
पहाड़ी स्टेशन की वो बारिश वाली रात
स्टेशन की प्लेटफॉर्म पर पड़ी भीगी सीमेंट की सतह पर रिमझिम बारिश की बूंदें नाच रही थीं। शाम के पांच बजे थे और आसमान में ऐसा घना अंधेरा छाया हुआ था जैसे रात पहले ही आ गई हो। पहाड़ी इलाके की ये बारिश कुछ अलग ही मादकता लिए हुए थी—ठंडी हवाएं, गुलाबी होंठों पर पड़ती बूंदें, और भीगे हुए कपड़ों में लिपटे शरीरों की कुदरती खूबसूरती। पहाड़ी स्टेशन की वो बारिश वाली रात
रिवा प्लेटफॉर्म के छत के नीचे खड़ी थी, अपने हाथ में एक छोटा सा डफल बैग लिए हुए। उसकी उम्र छब्बीस साल की थी, पर उसके चेहरे पर एक ऐसी परिपक्वता थी जो उसे उसकी उम्र से बड़ा बना देती थी। पांच फीट पांच इंच की उसकी लंबाई, और उस पर एक ऐसा शरीर जो किसी मूर्तिकार की सर्वोत्तम रचना लगता था। उसने एक गहरे हरे रंग की साड़ी पहनी हुई थी, जो अब बारिश में भीगकर उसके शरीर के हर एक घुमाव से चिपकी हुई थी। साड़ी का पल्लू उसके सिर से लेकर कंधे तक बिछा हुआ था, और भीगे हुए कपड़ों के कारण उसकी पीठ की नरम रेखाएं साफ झलक रही थीं।
उसके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी थी—वो उदासी जो किसी टूटे हुए रिश्ते, किसी अधूरी कहानी की गवाह होती है। उसकी बड़ी-बड़ी आंखें, जिनमें हल्की सी काजल की लकीर थी, कहीं दूर खोई हुई थीं। उसके गालों पर पड़ी बारिश की बूंदें आंसुओं जैसी लग रही थीं, पर वो रो नहीं रही थी। वो बस खड़ी थी, एक मूरत की तरह, जिसे जिंदगी के तूफान में बहा कर यहां लाया गया था।
तभी प्लेटफॉर्म के दूसरे छोर से एक आदमी आता हुआ दिखाई दिया। उसकी उम्र करीब बत्तीस-तीस साल की थी। लंबा, सुदृढ़ बदन, और कंधों पर एक बैकपैक लटकाए हुए। उसने एक मोटी जैकेट पहनी हुई थी जो बारिश से भीग चुकी थी, और सिर पर एक पुरानी टोपी थी जिससे पानी की बूंदें टपक रही थीं। उसका चेहरा दाढ़ी में ढका हुआ था, और उसकी आंखों में एक ऐसी गहराई थी जो किसी समंदर जैसी लगती थी—शांत सतह, पर अंदर हजारों तूफान।
वो आदमी जब रिवा के पास से गुजरा, तो उसकी नजरें उस पर ठहर सी गईं। शायद वो भीगी हुई साड़ी, शायद वो अकेली खड़ी लड़की, या शायद वो उदासी जो उसके चेहरे से बयां हो रही थी—कुछ तो था जो उस आदमी को रोक गया।
“क्या तुम्हें कहीं जाना है?” उस आदमी की आवाज़ भारी थी, जैसे कई दिनों से बोली न गई हो।
रिवा ने धीरे से उसकी तरफ देखा। उसकी आंखें उस आदमी के चेहरे पर टिकीं, और कुछ पल के लिए दोनों एक-दूसरे को देखते रहे। बारिश की आवाज़ के बीच, दो अजनबियों की आंखें कुछ कह रही थीं जो शब्दों में कहना मुश्किल था।
“मुझे… मुझे नहीं पता कहां जाना है,” रिवा की आवाज़ कांप रही थी, शायद ठंड से, शायद किसी और वजह से।
आदमी ने अपनी जैकेट का जिप खोला और एक पुराना, मुड़ा हुआ नक्शा निकाला। “ये ट्रेन रात भर नहीं चलेगी। लैंडस्लाइड हो गया है आगे। मेरे पास यहां पास में एक छोटी सी कोठी है। अगर तुम चाहो तो…”
रिवा ने उस आदमी की आंखों में देखा। वहां कोई चालाकी नहीं थी, कोई बुरी नीयत नहीं थी—बस एक साधारण सी मानवीय चिंता थी। और शायद, शायद कुछ और भी था जो अभी छिपा हुआ था।
“मैं रिवा हूं,” उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया।
“अर्जुन,” आदमी ने उसका हाथ अपने गर्म हाथों में लिया।
उस स्पर्श में कुछ था—एक बिजली सी दौड़ी जो दोनों ने महसूस की, पर किसी ने कुछ नहीं कहा। अर्जुन ने अपना बैकपैक उतारा और रिवा का डफल बैग अपने कंधे पर लटकाया। दोनों प्लेटफॉर्म से उतरे और बारिश में भीगते हुए एक संकरी सी पगडंडी पर चल पड़े।
रास्ता करीब पंद्रह मिनट का था, पर उन पंद्रह मिनटों में दोनों ने एक-दूसरे को बिना कुछ कहे कुछ बता दिया। रिवा ने अर्जुन को बताया कि वो एक शादी से भागी हुई दुल्हन है—वो शादी जो उसकी मर्जी के बिना तय कर दी गई थी, उस आदमी से जिसे वो जानती तक नहीं थी। और अर्जुन ने रिवा को बताया कि वो एक लेखक है—वो लेखक जो अपनी कहानियों में जीता है क्योंकि असली जिंदगी में उसने कुछ खो दिया है जिसे वापस पाना असंभव है।
जब वो कोठी पर पहुंचे, तो रात पूरी तरह छा चुकी थी। कोठी एक पुरानी लकड़ी की इमारत थी, जिसके चारों ओर देवदार के पेड़ थे। अर्जुन ने दरवाजा खोला और रिवा को अंदर आने का इशारा किया।
अंदर एक छोटा सा कमरा था, जिसके एक कोने में एक पुरानी लकड़ी की मेज थी, और दूसरे कोने में एक बड़ा सा बिस्तर जिस पर मोटी कंबल बिछी हुई थीं। बीच में एक छोटी सी बुखारी थी जिसमें आग जलने को तरस रही थी।
अर्जुन ने सबसे पहले बुखारी में आग जलाई। लकड़ी के जलने की खुशबू, आग की लपटों की गर्माहट, और बाहर की बारिश की आवाज़—तीनों मिलकर एक ऐसा माहौल बना रहे थे जो किसी सपने जैसा लगता था।
रिवा खड़ी थी, अपनी भीगी हुई साड़ी के पल्लू को कसकर पकड़े हुए। उसके बालों से पानी की बूंदें टपक रही थीं, और उसके होंठ ठंड से कांप रहे थे। अर्जुन ने उसकी तरफ देखा, और उसके चेहरे पर एक अजीब सी भावुकता थी।
“तुम्हें गर्म कपड़े बदलने होंगे,” अर्जुन ने कहा और एक अलमारी से एक मोटा स्वेटर और एक पुरानी शॉल निकाली। “ये मेरी बहन के हैं, जो अब यहां नहीं रहती।”
रिवा ने वो कपड़े लिए और बाथरूम की तरफ बढ़ी। पर दरवाजे पर रुकी और पीछे मुड़ी। “अर्जुन… धन्यवाद।”
अर्जुन ने सिर हिलाया, और रिवा बाथरूम में चली गई।
जब रिवा बाहर आई, तो वो अर्जुन का स्वेटर पहने हुए थी—एक ऐसा स्वेटर जो उसके घुटनों तक आ रहा था और उसके कंधे से एक तरफ गिर रहा था। उसने अपनी भीगी हुई साड़ी उतार दी थी, और अब स्वेटर के नीचे वो केवल अपने अंदरूनी कपड़ों में थी—एक काली रंग की लेस वाली ब्रा और मैचिंग पैंटी जो उसकी शादी के जोड़े का हिस्सा थी, जो अब कभी इस्तेमाल नहीं होगी।
अर्जुन की आंखें जब उस पर पड़ीं, तो उसका दिल एक पल के लिए रुक सा गया। वो स्वेटर रिवा पर इतना बड़ा लग रहा था कि उसकी एक कंधा पूरी तरह बाहर निकला हुआ था, और उसकी लंबी टांगें नंगी थीं, गोरी और कुरेदी हुई। उसके बाल अभी भी गीले थे, और पानी की बूंदें उसकी गर्दन से होते हुए उसके कॉलरबोन पर टिकी हुई थीं।
“तुम… तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो,” अर्जुन की आवाज़ फूटी फूटी सी थी।
रिवा ने शर्माते हुए अपनी पलकें झुकाईं। “ये तुम्हारा स्वेटर है… इसकी खुशबू अच्छी है।”
दोनों बुखारी के सामने फर्श पर बिछे एक पुराने कालीन पर बैठ गए। अर्जुन ने दो मग में गर्म गर्म कॉफी बनाई और एक रिवा को दी। उनकी उंगलियां जब एक-दूसरे को छूईं, तो दोनों ने एक पल के लिए वो स्पर्श महसूस किया—गर्म, जीवंत, और कुछ ऐसा जो दोनों को एक दूसरे की ओर खींच रहा था।
“तुम क्यों लिखते हो?” रिवा ने पूछा, अपनी आंखें आग की लपटों में गड़ाए हुए।
अर्जुन ने एक गहरी सांस ली। “क्योंकि लिखने में मैं वो जी पाता हूं जो असलियत में नहीं जी पाया। मैंने किसी को खोया है, रिवा। किसी को जो मेरी जिंदगी थी, और अब नहीं है।”
रिवा ने उसकी तरफ देखा। अर्जुन की आंखों में आंसू थे जो वो रोक रहा था। “मुझे बताओ,” रिवा की आवाज़ इतनी मधुर थी, इतनी दिलासा देने वाली।
“उसका नाम मीरा था,” अर्जुन ने कहा। “हम दस साल साथ थे। पर जिंदगी को कुछ और मंजूर था। एक दुर्घटना… और वो चली गई। उसके बाद से मैं यहां हूं, अपनी कहानियों में, अपने ख्यालों में।”
रिवा ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और अर्जुन का हाथ अपने हाथों में ले लिया। “मैं समझ सकती हूं। आज से पहले मैं भी किसी की थी, पर वो मुझे नहीं समझ पाया। उसे मेरी जरूरत नहीं थी, मेरी इच्छाएं नहीं थीं। उसे बस एक औरत चाहिए थी जो उसके घर की देखभाल करे, उसके बच्चे पैदा करे। मैं एक इंसान थी, अर्जुन, एक जिंदा इंसान जिसे प्यार चाहिए था, समझ चाहिए थी।”
दोनों की आंखें मिलीं। बुखारी की रोशनी में, दो टूटे हुए दिल, दो अकेली आत्माएं, एक-दूसरे को देख रही थीं। और फिर, जैसे कोई अदृश्य ताकत उन्हें खींच रही हो, दोनों एक-दूसरे की ओर झुके।
अर्जुन ने धीरे से रिवा का चेहरा अपने हाथों में लिया। उसकी उंगलियां उसके गीले बालों में फंसीं, उसके गालों को छूती हुईं, उसकी ठोड़ी को सहलाती हुईं। “क्या मैं…”
रिवा ने अपनी आंखें बंद कर लीं। उसकी सांसें तेज हो रही थीं, उसका दिल दौड़ रहा था। उसने हल्के से सिर हिलाया, और फिर हां में।
अर्जुन के होंठ जब रिवा के होंठों से मिले, तो वो चुंबन सिर्फ एक चुंबन नहीं था। वो दो टूटे हुए दिलों का मिलन था, दो अकेलेपन का अंत था, दो आत्माओं का एक-दूसरे को ढूंढना था। अर्जुन के होंठ रिवा के होंठों को चूम रहे थे, पहले धीरे-धीरे, फिर जोश से, फिर एक ऐसे जुनून से जो सालों से दबा हुआ था।
रिवा ने अपने हाथ अर्जुन की गर्दन के पीछे ले गई और उसे अपने करीब खींच लिया। उसके होंठ अर्जुन के होंठों का जवाब दे रहे थे, उसकी जीभ अर्जुन की जीभ से खेल रही थी, एक ऐसा नृत्य जो शुरू हुआ था और अब रुकने वाला नहीं था।
अर्जुन ने धीरे-धीरे रिवा को फर्श पर लिटाया, कालीन की मुलायम सतह पर। वो उसके ऊपर झुका, और उसके होंठ अब रिवा के गर्दन पर थे—उसकी नरम, गीली त्वचा को चूमते हुए, उसकी गर्दन की लय को महसूस करते हुए। रिवा का सिर पीछे की ओर झुक गया, और उसके मुंह से एक हल्की सी सिसकी निकली।
“अर्जुन… ओह…”
अर्जुन के हाथ अब रिवा के स्वेटर के नीचे घुस रहे थे। उसकी उंगलियां उसकी कमर को छू रही थीं, उसकी पीठ की नरम त्वचा को सहला रही थीं। रिवा की त्वचा आग की गर्माहट और बाहर की ठंडक के बीच एकदम गर्म हो गई थी, और उसके शरीर में एक अजीब सी कंपन दौड़ रही थी।
अर्जुन ने धीरे से उसका स्वेटर ऊपर उठाया। रिवा ने अपने हाथ ऊपर उठाए, और वो स्वेटर उसके सिर से निकल गया। अब रिवा केवल अपनी काली लेस वाली ब्रा और पैंटी में थी, और बुखारी की लपटों की रोशनी में उसका शरीर एक मूरत जैसा लग रहा था—गोरी त्वचा, सुडौल curves, और वो नाभि जो एकदम गोल और आकर्षक थी।
अर्जुन की सांसें रुक सी गईं। वो रिवा को देख रहा था, जैसे कोई कलाकार अपनी सबसे कीमती रचना को देखता है। “तुम… तुम इतनी खूबसूरत क्यों हो?” उसकी आवाज़ में एक दर्द था, एक तड़प थी।
रिवा ने अपने हाथ बढ़ाए और अर्जुन की जैकेट खोलने लगी। उसकी उंगलियां कांप रही थीं, पर उसमें एक निर्णय था—एक निर्णय जो वो आज रात लेने वाली थी, अपनी जिंदगी के लिए, अपनी खुशी के लिए।
अर्जुन ने उसकी मदद की, और जल्दी ही उसकी जैकेट, उसकी शर्ट, और फिर उसकी बनियान भी उतर गई। अब अर्जुन भी ऊपर से नंगा था, और रिवा ने पहली बार उसका शरीर देखा—उसकी चौड़ी छाती जिस पर हल्के बाल थे, उसका पेट जो सख्त और मजबूत था, और उसके कंधे जो इतने चौड़े थे कि रिवा को उनमें छिपने का मन कर रहा था।
दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे, और फिर अर्जुन ने रिवा को अपनी बाहों में उठाया। वो उसे उठाकर बिस्तर की ओर ले गया, और धीरे से उसे सफेद चादरों पर लिटा दिया। रिवा का शरीर बिस्तर पर फैला हुआ था, उसके बाल तकिए पर बिखरे हुए थे, और उसकी आंखों में एक ऐसी चमक थी जो अर्जुन को पागल कर रही थी।
अर्जुन बिस्तर पर रिवा के बगल में लेट गया, और उसने अपना एक हाथ रिवा के पेट पर रखा। उसकी उंगलियां उसकी नाभि के आसपास घूम रही थीं, और रिवा की सांसें तेज होती जा रही थीं। फिर अर्जुन ने धीरे से उसकी ब्रा के हुक को खोला, और वो धीरे-धीरे उसके कंधों से हटा दी।
रिवा की स्तनों की सुडौल गोलाई सामने आ गई—गोरी त्वचा, गुलाबी अग्रभाग, और वो आकृति जो किसी भी मर्द को दीवाना बना दे। अर्जुन ने एक गहरी सांस ली, और फिर उसने अपने होंठ एक स्तन पर रख दिए। उसकी जीभ ने उस गुलाबी अग्रभाग को छुआ, और रिवा की पीठ बिस्तर से ऊपर उठ गई।
“आह… अर्जुन… प्लीज…”
अर्जुन ने उसकी बात पूरी नहीं होने दी। वो उसके स्तनों के बीच की दरार में अपनी जीभ चला रहा था, एक स्तन को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था, और दूसरे को अपने हाथ से सहला रहा था। रिवा के मुंह से सिसकियां निकल रही थीं, और उसके हाथ अर्जुन के बालों में फंसे हुए थे, उसे और करीब खींच रहे थे।
फिर अर्जुन ने धीरे-धीरे नीचे की ओर चुंबन करना शुरू किया। उसके होंठ रिवा के पेट पर थे, उसकी नाभि को चूम रहे थे, फिर नीचे, उसकी पैंटी की लेस के पास। रिवा की टांगें कांप रही थीं, और उसने अपनी आंखें बंद कर लीं, अपने आप को उस पल के हवाले कर दिया।
अर्जुन ने धीरे से उसकी पैंटी नीचे खींची। रिवा ने अपनी टांगें थोड़ी उठाईं, और वो पैंटी उसके पैरों से निकल गई। अब रिवा पूरी तरह नंगी थी, और अर्जुन उसके शरीर की खूबसूरती को देखकर चकित था—उसकी जांघों की गोलाई, उसके कूल्हों की उभार, और वो जगह जो अब उसकी सबसे ज्यादा ध्यान मांग रही थी।
अर्जुन ने अपने होंठ रिवा की जांघों पर रखे। उसकी जीभ ने उसकी नरम त्वचा को चूमा, धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ता हुआ। रिवा की सांसें रुक सी गईं, और उसने अपने हाथ चादरों को मजबूती से पकड़ लिए। जब अर्जुन की जीभ ने उसके सबसे संवेदनशील हिस्से को छुआ, तो रिवा के मुंह से एक चीख निकली जो दर्द और सुख दोनों का मिश्रण थी।
“ओह गॉड… अर्जुन… ये… ये क्या हो रहा है…”
अर्जुन ने जवाब नहीं दिया। वो अपनी जीभ से रिवा की खुशी का केंद्र चूम रहा था, उसे चाट रहा था, और रिवा के शरीर को एक ऐसी लहर दे रहा था जो उसे ऊपर की ओर उठा रही थी। रिवा की कमर बिस्तर पर उठ रही थी, उसके हाथ अर्जुन के सिर को और नीचे दबा रहे थे, और उसके मुंह से अश्लील, मादक आवाजें निकल रही थीं।
“हां… हां… वहीं… प्लीज… मत रुको…”
अर्जुन ने रुकना नहीं चाहा। वो रिवा के स्वाद को महसूस कर रहा था, उसकी खुशबू को सांसों में भर रहा था, और उसे एक ऐसे सुख की ओर ले जा रहा था जो उसने कभी महसूस नहीं किया था। रिवा का शरीर कांप रहा था, उसकी जांघें अर्जुन के सिर को कस रही थीं, और फिर, एकदम से, एक जोरदार झटके के साथ, रिवा ने अपने आप को छोड़ दिया।
उसका पूरा शरीर कांप उठा, उसकी सांसें तेज हो गईं, और उसके मुंह से एक लंबी, गहरी सिसकी निकली। अर्जुन ने ऊपर देखा, और रिवा के चेहरे पर वो देखा जो वो कभी नहीं भूलेगा—एक संतुष्टि, एक मुक्ति, एक ऐसी खुशी जो आंसुओं के साथ आई थी।
रिवा ने अपने हाथ बढ़ाए और अर्जुन को अपने ऊपर खींच लिया। अर्जुन का शरीर अब उसके नंगे शरीर पर था, और दोनों की धड़कनें एक साथ बज रही थीं। रिवा ने अर्जुन के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उस चुंबन में अर्जुन के होठों पर अपने ही स्वाद का एहसास था, और ये और भी उत्तेजित कर रहा था।
“अब तुम्हारी बारी,” रिवा ने फुसफुसाते हुए कहा।
अर्जुन ने पलटकर लेट गया, और रिवा उठकर बैठ गई। उसने अर्जुन की पैंट के बटन को खोला, और धीरे-धीरे उसे नीचे खींचा। अर्जुन ने अपनी पैंट और अंडरवियर दोनों उतार दिए, और अब वो भी पूरी तरह नंगा था। उसका पुरुषत्व खड़ा था, मजबूत और आकर्षक, और रिवा ने उसे देखकर अपनी सांसें रोक लीं।
वो झुकी और अर्जुन के पेट पर चुंबन करने लगी। उसके होंठ उसकी नाभि पर थे, फिर नीचे, उसके पेट के निचले हिस्से पर, और फिर, वहां। रिवा ने अर्जुन को अपने मुंह में लिया, और अर्जुन की आंखें बंद हो गईं।
“ओह… रिवा…”
रिवा ने धीरे-धीरे उसे अपने मुंह में अंदर-बाहर करना शुरू किया। उसकी जीभ उसकी नोक को चाट रही थी, उसके हाथ उसके नीचे के हिस्से को सहला रहे थे, और अर्जुन का शरीर बिस्तर पर कांप रहा था। उसने अपने हाथ रिवा के बालों में फंसाए, और उसे और नीचे दबाने की कोशिश की।
रिवा को ये अनुभव नया था, पर वो अपने अंदर की एक अजीब शक्ति से प्रेरित महसूस कर रही थी। वो अर्जुन को खुश करना चाहती थी, उसे वो सुख देना चाहती था जो उसने उसे दिया था। उसके मुंह की गर्माहट, उसकी जीभ की चाल, और उसके हाथों की हरकतें अर्जुन को पागल बना रही थीं।
“रुको… रुको…” अर्जुन ने कहा, और रिवा ने ऊपर देखा।
“क्या हुआ?”
“मैं… मैं अभी नहीं… मैं तुम्हारे अंदर आना चाहता हूं,” अर्जुन की आवाज़ में एक विनती थी।
रिवा ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। वो ऊपर उठी और अर्जुन के ऊपर आ गई। उसने अपने एक हाथ से अर्जुन को पकड़ा और धीरे-धीरे अपने ऊपर बैठने लगी। जब अर्जुन का अग्रभाग रिवा के प्रवेश द्वार को छुआ, तो दोनों ने एक साथ सांस रोक ली।
“धीरे… धीरे से,” रिवा ने फुसफुसाते हुए कहा।
अर्जुन ने अपने हाथ उसकी कमर पर रखे और धीरे से नीचे की ओर दबाया। रिवा का मुंह एक दर्द भरी सिसकी के साथ खुला, पर वो दर्द जल्दी ही सुख में बदल गया। अर्जुन पूरी तरह उसके अंदर था, और दोनों एक-दूसरे की आंखों में देख रहे थे।
वो एक-दूसरे में थे, पूरी तरह, पूरी गहराई तक। अर्जुन ने अपने हाथ रिवा की पीठ पर ले गए और उसे अपने करीब खींच लिया। रिवा का सीना अर्जुन के सीने से सटा हुआ था, और दोनों की धड़कनें एक दूसरे को महसूस हो रही थीं।
फिर अर्जुन ने हिलना शुरू किया। धीरे-धीरे, पहले ऊपर, फिर नीचे, और रिवा का शरीर उसके साथ चलने लगा। उसकी कमर आगे-पीछे हो रही थी, और उसके स्तन अर्जुन के चेहरे के सामने झूल रहे थे। अर्जुन ने एक स्तन को पकड़ा और उसे अपने मुंह में ले लिया, और रिवा की सिसकियां और तेज हो गईं।
“ओह… हां… अर्जुन… ये बहुत अच्छा लग रहा है…”
अर्जुन ने गति तेज कर दी। वो नीचे से ऊपर की ओर धक्के लगा रहा था, और रिवा ऊपर से नीचे की ओर बैठ रही थी। दोनों एक दूसरे से टकरा रहे थे, उनकी त्वचा एक-दूसरे से रगड़ खा रही थी, और कमरे में सिर्फ उनकी सांसों की आवाज और शरीरों के टकराने की आवाज गूंज रही थी।
बिस्तर की चादरें क्रीज़ हो रही थीं, तकिए फर्श पर गिर गए थे, और बुखारी की रोशनी में दो शरीर एक-दूसरे में पूरी तरह समाए हुए थे। रिवा के बाल उसके चेहरे पर थे, उसके गाल लाल थे, और उसकी आंखों में एक ऐसा जादू था जो अर्जुन को और भी पागल बना रहा था।
“तुम इतनी खूबसूरत हो… इतनी गर्म… इतनी कसी हुई…” अर्जुन बड़बड़ा रहा था, अपने होंठ रिवा के गालों पर, उसकी गर्दन पर, उसके कंधों पर रखे हुए।
रिवा ने अपने हाथ अर्जुन की पीठ पर ले गई और उसे कसकर पकड़ लिया। वो अर्जुन के हर धक्के का जवाब दे रही थी, उसकी कमर उसके साथ चल रही थी, और उसके अंदर एक गर्माहट जमा हो रही थी जो उसे फिर से उस चरम पर ले जाने वाली थी।
“अर्जुन… मैं… मैं फिर से… ओह…”
“हां… मेरे साथ… मेरे साथ आओ…” अर्जुन ने कहा, और उसकी गति और तेज हो गई।
दोनों एक साथ उस चरम पर पहुंचे। रिवा का शरीर कांप उठा, उसकी अंदरूनी मांसपेशियां अर्जुन को कसने लगीं, और अर्जुन ने भी अपने आप को छोड़ दिया। उसका शरीर रिवा के ऊपर झुक गया, उसका सीना उसके सीने से सटा हुआ था, और दोनों एक-दूसरे में गर्म तरल पदार्थ का आदान-प्रदान कर रहे थे।
कुछ पल तक वो ऐसे ही रहे, एक-दूसरे में समाए हुए, एक-दूसरे की सांसों को महसूस करते हुए। फिर अर्जुन ने धीरे से अपने आप को बाहर निकाला और रिवा के बगल में लेट गया। उसने अपना एक हाथ रिवा के नीचे डाला और उसे अपनी बाहों में भर लिया।
रिवा ने अपना सिर अर्जुन की छाती पर रख दिया, जहां उसका दिल अभी भी तेजी से धड़क रहा था। बाहर बारिश अभी भी हो रही थी, और बुखारी की आग धीरे-धीरे कम हो रही थी, पर दोनों के बीच की गर्माहट बढ़ती जा रही थी।
“ये… ये क्या था?” रिवा ने धीरे से पूछा।
अर्जुन ने उसके बालों को सहलाया। “ये… ये शायद प्यार था, या शायद सिर्फ दो अकेले दिलों का मिलन। मुझे नहीं पता, रिवा। पर मुझे ये पता है कि मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया।”
रिवा ने ऊपर देखा। “मैं भी। ये… ये अलग था। ये सिर्फ शारीरिक नहीं था, अर्जुन। मैंने तुम्हें महसूस किया, तुम्हारे अंदर तक।”
दोनों ने एक-दूसरे को देखा, और फिर फिर से चूमने लगे। ये चुंबन धीमा था, भावुक था, और इसमें एक वादा था—एक वादा जो शब्दों में नहीं, बल्कि स्पर्श में किया गया था।
रात बीतती गई, और दोनों ने बार-बार एक-दूसरे को चूमा, छुआ, और एक-दूसरे में समाया। कभी रिवा ऊपर होती, कभी अर्जुन, और कभी दोनों बगल में लेटे एक-दूसरे को उंगलियों से सहलाते। अर्जुन ने रिवा के शरीर के हर एक हिस्से को चूमा—उसके पैरों की उंगलियों से लेकर उसके कान की लोलक तक। और रिवा ने अर्जुन के शरीर को अपने होठों और हाथों से पूजा।
सुबह के पहले अंधेरे में, जब बारिश थम चुकी थी और बाहर पहाड़ों की चमकती हुई चोटियां दिखाई दे रही थीं, दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए थे। रिवा सो रही थी, और अर्जुन उसे देख रहा था। उसके चेहरे पर एक शांति थी जो पहले नहीं थी, और अर्जुन को लगा कि शायद, सिर्फ शायद, उसने भी कुछ पा लिया था जो वो खो चुका था।
रिवा की आंखें खुलीं, और उसने अर्जुन को देखते हुए पाया। उसने मुस्कुराते हुए अपना हाथ उसके चेहरे पर रखा। “सुबह हो गई?”
“हां,” अर्जुन ने कहा। “और तुम्हें जाना होगा, है ना?”
रिवा ने सोचा। उसे वाकई में जाना था, अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करनी थी, पर अब उसके दिल में एक और इच्छा थी। “मैं… मैं नहीं जाना चाहती, अर्जुन। पर मुझे जाना होगा।”
अर्जुन ने समझदारी से सिर हिलाया। “मैं जानता हूं। पर क्या… क्या हम फिर मिल सकते हैं?”
रिवा ने अपने होंठ उसके होंठों पर रखे। “हम मिलेंगे, अर्जुन। ये जो हमारे बीच हुआ है, ये सिर्फ एक रात नहीं थी। ये शुरुआत थी।”
दोनों ने एक-दूसरे को कसकर गले लगाया, और फिर धीरे-धीरे उठकर कपड़े पहने। रिवा ने अपनी भीगी साड़ी वापस पहनी, जो अब सूख चुकी थी, और अर्जुन ने अपनी जैकेट। दोनों ने एक-दूसरे को एक लंबा, गहरा चुंबन दिया, और फिर दरवाजे की ओर बढ़े।
बाहर हवा में एक नई ताजगी थी। बारिश के बाद की सुबह, पहाड़ों की हरी-भरी वादियां, और एक नई शुरुआत का वादा। रिवा और अर्जुन हाथ में हाथ डाले उस संकरी पगडंडी पर चल रहे थे, जो उन्हें वापस स्टेशन की ओर ले जा रही थी।
जब वो स्टेशन पर पहुंचे, तो सुबह की पहली ट्रेन आ चुकी थी। रिवा ने अर्जुन की ओर देखा, और उसकी आंखों में आंसू थे। “मैं तुम्हें लिखूंगी, अर्जुन। और तुम भी मुझे लिखना।”
“हर रोज,” अर्जुन ने कहा। “तुम्हारे बिना मेरी कहानियां अधूरी होंगी।”
रिवा ने ट्रेन में कदम रखा, और खिड़की से झुककर अर्जुन को एक अंतिम चुंबन दिया। ट्रेन चल पड़ी, और अर्जुन प्लेटफॉर्म पर खड़ा रहा, उसकी आंखें उस ट्रेन को जाते हुए देख रही थीं जो उसकी जिंदगी की सबसे खूबसूरत रात लेकर जा रही थी।
पर दिल में एक भरोसा था—एक भरोसा जो उस रात की यादों से, उन स्पर्शों से, और उन भावनाओं से पैदा हुआ था जो कभी खत्म नहीं होंगी। अर्जुन ने मुड़कर कोठी की ओर कदम बढ़ाए, और उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी। वो जानता था कि ये अंत नहीं था, बल्कि एक नई कहानी की शुरुआत थी—एक कहानी जो शब्दों में नहीं, बल्कि दिलों में लिखी जाएगी, और जो हमेशा के लिए उसकी होगी।
और वो रात, वो बारिश वाली रात, वो कोठी, और वो आग—सब कुछ उसकी यादों में बस गया, एक ऐसी याद जो उसे हमेशा गर्म रखेगी, हमेशा जीवित रखेगी, और हमेशा उसे ये याद दिलाएगी कि प्यार कभी मरता नहीं, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदल जाता है, और कभी-कभी, सबसे अप्रत्याशित जगहों पर, सबसे अप्रत्याशित समय पर, वो फिर से जन्म लेता है—एक स्टेशन पर, एक बारिश की रात में, दो अजनबियों के बीच, जो अब अजनबी नहीं रहे, बल्कि एक-दूसरे की आत्मा के हिस्से बन चुके थे।
ट्रेन की आवाज धीरे-धीरे दूर होती गई, और अर्जुन ने अपने दिल पर हाथ रखा। वहां, उसकी धड़कनों में, रिवा अब हमेशा के लिए रहने वाली थी—उसकी खुशबू, उसकी सिसकियां, उसकी मुस्कान, और वो गर्माहट जो उसने उस रात उसे दी थी। ये एक अलविदा नहीं था, बल्कि एक ‘फिर मिलेंगे’ था, और अर्जुन ने आसमान की ओर देखा, जहां बादलों के बीच से सूरज की पहली किरणें निकल रही थीं—एक नई सुबह, एक नई उम्मीद, और एक नई कहानी की शुरुआत।
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