… मामी… आपकी गांड में ही छोड़ूंगा…” मैंने कहा, मेरी सांसें तेज थीं, मेरा लंड अब फटने को था।
“हां… हां… अंदर ही डाल दो… मेरी गांड को भर दो अपने पानी से…” मामी चीखीं, उनकी कमर पीछे की तरफ धकेल रही थी।
मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। “थप थप थप…” की आवाजें तेज हो गईं, इतनी तेज कि बाहर तक सुनाई दे सकती थीं।
फिर मैंने एक जोरदार, आखिरी धक्का दिया और अपना लंड मामी की गांड की सबसे गहरी जगह तक पहुंचा दिया।
“उह्ह्ह्ह्ह… आह्ह्ह्ह…” मैंने कराहते हुए अपना सारा वीर्य मामी की गांड में छोड़ दिया।
गरम, गाढ़ा, बहुत सारा वीर्य मामी की गांड में भर गया। मेरा लंड कांप रहा था, और मैंने उसे अंदर ही रखा, पूरी तरह खाली होने तक।
“आह्ह्ह… मेरी गांड भर गई… इतना सारा पानी…” मामी ने कहा, उनका बदन कांप रहा था, उनकी गांड ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया था।
भाभी ने मामी की चूत से अपनी उंगली निकाली और उसे चाटने लगीं। “दी… आपका पानी तो बहुत मीठा है…”
मैंने धीरे से अपना लंड मामी की गांड से बाहर निकाला। एक “प्लोप” की आवाज आई, और मेरा वीर्य बाहर बहने लगा – सफेद, गाढ़ा, और बहुत सारा।
मामी की गांड का छेद अब खुला हुआ था, लाल हो गया था, और मेरा वीर्य उससे बाहर बह रहा था, उनकी जांघों पर, बिस्तर पर।
मामी थककर बिस्तर पर गिर गईं। उनकी गांड लाल हो गई थी, उनकी चूत भी लाल थी, और उनके पूरे बदन पर पसीने की बूंदें थीं।
“बहुत मजा आया…” मामी ने धीमी आवाज में कहा, उनकी आंखें बंद थीं, उनके चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान थी।
भाभी ने मुझे गले लगाया। “अब मेरी बारी फिर से…”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “रुको… अभी तो मामी की चूत भी बची है…”
मामी ने आंखें खोलीं और शर्माते हुए कहा, “तुम भी ना… बहुत शैतान हो गए हो…”
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