ट्रिप पर मेरी दोस्त की चोदाई
मैं आज भी जब अपनी आंखें बंद करता हूं तो वो रात मेरी आंखों के सामने तैरने लगती है। वो रात जिसने मेरी जिंदगी बदल दी, जिस रात मैंने पहली बार किसी औरत की चूत का स्वाद चखा, पहली बार किसी लड़की के चuche चूसे, और पहली बार अपने लंड को किसी गर्म, टाइट चूत में डालकर उसे चोदा। यह कहानी मेरे सात दोस्तों के ग्रुप की है, जिसमें चार लड़के और तीन लड़कियां थीं। मेरा नाम अर्जुन है, और मैं उस वक्त बाईस साल का था, कॉलेज का आखिरी साल चल रहा था। हमारा ग्रुप बहुत मजबूत था, हम सब एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त थे। लड़कों में मैं, राहुल, विकास और अमित थे। लड़कियों में त्विंकल, रीना और रोशनी थीं। हम सातों की दोस्ती कॉलेज के पहले दिन से शुरू हुई थी और पिछले चार सालों में यह दोस्ती इतनी गहरी हो गई थी कि हम एक-दूसरे के घरों में आना-जाना रखते थे, एक-दूसरे के सबसे गहरे राज जानते थे। ट्रिप पर मेरी दोस्त की चोदाई
उस हफ्ते का प्लान राहुल ने बनाया था। उसके माता-पिता का एक फार्महाउस था शहर से करीब सौ किलोमीटर दूर, पहाड़ियों के बीच में। उनके माता-पिता उस हफ्ते किसी शादी में शामिल होने के लिए बाहर गए हुए थे, और राहुल के पास पूरी जगह खाली थी। उसने सबको इनवाइट किया था पूरे वीकेंड के लिए। हम सबने प्लानिंग की थी कि शनिवार की दोपहर को निकलेंगे, शाम तक पहुंच जाएंगे, रात भर पार्टी करेंगे, संडे को घूमेंगे और रात को वापस आ जाएंगे।
मैं और त्विंकल एक ही कॉलोनी में रहते थे, करीबी इलाके में। बाकी सब अलग-अलग जगहों से थे। इसलिए यह तय हुआ था कि मैं और त्विंकल साथ में निकलेंगे, और बाकी सब अपने-अपने रास्ते से फार्महाउस पहुंचेंगे। त्विंकल से मेरी दोस्ती भी गहरी थी, लेकिन उससे भी गहरा कुछ और था जो मैंने कभी उसे नहीं बताया था। मुझे वो हमेशा से अच्छी लगती थी, उसकी हरकतें, उसकी हंसी, उसकी आंखें, उसका बदन – सब कुछ मुझे मदहोश कर देता था। लेकिन मैंने कभी हिम्मत नहीं जुटाई उसे अपने दिल की बात बताने की, क्योंकि हमारी दोस्ती बहुत कीमती थी और मैं नहीं चाहता था कि कुछ गलत होने पर वो दोस्ती टूट जाए।
त्विंकल दिखने में बेहद खूबसूरत थी। उसकी लंबाई करीब पांच फुट चार इंच थी, गोरा रंग जैसे दूध में हल्दी मिलाई हो, बिल्कुल साफ और चमकदार। उसके बाल काले, लंबे और घने थे, जो उसकी कमर तक आते थे। उसकी आंखें बड़ी-बड़ी, भूरी रंग की, जिनमें एक अजीब सा जादू था। लेकिन जो चीज मुझे सबसे ज्यादा पागल करती थी वो था उसका बदन। उसके चuche इतने बड़े और सुडौल थे कि कोई भी उन्हें देखकर मंत्रमुग्ध हो जाए। वो हमेशा टाइट कपड़े पहनती थी जिससे उसके चuche की गोलाई साफ दिखती थी, और उसकी गांड भी बहुत मोटी और उभरी हुई थी। जब वो चलती थी तो उसकी गांड ऐसे मटकती थी जैसे दो गोल गुब्बारे हवा में उछल रहे हों। मैंने कई बार उसे सोचते हुए अपने लंड को हिलाया था, उसके चuche और उसकी चूत के बारे में सोच-सोचकर।
उस दिन की सुबह मैं बहुत उत्साहित था। मैंने अपने कपड़े पैक किए, कुछ स्नैक्स लिए, और त्विंकल का इंतजार करने लगा। हमने बारह बजे मिलने का प्लान बनाया था। लेकिन बारह बजे वो नहीं आई। मैंने उसे फोन किया तो पता चला कि उसे किसी जरूरी काम से निकलने में देर हो रही है। वो बोली कि दो बजे तक आ जाएगी। मैंने इंतजार किया, और दो बजे जब वो आई तो मैं उसे देखकर स्तब्ध रह गया।
उसने एक बहुत ही टाइट ब्लू जींस पहनी हुई थी जो उसकी जांघों और उसकी गांड को बिल्कुल चिपक कर दिखा रही थी। जींस इतनी टाइट थी कि उसकी चूत की दरार साफ नजर आ रही थी, और वो ऐसी जगह पर फंसी हुई थी कि मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। ऊपर उसने एक सफेद रंग की छोटी टॉप पहनी थी जो उसके पेट को खुला छोड़ रही थी और उसके चuche इतने उभरे हुए थे कि ऐसा लग रहा था टॉप फट जाएगा। उसने नीचे ब्रा नहीं पहनी थी या शायद बहुत पतली ब्रा पहनी थी, क्योंकि उसके चuche के निप्पल टॉप के नीचे से साफ दिख रहे थे, खड़े हुए और उभरे हुए।
“सॉरी यार, मम्मी को बाजार से कुछ सामान लाना था, इसलिए लेट हो गई,” वो मुस्कुराते हुए बोली, उसके होठ गुलाबी और फूले हुए थे।
मैंने अपने आप को संभाला और कहा, “कोई बात नहीं, चलो जल्दी निकलते हैं, वैसे भी बाकी सब इंतजार कर रहे होंगे।”
हमने सामान गाड़ी में रखा और निकल पड़े। मैंने अपनी सफेद सेडान कार निकाली थी, जिसकी पिछली सीट काफी चौड़ी थी। त्विंकल आगे मेरी बगल में बैठी। जब वो बैठी तो उसकी जींस और भी ज्यादा टाइट हो गई और उसकी चूत का उभार साफ दिखने लगा। मैंने जानबूझकर अपना हाथ गियर बदलने के बहाने उसकी जांघ पर रख दिया, वो गर्म और नरम महसूस हो रही थी।
हम शहर से निकल चुके थे। रास्ते में मौसम अचानक बदल गया। जुलाई का महीना था और मानसून अपने पूरे जोश में था। अचानक बादल घिर आए और तेज बारिश शुरू हो गई। मैंने वाइपर चालू किए और धीरे-धीरे गाड़ी चलाने लगा। ट्रैफिक भी बढ़ गया था क्योंकि बारिश में सब धीरे चल रहे थे। हमारा प्लान था कि शाम छह बजे तक पहुंच जाएंगे, लेकिन अब सात बजने वाले थे और हम अभी भी रास्ते में थे, फार्महाउस से करीब पचास किलोमीटर दूर।
राहुल का फोन आया, “अबे तुम लोग कहां हो? सब यहां इंतजार कर रहे हैं, भूखे मर रहे हैं।”
“यार बारिश में फंसे हैं, ट्रैफिक बहुत है,” मैंने बताया।
“साले, तुम दोनों अकेले हो, कहीं कुछ गलत काम तो नहीं कर रहे?” राहुल ने शरारत से पूछा।
मैंने हंसते हुए फोन काट दिया। त्विंकल मेरे बगल में बैठी थी, उसके बाल थोड़े गीले हो गए थे बारिश की छींटों से, और उसकी टॉप भी थोड़ी चिपक गई थी। मैंने साइड से देखा तो मेरा दिल धड़कने लगा – उसके चuche की गोलाई साफ दिख रही थी, और उसके निप्पल खड़े होकर टॉप को आगे की तरफ धकेल रहे थे। शायद ठंड लग रही थी उसे, या शायद वो उत्तेजित थी।
“थंड लग रही है,” वो कांपते हुए बोली, अपने हाथों को रगड़ते हुए।
मैंने तुरंत एसी बंद किया और अपनी जैकेट उतारकर उसे दे दी। वो जैकेट पहनते हुए मुझे देख रही थी, उसकी आंखों में कुछ अजीब सा नशा सा था। या शायद मुझे ऐसा लग रहा था। हम आगे बढ़ रहे थे, बारिश और भी तेज हो गई थी। रात हो चुकी थी और सड़क पर कोई ठीक से नजर नहीं आ रहा था। मैंने गाड़ी धीरे कर दी।
रास्ते में एक ढाबा आया, जिसकी लाइटें दूर से दिख रही थीं। मैंने सोचा कि थोड़ा रुककर कुछ खा लेते हैं, और शायद बारिश थोड़ी कम हो जाए तो आगे निकलेंगे। मैंने गाड़ी ढाबे के सामने रोकी। यह एक हाईवे का ढाबा था, जिसमें एक बड़ा हॉल था और पीछे कुछ कमरे भी थे। हम अंदर गए। ढाबा खाली था, एक-दो ट्रक ड्राइवर बैठे थे एक कोने में।
हमने एक टेबल पर बैठने का फैसला किया। वेटर आया और हमने ऑर्डर दिया। त्विंकल ने मेन्यू देखते हुए कहा, “एक पैग ले लेते हैं, ठंड बहुत है बाहर।”
मैंने सोचा कि एक पैग से कुछ नहीं होगा, और वैसे भी हमें गर्माहट चाहिए थी। मैंने वेटर से दो पैग व्हिस्की मंगवाए। हमने खाना भी ऑर्डर किया – रोटी और दाल मखनी। पहला पैग आया और हमने पिया। व्हिस्की की आग ने हमारे अंदर गर्माहट भर दी। त्विंकल के गाल लाल होने लगे थे, और उसकी आंखें चमक रही थीं।
“तुम बहुत अच्छे लगते हो जब तुम नशे में होते हो,” अचानक त्विंकल ने कहा, मुझे देखते हुए।
मैं चौंक गया, “क्या मतलब?”
“मतलब यह कि मुझे तुम हमेशा से पसंद हो, अर्जुन। मैंने कभी बोला नहीं, लेकिन तुम मुझे अच्छे लगते हो,” वो धीरे से बोली, अपनी आंखें झुकाते हुए।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। क्या सच में वो यह कह रही थी जो मैं सुनना चाह रहा था? मैंने सोचा कि शायद नशे की बात है, लेकिन फिर मैंने देखा कि वो गंभीर थी। हमने दूसरा पैग भी मंगवाया और पिया। अब हम दोनों हल्के नशे में थे। खाना आया और हमने खाया, लेकिन अब हमारे बीच एक अजीब सी तनावपूर्ण माहौल थी।
“चलो अब निकलते हैं,” मैंने कहा, बिल चुकाकर।
हम गाड़ी में बैठे। अब रात के दस बज चुके थे और फार्महाउस अभी भी तीस किलोमीटर दूर था। बारिश थोड़ी कम हुई थी लेकिन अभी भी हो रही थी। त्विंकल ने जैकेट उतार दी क्योंकि अब उसे गर्माहट महसूस हो रही थी नशे से। वो अपने पैर सीट पर रखकर बैठ गई, उसकी जींस उसकी चूत के पास से इतनी टाइट थी कि मुझे उसकी चूत की दरार साफ दिख रही थी।
मैंने गाड़ी चलाना शुरू की। अब हम पहाड़ी रास्ते पर थे, दोनों तरफ घने जंगल थे और सड़क खाली थी। त्विंकल ने अचानक अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया जो स्टीयरिंग पर था।
“अर्जुन, मैं जो कह रही हूं वो सच है। मुझे तुम पसंद हो,” वो फुसफुसाई।
मैंने गाड़ी साइड में रोक दी। हम एक ऐसी जगह पर थे जहां सड़क के किनारे एक छोटा सा रास्ता जंगल की तरफ जाता था। चारों तरफ अंधेरा था, सिर्फ गाड़ी की हेडलाइट्स से रोशनी थी। मैंने उसकी तरफ मुड़कर देखा। उसके चेहरे पर नशे की लाली थी, उसके होठ फूले हुए थे, और उसकी आंखों में एक वासना की चमक थी जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी।
“त्विंकल, क्या तुम…” मैं कुछ कहने ही वाला था कि उसने अपने हाथ मेरे चेहरे पर रखे और मुझे अपनी तरफ खींचा।
हमारे होठ मिले। क्या नरम, क्या गर्म होठ थे उसके। मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और जोर से किस करने लगा। उसने अपने होठ खोले और मेरी जीभ अंदर घुस गई। हमारी जीभें आपस में खेल रही थीं, एक-दूसरे को चूस रही थीं। मैंने अपना एक हाथ उसके चuche पर रख दिया और उसे सहलाने लगा। वो जैकेट के ऊपर से ही इतने नरम लग रहे थे कि मेरा दिमाग खराब हो रहा था।
“अंदर चलो,” वो मुझे धकेलते हुए बोली, पिछली सीट की तरफ इशारा करते हुए।
हम दोनों पिछली सीट पर आ गए। यह एक बड़ी सीट थी, जिसे बेड की तरह भी बनाया जा सकता था। मैंने सीट को पीछे की तरफ झुकाया ताकि हम लेट सकें। अब हम दोनों पिछली सीट पर थे, एक-दूसरे को चूम रहे थे। मैंने उसकी जैकेट उतारी, फिर उसकी टॉप भी उतार दी। वो अब केवल एक काले रंग की ब्रा में थी, जो उसके चuche को बहुत ऊपर की तरफ उठाए हुए थी। उसके चuche ब्रा से बाहर निकलने को तरस रहे थे, इतने बड़े और गोल थे।
मैंने उसकी ब्रा का हुक पीछे से खोला और उसके चuche आजाद हो गए। मैं उन्हें देखता ही रह गया। क्या खूबसूरत दृश्य था। उसके चuche बिल्कुल गोल, मुलायम, और सफेद थे। उसके निप्पल गुलाबी रंग के थे, छोटे-छोटे लेकिन खड़े हुए। मैंने अपने हाथ उन पर रखे और उन्हें सहलाने लगा। वो कितने नरम थे, जैसे रुई के गोले हों।
“चूसो उन्हें… प्लीज,” त्विंकल कराही।
मैंने अपना मुंह उसके एक चuche पर रखा और चूसना शुरू कर दिया। मैंने उसके निप्पल को अपने होठों में लेकर चूसा, काटा, और अपनी जीभ से घुमाया। वो आहें भर रही थी, अपने हाथ मेरे बालों में फेर रही थी। मैंने दूसरे चuche को भी वैसे ही चूसा, और फिर दोनों को एक साथ दबाने लगा। वो पागल हो रही थी मजे से।
“आह्ह्ह… हां… और जोर से… बहुत मजा आ रहा है,” वो चिल्ला रही थी।
मैंने उसे नीचे की तरफ धकेलना शुरू किया, उसकी जींस की तरफ। मैंने उसकी जींस का बटन खोला और जिपर नीचे किया। उसकी जींस बहुत टाइट थी, इसलिए मैंने उसे उतारने में थोड़ी मशक्कत की। जब जींस उतरी तो मेरा दिल रुकने को आया। उसने एक लाल रंग की लेस वाली पैंटी पहनी थी जो बहुत छोटी थी। उसकी चूत पैंटी से बाहर उभरी हुई थी, और घनी झांटें उसकी पैंटी के किनारों से बाहर निकली हुई थीं। वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि मेरा लंड पैंट फाड़कर बाहर आने को तरस रहा था।
मैंने उसकी पैंटी भी खींचकर उतार दी। अब वो पूरी तरह से नंगी थी, मेरे सामने लेटी हुई। उसकी चूत देखकर मैं स्तब्ध रह गया। इतनी खूबसूरत चूत मैंने कभी नहीं देखी थी, भले ही सिर्फ पिक्चर में ही देखी हो। उसकी चूत गुलाबी रंग की थी, थोड़ी घनी झांटों से ढकी हुई लेकिन फिर भी उसकी दरार साफ दिख रही थी। उसकी चूत की होंठ मोटे थे, और बीच में से गीली चमक निकल रही थी।
मैंने अपनी उंगली उसकी चूत पर फेरी। वो पहले से ही गीली थी, बहुत ज्यादा गीली। मेरी उंगली उसके रस से चिपक गई। मैंने उंगली को उसकी चूत के मुंह पर रखा और धीरे से अंदर डालने की कोशिश की। वो बहुत टाइट थी, मेरी उंगली मुश्किल से अंदर जा रही थी।
“धीरे… थोड़ा दर्द हो रहा है,” वो कराही।
मैंने धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू की। वो अपनी कमर उठा-उठा कर मेरे साथ तालमेल बिठा रही थी। उसकी चूत से पानी बह रहा था, मेरी उंगली पूरी गीली हो गई थी। मैंने एक और उंगली अंदर डाल दी, अब दो उंगलियां उसकी चूत में थीं और मैं उन्हें अंदर-बाहर कर रहा था।
“ओह्ह्ह… हां… और जोर से… मजा आ रहा है,” वो चिल्ला रही थी।
मैंने अपना मुंह उसकी चूत पर ले जाया और चाटना शुरू कर दिया। उसकी चूत का स्वाद बहुत मीठा था, थोड़ा खट्टा और थोड़ा नमकीन। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के अंदर डाली और ऊपर की तरफ क्लिटोरिस पर घुमाई। वो पागल हो रही थी, अपने सिर को पीछे की तरफ फेंक कर, अपने चuche खुद ही मसल रही थी।
“चाटो… और जोर से चाटो… मेरी चूत फाड़ दो,” वो चीख रही थी।
मैंने उसकी दोनों टांगें खोल कर उसकी चूत को पूरी तरह से चाटा। मैंने उसके चूत के होंठों को अपने होठों में लेकर चूसा, उसकी क्लिटोरिस को काटा, और अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर डाल-डालकर चाटा। वो झड़ने वाली थी, मुझे लग गया था। उसकी कमर तेज-तेज उठने लगी, उसकी सांसें तेज हो गईं, और अचानक उसने मेरा सिर अपनी चूत पर दबा लिया और एक लंबी सिसकी के साथ झड़ गई। उसकी चूत से ढेर सारा पानी निकला, मैंने सब पी लिया। वो कांप रही थी, उसकी पूरी बदन में एक कंपन सा था।
अब मेरी बारी थी। मैंने अपनी शर्ट उतारी, फिर अपनी जींस भी उतार दी। मेरा लंड अंडरवियर से बाहर निकलने को तरस रहा था, इतना कड़ा हो गया था। मैंने अपना अंडरवियर भी उतार दिया। मेरा लंड बाहर आते ही त्विंकल ने उसे देखा और उसकी आंखें फाड़ फाड़ कर देखने लगी। मेरा लंड करीब सात इंच लंबा था और काफी मोटा था, और अब पूरी तरह से खड़ा था, मोटी नसें उस पर उभरी हुई थीं और टोपा लाल हो चुका था।
“कितना बड़ा है तुम्हारा,” वो बोली, और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी।
उसके हाथ बहुत नरम थे, और वो मेरे लंड को सहला रही थी जैसे कोई कीमती चीज हो। वो मेरे लंड के टोपे को सहलाती, फिर नीचे की तरफ जाती, और फिर ऊपर आती। मेरा लंड उसके हाथ में फूलकर और भी बड़ा हो गया था। फिर वो झुकी और मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया।
क्या गर्म, गीला मुंह था उसका। वो मेरे लंड को चूसने लगी, ऊपर से नीचे तक, और मैं उसके बाल पकड़ कर उसका सिर अपने लंड पर दबा रहा था। वो मेरे लंड को गले तक ले जाने लगी, और फिर बाहर निकाल कर फिर से अंदर। मेरा लंड उसके थूक से चमक रहा था, और वो आवाजें निकाल रही थी “चुप… चुप… चुप” की।
“चूसो… पूरा अंदर लो… और जोर से चूसो,” मैंने कहा, उसके सिर को दबाते हुए।
वो मेरे लंड को बहुत तेजी से चूसने लगी, कभी टोपे को जीभ से घुमाती, कभी नीचे की तरफ चाटती, और कभी पूरा अंदर लेकर चूसती। मैं उसके मुंह में अपना लंड पेल रहा था, और वो बड़े चाव से चूस रही थी। मेरा वीर्य निकलने वाला था, लेकिन मैंने खुद को रोका क्योंकि मैं अभी उसकी चूत में अपना लंड डालना चाहता था।
मैंने उसे उठाया और उसे घुटनों के बल बैठा दिया, उसकी गांड मेरी तरफ थी। वो डॉगी स्टाइल में थी, उसकी गांड बहुत मोटी और गोल थी, और उसकी चूत पीछे से दिख रही थी, गीली और लाल। मैंने अपने लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा और धीरे से अंदर धकेलना शुरू किया।
वो चीखी, “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है… धीरे डालो… बहुत मोटा है तुम्हारा।”
मैंने धीरे-धीरे अपना लंड उसकी चूत में डालना शुरू किया। वो बहुत टाइट थी, मेरा लंड उसकी चूत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर जा रहा था। मैंने थोड़ा थूक लगाया अपने लंड पर और फिर से धक्का दिया। इस बार मेरा आधा लंड अंदर चला गया। वो दर्द से कराह रही थी, लेकिन मैंने उसकी कमर पकड़ी और एक जोरदार झटका मारा। मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया।
“ओह्ह्ह… मर गई… इतना अंदर… आह्ह्ह,” वो चीखी।
मैंने रुककर उसे थोड़ा आराम दिया। फिर मैंने धीरे-धीरे झटके मारने शुरू किए। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज-तेज। वो अपनी कमर पीछे की तरफ धकेल रही थी, मुझे और अंदर लेने के लिए। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी, और अब मैं उसकी चूत में पूरी तरह से अपना लंड पेल रहा था। हर झटके के साथ “फच… फच… फच…” की आवाज आ रही थी, और त्विंकल भी मुझसे भी जोर-जोर से चिल्ला रही थी।
“और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… आह्ह्ह… मजा आ रहा है… चोदो मुझे,” वो रोने लगी थी मजे में।
मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। मैं उसकी कमर पकड़े हुए था और जोर-जोर से झटके मार रहा था। उसकी गांड मेरी तरफ हिल रही थी, और मैं कभी-कभी उसकी गांड पर थप्पड़ भी मार देता था। उसकी चूत इतनी गीली हो गई थी कि मेरा लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था, और उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कस रही थीं।
“और जोर से… और तेज… मैं झड़ने वाली हूं,” वो चीखी।
मैंने पूरी ताकत से उसे चोदना शुरू कर दिया। मैं जानबूझकर उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा-घुसाकर मार रहा था। वो पागल हो रही थी, अपने सिर को पीछे की तरफ फेंककर चीख रही थी। अचानक उसकी चूत ने मेरे लंड को बहुत जोर से कस लिया, और वो फिर से झड़ गई। इस बार उसकी चूत से इतना पानी निकला कि मेरी जांघें भीग गईं, और उसका पानी मेरे लंड से टपक-टपक कर नीचे गिर रहा था।
मैं भी झड़ने वाला था। मैंने पूछा, “अंदर गिराऊं या बाहर?”
“अंदर… पूरा अंदर डाल दो… मैं गोली खा लूंगी… बस तुम्हारा वीर्य मेरी चूत में चाहिए,” वो सांसे तेज करते हुए बोली।
मैंने अपना लंड उसकी चूत में ही रखा और जोर से झटके मारने शुरू किए। अब मैं अंतिम चरण पर था, मेरा लंड फूलकर और भी मोटा हो गया था। मैंने तीन-चार बहुत जोरदार झटके मारे और फिर मेरा लंड उसकी चूत में ही फट पड़ा। मेरा गाढ़ा, गर्म वीर्य उसकी चूत में भर गया, और मैंने सारा माल उसी में छोड़ दिया। वो भी मजे से कराह रही थी, मेरे वीर्य को अपनी चूत में महसूस कर रही थी।
मैं उसके ऊपर ही गिर गया, थक कर। हम दोनों पसीने से लथपथ थे, और हमारी सांसें तेज चल रही थीं। कुछ देर बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला, और देखा कि उसकी चूत से मेरा वीर्य और उसका पानी मिलकर बाहर बह रहा था। वो इतनी खूबसूरत लग रही थी उस वक्त, पूरी तरह से नंगी, घुटनों के बल, उसकी चूत लाल हो चुकी थी और सेक्स से भरी हुई थी।
लेकिन मेरा मन नहीं भरा था। मैंने उसे पलटा दिया, अब वो पीठ के बल लेट गई। मैं उसके ऊपर आ गया। उसके चuche मेरे मुंह के सामने थे, मैं उन्हें चूसते हुए उसकी चूत में अपना लंड फिर से डालने की कोशिश की। मेरा लंड अभी भी काफी हद तक कड़ा था, और उसकी चूत में मेरा वीर्य और उसका पानी लगा हुआ था जिससे वो और भी चिकनी हो गई थी।
मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाला और इस बार और जोर-जोर से झटके मारने शुरू किए। वो अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेट कर मुझे और अंदर खींच रही थी। उसकी चूत अब और भी ज्यादा गीली हो गई थी, और मेरा लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। मैं उसके चuche चूसते हुए, काटते हुए, उसे चोद रहा था।
“तुम्हारा लंड बहुत मस्त है… और जोर से चोदो… मैं फिर से झड़ने वाली हूं,” वो चीखी।
मैंने स्पीड और बढ़ा दी, अब मैं पूरी तेजी से उसकी चूत में अपना लंड पेल रहा था। हम दोनों का पसीना निकल रहा था, और गाड़ी हिल रही थी। त्विंकल ने अपने नाखून मेरी पीठ में गाड़ दिए, और अचानक वो फिर से झड़ गई। इस बार उसने इतनी जोर से मेरा लंड कसा कि मैं भी रुक नहीं सका और मैं भी फिर से झड़ गया। मेरा दूसरा वीर्य उसकी चूत में ही गिरा, और इस बार और भी ज्यादा मात्रा में।
हम दोनों थककर एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। कुछ देर तक हम वैसे ही पड़े रहे, एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर हमने धीरे-धीरे अपने कपड़े ठीक किए। त्विंकल मुस्कुरा रही थी, उसके चेहरे पर एक अलग ही संतुष्टि और खुशी की रौनक थी। उसके बाल बिखरे हुए थे, उसके होठ सूजे हुए थे, और उसकी चूत से अभी भी मेरा वीर्य बह रहा था जिसे उसने टिश्यू से साफ किया।
हमने गाड़ी स्टार्ट की और फार्महाउस की तरफ निकल गए। रास्ते में हम दोनों चुप थे, लेकिन मुस्कुरा रहे थे। जब हम फार्महाउस पहुंचे तो रात के साढ़े ग्यारह बज चुके थे। बाकी सब सो चुके थे, कोई नहीं जानता था कि रास्ते में क्या हुआ था। हमने चुपचाप अपने कमरों में जाकर सो गए।
लेकिन वो रात मेरी जिंदगी की सबसे यादगार रात बन गई। मैंने त्विंकल की चूत का मजा लिया था, उसके चuche चूसे थे, और उसे तीन बार चोदा था। उसके बाद हम कई बार और भी मिले, कभी राहुल के घर पर, कभी किसी होटल में, और कभी मेरी गाड़ी में ही। लेकिन वो पहली बार कभी नहीं भूलता जब मैंने उसकी गीली चूत में अपना मोटा लंड डाला था और उसे जोर-जोर से चोदा था। वो रात मेरे लिए एक नई शुरुआत थी, एक ऐसी दुनिया की जिसमें मैंने पहली बार किसी औरत की चूत का स्वाद चखा था, और वो स्वाद मुझे आज भी मदहोश कर देता है।
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