मेरा नाम सचिन है। मैं बारहवीं कक्षा का छात्र हूं और मेरे ट्यूशन सर का नाम अभिनव है। उम्र में वो करीब 32-33 साल के होंगे, लेकिन दिखने में बेहद हैंडसम और फिट हैं। गे सेक्स और भाभी की चुदाई
उनकी हाइट 6 फीट होगी और उनका बदला हुआ शरीर मुझे हमेशा से ही कुछ अजीब सी उत्तेजना देता था, जिसका मुझे तब पता नहीं था कि यह क्या है।
मैं उनके यहां पिछले दो साल से पढ़ने आता हूं। उनकी पत्नी अनामिका भाभी जी, जिनकी उम्र करीब 28-29 साल होगी, बेहद खूबसूरत हैं।
उनका गोरा रंग, भरे हुए बदन और हमेशा साड़ी में लिपटा हुआ उनका काया रूप मेरे मन में अक्सर ख्याल लाता था। लेकिन अजीब बात यह थी कि जब भी मैं सर को देखता, मेरा ध्यान उनके बदन पर ही जाता।
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मुझे नहीं पता था कि मुझे मर्दों में दिलचस्पी है – यह एहसास मुझे बाद में हुआ।
मैं रोज शाम को 5 बजे उनके घर पढ़ने जाता था। उनका घर एक छोटी सी सोसाइटी में था जहां दो कमरे का फ्लैट था। एक कमरे में उनका बेडरूम था और दूसरे में पढ़ाने का कमरा।
मैं अक्सर सोचता था कि सर इतने हैंडसम हैं और भाभी जी इतनी खूबसूरत, तो उनकी निजी जिंदगी कैसी होगी? लेकिन मैंने कभी इस बारे में ज्यादा नहीं सोचा।
एक दिन की बात है। मैं शाम को उनके घर पहुंचा तो भाभी जी नहीं थीं। सर ने बताया कि वह अपने मायके गई हैं। घर में सिर्फ हम दोनों थे।
वैसे तो मैं अक्सर अकेला ही पढ़ने आता था, लेकिन आज कुछ अलग सा माहौल था। सर ने आज शर्ट की जगह सिर्फ एक बनियान पहनी हुई थी और उनकी बाहें बाहर निकली हुई थीं।
उनकी छाती के बाल उस बनियान से झाँक रहे थे और उनकी मांसल बाहें देखकर मेरा दिल तेज धड़कने लगा।
“आज क्या पढ़ना है सचिन?” सर ने मुझसे पूछा।
“सर, फिजिक्स का कुछ डाउट है,” मैंने कहा।
“ठीक है, बैठो। मैं समझाता हूं,” सर ने मुझे अपने पास बैठने का इशारा किया।
मैं उनके बगल में बैठ गया। उनकी बॉडी से एक अजीब सी खुशबू आ रही थी – शायद कोई परफ्यूम या डियोड्रेंट। मैं उस खुशबू में खो सा गया। सर ने मुझे फिजिक्स का एक सवाल समझाना शुरू किया, लेकिन मेरा ध्यान उनकी बातों में नहीं, उनके बदन में था। मेरी नजरें बार-बार उनकी बाहों पर जा रही थीं।
“क्या हुआ सचिन? ध्यान कहां है?” सर ने मेरी ओर देखते हुए पूछा।
“कुछ नहीं सर,” मैंने शर्माते हुए कहा।
“सच बताओ, क्या सोच रहे हो?” सर ने मेरे कंधे पर हाथ रखा।
उनके हाथ के स्पर्श से मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया। मैं कांप गया। “सर, मैं… मैं…” मैं कुछ कह नहीं पाया।
सर ने मेरे चेहरे को अपने हाथों में लिया और मेरी आंखों में देखने लगे। “तुम्हें पता है सचिन, मुझे पहले दिन से ही तुम्हारी आंखों में एक अजीब सी चमक दिखी है। तुम मुझे देखते हो, है ना?”
मैं घबरा गया। “नहीं सर, मैं…”
“झूठ मत बोलो,” सर ने मेरे चेहरे को पास खींचा। “मुझे पता है तुम्हें क्या चाहिए।”
ट्यूशन सर का गे सेक्स
इतना कहकर सर ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मैं तो जैसे पत्थर का हो गया। यह मेरा पहला किस था और वो भी एक मर्द के साथ। लेकिन अजीब बात यह थी कि मुझे बुरा नहीं लग रहा था। बल्कि मेरे अंदर एक अजीब सी खुशी और उत्तेजना महसूस हो रही थी।
सर ने मेरे होंठों को चूसना शुरू किया और मैं भी धीरे-धीरे उनकी बाहों में समाने लगा। उनका किस बहुत प्यारा था – मुलायम, गर्म और प्यार भरा। मेरा लंड तो पहले ही खड़ा हो चुका था और अब तो वो मेरी पैंट फाड़ने को तरस रहा था।
“तुम्हें पता है सचिन, मुझे लड़कों में बहुत दिलचस्पी है,” सर ने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा। “और तुम बेहद खूबसूरत हो।”
यह सुनकर मेरे शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। मैं भी तो यही महसूस करता था, लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा था। आज पता चला कि मुझे मर्दों में दिलचस्पी है – मैं गे हूं।
सर ने मेरी शर्ट उतार दी और मेरे छाते पर अपने होंठ रख दिए। वो मेरे निप्पल्स को चूसने लगे और मैं आहें भरने लगा। “ऊह्ह्ह सर… बहुत मजा आ रहा है…” मैंने सिसकते हुए कहा।
“अभी तो शुरुआत है प्यारे,” सर ने कहा और मेरी पैंट की तरफ बढ़ गए।
उन्होंने मेरी पैंट और अंडरवियर एक साथ उतार दिए। मेरा 7 इंच का लंड उछलकर बाहर आ गया। सर ने उसे देखकर मुस्कुराये। “वाह, कितना सुंदर और मोटा है तुम्हारा।”
इतना कहकर सर ने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया। ओह्ह्ह… क्या एहसास था वो! उनकी गर्म गर्म जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी और वो उसे चूसे जा रहे थे। मैं तो स्वर्ग में पहुंच गया। “आह्ह्ह सर… और चूसो… बहुत मजा आ रहा है…” मैं कराह रहा था।
सर ने मेरे लंड को बड़े मजे से चूसा। करीब दस मिनट तक वो मेरे लंड को अपने मुंह में रखकर चूसते रहे। फिर वो उठे और अपनी बनियान और शॉर्ट्स उतार दिए। उनका बदन देखकर मेरी आंखें फटी रह गईं। क्या मांसल शरीर था उनका – चौड़ी छाती, कसी हुई पेट की मांसपेशियां, और उनके बीच एक 8 इंच का मोटा काला लंड जो पूरी तरह खड़ा था।
“अब तुम मुझे चूसो,” सर ने आदेश दिया।
मैं घुटनों के बल बैठ गया और उनके लंड को हाथ में लिया। वो बहुत गर्म और कड़क था। मैंने उसे अपने मुंह में लेने की कोशिश की लेकिन वो बहुत मोटा था। धीरे-धीरे मैंने उसे अपने मुंह में लिया और चूसना शुरू किया। सर के मुंह से आहें निकलने लगीं। “हाँ सचिन… ऐसे ही चूसो… बहुत अच्छा लग रहा है…”
मैं उनके लंड को चूसता रहा। करीब पंद्रह मिनट तक मैंने उनके लंड का रसपान किया। फिर सर ने मुझे उठाया और कहा, “अब असली मजा आएगा। आज मैं तुम्हारी गांड मारूंगा।”
यह सुनकर मैं थोड़ा डर गया, लेकिन अंदर से उत्साह भी था। मैंने सुना था कि गांड मरवाने में बहुत दर्द होता है, लेकिन मैं तैयार था।
सर ने मुझे बेडरूम में ले गए। वहां उन्होंने मुझे बेड पर घुटनों के बल झुकाया और मेरी गांड के पीछे आ गए। उन्होंने पहले अपनी उंगली पर थूक लगाया और मेरी गांड में डाली। मैं सिसक उठा। “आह्ह्ह… सर… धीरे…”
“डरो मत प्यारे, पहले थोड़ा दर्द होगा फिर मजा आएगा,” सर ने कहा।
उन्होंने मेरी गांड को अच्छी तरह तैयार किया। पहले एक उंगली, फिर दो, फिर तीन। मेरी गांड थोड़ी ढीली हो गई। फिर सर ने अपने लंड पर कंडोम चढ़ाया और थूक लगाया।
“तैयार हो?” सर ने पूछा।
“हाँ सर, करो…” मैंने कहा।
सर ने अपने लंड का सुपाड़ा मेरी गांड पर रखा और धीरे से धक्का दिया। मेरी गांड फटने लगी। “आह्ह्ह… बहुत दर्द हो रहा है सर… रुको…”
“थोड़ा सब्र रखो,” सर ने कहा और थोड़ा रुककर फिर से धक्का दिया।
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इस बार उनका आधा लंड मेरी गांड के अंदर चला गया। मैं दर्द से चीख उठा। “आह्ह्ह… माँ… बहुत दर्द हो रहा है…”
“बस हो गया, अब मजा आएगा,” सर ने कहा और पूरा लंड एक ही धक्के में अंदर डाल दिया।
मेरी आंखों से आंसू निकल आए। दर्द बहुत तेज था। लेकिन सर रुके नहीं। उन्होंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। पहले तो मुझे बहुत दर्द हुआ, लेकिन फिर धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा और एक अजीब सा मजा महसूस होने लगा।
“कैसा लग रहा है?” सर ने पूछा।
“अब… अब अच्छा लग रहा है सर… और तेज करो…” मैंने कहा।
सर ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। वो मेरी गांड में जोर-जोर से धक्के मारने लगे। पच-पच की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मेरा लंड भी पूरी तरह खड़ा था और मैं खुद को हिला रहा था।
“तेरी गांड बहुत टाइट है सचिन… बहुत मजा आ रहा है…” सर कराह रहे थे।
“हाँ सर… मारो मेरी गांड… फाड़ दो मेरी गांड…” मैं भी कामुक होकर चिल्ला रहा था।
सर ने मुझे करीब आधे घंटे तक जमकर चोदा। वो मेरी गांड में अपना लंड अंदर-बाहर करते रहे। फिर उन्होंने मुझे घुमाया और मुझे अपनी गोद में बिठाया। अब मैं उनके ऊपर बैठकर उनका लंड अपनी गांड में ले रहा था।
“उछलो प्यारे, खुद चलो,” सर ने कहा।
मैं उनके लंड पर उछलने लगा। क्या अद्भुत एहसास था वो! उनका मोटा लंड मेरी गांड की गहराइयों को छू रहा था। मैं उछल-उछलकर चुदवा रहा था। मेरा लंड भी हवा में हिल रहा था।
“आह्ह्ह… सर… मैं झड़ने वाला हूं…” मैंने कहा।
“रुको, मैं भी आ रहा हूं,” सर ने कहा और जोर-जोर से धक्के मारने लगे।
फिर एकदम सर ने अपना लंड मेरी गांड के अंदर ही छोड़ दिया। मैं भी उनके ऊपर ही झड़ गया। हम दोनों थककर बेड पर गिर पड़े।
कुछ देर बाद जब हम सांस ले रहे थे, तभी दरवाजे की घंटी बजी।
भाभी जी की चुदाई
सर ने कहा, “लगता है अनामिका आ गई है।”
मैं घबरा गया। “सर, मैं तो…”
“डरो मत, वो भी तुम्हें पसंद करेगी,” सर ने मुस्कुराते हुए कहा।
सर ने अपने कपड़े नहीं पहने और नंगे ही दरवाजा खोला। अनामिका भाभी जी अंदर आईं। उन्होंने सर को नंगा देखा तो मुस्कुराईं, लेकिन जब उन्होंने मुझे भी नंगा बेड पर देखा तो उनकी आंखें हैरान हो गईं।
“यह क्या अभिनव? सचिन यहां…” भाभी जी ने पूछा।
“प्यारी, आज तुम्हें एक सरप्राइज देता हूं,” सर ने भाभी जी को अपनी बाहों में भरते हुए कहा। “सचिन और मैंने कुछ किया है और अब मैं चाहता हूं कि तुम भी हमारे साथ शामिल हो।”
“क्या? मतलब तुम दोनों ने…” भाभी जी समझ गईं।
“हाँ, और अब मैं तुम दोनों को एक साथ चोदना चाहता हूं,” सर ने कहा।
भाभी जी ने मेरी ओर देखा। मैं शर्म से लाल हो रहा था। लेकिन भाभी जी की आंखों में एक अजीब सी चमक थी। “ठीक है, लेकिन पहले मैं तुम दोनों को देखना चाहती हूं,” भाभी जी ने कहा।
सर ने मुझे इशारा किया। मैं उठा और भाभी जी के पास गया। उन्होंने मेरे लंड को देखा जो फिर से खड़ा हो रहा था। “वाह, सचिन, तुम्हारा तो बहुत बड़ा है,” भाभी जी ने कहा।
फिर सर ने भाभी जी को अपने पास खींचा और उनके होंठों पर किस करने लगे। मैं उन्हें देखता रहा। कुछ देर बाद सर ने भाभी जी की साड़ी खोलनी शुरू की। भाभी जी ने आज हल्की नीली साड़ी पहनी थी। सर ने उनकी साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट उतार दिया। अब भाभी जी भी सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं।
“सचिन, तुम भाभी जी की ब्रा खोलो,” सर ने कहा।
मैं भाभी जी के पास गया और उनकी पीछे से ब्रा की हुक खोल दी। उनकी ब्रा गिर गई और उनके दोनों गोरे-गोरे, गोल-मटोल बूब्स बाहर आ गए। उनके निप्पल गुलाबी और कड़क थे। मैं उन्हें देखता ही रह गया।
“अब उनकी पैंटी भी उतारो,” सर ने कहा।
मैंने भाभी जी की पैंटी नीचे खींची। उनकी चूत पर हल्के बाल थे और वो बिल्कुल गीली थी। अब हम तीनों नंगे थे – मैं, सर और भाभी जी।
“अब देखो, मैं कैसे तुम दोनों को चोदता हूं,” सर ने कहा।
सर ने भाभी जी को बेड पर लिटाया और मुझे उनके ऊपर लेटा दिया। अब मैं भाभी जी के ऊपर था और हम दोनों का चेहरा एक दूसरे के सामने था। भाभी जी ने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और अपनी चूत पर रखा।
“डालो सचिन, मेरी चूत में डालो,” भाभी जी ने कहा।
मैंने एक धक्का दिया और मेरा लंड भाभी जी की चूत में समा गया। क्या गर्म और टाइट चूत थी उनकी! मैं तो मस्त हो गया। मैंने धक्के मारने शुरू किए।
“आह्ह्ह… सचिन… बहुत मजा आ रहा है… और तेज करो…” भाभी जी कराह उठीं।
मैं जोर-जोर से भाभी जी की चूत में धक्के मारने लगा। उनकी चूत बहुत गीली थी और मेरा लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। तभी मुझे पीछे से कुछ महसूस हुआ। सर मेरी गांड के पीछे खड़े थे और वो मेरी गांड में अपना लंड डालने की तैयारी कर रहे थे।
“तैयार हो सचिन? अब तुम भाभी जी की चूत चोदो और मैं तुम्हारी गांड चोदता हूं,” सर ने कहा।
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सर ने अपना लंड मेरी गांड में डाल दिया। अब मैं बीच में था – मैं भाभी जी की चूत चोद रहा था और सर मेरी गांड चोद रहे थे। यह एक अद्भुत एहसास था। हम तीनों एक साथ मजे ले रहे थे।
“आह्ह्ह… बहुत मजा आ रहा है… और तेज… दोनों और तेज करो…” भाभी जी चिल्ला रही थीं।
सर मेरी गांड में जोर-जोर से धक्के मार रहे थे और मैं भी भाभी जी की चूत में पूरे जोर से धक्के मार रहा था। हम तीनों की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं – आहें, कराहें और चोदने की आवाजें।
“भाभी जी की चूत बहुत मस्त है सर…” मैंने कहा।
“और तुम्हारी गांड भी बहुत टाइट है सचिन…” सर ने कहा।
हम तीनों इसी पोजीशन में करीब बीस मिनट तक चुदाई करते रहे। फिर सर ने मुझे पीछे से खींचा और भाभी जी के ऊपर से हटा दिया। अब सर भाभी जी के ऊपर चढ़ गए और उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया।
“अब देखो मैं कैसे तुम्हारी भाभी जी को चोदता हूं,” सर ने कहा।
सर ने भाभी जी की चूत में जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। भाभी जी बुरी तरह कराह रही थीं। “आह्ह्ह… अभिनव… बहुत मजा आ रहा है… और तेज… मेरी चूत फाड़ दो…”
मैं एक तरफ बैठकर यह सब देख रहा था और अपना लंड हिला रहा था। सर भाभी जी को बड़े मजे से चोद रहे थे। उनकी चूत से पच-पच की आवाजें आ रही थीं।
“सचिन, आओ, अब तुम भाभी जी के मुंह में अपना लंड डालो,” सर ने कहा।
मैं उठा और भाभी जी के सिर के पास गया। उन्होंने मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगीं। अब सर उनकी चूत चोद रहे थे और मैं उनका मुंह चोद रहा था। भाभी जी दोनों तरफ से मजे ले रही थीं।
कुछ देर बाद सर ने अपना लंड भाभी जी की चूत से निकाला और मुझे कहा, “अब तुम भाभी जी की गांड मारो।”
मैंने भाभी जी को घुटनों के बल कर दिया। उनकी गांड बहुत सुंदर थी – गोरी और गोल। मैंने अपना लंड उनकी गांड पर रखा और धीरे से धक्का दिया। भाभी जी की गांड थोड़ी ढीली थी इसलिए मेरा लंड आसानी से अंदर चला गया।
“आह्ह्ह… सचिन… धीरे… मेरी गांड फाड़ दोगे क्या…” भाभी जी चीखीं।
“बस थोड़ी देर में मजा आएगा,” मैंने कहा और धक्के मारने शुरू किए।
मैं भाभी जी की गांड में जोर-जोर से धक्के मारने लगा। उनकी गांड बहुत मस्त थी। तभी सर मेरे पीछे आए और उन्होंने अपना लंड मेरी गांड में डाल दिया। अब फिर से वही पोजीशन – सर मेरी गांड चोद रहे थे और मैं भाभी जी की गांड चोद रहा था।
“यह है असली मजा – ट्यूशन सेक्स, गे सेक्स और भाभी जी की चुदाई एक साथ,” सर ने कहा।
हम तीनों इसी तरह चुदाई करते रहे। करीब आधे घंटे बाद सर ने कहा, “अब मैं झड़ने वाला हूं।”
सर ने अपना लंड मेरी गांड से निकाला और भाभी जी के मुंह में डाल दिया। वो भाभी जी के मुंह में झड़ गए। भाभी जी ने सारा रस पी लिया। मैं भी भाभी जी की गांड में ही झड़ गया।
हम तीनों थककर बेड पर पड़ गए। यह एक अविस्मरणीय रात थी। मुझे पता चल गया था कि मैं गे हूं और मुझे मर्दों में दिलचस्पी है। लेकिन साथ ही मुझे भाभी जी की चूत और गांड का भी मजा आया।
“कैसा लगा सचिन?” सर ने पूछा।
“बहुत अच्छा सर। यह मेरी जिंदगी की सबसे अच्छी रात थी,” मैंने कहा।
“अब हम तीनों रोज यही करेंगे,” भाभी जी ने मुस्कुराते हुए कहा।
“हाँ, यह हमारा छोटा सा सीक्रेट रहेगा – ट्यूशन सर का गे सेक्स और भाभी जी की चुदाई,” सर ने कहा।
उसके बाद से मैं रोज उनके घर जाता था और हम तीनों मिलकर चुदाई का खेल खेलते थे। कभी सर मेरी गांड मारते, कभी मैं भाभी जी की चूत या गांड मारता, और कभी हम तीनों एक साथ। यह मेरी अंतर्वासना की कहानी थी जो मेरी जिंदगी बदल गई।
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